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vad 26 16-12-2017
 
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सियासी चकल्लस 
 
कांग्रेस में नाराजगी

राहुल गांधी अब कांग्रेस का अध्यक्ष बनने जा रहे हैं। अभी बने नहीं है। बनने वाले है। यानी फिर से वही वंशवाद। वही नेहरू&गांधी परिवार। एक बार फिर से वही सियासत में कबीलाबाद। हालांकि राहुल को अध्यक्ष बनाने के लिए पूरी प्रक्रिया हो रही है। ताकि मामला जनतांत्रिक लगे। लेकिन पार्टी के भीतर से बगावत के बुलबुले उठने शुरू हो गए हैं। शहजाद पूनावाला ने कहा है कि यह इलेक्शन नहीं] सलेक्शन है। ऐसे वक्त में जब कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी का पार्टी अध्यक्ष बनना तय माना जा रहा है। शहजाद के बयान से सियासी भूचाल आ गया है। राहुल इस समय गुजरात विधानसभा चुनाव में लीड ले रहे हैं। ठीक उसी समय से इस बगावत ने कांग्रेस की मुहिम को एक तरह से पंचर कर दिया है। बगावत की कोई सार्थक परिणति हो नहीं पाएगी यह सब जानते हैं] लेकिन माहौल तो खराब हो ही गया है। वैसे भी कांग्रेस अपने कलेजे पर पत्थर रखकर नेहरू गांधी परिवार के नेतृत्व को स्वीकारने के लिए अभिशप्त है। पार्टी को छोड़ भी दिया जाए तो देश की जनता को भी न जाने क्यों इसी परिवार में देश का सुनहरा भविष्य दिखाई देता रहा है। एक बार फिर जब मोदी से मोहभंग होता हुआ सा दिखाई देने लगा है। एक तबके ने उम्मीद में राहुल की ओर देखना शुरू कर दिया है।

चेले ने बदला चोला

सियासत में कोई सीधी रेखा नहीं होती। वहां सबसे अच्छी मगर खतरनाक चाल द्घोड़े वाली मानी जाती है। जो टेढी चाल चलता है। सियासत में कोई लंबे समय तक न तो किसी का यसमैन रहता है न चेला के चोले में ही ढका रहा है। उत्तराखण्ड के कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष किशोर उपाध्याय को पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने आगे बढ़ाने में काफी मदद की। लेकिन पुरानी मदद को किशोर ने भुला दिया है। आज की तारीख में वे हरीश के साथ दुश्मनों जैसा व्यवहार करते हैं। प्रदेश कांग्रेस में बच गए इन दो दिग्गजों के बीच जारी दंगल की मूल वजह बहुत साफ&साफ पता नहीं। पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की जो फजीहत हुई उसमें इनकी लड़ाई की अहम भूमिका रही। अब इन दोनों की लड़ाई सोशल साईट पर भी आ गयी है। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने फेसबुक पर म्योर गांव पर एक पोस्ट लिखी। उस पर योगेश भट्ट ने प्रतिकूल टिप्पणी की। मौके का फायदा उठाते हुए किशोर उपाध्याय ने उससे शेयर किया। अलबत्ता नई तकनीक इन दो दिग्गजों की लड़ाई का जरिया बन गई है। 

लालू की नई शैली

लालू प्रसाद अपनी खास शैली के लिए मशहूर है। उनका अपना गिमिक और मैनरिज्म रहा है। उनकी खास शैली ने देश के लोगों का मन भी मोहा। राजनीतिक लोग उनको सुनते और पसंद करते रहे। अब उनके बिगड़ैल पुत्र तेजप्रताप के इधर के दो बयान लालू की नई शैली मालूम हो रही है। तेज प्रताप ने पहले सुशील मोदी फिर नरेंद्र मोदी को सबक सीखने वाले अंदाज में आक्रमक बयान दिया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को कहा है] अगर वह इनके पिता यानी लालू प्रसाद को और परेशान करेंगे तो वह उनकी खाल उधेड़ देंगे। राजनीति की भाषा नहीं है। कहा तो यह भी जा रहा है कि लालू प्रसाद ही अपने बेटे को उकसा रहे हैं। तेज प्रताप को भी अब इसमें रस आने लगा है। उनके इन दोनों बयानों की काफी चर्चा हुई। लिहाजा इस बात की पूरी गुंजाइश है कि तेज प्रताप इसी आक्रमकता की राह पर चल कर सुर्खियों में बने रहें। जैसा कि उनके पिता लालू प्रसाद एक जमाने में रहे हैं। लेकिन तेज प्रताप ने अपने पिता वाली राजनीति तेज नहीं है। 

 
         
 
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  • सिराज माही

देश में भले ही इन दिनों निराशा छाई हो लेकिन अंतरराष्ट्रीय पटल पर भारत नए कीर्तिमान गढ़ रहा है। इन्हीं कीर्तिमानों में से एक है अंतरराष्ट्रीय

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