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vad 50 04-06-2017
 
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देश-दुनिया 
 
फिर डाल पर बेताल

 

स्कूल की इतिहास की किताब के मुताबिक वर्ष १९८० में राजनीति में आने से पहले राजीव गांधी इंडियन एयर लाइंस के एक सामान्य कमर्शियल पायलट हुआ करते थे। संजय गांधी की मृत्यु के बाद इंदिरा गांधी के दबाव में उन्होंने राजनीति में कदम रखा। सियासत में उन्हें मिस्टर क्लीन कहकर लाया गया। हालांकि बाद में १९८७ में सामने आए बोफोर्स तोप कांड में नाम आने के चलते १९८९ में उनकी क्लीन इमेज वाली सरकार भी सत्ता से बेदखल हुई।

 

अमेरिका की नाक में दम कर चुकी विकीलीक्स ने अंग्रेजी समाचार पत्र द हिंदू के जरिए राजीव गांधी से जुड़े कुछ ऐसे राजों पर से पर्दा उठाया है। जिसके बाद उनका राजनीति से पहले का क्लीन जीवन भी अब शक के दायरे में आ गया है। विकिलीक्स ने हेनरी किसिंजर केबल्स के हवाले से खुलासा किया है कि राजीव गांधी प्रधानमंत्री बनने से पहले इंडियन एयरलाइंस के पायलट की नौकरी के दौरान स्वीडिश कंपनी साब-स्कॉनिया के लिए दलाली करते थे। यही कंपनी ७० के दशक में भारत को फाइटर प्लेन विजन बेचने की कोशिश कर रही थी। गौरतलब है कि हेनरी किसिंजर अमेरिका के सुरक्षा सलाहकार रह चुके हैं। खबर के मुताबिक स्वीडिश कंपनी के साथ सौदा नहीं हो पाया था और ब्रिटिश जगुआर ने बाजी मार ली थी।

 

सन् १९७४ से १९७६ के दौरान जारी किए गए ४१ केबल्स के मुताबिक स्वीडिश कंपनी को इस बात का अंदाजा था कि फाइटर एयरक्राफ्ट्स की खरीद के बारे में अंतिम फैसला लेने में गांधी परिवार की भूमिका होगी। फ्रांसीसी एयरक्राफ्ट कंपनी दसो को भी इसका अनुमान था। उसकी ओर से मिराज फाइटर एयरक्राफ्ट के लिए तत्कालीन वायुसेना अध्यक्ष ओपी मेहरा के दामाद दलाली करने की कोशिश कर रहे थे। हालांकि केबल में मेहरा के दलाल का नाम नहीं लिया गया है। १९७५ में दिल्ली स्थित स्वीडिश दूतावास के एक राजनयिक की ओर से जारी एक केबल के मुताबिक इंदिरा गांधी ने ब्रिटेन के खिलाफ अपने पूर्वाग्रहों की वजह से जगुआर न खरीदने का फैसला कर लिया है। अब मिराज और विजेन के बीच फैसला होना है। मिसेज गांधी के बड़े बेटे बतौर पायलट एविएशन इंडस्ट्री से जुड़े हैं और पहली बार उनका नाम बतौर उद्यमी सुना जा रहा है। अंतिम फैसले को परिवार प्रभावित करेगा। हालांकि राजीव गांधी एक ट्रांसपोर्ट पायलट हैं और उनके पास फाइटर प्लेन के मूल्यांकन की योग्यता नहीं है लेकिन उनके पास एक दूसरी योग्यता है। एक दूसरे केबल में स्वीडिश राजनयिक के हवाले से कहा गया है इस डील में इंदिरा गांधी की अति सक्रियता की वजह से स्वीडन चिढ़ा हुआ था। दरअसल इंदिरा ने फाइटर प्लेन की खरीद की प्रक्रिया से एयर फोर्स को दूर रखा था। राजनयिक के मुताबिक ४० से ५० लाख डॉलर प्रति प्लेन के हिसाब से ५० विजन के लिए बातचीत चल रही थी। स्वीडन को भरोसा था कि भारत सोवियत संघ से और युद्धक विमान न खरीदने का फैसला कर चुका था। ६ अगस्त १९७६ को जारी एक केबल से पता चलता है कि भारत को फाइटर प्लेन बेचने की कोशिश में जुटे स्वीडन को अमेरिकी दबाव के चलते अपने कदम पीछे खींचने पड़े थे। अमेरिका ने साब-स्कॉनिया को भारत को विजन निर्यात करने और देश में बनाने का लाइसेंस देने की अनुमति नहीं दी थी। अमेरिका की ओर से कहा गया था कि गंभीरता से विचार करने के बाद हम इस निष्कर्ष पर पहुंचे हैं कि विजन के किसी भी ऐसे संस्करण को भारत को निर्यात करने की अनुमति नहीं दे सकते हैं जिसमें अमेरिकी कल-पुर्जे लगे हों। 

 

भाजपा ने इन खुलासों को हाथोंहाथ लिया है। पार्टी प्रवक्ता प्रकाश जावड़ेकर ने कहा है कि यह मामला बेहद गंभीर है। यह कांग्रेस के गांधी परिवार से जुड़े हैं। देश से जुड़ा है। सभी रक्षा सौदों का गांधी परिवार से कोई न कोई रिश्ता जरूर होता है। सभी दस्तावेज सामने आने चाहिए। केंद्र सरकार और गांधी परिवार को भी इस पर जवाब देना चाहिए और सुप्रीम कोर्ट को इसकी जांच के आदेश देने चाहिए। उधर कांग्रेस ने इस खुलासे को बकवास और निराधार करार दिया है। कांग्रेस महासचिव जनार्दन द्विवेदी ने कहा कि जो अखबार में छपा उसका कोई आधार नहीं है। आम चुनावों के सिर पर होने के चलते इन खुलासों का महत्व और ज्यादा बढ़ गया है। 

 

गौरतलब है कि पिछले दिनों इटली की एक रक्षा ग्रुप कंपनी फिमेकानिका के साथ हुए रक्षा सौदों में द्घूसखोरी में भी इटली पुलिस ने अपनी एक रिपोर्ट में भारत के साथ रक्षा सौदों को हासिल करने के लिए करीब ३७० करोड़ रुपए भारत की किसी द फैमली नामक राजनीतिक परिवार को दिए जाने की बात कही थी। कुथ लिंडस्ट्रोम ने भी कुछ समय पहले वेबसाइट द हूट को दिए साक्षात्कार में दावा किया था कि बोफोर्स तोप सौदे में राजीव गांधी के खिलाफ रिश्वत लेने के साक्ष्य नहीं हैं। लेकिन इटली के व्यापारी ओत्तावियो क्वात्रोक्की को इस तरह देश से बाहर भेजा जाना कई सवाल पैदा करता है। इसी तरह संजय गांधी को मारुति कंपनी शुरू करने के लिए किए गए कानूनी फेरबदल भी विवाद का विषय रहे थे। बहरहाल इन खुलासों से भारत को कम्प्यूटर युग की ओर ले जाने वाले के तौर पर प्रचारित राजीव गांधी का राजनीति पूर्व का जीवन और कहें तो पूरा व्यक्तित्व ही संशय के दायरे में आ गया है। इस पूरे मामले की जांच होना तो आवश्यक है ही साथ ही कांग्रेस के लिए इस खुलासे ने मुश्किलें और बढ़ा दी हैं।

 

जॉर्ज फर्नांडिस पर भी सवाल विकीलीक्स ने एक और खुलासा किया है जिसके मुताबिक इमरजेंसी के दौरान पूर्व रक्षा मंत्री जॉर्ज फनार्ंडीज ने इमरजेंसी के दौरान अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए और फ्रांस की सरकार से आर्थिक मदद यानी फंडिंग की मांग की थी। इमरजेंसी के दौरान जॉर्ज देश के बड़े मजदूर नेता थे और ऑल इंडिया रेलवे मेंस फेडरेशन के अध्यक्ष भी थे। इमरजेंसी के दौरान जॉर्ज अंडरग्राउंड रहकर सक्रिय थे। विकीलीक्स ने दावा किया गया है कि नवंबर १९७५ में जॉर्ज ने खुलकर कहा था कि वो सीआईए से पैसे लेने के लिए तैयार हैं। २६ जून १९७५ को देश में इमरजेंसी लागू हुई थी। केबल के अनुसार किसी मिस गीता ने अमेरिकी राजदूत के साथ बैठक कराने की कोशिश की थी लेकिन ऐसा हो नहीं पाया था।

 

 

दबिश बढाने का दांव

 

प्रतिबंध के बावजूद उत्तर कोरिया का मिसाइल परीक्षण जारी है। इसी प्रक्रिया में इस देश ने पूर्वी तट पर लंबी दूरी तक मार करने वाली मिसाइल की तैनाती की। यह मिसाइल अमेरिका पर हमला करने की क्षमता तो नहीं रखती लेकिन इसमें अमेरिका को सावधान की मुद्रा में जरूर ला दिया है। 

 

दरअसल यह उत्तर कोरिया का गुस्सा ही है क्योंकि अमेरिका  उसके पड़ोसी देश दक्षिण कोरिया  के साथ संयुक्त सैन्य अभ्यास करता रहा। जब इसके बाद भी संयुक्त सैन्य अभ्यास नहीं रुके तो उत्तर कोरिया ने इसका जवाब अपनी सैन्य गतिविधियां बढ़ा कर दिया। नाराजगी की एक वजह इस देश में परमाणु परीक्षण के बाद संयुक्त राष्ट्र द्वारा लगाये गये प्रतिबंध ही हैं। यह सब होने के बाद तिलमिलाए उत्तर कोरिया ने अपने पूर्व तट पर लंबी दूरी तक मार करने वाली मिसाइलों की तैनाती कर दी। 

 

बीते २ अप्रैल को उत्तर कोरिया ने २००७ से बंद पड़े एक परमाणु रिएक्टर को दोबारा चालू करने की बात कही। जबकि उपग्रह से मिली तस्वीरें बता रही हैं कि रिएक्टर को दोबारा चालू करने के लिए जरूरी निर्माण पहले ही शुरू हो चुका है। पिछले दिनों उत्तर कोरिया ने कई बार अमेरिका पर हमले की बात कही और उसमें सेना का अमेरिका को जवाब देने वाला ऐलान सबसे नया है। इस बीच उत्तर कोरिया की परमाणु क्षमता के और बेहतर करने की बात भी सामने आ रही है। उत्तर कोरिया लेने सेना ने इतना तक कह दिया है कि हम व्हाइट हाउस और पेंटागन को औपचारिक रूप से बता रहे हैं कि अमेरिका की डीपीआरके खिलाफ शत्रुतापूर्ण नीतियों और परमाणु खतरों का सेना अपने छोटे उन्नत और अलग अलग तरह के परमाणु हथियारों से कड़ा जवाब देगी।

 

बीते साल उत्तर कोरिया ने एक परमाणु परीक्षण किया। उसके बाद  संयुक्त राष्ट्र संघ में इसका पुरजोर विरोध होने लगा। इससे नाराज उत्तर कोरिया की सेना ने चेतावनी दी कि उसे अमेरिका पर हल्के परमाणु हथियारों से हमला करने का अधिकार मिल चुका है। उधर अमेरिकी रक्षा विभाग ने ऐलान किया है कि वह अपनी मिसाइल प्रतिरक्षा तंत्र को गुआम के अमेरिकी प्रशांत क्षेत्र में तैनात करने जा रहा है। 

 

इन खबरों के बीच दक्षिण कोरियाई रक्षा मंत्री किम ने स्पष्ट किया कि सेना को अब तक कोई ऐसा संकेत नहीं मिला है जिससे उत्तर कोरिया के खुली जंग की तैयारी का पता चले। किम उत्तर कोरिया की हरकतों को बस धमकी और भड़काऊ हरकतें ही मान रहे हैं। हालांकि उन्होंने छोटे स्तर पर दक्षिण कोरिया के खिलाफ जंग की आशंका से इनकार नहीं किया। उन्होंने २०१० में हुई गोलाबारी की ओर ध्यान दिलाया जिसमें चार दक्षिण कोरियाई नागरिक मारे गए थे। दक्षिण कोरिया के रक्षा मंत्रालय ने कहा कि देश की सेना उत्तर कोरिया के किसी भी भड़काऊ हरकत का सामना करने और जवाब देने के लिए तैयार है।

 

इस बीच चीन ने अपनी सेना को तैयार रहने के लिए कह दिया है और कोरियाई प्रायद्वीप में तनाव को और फैलने से रोकने के काम करने में जुट गया। चीन उत्तर कोरिया के परमाणु संयंत्रों और चीन में शरणार्थियों की संभावित घुसपैठ को लेकर चिंतित है। इसके अलावा उसे इस बात की भी चिंता है कि उत्तर कोरिया की भड़काने वाली हरकतें एक बार फिर कोरियाई प्रायद्वीप में आग लगा देंगी। चीन और कोरिया के बीच १४०० किलोमीटर की साझी सीमा है। अपुष्ट खबरों में कहा गया है कि चीन ने उत्तर कोरियाई सीमा पर सेना की तैनाती शुरू कर दी है।

साम्यवादी उत्तर कोरिया ने नए परमाणु परीक्षण के बाद संयुक्त राष्ट्र से प्रतिबंध और अमेरिका और दक्षिण कोरिया के सैनिक अभ्यासों से नाराज होकर पिछले हफ्तों में कई बार दक्षिण कोरिया और अमेरिका पर हमले की धमकी दी है। सबसे ताजा धमकी अमेरिका को परमाणु हमले के रूप में मिली है जिसके बाद अमेरिका रॉकेट रोधी सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत कर रहा है। कुल मिलाकर कोरियाई द्वीप में सैन्य गतिविधियां बढ़ाने से तनाव व्याप्त है जिसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खत्म करने के तमाम प्रयास किए जा रहे हैं। फिलहाल अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि ये हलचल परमाणु परीक्षण के मद्देनजर है या दक्षिण कोरिया और अमेरिका पर अधिक दबाव बनाने की एक चाल है।

 

 

 
         
 
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  • सिराज माही

पड़ोसी देश होने के बावजूद चीन अक्सर भारत को आंख दिखाता रहता है। दोनों के बीच किसी न किसी मुद्दे पर विवाद बना रहता है। नया विवाद ^वन बेल्ट वन

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