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पीड़ित को ही प्रताड़ना

  • आकाश नागर

किडनी चोरी कांड के पीड़ित नरेश चंद्र गंगवार की पत्नी मुन्नी देवी उत्तराखण्ड पुलिस के रवैये से दुखी हैं। उनका कहना है कि पुलिस किडनी चोर मंत्री पति के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाय उल्टे मेरे पति को ही प्रताड़ित कर रही है

 

यह कैसी सरकार है जो पीड़ितों को न्याय देने के बजाय जांच से ही बच रही है। एक माह बाद भी आरोपी को बयान देने के लिए नहीं बुलाना इसका साक्षात प्रमाण है। जब पार्टी का मुखिया ही आरोपी के पक्ष में बयान देने लग जाए तो सरकार से न्याय की उम्मीद करना बेमानी है। मामले की जांच रिटायर्ड जज से कराई जाएगी तभी कुछ हो सकता है नहीं तो सरकार मंत्री पति की संरक्षक की भूमिका में ही बनी रहेगी।

करन माहरा] उपनेता सदन उत्तराखण्ड

गिरधारी लाल साहू को हमने बयान लेने के लिए बुलाया है। जल्द ही उनके बयान दर्ज होंगे। इसी के साथ हम श्रीलंका और दिल्ली अस्पताल के कागजों की जांच कर रहे हैं। जांच पूरी होने के बाद ही मुकदमा दर्ज किया जाएगा।

केआर पाण्डेय] जांच अधिकारी

मेरे पति को ^दि संडे पोस्ट^ के संवाददाता ने बंधक नहीं बनाया है] बल्कि वह अपनी मर्जी से अखबार वालों के पास अपना दुख-दर्द सुनाने जा रहे हैं। मेरे पति के साथ आज जिस तरह अन्याय हो रहा है उसे मीडिया वाले ही सामने ला रहे हैं] जबकि सरकार मामले को दबाने में लगी हुई है। गिरधारी लाल साहू सरासर झूठ कहता है कि मैं उसके पास कई बार गई। मैं सिर्फ अखबार वालों के पास गई हूं। आज हमारे परिवार को सिर्फ मीडिया पर भरोसा है। पुलिस ने अब तक कोई जांच नहीं की है। मेरे पति का गुनाह सिर्फ इतना है कि उन्होंने एक मंत्री पति के किडनी चोरी का पर्दाफाश किया है। जिस साहू ने मेरे पति की धोखे से किडनी निकलवाकर अपनी दूसरी पत्नी को लगवा दी है वह खुलेआम हल्द्वानी में द्घूम रहा है। लेकिन पुलिस उससे पूछताछ करने के बजाय मेरे पति को ही मानसिक प्रताड़ना दे रही है। हमारे पास अब न्यायालय की शरण में जाने के सिवाय और कोई रास्ता नहीं बचा है। हम तब तक चुप नहीं बैठेंगे जब तक कि हमें न्याय नहीं मिल जाता है।

अपना यह दर्द उस नरेश चंद्र गंगवार की पत्नी मुन्नी देवी ने बयां किया है जिसकी उत्तराखण्ड सरकार की मंत्री रेखा आर्य के पति गिरधारी लाल साहू ने किडनी निकलवाकर अपनी दूसरी पत्नी को लगवा दी थी। मुन्नी देवी ने कहा कि मंत्री पति साहू एक टीवी चैनल को बयान देते हुए कह रहा है कि नरेश चंद्र गंगवार को ^दि संडे पोस्ट^ वालों ने बंधक बना लिया। महिला ने अपना एक वीडियो जारी करके साहू के सारे काले कारनामों का पर्दाफाश भी किया है। वह वीडियो में स्पष्ट बता रही है कि किस तरह आनन-फानन में ही उनके पति का पासपोर्ट बनवाकर उन्हें धोखे से श्रीलंका ले जाया गया और वहां बेहोश कराकर किडनी निकलवा दी। वह कहती हैं कि उनके पति को साहू अपनी बीमार पत्नी की तीमारदारी के बहाने ले गया थाा। 

गौरतलब है कि गत्‌ ११ अक्टूबर को भुक्तभोगी नरेश चंद्र गंगवार ने नैनीताल में एसएसपी जन्मेजय खण्डूड़ी के समक्ष अपनी व्यथा कहते हुए एक शिकायती पत्र दिया था। प्रदेश की राज्यमंत्री रेखा आर्य के पति गिरधारी लाल साहू के खिलाफ गंगवार ने किडनी चोरी सहित कई संगीन आरोप लगाते हुए मामला दर्ज कराने की मांग की थी। तब ^दि संडे पोस्ट^ ने ^किडनी चोर मंत्री पति^ शीर्षक से खबर प्रकाशित की थी। इसके बाद शुरू-शुरू में इस मामले पर मीडिया ने सक्रियता दिखाई। लगभग सभी अखबारों ने प्रमुखता से प्रकाशित किया। जिसके चलते गिरधारी लाल साहू उर्फ पप्पू को मीडिया के सामने आना पड़ा। हल्द्वानी में गिरधारी द्वारा की गई प्रेस कॉन्फ्रेंस में उसने नरेश चंद्र गंगवार पर ही यह कहकर सवालिया निशान लगा दिए थे कि वह कभी उसका नौकर नहीं रहा और न ही हल्द्वानी स्थित उसके आवास पर रहा। इस बाबत नरेश चंद्र गंगवार ने गिरधारी के एक-एक झूठ को बेनकाब किया। ^दि संडे पोस्ट^ ने गिरधारी और गंगवार के सवाल-संवादों को अपने पिछले अंक में ^किडनी कांड में कोई कार्रवाई नहीं^ शीर्षक से प्रकाशित किया। 

उत्तराखण्ड सरकार द्वारा मामले को गंभीरता से नहीं लिए जाने पर पीड़ित नरेश चंद्र गंगवार ने राष्ट्रपति] प्रधानमंत्री से लेकर मानवाधिकार आयोग तक न्याय की गुहार लगाई है। खास बात यह है कि  किडनी कांड ने मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के जीरो टॉलरेंस के दावों को भी झुठला दिया है। मुख्यमंत्री ने हल्द्वानी में कहा था कि वह जल्द ही इस मामले की निष्पक्ष जांच कराएंगे। जांच की बात तो दूर एक माह बाद भी आरोपी गिरधारी के बयान तक दर्ज नहीं कराए जा सके हैं। ऐसा लग रहा है कि सरकार की पूरी मशीनरी आरोपी को बचाने में लगी है। यहां तक कि प्रदेश भाजपा अध्यक्ष अजय भट्ट भी एक पीड़ित को न्याय दिलाने के बजाय मामले को उत्तर प्रदेश और श्रीलंका की तरफ द्घुमाने का प्रयास करते नजर आ रहे हैं। कहा जाने लगा है कि यह मामला उत्तराखण्ड का है ही नहीं। मामले की जांच में उदसीनता पर त्रिवेंद्र सरकार सवालों के द्घेरे में है। आखिर एक व्यक्ति जो मंत्री पति के हल्द्वानी स्थित द्घर पर ही रहा हो न्याय मांगने उत्तर प्रदेश क्यों जाए? गंगवार बेशक बरेली का है] लेकिन गिरधारी भी तो बरेली का है। गिरधारी वर्षों से हल्द्वानी में डेरा जमाए हुए है। गंगवार से भी वह कई सालों से अपनी हल्द्वानी स्थित कोठी पर ही नौकरी कराता रहा। ऐसे में निष्पक्ष जांच का जिम्मा नैनीताल पुलिस का ही होता है न कि उत्तर प्रदेश पुलिस का। इस मामले में पुलिस की लापरवाही भी सामने आ रही है। नैनीताल पुलिस का यह कहना गले नहीं उतर रहा है कि गिरधारी लाल साहू उन्हें मिल नहीं रहा है। जबकि साहू को अपनी मंत्री पत्नी रेखा आर्य के इर्द-गिर्द मंडराते देखा जा सकता है। यहां तक कि वह मंत्री की जिला योजना की बैठकों में भी देखा गया है। यही नहीं] बल्कि साहू ने अपने बचाव में जो प्रेस वार्ता की वह भी हल्द्वानी में ही की गई थी। पुलिस चाहती तो उसे पूछताछ के लिए तलब कर सकती थी। हालांकि नैनीताल के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक जन्मेजय खण्डूड़ी को निष्पक्ष और ईमानदार के साथ ही सच्चाई का साथ देने वाला पुलिस अधीक्षक कहा जाता है। लेकिन इस मामले में पुलिस की उदासीनता के चलते आम लोगों के बीच यह चर्चा है कि शायद पुलिस पर ऊपर से बड़ा दबाव है जिसके चलते उसके हाथ बंधे हुए हैं।

akash@thesundaypost.in


ऐतिहासिक गौचयर मेला

  • केएस असवाल

गौचर ¼चमोली½। उत्तराखण्ड की संस्कूति में मेलों का अहम स्थान है। मेले में ये मेले संस्कूति के संवाहक] आपसी मिलन और भाईचारे के प्रतीक हैं। गौचर मेला ऐतिहासिक पुरातन संस्कूति को आगे बढ़ाने का काम कर रहा है। आजादी से पूर्व अंग्रेजी हुकूमत के समय से इस मेले का आयोजन होता आ रहा है। तब यह मेला हाट-बाजार के रूप में आयोजित होता था। आजादी के बाद देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू के जन्म दिवस पर १४-२० नवंबर तक ¼७ दिवसीय½ मेला आयोजित होता है। १९४३-४७ तक यह मेला १ नवंबर से ७ नवंबर तक आयोजित होता था जो १९४८ से १४ से २० नवंबर तक आयोजित होता आ रहा है। आर्थिक कमजोरी एवं अन्य कारणों से यह मेला ८ बार स्थगित गिया गया। पिछले वर्ष से पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने इसे राज्य स्तरीय मेला द्घोषित किया है। इस सरकारी मेले में विभिन्न विभागों के स्टॉल लगाए जाते हैं। साथ ही जनपद एवं प्रदेश के कलाकारों द्वारा अपने कार्यक्रम प्रस्तुत किए जाते हैं। इस मेले में नगर पालिका गौचर की अहम भूमिका रहती है। नगर पालिका अध्यक्ष मुकेश नेगी ने बताया कि नगर पालिका द्वारा हर वर्ष मेले को चार चांद लगाने के लिए पूरा सहयोग बना रहता है। इस वर्ष १४ नवंबर से शुरू होने वाले ६९वें औद्योगिक] सांस्कूतिक मेले की सभी तैयारियां प्रशासन द्वारा पूरी कर दी गई हैं।

 

 
         
 
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उत्तराखण्ड में कांग्रेस के कई दिग्गज चुनावों से ठीक पहले पार्टी का साथ छोड़ भाजपा में शामिल हो गए थे। इन कांग्रेसियों को भाजपा ने हाथों हाथ लिया। न केवल विधानसभा चुनाव में पार्टी का

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