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टॉक ऑन टेबल 2

 
मैं राजनीतिक वेश्या नहीं

मनोज रस्तोगी % जिस तरह से आपके अंदर राजनीतिक प्रतिभा] साहित्यिक प्रतिभा और बोलने की प्रतिभा है उससे आपके प्रशंसक सभी बने हुए हैं। भाजपा और कांग्रेस में भी आपके प्रशंसक हैं। और तमाम ऐसी बड़ी द्घटनाएं जो पिछले २० सालों से राजनीति के केंद्र में रही उनमें कहीं न कहीं आप रहे। तो क्या आप मानते हैं कि आपका जो कैरेक्टर है वह हाइलाइटकिंग की वजह से तो नहीं हैं। यह आपके राजनीतिक अध्ययन में बाधा तो नहीं बना

बिल्कुल सही है। इसलिए इस साक्षात्कार के आरंभिक दौर में मैंने कहा कि मैं राजनेता नहीं हूं। यह बाधक है] यही साधक भी है। अगर मैं लचीला हूं सौ जूता खाकर तमाशा देखूंगा। मुलायम अप्रासंगिक हो गए। अखिलेश प्रासंगिक हो गए। अभी मैं मुलायम को अप्रत्यक्ष करके अखिलेश यादव जिंदाबाद बोलूं तो यह सभी व्यवहारिक राजनेता करते हैं। लेकिन मैं नहीं करता। चुनाव से पहले मैंने जीवन भर धर्म निरपेक्षता की राजनीति की। लेकिन यहां देखा धर्म निरेपक्षता मजाक बना हुआ है। गुजरात पर हम टिप्पणी करके अलग हो गए फिर सुविधानुसार हम सांप्रदायिक हो गए। कई लोग बोले कि वह धर्म निरपेक्ष हैं और लड़के को भाजपा के साथ जोड़ दिया। मुलायम सिंह आ गए और अटल जी के सहयोग से मुख्यमंत्री भी बन गए। ये जो छद्म धर्म निरपेक्षता है] वह मुझे पसंद नहीं। जब भी जी चाहे कई चेहरे लगा लेते हैं लोग। मैं आपको स्पष्ट कहना चाहता हूं कि मेरे मन में मुसलमानों के लिए सम्मान है। मैं कैफी आजमी जैसे मुसलमान का सम्मान करता हूं। मैं मौलाना सिबली का सम्मान करता हूं। मैं अब्दुल हमीद का सम्मान करता हूं। मैं मुसलमान होना बिल्कुल बुरा नहीं मानता। मैं अपने ?kjपर हवन करता हूं रोज] लेकिन आयतुल कुर्सी और गीता में मैं कोई अंतर नहीं देखता। क्योंकि आयतुल कुर्सी कहती है कि खुदा तुम्हारी खुदाई का आगाज और अंजाम का पता नहीं। और हमारा हिंदुत्व भी कहता है हरि अनंता हरिकथा अनंता। तो आप हरि और खुदा को हटा दें तो बात वही है। मैं कोई भाषण देने के लिए नहीं कह रहा। अपने अध्ययन के आधार पर कह रहा हूं।  

खैर] मैं बताना चाहता हूं कि मेरे पास क्या बचा था। राहुल गांधी जी अखिलेश के साथ चले गए। उनका हाथ अखिलेश के डंडे पर चला गया। अगर मुझसे राहुल बात करते तो मैं कहता कि मास लीडर मुलायम सिंह हैं। क्योंकि ढांचा उनके पास है। आप अखिलेश से कहिए कि हम एकीकूत सपा से समझौता करेंगे। और राहुल के दबाव पर सपा का विभाजन बच पाता। क्योंकि ये पावरफुल थे। अगर सोनिया गांधी अखिलेश] अमर सिंह] मुलायम सिंह] शिवपाल यादव मिलकर लड़ते तो बहुत बुरा होता तो भी १४० सीटें आती। इस तरह का भयावह सूपड़ा साफ नहीं होता। बड़ी प्रैक्टिकल बात बता रहा हूं। लेकिन जो तत्काल चीजें हो गईं कि विश्लेषण नहीं करना तो हमारे पास विकल्प क्या था। हम अखिलेश के पास जा नहीं सकते थे। औपचारिक या अनौपचारिक राहुल के साथ जा नहीं सकते थे तो हमारी धर्म निरपेक्षता गई तेल लेने। और मोदी जी आजम खान को पसंद नहीं करते] मैं भी नहीं करता। मोदी जी राजनीतिक कारणों से अखिलेश को पसंद नहीं करते] मैं भी नहीं करता। तो मोदी जी के जितने राजनीतिक बैरी हैं उतने ही मेरे हैं तो चलो करो जिंदाबाद मोदी।

प्रीत पाल कौर % आपने मुलायम से कहा कि आप राजनीतिक आदमी हैं और मैं भावनात्मक हूं। लेकिन आप भावनातमक होते हुए भी राजनीति में मौजूद हैं। आप राजनीति में हैं भी और नहीं भी। तो कहां खड़े हैं आप

कहीं नहीं] हम त्रिशंकु हैं। कहां हैं राजनीति में।

राजकुमार भाटी % क्या अपको लगता है कि आपसे राजनीतिक भूल हुई है। अगर आपको मौका मिलेगा तो आप उसको दुरुस्त करना चाहेंगे

अब इस उम्र में क्या खाक मुसलमान होंगे। आप बताइए कि इस भूलभाल की राजनीति के बाद आप मेरे इंटरव्यू ले रहे हैं। 

प्रीत पाल कौर % यही साबित करता है कि आप राजनीतिज्ञ हैं

भूलभाल की राजनीति करने के बाद भी ६३ साल की आयु में २४ साल से सांसद रहे हैं। इस भूलभाल की राजनीति करने के बावजूद प्रणब मुखर्जी की जीवनी के अतिरिक्त जितनी भी जीवनी आई] फोतेदार की आई या सलमान खुर्शीद की आई इसमें हम उल्लेखित हुए। मनमोहन की जब जीवनी आएगी उसमें भी मैं उल्लेखित होऊंगा। न्यूक्लियर डील के कारण। भले भारतीय नेता हमें श्रेय दें या न दें अमेरिका के चुनाव में ट्रंप मेरे नाम की उद्द्घोषणा करते रहेंगे।

अपूर्व जोशी % इससे बड़ी बात और क्या हो सकती है

प्रीत पाल कौर % यह कैसे कह सकते हैं कि आप हैं

मैंने कहा मैं नहीं हूं।

मनोज रस्तोगी % आपने शुरुआत में कहा कि जब मैं संद्घर्ष के दिनों में था तो मैं अपनी एक्जिसटेंस को कुछ ऐसा असाधारण करके प्रूव करना चाहता था इसीलिए बहुत सारी चीजें कीं।

राजकुमार भाटी % राजनीति में सिद्धांत चरित्र का भी कुछ महत्व है। केवल जोड़&तोड़ ही सब कुछ नहीं है। इस मामले में अनुभव के आधार पर बताएं।

सिद्धांत और चरित्र का ही महत्व है। लेकिन सिद्धांत और चरित्र के दो मापदंड हैं। एक सिद्धांत और चरित्र व्यक्तिगत निष्ठा का है। एक सिद्धांत और चरित्र व्यक्तिगत निष्ठा और पतन हुए दर्शन का है। आज की राजनीति में दर्शन और चरित्र की हीनता हुई। मुलायम सिंह जो समाजवादी के निर्माता रहे उन्होंने मुंबई के एक बैरे को बड़ा नेता बना दिया। वह बैरा था एक होटल में। मैं सोचता था इतना बड़ा नेता लेकिन जब पार्टी से हटा तो केवल चार विधायक साथ थे। मुझे दल से निकाला गया। मैंने तो कितनों की मदद की लेकिन मुझे संतुष्टि हुई कि मुलायम सिंह ने बैरे को मंत्री बनाया उनके साथ एक भी नहीं आए। कम से कम उनसे चार गुना मेरे साथ थे। तो जो व्यक्तिगत निष्ठा थी वह भी लुप्त हो गई। मैंने दर्शन के प्रति जो नानाजी देशमुख थे] आरंभिक दौर में दास मजूमदार और कानू सान्याल की बात की। लोहिया] जयप्रकाश की बात की या चंद्रशेखर की बात की। चंद्रशेखर में दोनों थे। दर्शन की ईमानदारी भी थी और निष्ठा की भी थी। अगर सिद्धांत की बात आई तो उन्होंने कांग्रेस सरकार की समिति में रहते हुए संजीव रेड्डी के चुनाव में बड़े&बड़े पुरोधाओं से शत्रुता मोल लेकर गरीबी हटाओ और बैंकों के राष्ट्रीयकरण में इंदिरा गांधी का साथ दिया। बाद में दोहरी सदस्यता को लेकर विरोध हो गया। आपकी निष्ठा संद्घ के प्रति हो या दल के प्रति। तो इस पर जो विभाजन हुआ उसमें अलग हो गए। जिस पार्टी ने समर्थन देकर प्रधानमंत्री बनाया था। जब आरोप लगाए कि सरकार कॉन्स्टेबल से जासूसी करवा रही है तो इससे मायूस नहीं हुए। उन्हें जब लगा प्रधानमंत्री पद को लात मार दी। चंद्रशेखर एक अकेले आदमी थे जो व्यक्तिगत निष्ठा और दर्शन की निष्ठा दोनों को पूरी तरह से मानते थे। 

एक पत्रकार हैं अभी भी वह जीवित हैं। हरिशंकर व्यास। वो जनसत्ता में कॉलम लिखते थे। मेरे बारे में लिखा कि एक चिरकुट आजकल चंद्रशेखर के इर्द&गिर्द बना रहता है। चंद्रशेखर तो प्रधानमंत्री हो गए। मैं पहले एक बहुत छोटे ?kjमें ग्रेटर क्लास इंक्लेब में रहता था। वह बहुत छोटा था। वहां पर पुलिस आ गई। भांप लिया था उन्होंने। कहा कि प्रधानमंत्री पूरे कैबिनेट के साथ यहां खाना खाने आ रहे हैं। मैंने उनको फोन किया कि चंद्रशेखर जी मेरे ?kjमें जगह ही नहीं है। उन्होंने कहा कि तुम्हारा ?kjहमने देखा है। जहां पर गाड़ी है वह गाड़ी बाहर करो और वहां पर कैटरिंग करो। मैंने कहा मेरे पास पैसा नहीं है। बोले अरे यार हम प्रधानमंत्री हो गए हैं। हम जिसको बोलेंगे वह खड़ा हो जाएगा।

अपूर्व जोशी % यह चंद्रशेखर जी की स्टाइल थी

उसके बाद इंतजाम हुआ। प्लेट लग गई। वर्दी वाले लोग आ गए। ये लोग भी आ गए। दोपहर को शपथ ली। शाम को पूरी कैबिनेट आ गई। चंद्रशेखर जी आए। मैंने कहा अरे इसकी क्या जरूरत थी। उन्होंने कहा जरूरत थी। आप समझा कीजिए। फोन लगाया हरिशंकर व्यास को। अरे भाई तुमने लिखा था अमर सिंह चिरकुट है। अब न लिखना कि वह चिरकुट है। प्रधानमंत्री ने शपथ लेने के बाद पूरी कैबिनेट के साथ पहला खाना वहां खाया है। तो अब लिखना प्रधानमंत्री के दोस्त। तो यह है चंद्रशेखर जी का चरित्र। 

मनोज रस्तोगी % तो इसका मतलब यह हुआ कि अमर सिंह जी एक ऐसे टीम मेकर हैं कि उनकी मेधा से दूसरे लोग तो अपने पॉलीटिकल कैरियर बना गए। आपको वहां कोई ऐसा नहीं मिला जो आपके नजरिए को ठीक से पेश करे।

कहते हैं न जो मिल गया इसी को मुकद्दर समझ लिया। आपको संतोष होना चाहिए कि कहां से आए] क्या किया] कहां पहुंचे। 

प्रीत पाल कौर % संतोष की तो अलग बात है क्या आपको कभी ख्वाहिश रही कि आपको भी कोई अमर सिंह मिले

नहीं] बिल्कुल नहीं। मैं ईश्वर को प्रणाम करता हूं] धन्यवाद देता हूं] और अपने उन सभी पुराने साथियों को प्रार्थना करता हूं कि उन्होंने मुझे भारमुक्त किया। मैं संबंधों को बहुत गंभीरता से लेता हूं। जिससे मेरा संबंध होता है उसका पूरा भार मेरे सर पर होता है। अमिताभ से अगर संबंध है तो उनकी सारी समस्याएं मेरी हैं। जिस किसी ने मुझे अलग किया मैं उन सबको प्रणाम करता हूं। उन्होंने मुझे अपने भार से मुक्त किया और मुझे हल्का किया। मुझे मौका मिला साहित्यकी ओर किताबें पढ़ने का। 

प्रीत पाल कौर % आपका कहना सही है कि उन्होंने आपको भारमुक्त किया। लेकिन क्या कभी अफसोस होता है

बिल्कुल हुआ था। हम मानव हैं। मैंने कहा था कि मैं झूठ नहीं बोलूंगा। लेकिन अब वह अफसोस नहीं है। क्योंकि जब मन हो तो अच्छा है। मन का हो तो और भी अच्छा। और मैं इन सब लोगों को एक सकारात्मक रूप से देखता हूं। इन सब लोगों ने मुझे कुछ दिया। अनुभव दिया। धोखा ही दिया। मुझसे लिया क्या

प्रीत पाल कौर % सही कहा

एक बार दक्षिण के बहुत बड़े कलाकार मेरे पास आए। नाम लेना उचित नहीं। उन्होंने कहा हमारी एक फिल्म फ्लॉप हो गई है। हम भारी संकट में हैं। तो आप हमें मदद कर दीजिए। मैंने कहा आप मुझे जानते हैं] सम्मान करते हैं। मैं भी आपको जानता हूं सम्मान करता हूं। आप मुझे स्वीकूति दें। लेकिन बोले क्या हम मित्र हैं। हम बोले नहीं। क्या आपका हमारा कोई पारिवारिक संबंध है] हम बोले नहीं] तो तार्किक कारण क्या है। उन्होंने कहा आप कला प्रेमी हैं। अगर आपने अमिताभ की मदद की है तो आप हमारी भी मदद करेंगे। मैं बोला आप जाइए अमिताभ को पकड़ कर मारिए। क्योंकि अमिताभ ने कहा ^हेल्प ग्रीडी नॉट नीडी।^

प्रीत पाल कौर % मेरा अगला सवाल यही था आपसे कि वो जो लेसन आपने लिया उसे अप्लाई कर दिया आपने मुझे जवाब मिल गया मेरे सवाल का।

मनोज रस्तोगी % जितनी बातें आपने बताई उनमें भाव आता है। हालांकि आपने भी कहा कि आप संतुष्ट हैं। जिन लोगों के लिए आपने अपना सर्वस्व दिया। उनकी प्रगति] उनका भार] उनमें से एक भी व्यक्ति ऐसा नहीं रहा जो आपके प्रति लॉयल रहा हो

आपको मजे की बात बताऊं। जब प्रधानमंत्री का चयन हो रहा था तो करुणानिधि ने वीपी सिंह का नाम दे दिया और वीपी सिंह के लिए सहमति बन गई। दूसरी बार जब जनता दल के नेतृत्व वाला गठबंधन संयुक्त मोर्चा सरकार बनाने की स्थिति में आया तो तब तय हुआ कि सबसे बड़ा दल जनता दल है लिहाजा प्रधानमंत्री इसी दल से बनेगा। लालू जी इसके राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। सुरजीत साहब ने मुझे बुलाया और कहा कि ब्लॉक हिम] ही विल बी ए डिजास्टर एज प्राइम मिनिस्टर। चयन समिति में तय हुआ कि जनता दल प्रधानमंत्री बनाएं। कर्नाटक में भी जनता दल ने १६&१७ सीटें जीती थीं।

आदेश भाटी % मुलयाम सिंह का भी नाम आया था क्या

मुलायम सिंह प्रधानमंत्री हो गए थे। ज्योतिबसु] हरकिशन सिंह सुरजीत मुझे बहुत मानते थे। अकेले उन्होंने उन्हें बना दिया था। सुजीत रूस चले गए थे सब तय कर। तो शरद जी] लालू जी एक साथ थे। इन दोनों ने मिलकर मुलयाम सिंह जी को लूट लिया। मुलायम सिंह की सिर्फ चर्चा नहीं आई थी बल्कि वह सर्व ?kksf"kr बन भी गए थे।

अपूर्व जोशी % आपके खिलाफ बहुत षड्यंत्र भी हुए हैं। १० साल पहले एक कांड हुआ था। जिसमें आपकी छवि खराब हुई थी। वे कौन लोग थे। 

यह बंबई का एक प्रसिद्ध उद्योग पति द्घराना था। मैं नाम नहीं लेना चाहूंगा।   

अपूर्व जोशी % मैंने पहले देखा है कि कोई महिला नेता आती थी तो मुलायम सिंह जी लड़खड़ा जाते थे। लेकिन बाद का जो मुलयाम का स्त्री प्रेम है उसमें आपका बड़ा योगदान रहा 

आप आरोप लगा रहे हो। ऐसा नहीं है] उसका मैं आपको एक उत्तर दे दूं। 

प्रीत पाल कौर % यह तो कांपलीमेंट है

अपूर्व जोशी % यह आप पर आरोप नहीं है। आप स्पष्टवादी हैं

मेरे ?kj में तीन हिस्से हैं। दो पुत्रियां और एक मेरी पत्नी। मेरा मानना है कि स्त्री को आप क्या क्यों मानते हैं। कोई स्त्री जो आपकी पत्नी है वह आपकी मित्र क्यों नहीं हो सकती। मेरा कई स्त्रियों से संबंध है। और जो संबंध होता है वह शारीरिक संबंध से ज्यादा महत्वपूर्ण होता है यानी भावना का संबंध। शारीरिक संबंध तो बड़ा क्षणिक होता है। तात्कालिक होता है। जबकि भावना का संबंध हमेशा रहता है। जब हम चुनाव लड़ रहे थे तो पांच दिन तक वहां कोई नहीं गया। और १० दिन तक श्री देवी डिंपल और तमाम हीरोइनें आईं। हमारी तो पिकनिक हो गई। 

अपूर्व जोशी % कौन नहीं गया

हेमा जी। सारी सुंदरियां हमारे इर्द&गिर्द धूम रही थीं। उनको देखकर लगा कि यह तो स्वीप हो रहा है। भीड़ देखकर के मेरा अनुभव है हम को देखकर भी भीड़ हो सकती है। महिलाएं जो हमारी मित्र हैं उनको देखकर भी भीड़ हो सकती है। लेकिन यह भीड़ मतो में परिवार्तित होगी कि नहीं। क्योंकि उस भीड़ में आने वाला या तो मुलायम सिंह को वोट देगा। और नेता की सभा में मुसलमानों की बड़ी भीड़ होती है। खूब भीड़ होती है फिर वह अंतिम दिन कहते हैं ^पहले मेरा भाई फिर बीजेपी को हराई] फिर सपाई।^

प्रीत पाल कौर % यह अफवाह थी या सच था। इस बार यूपी चुनाव में धांधली हुई है। क्या वाकई हुई है

बिल्कुल नहीं] यूपी चुनाव में क्या हुआ है यह आप साफ सुन लीजिए। मंडल कमीशन का] आरक्षण का पूरा भाग] पूरी मलाई सिर्फ यादव पर टिकी थी। चौरसिया राजभर चौहान थे। छोटे&छोटे पिछड़ी जाति के लोग हैं। यह लोग वंचित लोग हैं। पहली बार ओम प्रकाश चौहान के रूप में सबको मंत्री पद मिला। सारे यादवों के अतिरिक्त जितने पिछड़े समुदाय के बिखरे मोती थे। मोतियों की एक माला बना दी। पूर्वी उत्तर प्रदेश में यादवों का बहुत बड़ा स्थान है। उस गड़वा द्घाट में मेरा सम्मान है। यादव परिवार में निरंतर जाता हूं। मुझे शांति मिलती है। वहां पहुंच गए मोदी जी। गड़वा द्घाट यादवों का सबसे बड़ा गढ़ है। योगी अदित्यनाथ की पीठ में हमारे यहां के बच्चों का मुंडन भी वहीं होता है। हम राजनीतिक विरोधी थे उनके तब भी वो हमारा माला पहनकार स्वागत करते थे। हमें कैसे निकाला देंगे। हमारे पुरोहित हैं। पुरोहित तो जिंदगी भर करनी है। हमारे यहां क्षत्रियों की पीठ है। वैसे ही यादवों की पीठ है। वहां जैसे किला राम की पीठ या बनारस में भगवान राम की पीठ में हम विश्वास रखते हैं। और गोरखपुर तो हम हरदम गए। चाहे सांप्रदायिक्ता के विरुद्ध कितना भी भाषण दें लेकिन मूल रूप से हम क्षत्रिय हैं। क्षत्रियों की पीठ है। और हम हिंदू हैं।

प्रीतपाल कौर % डिमोनेटाइजेशन का प्रभाव होगा

नहीं] बिल्कुल नहीं। लेकिन जीएसटी के दुष्प्रभाव का काउंटर नहीं हो रहा है। जीएसटी के लिए यह भी था मैंने मत दिया है। जीएसटी के प्रारूप को बनाया है चिदंबरम ने। जीएसटी के मां का नाम है चिदंबरम और उसके पिता का नाम है मनमोहन। माता& पिता की यह संपत्ति जो एकदम बच्चा है जो बोल भी नहीं सकता वह जीएसटी के कार्ड का नाम है। बच्चा क्रंदन कर रहा है। मां बाप को बुला रहा है। ये लोग उससे पूछ रहे हैं कि क्यों मां बाप को बुला रहे हो। क्या हो गया। वो बच्चा बताने में नाकाम है। तो इन कारणों को बीजेपी के नेता और अरुण जेटली बताने में नाकम रहे। जीएसटी काउंसिल में ममता रही हैं। इसमें कई गैर भाजपा सरकारों के मंत्री भी रहे हैं। जीएसटी अगर गलत प्रयोग है तो हम सब इसके जिम्मेदार हैं। जनता विरोध कर रही है तो सामूहिक रूप से हमें इसका निस्तारण करना चाहिए। अगर विश्व बैंक की रिपोर्ट के अनुसार मोदी यह कहते हैं कि भारत के स्तर में सुधार आया है। तो अभी से उसकी निंदा की जाए तो ठीक नहीं है। 

आकाश नागर % आजकल आप मोदी जी के गुण कुछ ज्यादा ही गा रहे हैं। तो उसे क्या कहेंगे

मैं उनके गुण नहीं गा रहा हूं इसलिए कह रहा हूं क्योंकि उनका काउंटर कोई पैदा नहीं हुआ। 

मनोज रस्तोगी % क्या हम मान लें कि जो अमर सिंह की जो मेन स्ट्रीम में वापसी होनी है उसे बीजेपी मूर्त रूप देगी

कोई संभावना नहीं है। इसकी वजह है कि योग्यता हर दम बांध होती है। 

 राजकुमार भाटी % भाई साहब ने सवाल पूछा था कि अमर सिंह का राजनीतिक पुनर्वास भाजपा के मंच पर हो

स्वाभाविक ईर्ष्या होती है। एहसास कमतरों को होता है कि यह नहीं हैं तो यह हाल है और अगर जाएंगे तो क्या हाल होगा। 

मनोज रस्तोगी % इसका मतलब संगठन तैयार है लेकिन जो विरोधी वहां हैं वह नहीं चाहते। 

देखिए] मैं आपको एक चीज बता दूं। अगर मुझे काम करना है] तो यह हर क्षेत्र में होता है। एमजे अकबर के साथ क्या बुराई है। देश का अगर सबसे मेधावी पत्रकार है] तो एमजे अकबर। ज्ञान की दृष्टि से। कोलकाता में जब हमारा प्रवास था। उन्होंने ^स्टेट्समैन^ को खत्म करके ^टेलीग्राफ^ को खड़ा कर दिया। ^एशियन एज^ को वैश्विक अखबर बना दिया। लेकिन आप आज ^टेलीग्राफ^ या ^एशियन एज^ को हाथ में लेंगे तो फर्क पता चल जाएगा। वह तो वही जानेंगे जो पढ़ते हैं। इनकी सामान्य पृष्ठि भूमि है। उनका एक भाई बाटा के एक शोरुम में जूता पहनाता है। सेल्समैन है। एमजे अकबर जी की योग्यता उनके रास्ते में बाधा है। एमजे अकबर की जो मेधा है] उनके जो राजनयिक संबंध हैं पूरे विश्व में] उसके हिसाब से कहां उनका नाम सुनते हैं। अखबार में या कहीं और। एक १०० पावर का बल्ब हो और आप उसे मोमबत्ती से टिमटिमवाएं तो यह गलत है। 

अपूर्व जोशी % उनके भाई के बारे में आप बता रहे हैं कि वह आज भी 

वह पटना में एक बाटा की दुकान में सेल्समैन हैं। जूता पहनाते हैं। तो योग्यता ईमानदार के रास्ते में हरदम बाधा है। आप देखिए न यहां महाभारत में क्या हुआ। एकलव्य का अंगूठा कटवा दिया उनकी योग्यता के कारण। अगर अर्जुन की योग्यता किसी को पता हो जाती तो उनको आगे नहीं बढ़ने दिया जाता। लोगों को अगर पता होता कि मोदी प्रधानमंत्री बन जाएंगे तो युवा सम्मेलन में ही उनको साइड कर दिया जाता। 

आकाश नागर % जीएसटी का छोटे कारोबरियों पर भारी प्रभाव पड़ रहा है 

मैं कह रहा हूं कि अगले दस साल तक मोदी ही मोदी का दुश्मन है। क्योंकि मोदी जी गुजरात के मुख्यमंत्री अब नहीं हो सकते। मोदी वर्सेस विजय रूपानी के रूप में वहां आकलन होता है। सोनिया गांधी से भी मेरे बड़े अच्छे संबंध रहे हैं। और मैं उनका आदर करता हूं। प्रियंका को मैं बहुत प्रेम करता हूं व्यक्तिगत रूप से। हमारे संबंध गांधी परिवार से बहुत अच्छे हैं  मेरे मुंह से आप गांधी जी के विरुद्ध कोई अशोभनीय बात नहीं सुनेंगे। लेकिन मैं कह दूं कि राहुल गांधी की गब्बर सिंह टैक्स वाली भाषा ठीक नहीं है। 

अपूर्व जोशी % विकास पागल हो गया है। यह भी ठीक नहीं है 

विकास पागल हो गया है भी ठीक नहीं है। विकास भटक गया है यह ठीक है। 

अपूर्व जोशी % गुजरात तो लपक रहा है। इस भाषा को

भले लपके जिस भाषा को लोग लपकें जरूरी नहीं है कि वह भाषा सही हो  

प्रीत पाल कौर % गांधी परिवार की बात की आपने। आपसे एक व्यक्तिगत सवाल पूछूंगी पिछले दिनों एक परिचर्चा थी] उसके बाद एक जार्नलिस्ट बता रहे थे कि मैं इस बात को दावे के साथ कह सकता हूं कि प्रियंका चाहती हैं राजनीति में आना लेकिन राहुल ऐसा नहीं चाहते

यह मैं आपको बताना चाहूंगा कि राहुल गांधी और प्रियंका गांधी का जो प्यार है बहुत अटूट है। राहुल गांधी को लोग पप्पू कहते हैं। लेकिन वह कुछ भी हों] पप्पू नहीं हैं। राहुल गांधी अध्ययन करने वाला व्यक्ति है। राहुल गांधी की सबसे बड़ी समस्या भाषा है। वह अंग्रेजी में सोचते हैं और हिंदी में उसका अनुवाद करते हैं। उनकी जो भाव अभियक्ति है वह अंतर्मन से नहीं है। उनको भारत में अगर राजनीति करनी है तो उनको भारत की भाषा] भारत का भोजन और लोक भूषा अपनानी होगी। लोक भूषा तो वह कुर्ता पाजामा पहनते हैं। 

प्रीत पाल कौर % उनको जो स्पीच लिखकर दे रहे हैं वह लोग गलत दे रहे हैं 

अगर आप लिखित स्पीच पढ़ेंगे तो आप हरदम गलत हैं। 

प्रीत पाल कौर % लेकिन कोई तो हो जो उनको ठीक तरह से फीडबैक दे

यह मेरी जिम्मेवारी तो नहीं है ना। 

प्रीतपाल कौर % नहीं आपकी नहीं है 

तो आप मुझ पर क्यों थोप रही हैं। हम प्रेम कर रहे हैं उस प्रेम के बदले हमें क्या मिला। मैं बचपन से कांग्रेस में रहा। वीरबहादुर चाहते थे कि मैं लालगंज विधानसभा क्षेत्र से लडूं। वीपी सिंह ने विरला का दलाल कह के मेरा टिकट काट दिया। माधव राय सिंधिया और अमिताभ बच्चन मेरे टिकट के लिए राजीव गांधी के यहां गए। मेरा टिकट हो गया। सौ जीप लेकर मैं वहां पहुंचा। मेरा टिकट काट कर उदयन शर्मा को दे दिया गया। दूसरी बार मुझे कहा गया आप गौंडा लड़िए। तो उस समय मोदी जी थे और कांग्रेस का बुरा हाल था। कुंवर जितेंद्र सिंह जो राहुल गांधी के सबसे खास हैं। मेरे ?kjआए और कहा आप दागी हैं। क्योंकि आप पर कैश फॉर वोट का चार्ज है। इसलिए आप निर्दलीय लड़िए। कांग्रेस आपको बाहर से समर्थन करेगी। फतेहपुर सीकरी में लोकलदल से चुनाव लड़ा। जब मैं लोकदल से चुनाव लड़ने आ गया तो वहां एक सभा राहुल गांधी की हुई। विरेंद्र सिंह पर्यवेक्षक थे। कहा कि आप दागी हैं। आप राहुल जी के साथ मंच शेयर नहीं कर सकते। यह हुआ मेरे साथ और आपको ताज्जुब होगा आप रिकॉर्ड चेक कर लीजिए नरेंद्र मोदी पूरे चुनाव में कहीं नहीं गए तो केवल फतेहपुर सीकरी। मोदी ने मेरा इतना सम्मान तो किया कि वह वहां नहीं गए। जहां मोदी नहीं गए वह है फतेहपुर सीकरी। मैं आज खुले आम कह रहा हूं। मोदी जी से मेरे रिश्ते हैं। मैं छुपाता नहीं। गुजरात के भावनगर में राज परिवार में मेरी शादी हुई है। अक्षरधाम के माध्यम से मेरे उनसे संबंध रहे हैं। प्रधनमंत्री बनने के बाद हमारी द्घनिष्ठता नहीं रही। नरेंद्र मोदी से मेरे व्यक्तिगत संबंध बहुत अच्छे रहे हैं। मैंने चुनाव नतीजे आने से पहले सोनिया जी से कहा कि नतीजे आने के बाद आप बुलाएंगी तो मैं नहीं आ पाऊंगा। उसके पहले आकर मिल लीजिए। मैंने सोनिया जी से मिलकर कहा आप हार रही हैं। पूरी पार्टी हार रही है। मैं भी हार रहा हूं। लेकिन आपके सलमान खुर्शीद से ज्यादा बुरी हालत मेरी नहीं है। मैं चला आया। आप यह बताइए कि इस धर्म निरपेक्षता ने ही मुझे सांप्रदियकता की तरफ धकेला। मैंने जो जीवन का सबसे अच्छा काम किया वह कलाम के कहने से किया। मनमोहन ने करन थापर के इंटरव्यूह में कहा कि अमर सिंह हमें समर्थन नहीं देंगे। न्यूक्लियर डील के समय कम्युनिस्टों ने सरकार से समर्थन वापस ले लिया था। मनमोहन सिंह ने कहा कि न्यूक्लियर डील देश के लिए जरूरी है। हमसे समर्थन मांगा।

मैंने कहा मैं कलाम साहब से पूछूंगा। फिर मैं कलाम के पास गया तो कलाम ने कहा कि यह देश के लिए जरूरी है। थोरियम बेस टेक्नॉलोजी २० साल बाद आएगी। जमाना यूरेनियम बेस टेक्नॉलॉजी का है। आज अगर हम न्यूकलीयर ताकत नहीं हैं तो क्या डो कलाम में मानेगा चीन और अगर हम नहीं होते न्यूक्लियर पावर सपलायर के सदस्य तो हमारा क्या होता। हमने देश में जो सबसे अच्छा काम किया इसके बदले में एक पैसे की मदद कांग्रेस से नहीं ली। कांग्रेस से कोई मंत्री पद नहीं लिया। चिंदबरम ने ^लुंगीधारी चिंदबरम^ ने मणिधारी सांप की तरह दिल्ली पुलिस को यह आदेश दिया कि अमर सिंह को बंद करो। पूरे के पूरे जीवन का बलिदान कर दिया सोमनाथ चटर्जी ने। 

सोमनाथ चटर्जी स्पीकर थे। झारखंड मुक्ति मोर्चा कांड में नरसिम्हाराव छूट गए। हमें जब क्लीनचिट सोमनाथ चटर्जी दे दिए तब भी दिल्ली पुलिस कमिशनर को कहकर हमें जेल भेजने का काम किया श्वेत लुंगीधारी पी चिंदबरम ने। वह सैडिस्ट है। हमारी दो&दो बच्चियां रोती&बिलखती रहीं। पत्नी विक्षिप्त हो गई हैं उस द्घटना के बाद। कोई अनिल अंबानी नहीं आया] कोई अमिताभ &मुलायम सिंह नहीं आया] उनकी पत्नी नहीं आई मदद को और अहमद पटेल ने तिहाड जेल में बंद करवा दिया। 

नैतिकता की बात करते हैं] बड़े पन की। बात करते हैं] लेकिन  मदद को कोई कांग्रेसी नहीं आया। अहमद पटेल को फोन किया तो लाइन काट दिया। सोनिया गांधी बाहर से लौटी तो सहानुभूति के दो बोल बोले। प्रियंका ने कहा कि गलत हो रहा है और आदरणीय राहुल गांधी के नाक के बाल जितेंद्र सिंह कहते हैं हम दागी हैं। जिसके लिए चोरी की वही कहे चोर हैं। मैं नरेंद्र मोदी को प्रणाम करता हूं। फिर इनको खुजली हो जाएगी। नरेंद्र मोदी न्यूक्लिर डील को भी आगे बढ़ा रहे हैं। और जीएसटी को भी आगे बढ़ा रहे हैं। यह पीड़ा मैं किसको बोलूं। आप कहेंगे आप धर्मनिरपेक्ष हैं। आइए हमारे ऊपर ईडी की जांच हुई। हमारे ?kjपर इन्कम टैक्स की रेडें हुई। आज लोग हाय&हाय कर रहे हैं। इसलिए कि अमर सिंह को ?ksj के रखो कहीं ये कुछ बोल न दे।

अपूर्व जोशी % अगर राहुल अध्यक्ष बनते हैं तो उनके लिए आपकी दृृष्टि क्या रहेगी 

मैं इस पर कोई टिप्पणी इसलिए नहीं देना चाहता क्योंकि कांग्रेस पार्टी में जिस तरह के तत्व हैं। और जिस तरह के लोग नेतृत्व को ?ksjs हुए हैं] उस पर कुछ बोलना ठीक नहीं। 

राजकुमार भाटी % पूरी बातचीत में राज बब्बर का जिक्र नहीं हुआ। वह आपका साथ छोड़कर आए। वह बड़ी कड़वी भाषा बोलते थे। और उनके भाषण की शुरुआत यहां से होती थी कि भारतीय पक्षी कौन है राष्ट्रीय पशु कौन है राष्ट्रीय दलाल कौन फिर कहते अमर सिंह। ऐसी छवि आपकी क्यों बनी। 

उनको मैं दोष नहीं देता। उनके संग अमिताभ ने बहुत बुरा किया। इनका जब करिअर शुरू हुआ तो यह बीआर चौपड़ा की हर फिल्म में होते थे। बीआर चोपड़ा की फिल्म बाबुल में राज बब्बर भी ले लिए गए। अमिताभ ने कहा या तो राजब्बर रहेगा या तो हम। इस तरह राजब्बर निकाले गए। अमिताभ जी की वजह से। और हम अमिताभ के उद्धारक माने जाते थे। तो जिस तरह से दुश्मन का दुश्मन दोस्त। सपा में हमारी शक्ति किसी से भी ज्यादा थी। उस शक्ति का लाभ अभिताभ बच्चन को मिला। भारतीय राजनीतिक परिपे्रक्ष्य में वे महत्वपूर्ण हो गए थे। अमिताभ ने पहले राजीव गांधी की सत्ता का मजा लिया फिर हमारी सत्ता का मजा लिया। फिर मोदी जी का दामन पकड़ा। अब वे पनामा में फंसे हैं देखिए क्या होता है। बचते हैं कि निकलते हैं। बोफोर्स हो] बाराबंकी का भूमि विवाद हो या कौन बनेगा करोडपति में आयकर से बचना हो। जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी की है मैं नहीं कर रहा। विवाद और अर्थिक विवाद का अमिताभ का संबंध रहा है। बाद में राज बब्बर ने यह भी कहा कि अमर सिंह जैसा देने वाला कोई नहीं है। मैंने उनको क्या&क्या दिया है] यह मैं नहीं बोलूंगा। जब उन्होंने कह ही दिया कि उनके जैसा कोई नहीं है। 

अपूर्व जोशी % मौजूदा संद्घर्ष के चलते पिता पुत्र के संबंध में विवाद सार्वजनिक हैं। मगर इंटरनल क्या है। हम नहीं जानते आप जानते हैं। रामगोपाल जी और शिवपाल जी के मध्य में मथुरा में जय गुरुदेव का आश्रम का है और खरबों की संपत्ति है उसके कारण विवाद है

यह सब झूठ है। रामगोपाल हीनभावना से ग्रस्त है। इस पूरे परिवार में सबसे कमजोर व्यक्ति है। सबसे मजबूत व्यक्ति हैं मुलायम सिंह। इनके यहां सारे मंद बुद्धि हैं। जैसे दरिद्रों में सुरा पैसा श्रेष्ठ] वैसे ही मूर्खों में जो थोड़ा पढ़ा लिखा हो वह प्रोफेसर। फर्जी छद्म प्रोफेसर राम गोपाल। 

अपूर्व जोशी % यह थिंक टैंक माने&जाने लगे

हां] क्योंकि किसी को लिखना पढ़ना नहीं आता था। जब मैं आया तब रामगोपाल की भूमिका कुछ कम हुई। हमारी विधा के सामने यह छद्म प्रोफेसर कुछ क्षीण हुआ। उनकी जो संप्रभुता थी उसमें ग्रहण लगा। वो हमारे स्वाभाविक विरोधी हैं। राजबब्बर को मेरे खिलाफ भड़काने में उनकी भूमिका रही है। जो बाद में उन्होंने माना। मैं ऑन रिकार्ड कह रहा हूं। जब हमें निकाला गया वह मुलायम सिंह पर पहली चोट थी। उसके बाद मुलायम सिंह पर उनका पूरा आधिपत्य हो गया। उन्होंने मुलायम सिंह से अखिलेश को मुख्यमंत्री बनवाया। और फिर अखिलेश को कब्जे में लेकर मुलायम को हाशिए पर करवाया। जब मुलायम सिंह को यह लगा कि हम हाशिए पर हैं तो वह अमर सिंह को जबरदस्ती ले आए कि देखो साथी आ गया। अब बताता हूं मैं। लेकिन जब मैं आ गया तो मैंने सोचा कि मैं डंडा क्यों चलाऊं। जब चिड़िया खेत चुग चुकी है। सत्ता का हस्तांतरण हो चुका है। यहां चकबंदी हो चुकी है। चक बद चुके हैं। खेतों के नाम दूसरे के नाम पर चढ़ चुके हैं। 

अपूर्व जोशी % खसरा खतौनी हो चुकी है 

उसके बाद आखिलेश ने हमसे पूछा कि आप किसके साथ हैं। हमने कहा हम मुलायम सिंह के साथ हैं। तुम मुलायम के बेटे हो इसलिए तुम्हारे साथ भी हैं। उसी दिन मेरे भाग्य का निर्धारण हो गया। लेकिन जब तलवारें खिंच गईं। सब कुछ हो गया। क्योंकि इसकी परिणति होनी थी। और अन्त में मुलायम सिंह ने कह दिया कि आप भावना के लिए राजनीति छोड़ते हैं और हम राजनीति के लिए सब कछ छोड़ते हैं। इसलिए आपसे निवेदन है कि आप हो सके तो सिंगापुर या लंदन चले जाइए। और चुनाव में आइए। मतलब जिला बदर भी नहीं देश बदर। मैने कहा और कुछ चुनौती है अगर मुलायम सिंह सुन रहे हैं या पढ़ रहे हो��

 
         
 
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  • कृष्ण कुमार

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