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टॉक ऑन टेबल 1
 
मैं राजनीतिक वेश्या नहीं

अमर सिंह नाम है उस शख्स का जो कुछ हलकों के शीर्ष पंक्ति पर व्याप्त हैं। आप इन्हें पॉलीटिकल मैनेजर या नेशनल लाइजनर कहकर इनको नापसंदगी के ?ksjss में डाल सकते हैं। लेकिन इनका एक दूसरा भी पक्ष है जिसको इनकी पहली वाली छवि ढक लेती है। यह एक सच्चे मित्र और मित्रों के संकट मोचक हैं। ये खुद को मूर्खता की हद तक भावुक मानते हैं। इन्होंने अमिताभ से लेकर सहाराश्री] मुलायम सिंह की मदद की। इनके सभी दलों के लोगों से गहरे रिश्ते रहे हैं। इनको साहित्य और सिनेमा का गजब शौक है। ग्लैमर पसंद हैं। कहना यह है कि इनके व्यक्तित्व के कई लेयर हैं जो ^दि संडे पोस्ट^ के इस विशेष आयोजन^टॉक ऑन टेबल^ में परत&दर&परत संवाद के माध्यम से सामने आए हैं। यकीन नहीं तो आप टीम ^दि संडे पोस्ट^ के साथ समाजवादी चिंतक राजकुमार भाटी] वरिष्ठ पत्रकार प्रीत पाल कौर] मनोज रस्तोगी और आदेश भाटी का अमर सिंह संग तीन ?kaVss तक चले इस संवाद को पढ़कर जान लीजिए


अपूर्व जोशी % राजनीतिज्ञ अमर सिंह के बारे में बहुत कुछ सबको मालूम है। आपकी राजनीतिक यात्रा की शुरुआत कहां से हुई व्यापारी से राजनेता कैसे बने] इस पर प्रकाश डालें

सबसे पहले मैं आपको बता दूं कि मैं अपने आपको राजनीतिक मानता ही नहीं] क्योंकि राजनीति आज के संदर्भ में एक पेशा है] रोटी कमाने का जरिया है। मैं उन वेश्याओं को ज्यादा ईमानदार मानता हूं जो शरीर का धंधा करती हैं। कम से कम वो खुलेआम करती हैं। वो अपने जीवन को परिभाषित करती हैं। ?ksjs में नहीं रहती हैं। लेकिन आज के राजनेता गांधी की समाधि पर फूल चढ़ाते हैं। जयप्रकाश और लोहिया को उद्धृत करते हैं और फिर अपने वातानुकूलित कक्ष में सिटकनी चढ़ा कर शराब माफिया से] भूमाफिया से डील करते हैं। बच्चों के मिड डे मील] जो पौष्टिकता का मामला है] उसके बारे में खुलेआम प्रतिशतों की बात होती है। सरकारें बदलती हैं। लेकिन कुछ अधिकारी और व्यापारी नहीं बदलते। मैं बहुत छोटी उम्र में लगभग ४० साल की उम्र में राज्यसभा पहुंच गया था। ये सत्र पूरा होगा तो २४ साल हो जाएंगे। मैं चंद्रशेखर जी से बहुत प्रभावित हूं। दलीय संकीर्णता से ऊपर उठना चाहिए। उत्तर प्रदेश में मैंने कल्याण सिंह की सरकार] मुलायम सिंह की सरकार] अखिलेश की सरकार सबकी सरकारों को देखा। उत्तर प्रदेश विकास परिषद का गठन हुआ] हमने अपने पुरुषार्थ से किया। देश की जीडीपी का अधिकांश प्रतिशत उत्तर प्रदेश की धरती से हर महीने आता था। २७ चीनी मिलें लगवाई। मैं चाहता था उत्तर प्रदेश में कूषि पर आधारित उद्योग चलें। मैंने आलू के दामों में उतार&चढ़ाव देखा है। आलू से शराब बने इस तकनीकी को लेकर रामपुर में एक कारखाना लगवाया ताकि कम से कम आलू किसानों को सहारा मिले।

मनोज रस्तोगी % हम ये जानना चाह रहे हैं कि आपकी राजनीतिक जीवन यात्रा कहां से प्रारंभ हुई

मैं बोल रहा हूं। उसकी प्रस्तावना ही दे रहा हूं। मेरा जन्म २७ जनवरी १९५६ को अलीगढ़ में हुआ। मेरे पिता स्व. हरिश्चंद्र सिंह अलीगढ़ में ताले के उद्योग के लिए जाने&जाते हैं। ताले का कुटीर उद्योग वह करते थे। ६२ में वह कोलकाता चले गए] क्योंकि अलीगढ़ के ताले कोलकाता में बिकते थे। कोलकाता उस समय उत्तर&पूर्वोत्तर की मंडी हुआ करता था। उनकी आवश्यकताओं की आपूर्ति कलकत्ता से होती थी। ६२ से ७७ तक कोलकाता में रहा। बहुत ही अल्पायु में करीब १८ या २० साल का रहा हूंगा। पिता जी से मेरा विवाद हुआ जिसे मैं आशीर्वाद मानूंगा। वे चाहते थे कि मैं पारिवारिक व्यवसाय में रहूं। मैं कहता था कि मैं पारिवारिक व्यवसाय में नहीं रह सकता। मैं सेंट जेवियर कॉलेज में इंग्लिश ऑनर्स पढ़ना चाहता था। वह मुझे सिटी कॉलेज में बीकॉम कराना चाहते थे। मुझे अभी भी याद है कि वह कहते थे अंग्रेजी की डिग्री लेकर क्या होगा मैंने कहा कम से कम शादी&विवाह में दिक्कत नहीं होगी।

प्रीत पाल कौर % डिग्री लड़कियों के शादी विवाह के लिए जरूरी मानी जाती है

नहीं] लड़कों के लिए भी जरूरी थी ताकि हीनभावना न हो कि पत्नी ग्रेजुएट है और मैं नहीं। मेरा ख्याल है कि १८ या १९ वर्ष की आयु में मैंने पिता की प्रताड़ना पर ?kj छोड़ दिया। उसके बाद कई तरह के काम किए खुद को पालने के लिए। हॉस्टल में रहा। इधर&उधर रहा। लोग अपने अतीत की लज्जा को छिपाते हैं। मैं अपने अतीत के बुरे दिनों] शोभनीय&अशोभनीय दिनों को छुपाता नहीं। जीवन की पाठशाला में वे बड़े रोचक दिन थे। जब कलकत्ता विश्वविद्यालय के प्रेसीडेंसी कॉलेज के सामने वाले परिसर में नक्सली नेता कानू सान्याल और चारु मजूमदार से भेंट होती थी। महाश्वेता देवी के ^हजार चौरासीवें  की मां^ के चरित्रों से मिलने का अवसर मिला। मुझे लगता है कि जिनको लोग भटकाववादी और अलगावादी कहते हैं उनके चरित्र में और मानसिकता में पवित्रता है। इसलिए नक्सलवाद पर जो फिल्म बनी हैं वह सत्यता के बहुत नजदीक है] उसमें उनके रास्ते के भटकाव का चित्रण है। लेकिन उनकी आत्मा की शुद्धता की भी बात है। वह अनुभव के दिन थे। जीविकापार्जन के लिए अपर इंडिया एसोसिएशन नाम की संस्था थी। वहां चिंतामणि राय ने मुझे काम दिया। अपर इंडिया एसोसिएशन का काम सत्कार व्यवसाय का था। सत्कार व्यवसाय मतलब फूल वगैरह देना। उत्तर प्रदेश से कोई हिंदी भाषी आए तो उसे बुलाना] उनका स्वागत&सत्कार करना और जो प्रवासी हिंदी भाषी हैं उनको एकत्रित कर] अतिथियों को देखकर पुल्कित होना था। इसी प्रक्रिया में मैं वीर बहादुर सिंह जी से मिला। उस वक्त वह बिल्कुल सामान्य व्यक्ति थे। गोरखपुर के पनियारा के थे। उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री थे।

अपूर्व जोशी % सरकार तब नारायण दत्त तिवारी जी की

जी उन्हीं की सरकार। वीर बहादुर मध्यम कद के काले। प्रखर वक्ता नहीं। वह भी क्षत्रिय थे। हम भी क्षत्रिय थे। उसके बाद पता चला कि पंडित कमलापति त्रिपाठी को निपटाने के लिए संजय गांधी ने उनको चयनित किया था। पहले तो चंद्रजीत यादव को उतारा गया था। हरिशंकर तिवारी और सभी कमलापति जी के परम भक्त थे। वीर बहादुर जी ने उनका इतना जीना हराम किया कि वह काठमांडू में रहने लगे। एक बात मैं कहूंगा वीर बहादुर जी के लिए कि धीरे&धीरे जिस तरह उनका उत्थान हुआ उन्होंने उतना ही ज्यादा हमसे एक ?kfu"Brk पायी। राजनीति में अक्सर यह होता है कि पुराना साथी पीछे छूटता जाता है। लेकिन मेरे साथ ऐसा नहीं हुआ। वीर बहादुर सिंह जी की इंदिरा गांधी और राजीव गांधी की कूपा से उन्नति हुई। la?klZ तो उन्होंने पद प्राप्त करने के बाद किया। कूपा से जब वो एक जगह पहुंच गए फिर la?klZ किया। उनका la?klZ यह था कि उन्हें प्रपंच करना था कि वह कमलापति से कम नहीं हैं। उस la?klZ के दौर में उन्होंने कहा कि हमारा साथ दीजिए। कोलकाता में क्या करेंगे। आइए हमारे साथ और मिलकर राजनीति करें। आजमगढ़ जिले के लालगंज क्षेत्र में जो मेरा पूर्वजों का क्षेत्र था उसमें विधानसभा का चुनाव होने वाला था जब मैं दिल्ली आया। उस समय उद्योग में एक नौजवान la?klZ कर रहा था। हमारा मित्र था और उसका नाम था श्याम भरतिया। उसका विवाह केके बिरला की बड़ी पुत्री शोभना भरतिया से हुआ था। श्याम भरतिया हमें अपने ?kj ले गए।  हमारी पत्नी का भी शोभना जी ने चयन किया। उस परिवार से मेरी ?kfu"Brk ही यह वजह रही कि स्वर्गीय वीपी जी ने मेरे ऊपर आरोप लगाया कि ये बिरला के आदमी हैं। बिरला के आदमी होने की छाप जिस पर लगी हो उसको कांग्रेस टिकट नहीं देगी। मैं हिंदुस्तान टाइम्स में डायरेक्टर भी था। बिरला की तमाम कंपनियों के बोर्ड में निदेशक था। नौकर ?kj पर नहीं रहते हैं। मैं श्याम और शोभना जी के ?kj पर रहता था। केके बिरला जी मुझे लड़के की तरह ही मानते थे। 

अपूर्व जोशीः विश्वनाथ जी ने आपका विरोध क्यों किया था

बिरला के आदमी हैं] कॉरपोरेट आदमी हैं। इसलिए नारायण दत्त जी ने भी विरोध किया। क्योंकि नारायण दत्त और वीर बहादुर जी में छत्तीस का आंकड़ा था। जय प्रकाश नारायण जब कोलकाता विश्वविद्यालय आए तो हमने विरोध प्रदर्शन किया। उसमें ममता बनर्जी] सुब्रत मुखर्जी] प्रियरंजन दास मुंशी] सुदित बनर्जी थे। हम लोग कांग्रेस की स्टूडेंट विग में थे। नारे लगाते थे। नक्सलवाद से भी संपर्क में थे। कुछ ऐसा था कि सबेरे हमलोग मिलते थे और सोचते थे कि शाम तक कौन पहुंचेगा और कौन मरेगा।

अपूर्व जोशी % आपने कहा कि आपने अपने पिता की आज्ञा की अवहेलना की। मेरी जिज्ञासा है कि जब चेतना जग रही थी तो आप एक्चुअल में क्या बनना चाहते थे

भाई देखिए मेरी आदत है मैं चुप रहता हूं जब बोलता हूं तो विवाद होता है मगर विवाद से डरता नहीं। मेरे को भोजन के लाले पड़े थे तो प्राथमिकता नीति थोड़े ही थी। प्राथमिकता यह थी कि कोलकाता की कैंटीन में मुझे खाना कैसे मिले] कैसे उनको पटाया जाए।

प्रीत पाल कौर % आपने इंग्लिश ऑनर्स किया

इंग्लिश ऑनर्स मैंने दो साल करके छोड़ दिया। इसलिए छोड़ दिया कि लिटरेचर तो मुझे बहुत अच्छी लगती थी लेकिन  फिक्शन मुझे बिल्कुल समझ में नहीं आती थी। 

अपूर्व जोशीः तो आपको टिकट मिला

नहीं] टिकट नहीं मिला। वीर बहादुर भारी उद्योग सिंचाई और परिवहन] जितने मलाइदार विभाग थे] सबके मंत्री थे। उन्होंने मुझे प्लॉट दिया गाजियाबाद में। हमारा उद्योग लगाने में मदद की। हमसे कहने लगे निराश मत होना। सामाजिक&आर्थिक प्रतिष्ठा हासिल कर लो इसके बाद राजनीतिक प्रतिष्ठा आसानी से मिल जाती है। उनका जो दर्शन था] वह बड़ा व्यवहारिक था।  

अपूर्व जोशी % आपने वीर बहादुर के रिश्तों का जिक्र किया है। कहते हैं आपकी उनसे बहुत ?kfu"Brk थी

?kfu"Brk इतनी कि वह जब पेरिस गए तो हमारे ?kj से होते हुए गए। मैंने जीवित वीर बहादुर सिंह को भेजा और मृत वीर बहादुर जी के शव को रिसीव भी किया।

अपूर्व जोशी % अमिताभ बच्चन] अनिल अंबानी] सहारा श्री] मुलायम सिंह यह सब कैसे क्रम बनता गया

वीर बहादुर जी गोरखपुर के थे। उसी गोरखपुर में सुब्रत रॉय स्कूटर में चलते थे। बलिया] आजमगढ़ का वहां पर अगर कोई व्यक्ति चर्चित हो जाने की प्रक्रिया में हो तो संभावित रूप से एक आकर्षण होता है। मैं यह नहीं कहूंगा  कि सुब्रत रॉय जी ने कोई अनैतिक चेष्टा की हमलोगों के जीवन में प्रवेश करने की। सुब्रत रॉय जी काफी मिलनसार और संबंधों का निरंतरता से निर्वहन करने वाले व्यक्ति हैं। वह सार्वजनिक व्यक्ति हैं। वह विरेंद्र साही से मिलेंगे तो हरिशंकर तिवारी और मायावती से भी मिलना चाहेंगे। मुलायम से भी मिलना चाहेंगे। उनके स्वभाव की प्रवृत्ति है कि सब हमारे हैं] हम सबके हैं। वह चाहेंगे कि कल्याण सिंह से भी उनका अच्छा रहे और राजनाथ सिंह से भी अच्छा रहे। इसी क्रम में कल्याण सिंह से उनकी मित्रता नहीं हुई क्योंकि कल्याण सिंह का वैसा आचरण नहीं था। या तो तुम हमारे हो या नहीं हो। उनके हो तो हमारे नहीं हो। मैं भी कुछ उसी प्रवृत्ति का हूं। मैं भी सबसे नहीं मिलता। यह अच्छी प्रवृत्ति नहीं हो सकती है] लेकिन है तो है। शराब पीना गलत है। लेकिन जो शराबी कहे कि मैं शराब नहीं पीता तो वह झूठा है। तो हमलोगों के मिलने का कारण आपको बता दिया और बिछड़ने का कारण यह है कि नरेश अग्रवाल आपकी नाक का बाल होगा और नरेश अग्रवाल को आप समाजवादी पार्टी में अमर सिंह के मार्फत प्रवेश कर रहे हों। फिर सुबह&शाम तक एक ओहदे पर पहुंचने के बाद सिवाय गाली देने के हमारे साथ कुछ नहीं करेगा तो हम रूष्ट नहीं होंगे। हालांकि उससे रूष्ट होने का मैं अपना स्तर ही नहीं मानता।

अपूर्व जोशी % अमिताभ के लिए कहा जाता है कि अमिताभ जब सबसे बुरे दौर में थे और उनके ?kj की कुर्की के नोटिस भी आ गए थे। मेरे ख्याल से सबसे कठिन दौर था और अमिताभ का साथ सबने छोड़ दिया था। उनके जीवन में आपका प्रवेश हुआ और अमिताभ जो आज अमिताभ हैं सब तरह से संपन्न व्यक्ति हैं उसमें आपका बहुत महत्वपूर्ण योगदान है

हमारा ही योगदान है। आपको मैं यह भी बता दूं कि हमने अमिताभ के लिए कुछ भी नहीं किया है। क्योंकि जिस स्तर की मदद मैंने अमिताभ के लिए की उस स्तर को पागलपन कहते हैं। पागलपन आपका उस स्तर का होता है जिस स्तर का अपनी प्रेयसी के लिए होता। लोग ताजमहल बनवाते हैं। देवानंद साहब की एक फिल्म आई थी ^हम दोनों^। पुरानी फिल्मों में साहित्य होता था। उसमें एक पंक्ति थी] ^कौन रोता है यहां किसी के खातिर ऐ दोस्त] सबको अपनी बात पर रोना आया] बात निकली तो हर बात पर रोना आया] कभी हालात पर रोना आया।^ मैं कहूं जो आप लोग कहते हैं कि अमिताभ की मदद की। मदद एक व्यक्ति के जीवन में एक विशेष कार्य के लिए होती है। पूरे जीवन का ही ठेका लें वह मदद नहीं। आप किसी के जीवन की विषमता में मदद करें यह होता है। लेकिन जब आप अपने अस्तित्व का उसके अस्तित्व विलय में कर दें] यह ठीक नहीं। हालांकि उस समय मेरा भाव उनके प्रति कुछ ऐसा ही था। यहीं पर मैं आपको बता हूं कि मैंने उनकी मदद नहीं की मैंने अपनी मदद की। उनकी पीड़ा मेरी पीड़ा बन गई। जब लोग उनके यहां आकर गाली देने लगे। नीलामी के कागज उनके ?kj पर चस्पा करने लगे। जब ^मेजर साहब^ की शूटिंग पर उनका जूता उठाने वाला टीनू आनंद उन्हें गालियां देने लगा। जब सोनम जैसी छोटी अभिनेत्री एक गाने की शूटिंग के दौरान अमिताभ बच्चन के साथ अभिनय करने से पहले पेमेंट मांगने लगी तो मुझे बहुत बुरा लगा। मुझे बहुत झटका लगा। इतना बड़ा व्यक्ति जिसने इतना कुछ जीवन में किया है। इतना कुछ देखा है] उसके साथ ये हो रहा है। उस समय हमने एक निश्चय किया कि अब यह सब नहीं होने देना है। और मुझे इस बात पर गर्व है कि जो मैंने उस समय उनके लिए किया] क्षमा चाहता हूं जो अपने लिए किया वह बिल्कुल ठीक किया। क्योंकि अगर हमारा सामर्थ्य है और हम किसी को अपना मानते हैं और उसको इतना लज्जित और कलंकित किया जाए और आप चुप रहिये तो इसका मतलब आपके अंदर पुरुषत्व है ही नहीं। या आप हृदयहीन हैं। इसलिए यह सवाल ही गलत है कि मैंने अमिताभ की मदद की। एक पुरानी कहावत है जो हम बचपन से सुनते आ रहे हैं कि नेकी कर दरिया में डाल। मुझे यह नहीं समझ आता था कि नेकी करके दरिया में क्यों डालें साहब। नेकी तो अच्छी चीज है। इसको करके दरिया में क्यों डाला जाए।

प्रीत पाल कौर % आपको क्या लगता है कि क्यों डालनी चाहिए

मुझे तो इस मुहावरे पर हंसी आती थी। किस मूर्ख ने यह मुहावरा बनाया था। विचार कर किसी को मत बोल यह तो ठीक है। नेकी कर छुपा यह भी ठीक है। लेकिन चोरी कर दरिया में डाल और उसके बाद चल दरिया में डूब जाएं। दोनों किसी को नजर नहीं अाए। यह समझ नहीं आता। इसको अंग्रेजी में कहते हैं कि मैनुफैक्चरिंग डिफेक्ट है। यह संभवतः १७&१८ साल की उम्र में परिवार से अलग निकलकर अपने को सिद्ध करने की एक जो प्रक्रिया होती है। जरा पहचानो कहां से आया] मैं हूं कौन। तो आप हर रोज परीक्षा दे रहे हैं। आप पहलवान नहीं हैं] आप सचिन तेंदुलकर नहीं हैं। आप एक कुशाग्र बुद्धि के लड़के हैं। लेकिन आप एकेडमिक ब्रिलिएंस के उस मानव को नहीं छिपाए हैं। आप कुछ असाधारण करते रहना चाहते हैं ताकि आपका व्यक्तित्व बने और आप जिस चीज से वंचित रहे हैं उसे आप ढूंढ़ते रहते हैं कि यह शायद आपसे मिल जाए तो उस प्रक्रिया में क्रमवार तरीके से आपको अनुभव मिलते हैं। मैं यह नहीं कहता धोखे मिलते हैं क्योंकि जो आपको धोखा भी देता है वह कुछ लेकर नहीं जाता कुछ देकर जाता है। कुछ दिया ही न] चाहे धोखा ही सही। तो अमिताभ बच्चन से विवाद का कारण यह है कि वह हर दम हमसे राजनीति के विरोध की बातें वांचते रहते थे। कहते थे कि राजनीति बड़ी क्रूर] निर्मम है। चंद्रशेखर ने अपनी जेल डायरी लिखी। मोटा अंक है और उस समय की राजनीति का एक दस्तावेज है। उन्होंने बिना डर&दबाव के लिखा है। उस ग्रंथ की एक लाइन को मैंने आत्मसात्‌ किया हुआ है& ^राजनीति या तो रंडी है या तो चंडी है। या तो देगी आपको रंडी की तरह सुख या तो करेगी चंडी की तरह आपका विनाश।^ मैंने अमिताभ को चंद्रशेखर की यह बात बताई। सहमत हुए उनसे। फिर इलाहाबाद का अनुभव। इलाहाबाद में लड़कियों का दुपट्टा फेंकना। राजीव गांधी के साथ जाने पर उनसे ज्यादा कौतूहल होना। बोफोर्स का अभिशाप। फिर वीपी सिंह की ईर्ष्या मनमुटाव। इस सबका कोपभाजन हमको बनना पड़ा। अमिताभ का कहना था] मैं अपने क्षेत्र का राजा था] राजीव गांधी हमारे बाल्यावस्था के मित्र थे। बराबरी का संबंध था। छुट्टियां साथ बिताते थे। प्रधानमंत्री बनने पर भी वक्त बिताते थे। तो जैसे ये राजनीति में गए वह एक हो गए और मैं दो हो गया। 

अपूर्व जोशी % मुलायम सिंह से भी संबंध बिगड़ गए आपके

आजकल धनाढ्य परिवार में धन की कमी नहीं है। संपत्ति के लिए झगड़ा हो रहा है। इसी तरह मुलायम सिंह जी के परिवार का व्यवसाय ही राजनीति है। जब परिवार में १४&१५ लोग सांसद हो जाएं] जिला परिषद् हो जाए] जिस परिवार के बच्चे पैर छूते थे] कहते थे अंकल टॉफी दीजिए। अब सबकी आकांक्षाएं युवा हो गई हैं। महत्वकांक्षाएं युवा हो गई हैं। सबको लगा कि अब हम बांटे क्यों तो अंकल जो थे वह बाहर हो गए। बस इतनी सी बात है। मैं बाहर ही हो गया ताकि मैं खलनायकत्व का पोस्टर न बनूं। मैंने कहा मैं बाहरी हूं बाहर निकल जाता हूं। मैं तुम्हारे पिता को तुमको देता हूं। अब तुम एक हो जाओ।

अपूर्व जोशी % यह तो अखिलेश और मुलायम की बात थी

नहीं&नहीं] सारा परिवार।

अपूर्व जोशी % नहीं आपने जो कुछ भी किया वह अमिताभ कैसे भूल गए

मैं बताता हूं क्या होता है। बाद में समझ आता है] लोग विश्लेषण नहीं करते हैं। महमूद को यू&ट्यूब पर आप देखें। महमूद अपने यू&ट्यूब में कहता है कि यह तुम्हारे जैविक पिता (डॉ हरिवंश बच्चन) हैं और मैं तुम्हारा असली पिता हूं। क्योंकि मुंबई में रहने की जगह नहीं थी तो महमूद ने अपने ?kj में रखा। अपनी प्रेयसी अरुणा इरानी के साथ ^मुंबई टू गोवा^ फिल्म में मौका दिया। महमूद बीमार थे तो उन्हें देखने नहीं गए। तो महमूद का यू&ट्यूब आज भी है कि ^अमिताभ ने मेरे साथ जो किया और किसी के साथ तुम नहीं करना।^ फिर प्रकाश मेहरा की ^जंजीर^ से स्टार बने। लेकिन उनके साथ क्या किया। मनमोहन देसाई ने तो आत्महत्या कर ली। तो एक इतिहास है उनका। फिर अमजद खान] परवीन बॉबी।

मनोज रस्तोगी % हिंदी में आपकी पकड़ कैसे है। अंग्रेजी की बात नहीं करूंगा। और हिंदी के उन शब्दों का इस्तेमाल कर रहे हैं जो शब्दकोष में विलुप्त हो गए हैं। ये कहां से आया

मुझे सिनेमा और साहित्य शुरू से बहुत अच्छा लगता है। मैंने अपनी युवावस्था में अज्ञेय की कूति ^शेखर एक जीवनी^ पढ़ ली थी। मैंने इंग्लिश ऑनर्स करते हुए ^कामायनी^ को पढ़ना शुरू किया और जिस भाव] अभिव्यक्ति के बहुत भोलेपन की बात कर रहा हूं नारी की उस त्रासदी को जयशंकर प्रसाद जी ने बखूबी चित्रित किया। उनकी ^मैं सबसे हारी हूं^ कविता मुझे बहुत पसंद है। कुछ छोड़ा नहीं। छायावाद क्या है। प्रगतिवाद क्या है। सब पढ़ गया। मुझे याद है एक बार कोलकाता गया था मैं। वहां मेरे दादाजी रहते थे। निरालाजी वहां रहने आए थे। हमारे दादाजी के पास। दादाजी ने बताया निराला एकदम दरिद्र जैसे थे। शुरू में मुझे याद है। अब तो उनकी कविताएं हम पढ़ते हैं। मुझे लगता है कि उनकी उस दरिद्रता के पीछे उनका अहंकार कैसा रहा होगा। उनकी जो रचनाएं हैं ^सुन बे गुलाब^ सेठों पर तंज है। 

मनोज रस्तोगी % आपके ज्ञान पर सवाल नहीं है आपको हिंदी के संस्कार इतने गहरे कैसे मिले

मैं पढ़ता रहा। मैं आज भी डॉ बच्चन का सम्मान करता हूं। मैंने उनकी जीवनी के तीनों अंश पढ़े हैं। जिस हिम्मत के साथ उन्होंने अपने चरित्र की विद्रूपता का चित्रण किया है काम] क्रोध और मोह इसका वशीकरण हम सबमें है। लेकिन आत्मकथा लिखते समय अपने बारे में बिना किसी भेद के अंकित करना मैं समझता हूं साहसी लोग ही करते हैं। डॉ बच्चन जी बड़े दुस्साहसी थे। वह जितने बड़े आदमी थे उतने ही वे छोटे आदमी थे। डॉ बच्चन से मिलने के मुझे मौके मिलते रहे। यह हमारा सौभाग्य रहा कि अमिताभ बच्चन से निकटता के कारण हम बच्चन जी को देख पाए। और बच्चन अद्भुत रचियता थे। मैं समझता हूं कि समकालीन रचियताओं में सबसे कम श्रेय उनको मिला। 

मनोज रस्तोगी % उनका मूल्यांकन नहीं हुआ। डॉ बच्चन की स्मृति में जितने भी अनुष्ठान&प्रतिष्ठान हुए उनमें मेरे ख्याल से ज्यादातर इन्हीं का दबदबा रहा।

नहीं] मैं एक चीज बताऊं। बेशक आज मेरे संबंध अच्छे नहीं रहे होंगे] लेकिन ईश्वर अमिताभ बच्चन जैसा पुत्र सभी को दे। वह कैसे भी व्यक्ति हों स्वार्थी हों] संकुचित हों] लेकिन ऐसा पुत्र मैंने श्रवण कुमार और राम के रूप में ही सुना था। मैंने इनमें राम को और श्रवण को देखा है। इसके लिए मैं कूतज्ञ हूं कि मातृ प्रेम क्या होता है पितृ प्रेम क्या होता है] यह अमिताभ से सीखा। आज भी बच्चन जी का चश्मा वैसे रखा हुआ है उनके मेज पर जैसे कि उनकी आत्मा पढ़ती हो। वह जगह वैसे ही जैसे रामकूष्ण मिशन में रामकूष्ण की खाट है] की आत्मा नश्वर नहीं है] शरीर नश्वर है। आत्मा की स्वीकार्यता का बोध मैं देखता हूं कि वहां मानने के लिए तैयार नहीं कि पिता जी नहीं हैं। तो अब निश्चित रूप से इनके छोटे भाई वैसे नहीं हैं जैसे अमिताभ हैं। अपने पिता के प्रति श्रद्धाभाव के कारण उनकी साहित्यिक अभिरूचि बनी हुई है। वे इस तथ्य को जानते हैं कि हम नट हैं और हमारे पिता ऐसे व्यक्ति हैं कि जिनकी रचनाएं वर्षों तक रहेगी।

अपूर्व जोशी % आप में ऐसा कौन सा गुण है कि कहा जाता है कि आप अमिताभ के बहुत करीब थे। लेकिन जया से दूरी थी। आप मुलायम के करीब हुए तो अखिलेश दूर हुए। पिता&पुत्र में विवाद हो गया। यहां तक कि अंबानी में दूरी बनी इस सबका श्रेय आप पर क्यों जाता है

यह आप अमिताभ से पूछिएगा। हमारी वजह से अमिताभ और जया अब निकट हैं। अमिताभ और जया के बीच दूरी मेरी वजह से नहीं हुई। ^कभी खुशी] कभी गम^ के सेट पर सार्वजनिक रूप से जया जी ने उनका अपमान कर दिया था यह ऐतिहासिक सत्य है। मैं पहली बार बोल रहा हूं। और उन्होंने प्रण किया कि इनके साथ मैं अब कोई फिल्म नहीं करूंगी। 

अपूर्व जोशी % अमिताभ जी ने

हां] एक फिल्म बननी थी ^fo:/k^। इसमें शुरू से अमिताभ जी जया जी] अभिषेक प्रमुख भूमिका में थे। महेश मांजरेकर जी मेरे पास आए। मैं उस वक्त उनकी कंपनी का चेयरमैन था। उन्होंने कहा कि जया जी अमिताभ के साथ राजी नहीं हो रही हैं। शर्मिला टैगोर का मैं बहुत आशिक हुआ करता था। बहुत पसंद करता था उनको। उनके गाल के गड्ढ़े मुझे बहुत पसंद थे।

प्रीत पाल कौर % गड्ढ़े तो अब भी हैं

हैं] लेकिन अब हम परिपक्व हो गए हैं। तब हम जवान थे अब जीवन की संध्या है। अब जीवन के गड्ढ़े देखे। गाल के गड्ढ़े से उबरे। हमने शर्मिला जी से बात की कि आप और सैफ के साथ काम कर लीजिए। तब तक सैफ की फिल्म आ गई ^सलाम नमस्ते^। वह हिट हो गई] तो उसने कहा मैं नहीं काम करूंगा। मैं भी बड़ा हो गया हूं। साला मैं तो साहब हो गया। शर्मिला जी ने कहा तो अब क्या करें। मैंने कहा कि आप तो काम करेंगी। फिर जॉन अब्राहम को लेकर फिल्म बनी। मैं आपको यह उदाहरण बता रहा हूं कि उसमें मेरी कोई भूमिका नहीं है। अमिताभ अंतर्मुखी हैं। अमिताभ शांत और सौम्य हैं जया ठीक उलट हैं। अभी जितनी फोटो आप ले रहे हैं उतने में तो वह कैमरा नोच लेतीं।

अपूर्व जोशी % अच्छा इतनी एग्रेसिव हैं

बहुत ज्यादा। कहतीं तुम्हें शर्म नहीं आती] फ्लैश चमकाए जा रहे हो। बदतमीज कहीं के। यह लाइव हो रहा है। यह भी आ जाएगा। इससे भी वह बेफिक्र रहेंगी। अपनी इस बदतमीजी को उन्होंने एक अदा बना दिया है। 

अपूर्व जोशी % आप जया जी के करीब नहीं रहे

हरदम रहा] बल्कि जया जी के ज्यादा करीब रहा। मेरी अमिताभ से मित्रता जया जी के कारण हुई। जया में यह गुण है कि बड़ी स्थिरप्रज्ञ हैं। अमिताभ की तरह नहीं हैं। चाहे स्वार्थ हो] परमार्थ हो] वह जो ठान लेती हैं करती हैं। अगर वह बुरा करना है तो बुरा करेंगी और भला करना है तो भला करेंगी। अगर उन्होंने एक धारणा बना ली कि अमर सिंह को धोखा देना है तो हमें धोखा देने की प्रक्रिया बड़ी तन्मयता से करेंगी। अगर सोच लिया कि हमें साथ देना है तो वह साथ निभाएंगी। जया बच्चन एक बार गोवा में हमारे साथ अकेले छुट्टी बिता रही थीं तो उन्होंने कहा अमर सिंह जी एक बात बताऊं मैेंने कहा बताओ। जितना आप लोगों के लिए करते हैं उतना आप आशा मत करना कि लोग आपके साथ करेंगे। तो ऐसा नहीं है कि जया बच्चन में सिर्फ बुराई है। जया बच्चन अपने परिवार की पहली मूल स्टार हैं। जब जया ने अमिताभ से विवाह किया था तब खबर यह नहीं थी कि अमिताभ ने जया से विवाह किया है] बल्कि जया बच्चन ने अमिताभ से विवाह किया था। लेकिन बाद में अनुकूलता से बिल्कुल प्रतिकूलता हो गई। पहले जया के कहने पर अमिताभ को ^जंजीर^ मिली। ^शोले^ में जया को तीन लाख मिले और अमिताभ को एक लाख मिला। इसके बाद तख्ता पलट हो गया। तख्ता पलट में अनुपात बहुत लंबा बन गया। ^ब्लैक^ अमिताभ ने अब की। लेकिन अमिताभ बच्चन ने ^ब्लैक^ में जो कमाल किया उससे कम कमाल जया बच्चन ने संजीव कुमार और गुलजार की फिल्म ^कोशिश^ में नहीं किया। ^कोशिश^ में जया जी का काम अमिताभ से कम नहीं था] बल्कि ज्यादा ही था।  

अपूर्व जोशी % लेकिन ये प्रसेप्शन क्यों बनता है कि आप जिसके करीब रहे उनके करीबी दूर हुए।

यह प्रसेप्शन वह खुद बनाते हैं क्योंकि कहने के लिए कुछ है नहीं। कह नहीं सकते कि अमिताभ की मदद की है। अनिल अंबानी और मुकेश अंबानी का झगड़ा तो पैसे को लेकर हुआ है। मुलायम और अखिलेश का झगड़ा सत्ता के लिए हुआ है। अब तो आपका प्रश्न अप्रासंगिक है। हम तो यहां हैं नहीं। मुलायम सिंह का फोन सुनते हैं न बात करते हैं इसलिए नहीं कि मैं उनका आदर नहीं करता। उनका फोन सुनेंगे तो बेटा कहेगा अंकल ने भड़का दिया होगा। 

अपूर्व जोशी % ऐसा क्या हुआ। जिस मुलायम ने इतनी बड़ी बात कही थी कि मैं अमर सिंह को नहीं छोड़ सकता उनसे रिश्ते खराब हो गए

मेरे रिश्ते बिल्कुल खराब नहीं हुए। मेरे मन में उनके लिए आदर है। मुलायम सिंह ने खुद मुझे कहा कि आपमें और हम में एक अंतर है। आप भावनात्मक व्यक्ति हैं और मैं राजनीतिक व्यक्ति हूं। आप संबंधों के लिए राजनीति छोड़ सकते हैं] मैं राजनीति के लिए आपको छोड़ सकता हूं। और उन्होंने यह काम करके दिखाया। उन्होंने कहा कि आप हमारे साथ रहेंगे तो हमारा अध्यक्ष पद नहीं रहेगा। क्योंकि रामगोपाल] आजम खान] अखिलेश आपको हजम नहीं कर पाएंगे। और मैं आपको छोड़ना भी नहीं चाहता। आप खुलेआम मत आइए] पीछे के दरवाजे से आइए और पीछे के दरवाजे से जाइए।

अपूर्व जोशी % तो क्या आपने इसे स्वीकारा

मैंने कहा कि मैं राजनीतिक वेश्या थोड़े हूं कि आप हमारा भोग भी करना चाहें और स्वीकार भी ना करना चाहें। मैंने कहा मैं आऊंगा ही नहीं और आपसे बात ही नहीं करूंगा। खुलेआम कह रहा हूं। ऑन रिकॉर्ड कह रहा हूं। और मैं चुनौती दे रहा हूं मुलायम सिंह मना कर दें। चुनौती दे रहा हूं कि मुलायम सिंह जी कहीं हो तो सुनें मेरी बात।

मनोज रस्तोगी % जिस तरह से आपके अंदर राजनीतिक प्रतिभा] साहित्यिक प्रतिभा और बोलने की प्रतिभा है उससे आपके प्रशंसक सभी बने हुए हैं। भाजपा और कांग्रेस में भी आपके प्रशंसक हैं। और तमाम ऐसी बड़ी ?kVukएं जो पिछले २० सालों से राजनीति के केंद्र में रही उनमें कहीं न कहीं आप रहे। तो क्या आप मानते हैं कि आपका जो कैरेक्टर है वह हाइलाइटकिंग की वजह से तो नहीं हैं। यह आपके राजनीतिक अध्ययन में बाधा तो नहीं बना

बिल्कुल सही है। इसलिए इस साक्षात्कार के आरंभिक दौर में मैंने कहा कि मैं राजनेता नहीं हूं। यह बाधक है] यही साधक भी है। अगर मैं लचीला हूं सौ जूता खाकर तमाशा देखूंगा। मुलायम अप्रासंगिक हो गए। अखिलेश प्रासंगिक हो गए। अभी मैं मुलायम को अप्रत्यक्ष करके अखिलेश यादव जिंदाबाद बोलूं तो यह सभी व्यवहारिक राजनेता करते हैं। लेकिन मैं नहीं करता। चुनाव से पहले मैंने जीवन भर धर्म निरपेक्षता की राजनीति की। लेकिन यहां देखा धर्म निरेपक्षता मजाक बना हुआ है। गुजरात पर हम टिप्पणी करके अलग हो गए फिर सुविधानुसार हम सांप्रदायिक हो गए। कई लोग बोले कि वह धर्म निरपेक्ष हैं और लड़के को भाजपा के साथ जोड़ दिया। मुलायम सिंह आ गए और अटल जी के सहयोग से मुख्यमंत्री भी बन गए। ये जो ?ksjs धर्म निरपेक्षता है] वह मुझे पसंद नहीं। जब भी जी चाहे कई चेहरे लगा लेते हैं लोग। मैं आपको स्पष्ट कहना चाहता हूं कि मेरे मन में मुसलमानों के लिए सम्मान है। मैं कैफी आजमी जैसे मुसलमान का सम्मान करता हूं। मैं मौलाना सिबली का सम्मान करता हूं। मैं अब्दुल हमीद का सम्मान करता हूं। मैं मुसलमान होना बिल्कुल बुरा नहीं मानता। मैं अपने ?kj पर हवन करता हूं रोज] लेकिन आयतुल कुर्सी और गीता में मैं कोई अंतर नहीं देखता। क्योंकि आयतुल कुर्सी कहती है कि खुदा तुम्हारी खुदाई का आगाज और अंजाम का पता नहीं। और हमारा हिंदुत्व भी कहता है हरि अनंता हरिकथा अनंता। तो आप हरि और खुदा को हटा दें तो बात वही है। मैं कोई भाषण देने के लिए नहीं कह रहा। अपने अध्ययन के आधार पर कह रहा हूं।  

खैर] मैं बताना चाहता हूं कि मेरे पास क्या बचा था। राहुल गांधी जी अखिलेश के साथ चले गए। उनका हाथ अखिलेश के डंडे पर चला गया। अगर मुझसे राहुल बात करते तो मैं कहता कि मास लीडर मुलायम सिंह हैं। क्योंकि ढांचा उनके पास है। आप अखिलेश से कहिए कि हम एकीकूत सपा से समझौता करेंगे। और राहुल के दबाव पर सपा का विभाजन बच पाता। क्योंकि ये पावरफुल थे। अगर सोनिया गांधी अखिलेश] अमर सिंह] मुलायम सिंह] शिवपाल यादव मिलकर लड़ते तो बहुत बुरा होता तो भी १४० सीटें आती। इस तरह का भयावह सूपड़ा साफ नहीं होता। बड़ी प्रैक्टिकल बात बता रहा हूं। लेकिन जो तत्काल चीजें हो गईं कि विश्लेषण नहीं करना तो हमारे पास विकल्प क्या था। हम अखिलेश के पास जा नहीं सकते थे। औपचारिक या अनौपचारिक राहुल के साथ जा नहीं सकते थे तो हमारी

 
         
 
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क्या मुख्यमंत्री हरीश रावत के सचिव के स्टिंग आॅपरेशन की खबर से कांग्रेस की छवि प्रभावित हुई है?

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एक है बिहारी बाबू। जाहिर है बिहार प्रदेश से ही होंगे। लेकिन आप नीतीश कुमार को मत समझ लीजिएगा। बात उन बिहारी बाबू की हो रही है] जो भाजपा में हैं। और भाजपा में होकर भी भाजपा से बाहर हैं।

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