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खास खबर 
 
कागजों में शौचालय

  • गुंजन कुमार@अरुण कश्यप

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मिशन को उत्तराखण्ड में पलीता लगाया जा रहा है। स्वच्छता अभियान के तहत खुले में शौच मुक्त भारत के मिशन को यहां सिर्फ कागजों पर ही पूरा किया जा रहा है। हरिद्वार में शौचालय के नाम पर लाखों के ?kksVkys के साथ& साथ दो पर्वतीय जिलों के ग्राम प्रधान कागजों पर ही शौचालय बना दे रहे हैं। कहीं पुराने शौचालय को रंग&रोगन कर दिया जा रहा है और इस फर्जीवाड़े से गदगद होकर मुख्यमंत्री राज्य को खुले में शौच मुक्त करने का ऐलान कर देते हैं

वर्ष १९८५&८६ में तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी संयुक्त राष्ट्र संद्घ के अपने भाषण में कंप्यूटर और संचार क्रांति पर बात कर रहे थे। उसी दौरान एक शख्स ने उनसे पूछा कि भारत के ग्रामीण इलाकों के कितने ?kjksa में शौचालय हैं। तब राजीव गांधी के पास उसके सवाल का जवाब नहीं था। मगर उस शख्स ने १९८१ के जनगणना का हवाला देते हुए कहा कि ग्रामीण भारत में केवल एक फीसदी ?kjksa में ही शौचालय हैं। इसलिए भारत में कंप्यूटर और संचार क्रांति से ज्यादा जरूरी शौचालय बनाना है। इसके बाद ही राजीव गांधी ने १९८६ में ^ग्रामीण स्वच्छता अभियान^ की शुरुआत की। वर्तमान प्रधानमंत्री मोदी इस बार ^डिजिटल इंडिया^] ^बुलेट ट्रेन^] ^स्टार्टअप इंडिया^ के साथ खुले में शौच मुक्त भारत की भी बात कर रहे हैं। सिर्फ बात ही नहीं कर रहे बल्कि अपने इस मिशन को पूरा करने के लिए उन्होंने अपनी पूरी ताकत झोंक रखी है। इसके लिए उन्होंने विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिष्ठित शख्सियतों को ^नौ रत्न^ बनाया। ताकि मिशन को देश के हरेक लोगों के दिलो&दिमाग में इस कदर बैठा दें कि बिना शौचालय के ?kj की कल्पना ही न की जा सके पर मोदी मिशन उनकी ही पार्टी शासित राज्य उत्तराखण्ड में आकर ?kksVkys के भेंट चढ़ने लगा है। राज्य सरकार ?kksVkysबाजों पर कार्यवाही करने के बजाए प्रदेश को खुले में शौच मुक्त ?kksf"kr करने में लगी रही।

उत्तराखण्ड की धर्मनगरी हरिद्वार जिले में शौचालय के नाम पर लाखों का ?kksVkyk किया गया। एक वर्ष से ज्यादा का समय इस ?kksVkys को अंजाम दिए हो चुका है। मगर अभी तक ?kksVkysबाज पर कोई कार्यवाही नहीं की गई है। शौचालय के नाम पर ?kksVkyk सिर्फ धर्मनगरी ही नहीं] बल्कि केदारद्घाटी में भी हो रहा है। दो पर्वतीय जिलों में तो कई ग्राम प्रधानों ने कागजों पर ही शौचालय बना दिए हैं। कागजों पर बने शौचालय के सहारे कैसे कोई गांव] ब्लॉक] जिला और प्रदेश खुले में शौच मुक्त हो पाएगा। पर इस सरकार ने इन सबको नजरअंदाज कर प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्र को खुले में शौच मुक्त ?kksf"kr कर दिया। सरकार की इस जल्दबाजी के पीछे का कारण अभी तक समझ से परे है।

धर्मनगरी हरिद्वार से सटे अहमदपुर ग्रंट गांव में शौचालय बनाने में द्घपला किया गया है। इस गांव में स्वजल योजना के तहत करीब ८१ और मनरेगा के तहत करीब ४५ शौचालय बनाने का दावा ग्राम प्रधान कर रहे हैं। गांव में ?kksVkyk इस तरह किया गया कि कुछ लोगों के पुराने शौचालय को ही रंग&रंगाई कर नया बताया गया है। कई लोगों के ?kjksa में स्वजल और मनरेगा दोनों योजना के तहत शौचालय बना दिया गया। इस धांधली के चलते जिन ?kjksa में शौचालय बनने थे वहां बन नहीं पाए। क्योंकि जब तक उनका नंबर आता तब तक ग्राम प्रधान धनराशि खत्म होने की बात करने लगे। अहमदपुर ग्रंट ग्राम पंचायत के कई लोगों ने प्रधान यशपाल सैनी पर इस तरह के आरोप लगाए हैं। ग्राम प्रधान पर लोगों का आरोप यहीं खत्म नहीं हो जाता है] बल्कि उनके पास आरोपों की लंबी फेहरिस्त है। शिकायत और आरोप सिर्फ आम लोगों के ही नहीं] बल्कि ग्राम पंचायत सदस्य का भी है।

ग्राम पंचायत सदस्य सुरेंद्र अपनी शिकायत एक शपथ पत्र के माध्यम से कर चुके हैं। सुरेंद्र की शिकायत है कि मेरे ?kj में एक पुराना शौचालय है। जब २०१६&१७ में उनके नाम शौचालय निकला तो ग्राम प्रधान को नया शौचालय बनाने को कहा गया। फिर उन्होंने पुराने शौचालय में पुताई कर उसे नया बनाया बता दिया। यही नहीं पुताई के नाम से लोगों से ही २०० से ३०० रुपए प्रधान ने लिया। सुरेंद्र कहते हैं] ^मैंने प्रधान को नया शौचालय बनाने के लिए बहुत कहा मगर वह हर बार बहाना बना देता। मुझे शौचालय के नाम पर मात्र ७५०० रुपए ही कैश दिया है। जबकि प्रधान को १२००० रुपए प्रति शौचालय मिला है। शेष पैसा प्रधान ने मुझे नहीं दिया। साढ़े चार हजार रुपए मांगने पर प्रधान ने कहा कि पूरा पैसा लेने पर आपको १००० रुपए टैक्स देना होगा।^ शौचालय के नाम पर आए पैसे का इस गांव में लाखों का गबड़झाला किया गया है। अधिकतर लोगों से शौचालय बनाने के नाम पर मोटा कमीशन लिया गया है।

एक अन्य ग्रामीण धीर सिंह ने भी अपनी शिकायत शपथ पत्र के माध्यम से दर्ज कराई है। धीर सिंह का आरोप है कि उन्हें शौचालय का १२००० के बजाए १०५०० रुपए ही प्रधान ने दिया। धीर सिंह का कहना है] ^प्रधान यशपाल सैनी ने एक बार ३००० हजार रुपए मेरे खाते में ट्रांसफर किया। इसके अलावा ७५०० रुपए मुझे प्रधान ने नगद दिए। इस तरह मुझे मात्र १०५०० रुपए ही मिले हैं। गौरतलब है कि धीर सिंह के ?kj में भी पहले से ही शौचालय बना हुआ है। ग्राम प्रधान ने पुराने शौचालय की पुताई कर उसे ही नया शौचालय दर्शा दिया। धीर सिंह ने शौचालय के लिए पूरा पैसा नहीं मिलने की शिकायत उत्तराखण्ड सरकार की समाधान पोर्टल पर भी की है। इस शिकायत में धीर सिंह ने स्पष्ट कहा है कि शौचालय के नाम पर ग्राम प्रधान यशपाल सैनी ने प्रत्येक परिवार से १००० रुपए से लेकर ३००० रुपए तक कमीशन लिया है। लगभग लोगों को शौचालय का पैसा कैश में ही दिया गया है।

^दि संडे पोस्ट^ ने कुछ समय पूर्व भी इस गांव में सभी ?kjksa में शौचालय नहीं होने की खबर भी प्रकाशित की थी। जिसमें कई ग्रामीणों ने स्पष्टतः आरोप लगाया था कि गांव में करीब ३० से ३५ ?kjksa में शौचालय नहीं है। यदि ग्राम प्रधान यशपाल सैनी प्रधानमंत्री मोदी के इस मिशन को गंभीरता से लेता तो वह उनके ?kjksa में शौचालय बनवाता] जिनके ?kjksa में शौचालय नहीं है। जबकि प्रधान ने ऐसा नहीं किया। पुराने शौचालय पर रंग&पुताई कर नया शौचालय बता दिया गया।

इस तरह के ?kksVkys सिर्फ मैदानी जिले हरिद्वार में ही नहीं हुए हैं। केदारद्घाटी में भी ऐसा ही एक ?kksVkyk सामने आया है। इस साल अगस्त के अंतिम सप्ताह में रुद्रप्रयाग जिले के एक ग्राम प्रधान ने कागजों पर ही दर्जनों शौचालय बना पैसा डकार गया।

रुद्रप्रयाग के जिलाधिकारी मंगेश f?kfYM;ky अगस्त माह में भरदार क्षेत्र के विभिन्न गांवों का भ्रमण कर रहे थे। उसी दौरान ग्राम पंचायत ढौण्डा पालीपुर में स्वजल परियोजना के तहत बनाए गए शौंचालयों के निर्माण में ग्रामीणों से ग्राम प्रधान की शिकायत मिली। शिकायत सुनते ही जिलाधिकारी ने तत्काल संबंधित प्रधान के खिलाफ जांच कर कड़ी कार्यवाही के निर्देश दिए। भ्रमण के दौरान जिलाधिकारी ने पाया कि ग्राम पंचायत ढौण्डा में स्वजल विभाग के साथ ग्राम प्रधान ने जनवरी २०१७ में अनुबंध हस्ताक्षरित किया था। जिसके तहत ग्राम प्रधान को ७९ ?kjksa में शौचालयों का निर्माण कराना था। इस कार्य के लिए प्रधान के खाते में ४ .७४ लाख की धनराशि दी गई थी। जिलाधिकारी ने प्रधान से सभी ७९ शौचालय दिखाने को कहा। जिलाधिकारी मंगेश f?kfYM;ky ने ३ द्घंटे तक गांव के प्रत्येक ?kj का भ्रमण किया। प्रत्येक ?kj द्घूमने के बाद पता चला कि ७९ शौचालयों में से मात्र २९ शौचालय ही बने हैं। १९ परिवार ऐसे दिखाये गये हैं] जिन्होंने उस समय तक शौचालय नहीं बनाए थे। शेष ३१ परिवारों के संबंध में प्रधान कुछ भी बताने में असमर्थ रहा। जिससे यह सवाल खड़ा हुआ कि वे परिवार वास्तव में हैं भी या नहीं।

ग्राम प्रधान पहले ही द्घोषणा कर चुका था कि सभी ७९ शौचालय बना दिये गए हैं। ग्रामीणों ने तब जिलाधिकारी को बताया कि पहली किश्त का उन्हें छह हजार रुपए का भुगतान होना था पर प्रधान ने मात्र पांच हजार रुपए ही उन्हें दिए। लोगों की शिकायत और तत्काल किए गए स्थलीय निरीक्षण के बाद जिलाधिकारी ने प्रधान के खिलाफ कार्यवाही के निर्देश दिए। ग्राम प्रधान को एक माह के भीतर गांव में सभी शौचालय निर्माण करने के सख्त निर्देश दिए। जितने भी परिवार शौचालयों का निर्माण कर रहे हैं] उन्हें मानकों के अनुरूप बारह हजार रुपए प्रति परिवार को भुगतान करने का जिलाधिकारी ने आदेश दिया है। स्वजल के अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि अनुबंध की शर्तों के उल्लंद्घन के लिए ग्राम प्रधान पर सक्षम न्यायालय में मुकदमा दर्ज करें एवं स्वजल के क्षेत्रीय समन्वयक को निलंबित किया जाए। जिन अधिकारियों ने इस ग्राम का सत्यापन किया है उनका वेतन तब तक आहरित न किया जाए जब तक कि गांव में सबके शौचालय न बना दिए जाएं। रुद्रप्रयाग जिलाधिकारी की सक्रियता और तत्काल निरीक्षण कर कार्यवाही के निर्देश से इस गांव का ?kksVkyk उजागर हो गया। मगर कई गांवों के इस तरह के छोटे&छोटे ?kksVkys दबे रहते हैं।

 

हम स्वजल के कर्मचारियों के कार्यों की जांच करा रहे हैं। अगर शौचालय के नाम पर कोई ?kksVkyk सामने आता है तो हम निश्चित तौर पर कार्यवाही करेंगे। इसमें प्रधानों की भूमिका की भी जांच कराई जाएगी।

मंगेश f?kfYM;ky] जिलाधिकारी रुद्रप्रयाग

 

मामले की जांच कराई जाएगी। अगर किसी गांव में ऐसा हो रहा है तो उसकी रिकवरी कराई जाएगी। साथ ही ग्राम प्रधान पर मुकदमा दर्ज कराया जाएगा।

दीपक रावत] जिलाधिकारी हरिद्वार

 

हम इन आरोपों की जांच करवाएंगे। यदि जांच सही पाई गई तो दोषी पर कार्यवाही सुनिश्चित की जाएगाी।

प्रकाश पंत] पेयजल मंत्री

 

  • वर्ष १९८१ में सिर्फ एक फीसदी ग्रामीण ?kjksa में शौचालय थे।
  • वर्ष १९८६ में राजीव गांधी ने बीपीएल श्रेणी के लोगों को २२५० रुपए और एपीएल लोगों को १५०० रुपए शौचालय निर्माण के लिए देने की शुरुआत की।
  • १९९९ में सिर्फ बीपीएल लोगों को ५०० रुपए देने का प्रावधान किया गया।
  • २००६ में ५०० को बढ़ाकर १२००] २००८ में इसे ३२०० रुपए किया गया। वर्ष २०१२ में इसे बढ़ाकर १०००० रुपए कर दिया गया।
  • मोदी ने जब इसे अपना मिशन बनाया तो शौचालय विहीन ?kjksa के सभी परिवार को शौचालय निर्माण के लिए १२००० रुपए देना शुरू किया।
  • दुनिया में सिर्फ तीन देश भारत] नाइजीरिया और एक छोटा देश बर्कोनीफासो में शौचालय बनाने के लिए सब्सिडी दी जाती है।
  • नेपाल केवल एक दशक में ६ फीसदी शौचालयों से बढ़ाकर ५३ फीसदी करने में सफल रहा।
  • भारत तीन दशक १९८१&२०११ में मात्र तीस फीसदी ग्रामीण इलाकों में शौचालय बना सका।

  • १९९९ से २०१४ तक ९ करोड़ शौचालय बनाने का दावा।
  • पेयजल और स्वच्छता मंत्रालय के २०१२ के एक सर्वे से पता चला कि २ करोड़ ७६ लाख ४० हजार शौचालय हकीकत में बने ही नहीं हैं।
gunjan@thesundaypost.in


 
         
 
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