fnYyh uks,Mk nsgjknwu ls izdkf'kr
चौदह o"kksZa ls izdkf'kr jk"Vªh; lkIrkfgd lekpkj i=
vad 23 25-11-2017
 
rktk [kcj  
 
सियासी चकल्लस 
 
एक हैं बिहारी बाबू

एक है बिहारी बाबू। जाहिर है बिहार प्रदेश से ही होंगे। लेकिन आप नीतीश कुमार को मत समझ लीजिएगा। बात उन बिहारी बाबू की हो रही है] जो भाजपा में हैं। और भाजपा में होकर भी भाजपा से बाहर हैं। सही समझे शत्रुघ्न सिन्हा। शत्रुघ्न सिन्हा को किसी जमाने में लालकृष्ण आडवाणी सिनेमा से भाजपा में लाए थे। तब शत्रुघ्न सिन्हा भाजपा के स्टार प्रचारक हुआ करते थे। अटल बिहारी वाजपेयी के बाद उन्हीं की सभाओं में जबरदस्त भीड़ जुटती थी। लेकिन भाजपा में नेतृत्व बदलते ही शत्रु को हाशिए पर डाल दिया गया। जब आडवाणी ही कोने में धकेल दिए गए] फिर शत्रु की क्या औकात। लेकिन शत्रु आडवाणी की तरह महान नहीं हैं। इसलिए वह मौन नहीं हैं। वे मोदी के खिलाफ बयान देते रहे। एक बार फिर उन्होंने भाजपा को वन मैन पार्टी कह दिया है। जिसके दो गार्ड हैं। इशारा मोदी] शाह और जेटली की ओर है। अभी तक यह किसी को समझ में नहीं आ रहा है कि भाजपा आलाकमान अभी तक शत्रु को कैसे बर्दाश्त कर रहा है। क्यों कर रहा है\ मजबूरी क्या है\ यह बात बहुत कम लोग जानते होंगे कि बहुत पहले से ही बिहारी बाबू की महत्वाकांक्षा बिहार के मुख्यमंत्री बनने की भी थी। वह पूरी नहीं हो पाई। बिहार भाजपा में भी सुशील कुमार मोदी उन पर भारी पड़ गए। दो मोदियों के बीच द्घिरी बिहारी बाबू भी क्यों भाजपा में पड़े हुए हैं\ यह भी समझ में नहीं आता है।

शरद का क्यका होगा\

सत्ता का यह स्वभाव होता है कि वह प्रतिरोध को बर्दाश्त नहीं करती। उसको अपनी आलोचना भी सहन नहीं है। अमूमन व्यक्ति ही सत्ता में तब्दील होता है या यूं कहें कि सत्ता का मूर्त रूप व्यक्ति ही होता है। किसी भी व्यक्ति के सत्ता में तब्दील होते ही वह पहले जैसा नहीं रह जाता। कभी फासिज्म का विरोध करने वाले नीतीश कुमार जब बिहार के मुख्यमंत्री बने तो उन्हें भी अपनी आलोचना सहन नहीं होती है। राजद का साथ छोड़कर भाजपा के सहयोग से सरकार बनाने के नीतीश के कदम को शरद यादव ने गलत बताया। उन्होंने कहा यह जनादेश का अपमान है। यह बात मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को नागवार गुजरी। अब शरद यादव की राज्यसभा सदस्यता पर सुनवाई फैसला होना है। उन पर पार्टी की अनुशासनहीनता का आरोप है। वे राजद की रैली में क्यों गए\ शरद यादव के साथ-साथ अली अनवर की राज्यसभा सदस्यता खतरे में है। उन पर भी पार्टी की तरफ से अनुशासहीनता का आरोप है। दोनों ने ही अपना पक्ष रखते हुए कहा है कि पार्टी की ओर से राजद रैली में जाने संबंधी कोई लिखित रोक नहीं थी। अब ये दोनों नेता कहां जाते हैं] किस दल में शामिल होते हैं। यह उत्सुकता का विषय बना हुआ है।

हरीश का दबदबा

यह सच है कि हरीश रावत पिछले विधानसभा चुनाव में पूरी तरह पराजित हुए। यह भी सच है कि वे खुद दो जगहों से हारे। लेकिन उन्होंने हार से अवसाद की तरफ जाने  की बजाय संद्घर्ष का रास्ता चुना। वे चुनावी हार के बाद पराजय की पीड़ा को भुलाकर लगातार जन संपर्क अभियान में जुटे हुए हैं। उनके इस अभियान को देखकर कांग्रेस आलाकमान ने निर्णय लिया। इसका ईनाम उन्हें हिमाचल प्रदेश के विधानसभा चुनाव में सटार प्रचारक के रूप में मिला। हरीश रावत ने हिमाचल में जनसभाएं की। उनको हिमाचल से स्टार प्रचारक बनाए जाने पर उत्तराखण्ड कांग्रेस में खुसर-पुसर है। सबको यकीन हो चलाहै कि आलाकमान में हरीश रावत का दबदबा कायम है।

 
         
 
ges tkus | vkids lq>ko | lEidZ djsa | foKkiu
 
fn laMs iksLV fo'ks"k
 
 
fiNyk vad pquss
o"kZ  
 
 
 
vkidk er

क्या मुख्यमंत्री हरीश रावत के सचिव के स्टिंग आॅपरेशन की खबर से कांग्रेस की छवि प्रभावित हुई है?

gkW uk
 
 
vc rd er ifj.kke
gkW & 70%
uk & 14%
 
 
fiNyk vad

  • कृष्ण कुमार

रैबार कार्यक्रम को लेकर सरकार की मंशा पर सवाल उठ रहे हैं। लोग हैरान हैं कि जब मुख्यमंत्री गढ़वाली बोली में जनता से विकास के सुझाव मांग रहे

foLrkkj ls
 
 
vkidh jkf'k
foLrkkj ls
 
 
U;wtysVj
Enter your Email Address
 
 
osclkbV ns[kh xbZ
1916457
ckj