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स्मृति शेष
 
अलविदा टॉम अल्टर
  • सिराज माही

उत्तराखण्ड की धरती सिर्फ देवभूमि के लिए प्रसिद्ध नहीं है। यहां से कई बड़ी हस्तियां निकली हैं जो देश के साथ&साथ पूरे विश्व में उत्तराखण्ड का नाम रोशन किया है। मौजूदा दौर में देश के कुछ बड़े पदों पर उत्तराखण्ड की कई हस्तियां विराजमान हैं। थल सेना प्रमुख विपन रावत इसके उदाहरण हैं। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी अदित्यनाथ भी उत्तराखण्ड से ताल्लुक रखते हैं। उत्तराखण्ड के लोगों ने तमाम क्षेत्रों में नाम कमाने के साथ ही सिनेमा में नाम कमाया है। देश के जाने माने एक्टर टॉम अल्टर का नाम इसमे शामिल है। लेकिन दुख की बात है कि वह अब इस दुनिया में नहीं हैं। २९ सितंबर को उनका निधन हुआ।

 

हिंदी फिल्मों के अभिनेता] लेखक और पद्मश्री पुरस्कार विजेता टॉम अल्टर लंबे समय से स्किन कैंसर से पीड़ित थे। उन्होंने अपने जीवन में करीब ३०० फिल्मों में काम किया है। उन्होंने शतरंज के खिलाड़ी] हम किसी से कम नहीं] क्रांति] कर्मा] परिंदा जैसी कई फिल्मों में शानदार अभिनय कर भारतीय सिने जगत में अपनी अलग पहचान बनाई। उन्होंने छोटे पर्दे पर भी लोगों का मनोरंजन किया। वह भारत एक खोज] जुबान संभाल के] शतरंज के खिलाड़ी जैसे यादगार टीवी शो में भी काम कर चुके हैं। वर्ष १९९० में उनका टीवी शो केशव कालसी काफी हिट हुआ था। आल्टर का यह शो पांच साल तक प्रसारित हुआ था। टॉम आल्टर १९८० से १९९० दशक के बीच खेल पत्रकार भी रहे। इस दौरान उन्होंने देश की कई पत्रिकाओं में स्पोर्स पर लिखा। वे पहले ऐसे पत्रकार थे] जिन्होंने सचिन तेंदुलकर का टीवी इंटरव्यू लिया था। टॉम आल्टर ने तीन किताबें भी लिखीं। उनकी किताबों में एक नॉन फिक्शन और दो फिक्शन किताबें शामिल हैं।

 

टॉम अल्टर को भारत सरकार ने कला और सिनेमा में उत्कूष्ट योगदान के लिए २००८ में पद्मश्री अवार्ड से सम्मानित किया था। टॉम आल्टर का जन्म वर्ष १९५० में मसूरी में हुआ था। वे भारत में तीसरी पीढ़ी के अमेरिकी थे। मसूरी उत्तराखण्ड के मूल निवासी टॉम अल्टर इंग्लिश और स्कॉटिश पूर्वजों के अमेरिकी ईसाई मिशनरियों के पुत्र थे। वह मुंबई में और लन्दूर के हिमालयी हिल स्टेशन में रहते थे। उनके दादा दादी नवंबर १९१६ में ओहियो से भारत आए थे। इसके बाद उनके दादा दादी लाहौर ¼पाकिस्तान½ बस गए। उनके पिता का जन्म सियालकोट ¼पाकिस्तान½ में हुआ।

 

विभाजन का दर्द टॉम अल्टर ने भी सहा है। विभाजन के बाद उनके दादा दादी पाकिस्तान में रहने लगे और उनके माता&पिता भारत चले आए। टॉम के माता पिता इलाहाबाद] जबलपुर और सहारनपुर जैसी कई जगहों पर रहे लेकिन उन्होंने अपना आशियाना १९५४ में मसूरी में बनाया। टॉम अल्टर ने मसूरी में प्रारंभिक शिक्षा ली। यहां उन्हें बच्चे ^ब्लू&आंखों वाला साहेब^ कहते थे। उनके पिता ईसाई कॉलेज ¼ईसीसी½ इलाहाबाद में इतिहास और अंग्रेजी पढ़ाते थे। १९५४ में ही टॉम के माता&पिता ने राजपुर में आश्रम शुरू किया] जिसे ^विशाल ध्यान केंद्र^ कहा जाता था।

 

उच्च शिक्षा के लिए टॉम ने अमेरिका की येल यूनिवर्सिटी में दाखिला लिया। इसके बाद वे १९७० के दशक की शुरुआत में वापस भारत लौटे। १९ साल की आयु में उन्होंने सेंट थॉमस स्कूल जगधरी हरियाणा में शिक्षक के रूप में काम किया। यहां रहते उन्होंने हिंदी फिल्मों को देखना शुरू किया। वह इससे प्रभावित हुए। इसके बाद उन्होंने सिनेमा में जाने का मन बनाया। १९७२ में वह उन तीन लोगों में शामिल थे] जिनको पुणे स्थित देश के प्रतिष्ठित फिल्म ऐंड टेलिविजिन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया में दाखिले के लिए उत्तरी भारत के ८०० आवेदकों में से चुना गया था। यहां उन्होंने रोशन तनेजा के तहत १९७२ से १९७४ तक अभिनय का अध्ययन किया। इसके बाद टॉम ने धर्मेंद्र की फिल्म श्चरसश् से साल १९७६ में बाूलीवुड में एंट्री किया। इससे पहले वह कई नाटकों में काम कर चुके थे। उन्होंने फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया पुणे से साल १९७४ में डिप्लोमा करने के दौरान गोल्ड मेडल जीता था।

 

हिंदी सिनेमा में टॉम अल्टर को अक्सर एक अंग्रेज की भूमिका के लिए लिया जाता था। लेकिन टॉम अल्टर का कहना था कि उन्होंने हिंदी फिल्मों में हिंदी और उर्दू के संवाद ज्यादा बोले हैं। टॉम अल्टर ने अपने लिखे एक लेख में कहा था कि मेरा परिवार लेखन से जुड़ा रहा है। उनके मुताबिक उनकी पत्नी अध्यापिका थीं] उनके पिता अध्यापक थे] उनकी बहन अध्यापिका थीं इसलिए उन्होंने भी अध्यापन का पेशा अख्तियार किया।

 

टॉम अल्टर की चर्चित फिल्में

२०१७ सरगोशियां

२०१२ एम क्रीम

२०११ सन ऑफ फ्लावर

२०११ साइकिल किक

२००९ अवतार

२००७ कैलाशी केलेनकारी

२००५ जल्लाद

२००४ लोकनायक

२००४ वीर जारा

२००४ असंभव

२००४ एतबार

२००४ ?kj गृहिस्ती

२००२ दिल विल प्यार व्यार

२००२ भारत भाग्य विधाता

१९९२ जुनून

१९९० आशिकी

१९८९ परिंदा

१९८८ साेनी पे सुहागा

१९८६ कर्मा

१९८५ राम तेरी गंगा मेली

१९८२ गांधी

१९८१ क्रांति

१९७८ देस परदेस

१९७७ राम भरोसे

१९७७ शतरंज के खिलाड़ी

१९७६ चरस

 

टॉम अल्टर की चर्चित टीवी श्रृंखला

२०१७ रिश्तों का चक्रव्यूह

२०१४ यहां के हम सिकंदर

२००३ हातिम

१९९७ शक्तिमान

१९९७   बेतल पचीसी

१९९३  जबान संभलेकर

 
         
 
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