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vad 18 21-10-2017
 
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दुनिया 
 
कुर्दों का la?k"kZ

  • सिराम माही

जहां ज्यादा दमन होता है वहां लोग आजादी तलाशने लगते हैं। सैकड़ों वर्षों से दमन सह रहे कुर्द समुदाय के मामले में भी यही है। उन्होंने अपनी आजादी और एक अलग देश बनाने के लिए जनमत संग्रह किया है। यह जनमत संग्रह इराक में हुआ है। यहां रह रहे कुर्दों ने जनमत संग्रह कर अलग कुर्दिस्तान देश बनाने की मांग की है। इस जनमत संग्रह में भारी संख्या में कुर्द शामिल हुए हैं। हालांकि इस जनमत संग्रह का चौतरफा विरोध हो रहा है। खुद इराक की सरकार ने इसे अवैध बताया है। अमेरिका और संयुक्त राष्ट्र ने भी इसका समर्थन नहीं किया है। कुर्दों का कहना है कि जनमत संग्रह उनके पक्ष में रहा तो उन्हें अलग देश बनाने को लेकर एक राह मिलेगी। हालांकि इराकी प्रधानमंत्री ने इसे असंवैधानिक करार दिया है। पड़ोसी देश तुर्की और ईरान को डर है कि इससे उनके यहां भी कुर्दों को अलगाव के लिए प्रेरणा मिलेगी। दोनों देश इस जनमत संग्रह का मुखर होकर विरोध कर रहे हैं।

 

गौरतलब है कि कुर्द लोग पांच देशों इराक] सीरिया] तुर्की] ईरान और अर्मेनिया में रहते हैं। कुर्दों की आबादी ढाई से साढ़े तीन करोड़ के बीच है। कुर्द मध्य पूर्व में चौथे सबसे बड़े जातीय समूह हैं। इसके बावजूद कुर्दों का कोई एक देश नहीं है। कुर्द तुर्की में अपनी स्वायत्तता के लिए लड़ रहे हैं तो सीरिया और इराक में अपनी अहम भूमिका के लिए la?k"kZ कर रहे हैं। इसीलिए तुर्की] इराक] सीरिया और ईरान की सरकारों से उनके संबंध अच्छे नहीं हैं। एक अनुमान के मुताबिक सीरिया में १० प्रतिशत] तुर्की में १९ प्रतिशत] इराक में १५&२० प्रतिशत और ईरान में १० प्रतिशत कुर्द रहते हैं। कुर्दों में ज्यादातर लोग सुन्नी इस्लाम को मानने वाले हैं] लेकिन इस समुदाय में कई और धर्मों के मानने वाले लोग भी शामिल हैं।

 

इराक] सीरिया] तुर्की] ईरान में रह रही कुर्द आबादी अपने&अपने देशों के शासकों से उत्पीड़ित रही है। यही वजह है कि ईराक के कुर्दों ने अलग देश की मांग की है। इन चारों देशों की कुर्द आबादी कई मौकों पर अलग देश कुर्दिस्तान की मांग करती रही है। उनकी इस मांग को इन देशों के शासक कुचलते रहे हैं। यह दिलचस्प है कि जहां स्थानीय सरकारें कुर्दों की मांग को ठुकराती रहीं हैं वहीं अमेरिका कुर्दों और उनके शासक के बीच के झगड़े का फायदा उठाता रहा है। वर्ष २००३ में जब की हत्या की गई तब अमेरिका ने इराक में अपने कदम जमाना चाह रहा था। इसलिए उसने इराक को शिया] सुन्नी व कुर्द तीन देशों में बांटने की कोशिश की। लेकिन लेकिन कुर्दों ने एकता बनाए रखी है। तब से स्वायत्त कुर्द क्षेत्र का शासन कुर्दिस्तान क्षेत्रीय सरकार चलाती रही है। कुर्दों पर अपने प्रभाव का इस्तेमाल अमेरिका ने सीरिया में भी किया। सीरिया में अमेरिका ने कुर्दों को असद सरकार के खिलाफ खड़ा कर विद्रोही ताकतों को एकजुट किया।

 

२०वीं सदी की शुरुआत में कुर्दों ने अलग देश बनाने की पहल शुरू की थी। सामान्य तौर पर कुर्दिस्तान बनने की बात कही जाती थी। १९२३ में तुर्की के नेता मुस्तफा कमाल पाशा ने इस संधि को खारिज कर दिया था। तुर्की की सेना ने १९२० और १९३० के दशक में कुर्दिश उभार को कुचल दिया था। जब लुसान संधि के तहत आधुनिक तुर्की की सरहद खींची गई तो कुर्दों के लिए अलग देश की उम्मीदों पर पानी फिर गया। इसमें कुर्दों के लिए अलग देश का कोई प्रावधान नहीं रखा गया। उन्हें अलग&अलग देशों में अल्पसंख्यक का दर्जा मिला। पिछले ८० सालों में जब भी कुर्दों ने अलग देश की मांग के लिए आंदोलन छेड़ा तो बर्बरता से कुचल दिया गया। माना जाता है कुर्द के नेता मसूद बरजानी कुर्द पूंजीपतियों के ही प्रतिनिधि हैं जहां एक ओर वे इराक से अलग हो कुर्दिस्तान बनाने की बात कर रहे हैं वहीं उनकी महत्वाकांक्षा कई विवादित इलाकों पर भी कब्जा जमाने की रही है। पहले तीन प्रांतों इर्बिल] दो हुक] सुलेमान नियाह को ही कुर्द क्षेत्र माना जाता था पर मौजूदा चुनाव नये कब्जाये क्षेत्रों खानकीन] सिंजर] मखमोर और तेल समृद्ध किंर्कुक में भी कराए गए।

 

कुर्दिश लोगों ने वर्ष २०१४ में आईएस से लोहा लिया है। दरअसल २०१३ में इस्लामिक स्टेट ने उत्तरी सीरिया में उन इलाकों पर हमले किए जहां कुर्दिश के ठिकाने थे। यह हमले जून २०१४ तक जारी रहे। इसके बाद कुर्दों ने पीपुल्स प्रोटेक्शन यूनिट्स का गठन किया। इस संगठन में कुर्दों ने अपनी रक्षा के लिए लड़ाके तैयार किए। तब जाकर आईएस ने इनपर हमले करना बंद किया। काफी la?k"kZ के बाद कुर्द लड़ाकों ने कुर्दिश इलाके में मौजूद इस्लामिक स्टेट के लड़ाकों को रोक दिया। लेकिन ये सीरिया में कुर्दिश प्रांतों पर आइएस के कब्जे की कोशिश को रोकने में नाकाम रहे। २०१४ में सितंबर में आईएस ने कोबाने में कुर्दिशों पर हमला किया। इससे तुर्की के आसपास सीमाई इलाकों से हजारों की संख्या में कुिर्दश भागने पर मजबूर हुए। यह सब तुर्की के पास हो रहा था और इस्लामिक स्टेट का खतरा भी था। लेकिन तुर्की ने आईएस के खिलाफ कोई कदम नहीं उठाया। इसके बाद तुर्की और सीरिया के बार्डर पर बसे शहर कोबाने को आईएस ने अपने कब्जे में ले लिया। la?k"kZ के चलते यहां वर्ष २०१५ के शुरुआत में १]६०० लोग मारे गए और कम से कम ३]२०० इमारतों को नष्ट कर दिया गया।

 

ईराक में कुर्द दूसरे देशों के मुकाबले अच्छी स्थिति में रह रहे हैं। ईराक सरकार से उन्हें कई तरह के अधिकार मिले हुए हैं। लेकिन उनपर पिछले काफी समय अत्याचार हुए हैं इसलिए कुर्दों ने अलग देश के पक्ष में जनमत संग्रह किया है। ईराक सरकार संविधान का हवाला दे इस जनमत संग्रह को असंवैधानिक करार दे रही है। ईरान ने भी कुर्दों पर प्रतिबंध लगाने की मांग की। इकलौते इजरायल ने इराक के कमजोर होने के मद्देनजर जनमत संग्रह का समर्थन किया। रूस ने यहां अपने निवेश को देखते हुए इस पर मौन सहमति दी। इस जनमत संग्रह से अलग कुर्दिस्तान फिलहाल नहीं बनने जा रहा है। जनमत संग्रह में जीत के बावजूद कुर्दिस्तान का गठन बिना अमरीका और संयुक्त राष्ट्र के सहयोग के संभव नहीं है।


अमेरिका में नरसंहार

 

  • दि संडे पोस्ट संवाददाता

 

सुरक्षा की दृष्टि से अमेरिका बहुत पुख्ता है। लेकिन चूक कहीं न कहीं हो जाती है। अमेरिका के लास वेगास में जब एक अक्टूबर को लोग संगीत का आनंद उठा रहे थे उसी वक्त उन पर कहर टूट गया। यह कहर गोलियों के रूप में था। संगीत समारोह में मौजूद तमाम लोगों पर ६४ साल के स्टीफन पैडॉक ने गोलियों की बौछार कर दी। इससे करीब ५० लोग वहीं मर गए तो ५०० लोग ?kk;y हो गए। आधुनिक अमेरिकी इतिहास में यह अब तक गोलीबारी की सबसे ?kkrd ?kVuk है। दुनिया के सबसे खूंखार आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट ने इस हमले की जिम्मेदारी ली थी। लेकिन अमेरिका ने इस्लामिक स्टेट के दावे को खारिज कर दिया है। 

 

अमेरिका में गोलीबारी की पिछली सबसे ?kkrd ?kVuk जून २०१६ में हुई थी जब ओरलैंडो के एक नाइट क्लब में गोलीबारी में ४९ लोगों की मौत हुई थी। ^पल्स^ ऑरलैंडो शहर के सबसे बड़े नाइट क्लबों में से एक है। अमरीका के वर्जीनिया स्थित एक यूनिवर्सिटी में हुए हमले को वर्जीनिया टेक नरसंहार भी कहते हैं। ये हमला १६ अप्रैल २००७ को यूनिवर्सिटी की इंजीनियरिंग बिल्डिंग में हुआ। हमले में करीब ३२ लोग मारे गए। तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने हमले के बाद कहा कि इससे अमेरिका ^सदमे में और दुखी है।^ अमेरिका के कनेक्टिकट में एक स्कूल में १४ दिसंबर २०१२ की सुबह २० साल के एडम लान्जा ने गोलीबारी की थी। स्कूल में गोलीबारी से पहले उसने अपनी मां को भी गोली मारकर हत्या कर दी थी। हमले में करीब २० बच्चों समेत कुल २७ की मौत हुई थी।

 

वर्ष १९९१ में अमेरिका में टेक्सस के किलीन स्थित लुबीज कैफेटेरिया में एक ट्रक के जरिए लोगों को कुचला गया और गोलीबारी की गई। जॉर्ड हेनार्ड नाम के शख्श ने इस हमले में २३ लोगों की जान ली और खुद को भी खत्म कर दिया। २ दिसंबर २०१५ को कैलिफोर्निया के इनलैंड रीजनल सेंटर पर बमबारी करके बड़ी संख्या में लोगों की हत्या की कोशिश की गई। इस हमले में १४ लोग मारे गए। न्यूयॉर्क के fca/keVu स्थित अमेरिकी सिविक इमिग्रेशन सेंटर पर हुए हमले में करीब १३ लोग मारे गए। यह ?kVuk ३ अप्रैल २००९ को हुए अंजाम दी गई। हमले की जिम्मेदारी पाकिस्तानी तालिबान ने ली थी। कोलोराडो के कोलंबाइन हाई स्कूल में दो छात्रों ने ताबड़तोड़ फायरिंग में करीब १३ लोगों की हत्या कर दी थी। २० अप्रैल १९९९ को हुए हमले में दोनों छात्रों ने ऑटोमेटिक गन का इस्तेमाल किया। बाद में दोनों ने खुद को भी गोली मार ली। उनके शव लाइब्रेरी से बरामद हुए थे।

 
         
 
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