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vad 26 16-12-2017
 
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देश
 
भाजपा के भीतर से विरोध

  • सिराज माही

ऐसा बहुत कम ही होता है कि देश के बड़े संगठन में सब कुछ ठीक चलता रहे] वहां कुछ अनुचित न हो। और अगर हो भी तो उस पर सब खामोश रहें। कोई न कोई अनुचित पर बोल उठता है। देश की सत्तारूढ़ पार्टी भारतीय जनता पार्टी ¼भाजपा½ में इन दिनों कुछ ऐसा चल रहा है। जहां अब भाजपा नेता और अटल बिहारी की सरकार में वित्त मंत्री रहे यशवंत सिंहा ने विरोधी रूप धारण किया है। लोगों में अपनी लोकप्रियता बनाए रखने वाली भाजपा लगता है अब कहीं न कहीं अपनी नीतियों के चलते ऊबाउ होने लगी है। इसे पिछले दिनों संद्घ की छात्र शाखा एबीवीपी की दो विश्वविद्यालयों में हार से भी समझा जा सकता है।

 

गौरतलब है भाजपा के वरिष्ठ नेता यशवंत सिंहा ने भाजपा के निर्णयों से होने वाले दुष्परिणामों के जरिए उस पर निशाना साधा है। इससे समझा जा सकता है कि भाजपा में विरोध के स्वर उठने लगे हैं। उनके विरोधी सुर से भाजपा के नेताओं और यशवंत सिन्हा के बीच तीखे हमले हो रहे हैं। दरअसल यशवंत सिन्हा ने २७ सितंबर को अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस में एक लेख लिखकर अरुण जटेली और देश की मौजूदा अर्थव्यवस्था की कड़ी आलोचना की थी। उन्होंने अपने लेख में बताया था कि किस तरह नोटबंदी और जीएसटी से देश की अर्थव्यवस्था चरमराई हुई है। उन्होंने देश में खराब होती अर्थव्यव्स्था के लिए भाजपा को ही जिम्मेदार माना है। उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा में बहुत से लोग यह बात जानते हैं मगर डर की वजह से कुछ बोलते नहीं। उन्होंने अपने बारे में लिखा कि अगर मैं अब वित्तमंत्री के द्वारा अर्थव्यवस्था की दुर्गति के बारे नहीं बोला तो मैं अपने राष्ट्रीय कर्तव्य के पालन करने में असफल होऊंगा।

 

यशवंत सिन्हा का लेख आने के बाद २८ सितंबर को ही यशवंत सिन्हा के बेटे और केंद्रीय नागरिक उड्डयन राज्य मंत्री जयंत सिन्हा ने एक लेख में नाम लिए बिना यशवंत सिन्हा की आलोचना की थी। नेशनल हेरल्ड अखबार ने जयंत सिन्हा का लेख छपने से पहले दावा किया था कि जयंत सिन्हा से उनके पिता के लेख का जवाब देने के लिए कहा गया है। स्पष्ट रहे कि २०१४ में नरेंद्र मोदी सरकार के गठन के समय जयंत सिन्हा वित्त राज्य मंत्री बनाए गये थे। हालांकि बाद में कैबिनेट फेरबदल में उनका मंत्रालय बदल दिया गया। जहां एक तरफ भाजपा ने पिता के खिलाफ बेटे को इस्तेमाल किया और कई भाजपा नेता यशवंत सिन्हा के विरोध में हो गए वहीं भाजपा ने शत्रुघ्न सिन्हा ने यशवंत सिन्हा का साथ दिया है।

 

मोदी सरकार में पहले भी विरोध के स्वर उठते रहे हैं। कभी भाजपा के नेता पार्टी के खिलाफ आवाज उठाते हैं तो कभी उसकी सहयोगी पार्टी विरोध का स्वर बुलंद कर देती है। हाल ही में महाराष्ट्र के बांद्रा से भाजपा सांसद ने मोदी के खिलाफ मोर्चा खोला है। उन्होंने कहा कि मोदी को अप्रिय प्रश्नों से परहेज है। मोदी तब बहुत गुस्सा हो जाते हैं जब मैं भाजपा सांसद की मीटिंग में किसानों की आत्महत्या और अल्पसंख्यकों के मुद्दे को रखता हूं। जब उनसे सवाल पूछा जाता है तो वह उल्टे सवाल पूछते हैं कि क्या आपने सरकार की स्कीम और पार्टी का मेनिफिस्टो पढ़ा है। एक मीटिंग में मैंने कृषि में केंद्र सरकार की तरफ से निवेश करने का सुझाव दिया। इसपर मोदी जी गुस्सा हो गए और हमसे कहा चुप रहो। मोदी अक्सर सांसदों से मिलते हैं लेकिन उन्हें उनके प्रश्नों से परहेज रहता है।

 

बिहार के बेगूसराय से भाजपा सांसद भोला सिंह आए दिन अपनी पार्टी के खिलाफ बयान देने के लिए मशहूर हैं। वह अब तक कई मुद्दों पर भाजपा के खिलाफ मोर्चा खोल चुके हैं। उन्होंने इस वर्ष जुलाई में भाजपा के वरिष्ठ नेता और बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी को अपने निशाने पर लिया था। भोला सिंह ने सुशील मोदी को पार्टी का खलनायक बताते हुए कहा था कि वे ही मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को भाजपा के साथ नहीं आने दे रहे हैं। उन्होंने भाजपा को नसीहत देते हुए कहा कि भाजपा को नीतीश के लिए दरवाजा खोल देना चाहिए। इसी तरह पिछले साल मई में भोला सिंह ने कहा था कि सरकारों पर औद्योगिक ?kjkuksa विशेष तौर पर तेल और गैस कारोबार से जुड़े व्यापारियों का दबाव रहता है। वर्तमान सरकार भी इससे अछूती नहीं है।

 

नवंबर २०१५ में भोला सिंह ने पीएम नरेंद्र मोदी की भाषा को अमर्यादित बताया था। उन्होंने बिहार में हार के लिए मोदी को जिम्मेदार ठहराया था। भोला कहा था कि सेनापति हैलीकॉप्टर से ?kwers थे लेकिन बिहार के नेताओं को किसी ने नहीं पूछा। भोला सिंह ने आरोप लगाया था कि भाजपा जहां रोजी-रोटी की बात करती थी लेकिन वह बिहार चुनाव में भटक गई। उसने गाय और पाकिस्तान को मुद्दा बनाया।

 

पिछले साल आठ नवंबर को नोटबंदी का फैसला आने के बाद गुजरात में नोटबंदी पर सबसे ज्यादा राज्य में भाजपा के नेता ही भड़के थे। भाजपा के सांसद ने तो यहां तक कहा था कि रिजर्व बैंक का ये तुगलकी फैसला है और इसकी भर्त्‌सना जरूरी है। महाराष्ट्र में भाजपा के साथ गठबंधन पार्टी शिवसेना अक्सर भाजपा के खिलाफ विरोध के स्वार उठाती रहती है। उसने हाल में भाजपा पर हमला बोला है। उसके मुताबिक हर मुद्दे पर विफल मोदी सरकार दाऊद इब्राहीम को २०१९ के चुनाव के आस पास लाएगी और उसका बखान लोकसभा चुनाव में करेगी। पिछले दिनों गोहत्या पर रोक लगाने के लिए केंद्र सरकार ने पशुओं की बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया था। तब भाजपा के नेता और अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने कहा था कि मैं खुद गोमांस खाता हूं। और ऐसा करना मुझे गलत नहीं लगता। इस मुद्दे पर उन्होंने भाजपा पर निशाना साधा था।

 

जानकारों के मुताबिक यशवंत सिन्हा ने अपनी सरकार को आईना दिखा कर बहुत साहस का काम किया है। उन्होंने अपना भविष्य दांव पर लगाकर भाजपा की नाकामियों से पर्दा उठाया है। इससे पहले सरकार में वित्त मंत्री रह चुका अगर कोई मंत्री कह रहा है कि दिक्कत है तो भाजपा को इस पर आरोप प्रत्यारोप के बजाए सोचना चाहिए कि कहीं कुछ गड़बड़ तो नहीं है। सरकार को अब उनकी सलाह मान कर अपनी गलती माननी चाहिए और अपने काम करने के तरीके में सुधार लाना चाहिए।


योगी का विवादित बयान

 

योगी अदित्यनाथ सांसद रहते अपने विवादित बयानों के चलते अक्सर मीडिया में बने रहते थे। अब जब वह उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बन गए हैं तब भी विवादित बयान देने से नहीं चूक रहे हैं। उनका ताजा विवादित बयान २९ सितंबर को आया जिसमें उन्होंने कहा कि राज्य में पिछले ४० साल से बच्चे इन्सेफ्लाइटिस बीमारी से मर रहे हैं तो अब इस मुद्दे पर क्यों रोना रोया जा रहा है\ मुख्यमंत्री का यह बयान तब आया है जब महीने भर पहले ही उनके ही क्षेत्र गोरखपुर के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल बाबा jk?ko दास मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल में ६४ से ज्यादा बच्चों की मौत एक महीने के अंदर हो गई। आदित्यनाथ ने बच्चों की मौत पर अपनी सरकार की हो रही आलोचनाओं के जवाब में ये बातें कहीं। इसके बाद मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने भविष्य में बच्चों की मौत ना हो इसके लिए बड़े पैमाने पर टीकाकरण कराया है। उनके मुताबिक मई महीने में कुल ९२ लाख बच्चों की टीका दिया गया है। इसके साथ ही राज्य के २० जिलों में उन्होंने बच्चों के लिए आईसीयू की शुरुआत की है। इन्सेफ्लाइटिस पर काबू पाने के लिए सभी अस्पतालों में मेडिकल फैसिलिटी बढ़ाई है। आर्थिक मोर्चे पर केंद्र की मोदी सरकार की हो रही आलोचनाओं पर योगी आदित्यनाथ ने कहा कि हिंदुस्तान की अर्थव्यवस्था मौजूदा दौर में दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ती हुई अर्थव्यवस्था है। 

 
         
 
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  • जीवन सिंह टनवाल

श्रीलंकाई टीम इन दिनों भारत दौरे पर है। श्रीलंकाई टीम यहां तीन टेस्ट] तीन वनडे और तीन टी२० मैचों की सीरीज खेलेगी। अब तक श्रीलंकाई टीम

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