fnYyh uks,Mk nsgjknwu ls izdkf'kr
चौदह o"kksZa ls izdkf'kr jk"Vªh; lkIrkfgd lekpkj i=
vad 26 16-12-2017
 
rktk [kcj  
 
प्रदेश 
 
विस्तार का विरोध

  • संजय स्वार

आमतौर पर किसी चीज के विस्तार का स्वागत होता है। लेकिन उत्तराखण्ड के ३८ नगर निकायों के विस्तार का ग्रामीण क्षेत्रों में विरोध हो रहा है। हालांकि विरोध के स्वर पूर्व कांग्रेस सरकार में भी उठे थे] पर इस बार ये काफी तीव्र हैं

 

उत्तराखण्ड में ३५ नगर निकायों के सीमा विस्तार को राज्य कैबिनेट की मंजूरी के बाद विवाद खड़ा हो गया है। विस्तार में शामिल किए जाने वाले ग्रामीण क्षेत्रों से विरोध के स्वर उठने लगे हैं। प्रदेश कैबिनेट ने ३५ नगर निकायों के सीमा विस्तार को मंजूरी दी है] जिनमें ३ नगर निगम] २२ नगर पालिकाएं और १० नगर पंचायतें शामिल हैं। निकाय चुनावों से ऐन पहले प्रदेश सरकार के इस निर्णय को राजनीतिक दृष्टि से अहम माना जा रहा है। पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार ने भी विस्तार का निर्णय किया था। मगर तब उसका विरोध कांग्रेस के अंदर से ही शुरू हो गया था। जिस कारण कांग्रेस सरकार ने इसे ठंडे बस्ते में डालना ही बेहतर समझा था।

 

नगर निकायों में ग्रामीण इलाकों को शामिल करने का ग्रामीण जनप्रतिनिधियों ने विरोध करना शुरू कर दिया है। पंचायत प्रतिनिधियों का आरोप है कि नगर निकायों के सीमा विस्तार की कवायद में एक बड़े ग्रामीण क्षेत्र को नगर में शामिल करने के पीछे पंचायतों को खत्म करने की एक साजिश है। एक तरफ सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में पंचायत निधि को आधा कर दिया है। दूसरी तरफ नगर निगम के विस्तार के नाम पर ग्रामीण क्षेत्रों को उनके हवाले करने का प्रयास किया जा रहा है जो अपने वर्तमान स्वरूप में मूलभूत दायित्वों को निभाने में पूर्णतया असफल रही हैं। विस्तारीकरण के बाद इतने बड़े क्षेत्र को निगम या पालिका व्यवस्थित कर पाएगी इसमें संदेह है। पंचायत प्रतिनिधियों का आरोप है कि आज जब सरकारें ग्रामीण क्षेत्रों के विकास के प्रति अपनी प्रतिबद्धता का दावा करते नहीं थकती वहीं उनका ये कदम ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज की मूल अवधारणा पर dqBkjk?kkr है। यह ग्राम्य विकास की छोटी इकाइयों को खत्म करने का प्रयास है।

 

हल्द्वानी नगर निगम विस्तार के इस निर्णय ने हल्द्वानी नगर निगम एवं इसके आस&पास की राजनीतिक स्थिति को काफी हद तक प्रभावित किया है। ५२ गांवों को नगर निगम की परिधि में शामिल करने वाला यह प्रस्ताव भाजपा&कांग्रेस की राजनीति को एक हद तक प्रभावित करने वाला निर्णय होगा। अगर नगर निगम के विस्तार की ये कवायद मूर्तरूप ले लेती है तो अभी तक सिर्फ हल्द्वानी विधानसभा क्षेत्र को कवर करने वाले इस नगर निगम में लालकुआं और कालाढूंगी विधानसभाओं का कुछ हिस्सा शामिल होगा। जिसके बाद हल्द्वानी नगर निगम तीन विधानसभाओं में विस्तार पा लेगा। यह क्षेत्र की राजनीतिक स्थिति को काफी हद तक प्रभावित करेगा। यहां के राजनीतिक दलों और उनके आंतरिक समीकरणों में भी बड़ा बदलाव आने की संभावना है। ये बदलते समीकरण किस राजनीतिक दल या किस नेता को कितना फायदा और नुकसान पहुंचाएंगे ये तो भविष्य में पता चलेगा। पर यह विस्तार भाजपा और कांग्रेस दोनों के लिए ही सिर दर्द हो सकता है। अभी कागजों पर स्थिति का आकलन करें तो भाजपा के प्रभाव वाला क्षेत्र इसमें शामिल होने पर विस्तार का लाभ पार्टी को हो सकता है। मगर विधानसभा और नगर निगम की राजनीतिक फर्क के लोग भी स्वीकार करते हैं।

 

हल्द्वानी के आस&पास ग्रामीण क्षेत्रों में शहरीकरण तेजी से बढ़ा है। पहाड़ से बढ़ते पलायन का दबाव हल्द्वानी ने खूब झेला है। कई ग्रामीण क्षेत्र आज शहरी क्षेत्रों की तरह विकसित हो गए हैं। यहां नागरिक सुविधाएं मुहैया कराने की जिम्मेदारी ग्रामीण पंचायतों की है। जहां नगर निगम सफाई के क्षेत्र में फिसड्डी साबित हो रहा है वहीं कई ग्रामीण क्षेत्रों में जिला पंचायत एवं स्थानीय पंचायती संस्थाएं स्वच्छता के मामले में निगम से बीस साबित हो रही हैं। आज नगर निगम आर्थिक रूप से खस्ता हालत में है। निगम अपने कर्मचारियों का वेतन पेंशन और अन्य देयकों का भुगतान करने की स्थिति में नहीं है। वह निगम इन बढ़ते क्षेत्रों में विकास कार्यों को कैसे अंजाम देगा] ये सवाल भी महत्वपूर्ण है। विस्तार के साथ नए जुड़ने वाले क्षेत्रों में निगम विकास की नीति कैसे बनाएगा। जब निगम के पास २५ वार्डों के लिए विकास] सीवर] सड़क निर्माण जैसे कार्यों के लिए धन का अभाव है] तो फिर लगभग ४० वार्डों में विकास कार्यों के लिए धन की व्यवस्था करना बड़ी चुनौती होगी।

 

नगर निगम में शामिल होने या न होने को लेकर आपत्तियां मांगी जा रही हैं। पर यहां विरोध के स्वर तेज होते जा रहे हैं। इस विरोध के स्वरों को नेता प्रतिपक्ष इंदिरा हृदयेश के समर्थन से और बल मिला है। इंदिरा हृदयेश ने आरोप लगाया है कि सरकार ने बिना उनकी राय के हल्द्वानी नगर निगम के विस्तार को मंजूरी दी है। वह इस विस्तार का सड़क से सदन तक विरोध करेंगी।

 

नगर निगम के विस्तार में शामिल अधिकांश ग्रामीण क्षेत्रों में अभी भी खेती की जाती है। प्रदेश में जिस प्रकार कृषि भूमि का रकबा ?kVrk जा रहा है उस पर ग्रामीण क्षेत्रों को नगर निगम की परिधि में शामिल किया जाना पंचायत प्रतिनिधियों के गले नहीं उतर रहा। हल्द्वानी में जिस प्रकार शहरीकरण का विस्तार हो रहा है] उससे इन ग्रामीण क्षेत्रों का निगम बनने के बाद यहां की कूषि भूमि कंक्रीट की महल में बदल जाएगा। फिलहाल हल्द्वानी नगर निगम विस्तार की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। आपत्तियों की सुनवाई के पश्चात ही इनके निगम में शामिल होने या न होने पर निर्णय होगा।

 

बात अपनी&अपनी

सरकार ने मुझसे विमर्श किए बिना ही ये निर्णय लिया है। इसका हम भरपूर विरोध करेंगे जो नगर निगम वर्तमान क्षेत्र में व्यवस्थाएं उपलब्ध नहीं करा पा रहा है वह इतने बड़े क्षेत्र का संचालन कैसे करेगा। हम इसका सड़क से सदन तक विरोध करेंगे।

डॉ- इंदिरा हृदयेश] नेता प्रतिपक्ष

 

सरकार का ये निर्णय ग्रामीण विरोधी है। आज जब नगर निगम वर्तमान क्षेत्र का ही संचालन ठीक से नहीं कर पा रहा है तो नए जुड़ने वाले क्षेत्रों की व्यवस्था वो कैसे करेगा। प्रस्तावित नए ५४ गांवों में अधिकतर ऐसे हैं जिनमें ७० प्रतिशत से अधिक में खेती होती है। ऐसे में उन्हें नगर निगम में शामिल करने का क्या औचित्य है।

सुमित्रा प्रसाद] अध्यक्ष जिला पंचायत नैनीताल

 

शहरीकरण के क्रम में टाउन एरिया से नगर पंचायत] नगर पंचायत से नगर पालिका] नगर पालिका से नगर निगम बनना एक सतत्‌ प्रक्रिया है। सरकार को जब लगता है कि नगर निकायों के आस&पास शहरीकरण हो रहा है तो वो उनसे जुड़े क्षेत्रों को नगर निकायों में सम्मिलित करती है जहां ७० प्रतिशत या उससे अधिक क्षेत्र में खेती हो रही है उन क्षेत्रों को नगर निगम में शामिल करना न्याय संगत नहीं है। ये भ्रम है कि नगर निगम में शामिल होने से करों की बाढ़ आ जाएगी। उल्टे इन क्षेत्रों को राज्य एवं केंद्र पोषित योजनाओं जैसे पेयजल योजनाओं का पुनर्गठन] सीवरेज व्यवस्था जैसी सुविधाओं का लाभ मिलेगा।

डॉ- जोगेंदर रौतेला] मेयर नगर निगम हल्द्वानी

 
         
 
ges tkus | vkids lq>ko | lEidZ djsa | foKkiu
 
fn laMs iksLV fo'ks"k
 
 
fiNyk vad pquss
o"kZ  
 
 
 
vkidk er

क्या मुख्यमंत्री हरीश रावत के सचिव के स्टिंग आॅपरेशन की खबर से कांग्रेस की छवि प्रभावित हुई है?

gkW uk
 
 
vc rd er ifj.kke
gkW & 71%
uk & 15%
 
 
fiNyk vad

  • गुंजन कुमार

^पद्मावती^ पर विवाद पिछले कुछ दिनों से लगातार चल रहा है। सोशल मीडिया से लेकर सड़कों पर राजपुताना खून उबलने को बेताब है। राजपुताना समाज और

foLrkkj ls
 
 
vkidh jkf'k
foLrkkj ls
 
 
U;wtysVj
Enter your Email Address
 
 
osclkbV ns[kh xbZ
1948139
ckj