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vad 18 21-10-2017
 
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सियासी चकल्लस 
 
कमल का सपना

तमिलनाडु की राजनीति में लंबे समय से फिल्मी सितारों का दबदबा रहा है। राज्य के दो मुख्य दल डीएमके और एआईएडीएमके का नेतृत्व भी फिल्म जगत के लोगों के पास रहा। डीएमके नेता एम करूणानिधि और एआईएडीएमके के संस्थापक एमजीआर ¼एमजी रामाचंद्रन½ और जयललिता तमिल फिल्मों में सक्रिय रहे। तीनों फिल्मी सितारे कई दशकों तक राज्य की बागडोर संभालते रहे। जयललिता चार बार राज्य की मुख्यमंत्री बनीं। जयललिता बेहद ही लोकप्रिय नेता रहीं और आम जनता उन्हें अम्मा कह कर देवी का दर्जा तक देती थी। लेकिन बीते दिसंबर माह में जयललिता की मौत के बाद से ही तमिलनाडु की राजनीति में बड़े बदलाव के संकेत मिल रहे हैं। इस बदलाव से फिल्मी सितारे अपने लिए जगह ढूंढ़ रहे हैं। इसमें कमल हासन और रजनीकांत प्रमुख हैं। रजनीकांत तो अभी उधेड़बुन में हैं। पर कमल हासन ने राजनीति में कदम रखने का पूरा मन बना लिया है। उनका कभी डीएमके तो कभी बीजेपी और हाल में केजरीवाल से मुलाकात के बाद आप में शामिल होने की अटकलें लग रही थीं। अब खबरें आ रही हैं कि वे ७ नवंबर यानी अपने जन्मदिन पर अपनी राजनीतिक पार्टी का ऐलान कर सकते हैं। कमल एमजीआर या करूणानिधि बनने का सपना देख रहे हैं। सपना देखना अच्छी बात है। लेकिन सच यह भी है कि सपने हर किसी के पूरे नहीं होते] खासकर भारतीय राजनीति में। 

 

रामदेव की चुटकी

हाल में नदी अभियान रैली फॉर रिवर्स के कार्यक्रम में पहुंचे बाबा रामदेव की एक चुटकी सुर्खियों में है। सतगुरु वासुदेव के इस अभियान में बाबा रामदेव ने कहा कि नदियों के संरक्षण के लिए पौधे लगाने जरूरी हैं। अपनी बात के समर्थन में उन्होंने चुटकी भी ले डाली कि पौधों को यदि पालोगे तो उनमें से कोई राम रहीम नहीं निकलेगा। बाबा की इस चुटकी के दो मायने निकाले जा रहे हैं। एक यह कि उन्होंने स्पष्ट किया है कि वे राम&रहीम जैसे विवादास्पद संतों से हटकर विशुद्ध संन्यासी हैं। दूसरा अर्थ यह निकाला जा रहा है कि रामदेव खुद मूल रूप से हरियाणा के रहने वाले हैं। यहां राम रहीम पहले से ही इस कदर जड़ें जमाकर बैठे हुए थे कि बाबा रामदेव को यहां फलने&फूलने के लिए उर्वरक धरती नहीं मिली। यानी धरती के सारे पोषक तत्व राम रहीम ही हड़प रहे थे। ऐसे में बाबा को दूसरे राज्य उत्तराखण्ड को अपना कर्मक्षेत्र बनाना पड़ेगा। हालांकि उत्तराखण्ड की धरती उनके लिए काफी उर्वरा साबित हुई। लेकिन कहीं न कहीं बाबा रामदेव के मन में यह टीस अवश्य है कि वे अपने मूल राज्य में वह रुतबा हासिल नहीं कर पाए जिसकी उन्हें उम्मीद रही होगी।

 

मुलायम की पारी समाप्त

अखिलेश यादव फिर से समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष बन चुके हैं। उनके पिता और पूर्व पार्टी अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव एवं उनके समर्थकों को यह बहुत बड़ा झटका है। दरअसल] मुलायम उम्मीद पाले हुए थे कि वे फिर से पार्टी सुप्रीमो बन सकेंगे। पिछले दिनों उन्होंने अपनी इस पीड़ा का खुलासा भी किया था कि अखिलेश ने पूर्व में उनसे वादा किया था कि वह सिर्फ तीन माह ही अध्यक्ष पद पर रहेंगे और उसके बाद उन्हें यह पद सौंप देंगे। लेकिन ऐसा हो न सका। अखिलेश अध्यक्ष बने रहे और एक बार फिर अध्यक्ष चुन लिए गए। मुलायम पर वे जरा भी मुलायम नहीं हुए। उनका यह कठोर रवैया सचमुच मुलायम के लिए बहुत बड़ा झटका है। राजनीतिक पंडित तो इसे राजनीति में मुलायम की पारी समाप्ति के तौर पर देखने लगे हैं।

 
         
 
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  • रवि जोशी

बिना गॉडफादर के बॉलीवुड में काम पा लेना ढेढ़ी खीर है। बॉलीवुड के कई नामचीन सितारे ऐसे हैं जिन्हें एक समय में काम पाने के लिए पापड़ बेलने पड़े हैं

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