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vad 18 21-10-2017
 
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सरगोशियां
 
निशंक के दिन बहुरे

भाजपा के नए नेतृत्व ने जिन पुराने दिग्गजों को काफी अर्से तक हाशिए में रखा है उनमें एक उत्तराखण्ड के पूर्व सीएम रमेश पोखरियाल ^निशंक^ भी हैं। हरिद्वार से सांसद निशंक ने इन बुरे दिनों में अपनी साहित्यिक गतिविधियों को तराशने का काम किया। अब लगता है उनके अच्छे दिनों की शुरुआत होने जा रही है। पार्टी अध्यक्ष ने उन्हें अरुण जेटली के नेतृत्व वाली टीम गुजरात का सहप्रभारी बनाया है। खबर है कि इस जिम्मेदारी को मिलने के बाद निशंक खेमे में बड़ा उत्साह है। खबर यह भी है कि दो अन्य दिग्गज भाजपाई भगत सिंह कोश्यारी और भुवन चंद्र खण्डूड़ी को भी भाजपा नेतृत्व नई जिम्मेदारी सौंपने जा रहा है। हालांकि नए निजाम के कानून मुताबिक ये दोनों नेता ७५ की उम्र पार कर चुकने के कारण शायद ही संगठन में एडजस्ट किए जाएं लेकिन शायद इनमें से किसी एक को राजभवन भेजा जा सकता है।

 

बदलते माहौल से बेचैन भाजपा

भाजपा के शीर्ष नेतृत्व से लेकर आम कार्यकर्ता तक की बेचैनी बढ़ने की खबर है। कारण है आम जनता] व्यापारी और मीडिया क्लास में मोदी सरकार की आर्थिक नीतियों के चलते मचा कोहराम। पहले नोटबंदी के चलते अर्थव्यवस्था चरमराती नजर आई। इसके बाद जीएसटी ने बची&खुची कसर पूरी कर दी। बड़े पैमाने पर बेरोजगारी बढ़ने से आम आदमी का जनजीवन अस्त&व्यस्त हो चला है। मोदी पर आंख मूंदकर भरोसा करने वाले भी अब बेचैन होने लगे हैं। भाजपा नेतृत्व को सबसे ज्यादा चिंता गुजरात की है जहां इस वर्ष के अंत में चुनाव होने जा रहे हैं। कभी गुजरात के विकास मॉडल की सर्वत्र प्रशंसा होती थी। यकायक ही उस पर प्रश्न&चिह्न लगने का काम शुरू हो चला है। भाजपा नेतृत्व प्रश्नों की इस बारिश को संभाल नहीं पा रहे हैं। ऐसा तब जबकि देश का मीडिया सरकार और भाजपा को चुभने वाले विषयों पर पूरी तरह खामोश है। सूत्रों की मानें तो जल्द ही सरकार आम आदमी से लेकर व्यापारी वर्ग तक को लुभाने वाले कुछ निर्णय लेने पर विचार कर रही है ताकि जनता की बढ़ती बेचैनी को थामा जा सके। इतिहास गवाह है कि भारत की जनता का मिजाज कब बदल जाए यह कोई नहीं जानता। सतहत्तर में कांग्रेस को बेदखल करने वाली जनता ने ही मात्र ढाई बरस में तख्ता वापस कांग्रेस को सौंप दिया था। शायद इसे समझते हुए भाजपा का शीर्ष नेतृत्व बेचैन है।

 

दिग्गी राजा की यात्रा के मायने

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह की नर्मदा परिक्रमा यात्रा को लेकर मध्य प्रदेश में राजनीति गर्मा गई है। ३० सितंबर को अपनी पत्नी अमृता राय के संग छह माह की इस संपूर्ण नर्मदा यात्रा के कई मायने निकाले जा रहे हैं। हालांकि स्वयं दिग्गी राजा ने इस यात्रा को पूरी तरह गैरराजनीतिक बताया है लेकिन उनकी यात्रा का मार्ग मध्य प्रदेश की ११० विधानसभा सीटों से होकर निकलने के चलते प्रदेश की राजनीति में भारी हलचल की खबरें हैं। इस यात्रा के दौरान दिग्गी राजा लगभग २० गुजरात विधानसभा की सीटों को भी प्रभावित करेंगे। ऐसे में माना जा रहा है कि व्यापम ?kksVkys के बाद से लगातार राजनीतिक संकट झेल रहे मध्य प्रदेश के सीएम शिवराज सिंह को आगामी विधानसभा चुनाव में ?ksjus की यह दिग्विजयी रणनीति है। मध्य प्रदेश में भाजपा के लिए चुनाव जीतना इस दफा आसान नहीं है। ऐसे में दिग्विजय सिंह का खुलकर ज्योतिरादित्य सिंधिया के नाम पर मुहर लगाना] दूसरे दिग्गज कांगे्रसी कमलनाथ का भी सिंधिया के पक्ष में बयान देना] कांग्रेस में एकता लाता नजर आ रहा है। हालांकि कुछेक का दावा है कि दिग्गी राजा की इस यात्रा का एक उद्देश्य अपने गृहक्लेश को शांत करना भी है। उल्लेखनीय है कि जब से दिग्विजय सिंह ने दूसरी शादी रचाई है] उनके संबंध अपने परिजनों से खासे खराब हो चले हैं। जानकारों की मानें तो अपने एमएलए पुत्र जयवर्धन सिंह से दिग्गी राजा की बातचीत तक बंद है। खबर यह भी है कि दिग्गी राजा शादी के बाद से न तो अपने गृह नगर राजोगढ़ गए हैं] न ही उन्होंने भोपाल की यात्रा की है।

 
         
 
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  • संजय चौहान

भले ही अलग राज्य बनने के १७ साल बीत जाने के बाद भी उत्तराखण्ड क्रिकेट la?k को बीसीसीआई से मान्यता न मिली हो मगर पहाड़ी राज्य उत्तराखण्ड के लाल

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