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आवरण कथा
 
सितारगंज में भू मफिया सरकार

 

सीधे तौर पर यह तो नहीं कहा जा सकता कि मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा भ्रष्टाचार के प्रतीक बनते जा रहे हैं। लेकिन जिस तरह से उनके नाम का सहारा लेकर भू-माफिया सरकारी जमीन पर कब्जेदारी करने में जुटे हैं उसके संकेत साफ हैं। दोषियों के खिलाफ प्रशासनिक कार्रवाई का न होना आम आदमी का घर तोड़ दिया जाना कृषि योग्य भूमि का व्यावसायिक इस्तेमाल किया जाना। इन तमाम चीजों पर मुख्यमंत्री का मौन भू-माफिया पर उनके वरदहस्त होने का गवाह है

 

जब बतौर मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने सितारगंज से विधानसभा चुनाव लड़ने का फैसला किया तो वहां के लोगों में इस बात को लेकर उत्साह था कि उनके क्षेत्र में अब विकास की गंगा बहेगी। आम आदमी की आंखों में आस का वह चिराग रोशन हो गया जिसके आलोक में लोग खुशहाली के सपने देखने लगे। लेकिन साल भर के भीतर ही जो सूरत बनी है वह चिंता में डालने वाली है। इतने कम समय में ही सितारगंज में भू-माफियाओं की समानांतर सरकार चल रही है और वे मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा को ढाल के तौर पर इस्तेमाल कर रहे हैं।

 

इसका जीता-जागता उदाहरण है सिडकुल रोड स्थित सरकारी जमीन पर बना वह होटल जिसे शासन-प्रशासन चाहकर भी नहीं तुड़वा सका है। चौंकाने वाली बात यह है कि जब इस होटल का निर्माण किया गया तो मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा की फोटो से सुसाज्जित होर्डिंग्स अतिक्रमण स्थल पर लगाए गए। होर्डिंग्स पर कांग्रेस कार्यालय लिखकर भू-माफिया ने यह भी संकेत दिया कि अतिक्रमण वाली जगह पर कांग्रेस कार्यालय है। सरकारी भूमि पर अवैध निर्माण करने वाला व्यक्ति कांग्रेसी नेता भी बताया जाता है।

 

वीवीआईपी विधानसभा क्षेत्र सितारगंज में भू-माफिया का कितना बोलबाला है इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि अवैध निर्माण के खिलाफ जिस अधिकारी ने कार्यवाही की उसका तबादला तक करा दिया गया। 

 

तहसीलदार ने अपनी जांच रिपोर्ट में यह स्पष्ट किया कि यह सरकारी जमीन पर अतिक्रमण है इसे हटाया जाना चाहिए। बावजूद निर्माण को तोड़ना तो दूरमामले को लंबा खींचने और कानूनी पचड़ों में उलझाने के मकसद से बेदखली की फाइल चला दी गई। इस मामले में हाथ डालने से प्रशासन इतना डरा हुआ है कि कार्यवाही को आगे बढ़ाने की हिम्मत तक नहीं जुटा पा रहा है।

 

नियमानुसार यह संभव नहीं है कि सरकारी जमीन (वर्ग ५ पर बने दो मकानों में से एक को अवैध अतिक्रमण बताकर तोड़ दिया जाय और दूसरे का निर्माण कार्य बदस्तूर जारी रहे। लेकिन सितारगंज शहर में ऐसा ही हुआ है। यहां की खतौनी संख्या ००६४१ की जमीन पर कई लोगों ने अपने आशियाने बना लिए हैं। जबकि यह जमीन वर्ग ५ की है। वर्ग ५ की यह जमीन बंजर जमीन होती है। जिस पर पूरी तरह सरकार का अधिकार रहता है। इस जमीन पर कृषि के लिए पट्टे किए जा सकते हैं। लेकिन इसे आवसीय एवं व्यावसायिक कार्य के लिए प्रयोग नहीं किया जा सकता है। लेकिन इसी भूमि के खसरा संख्या ९६/५०९ पर मालविन्दर सिंह पुत्र वीवीएस चौहान ने अवैध कब्जा कर व्यावसायिक भवन का निर्माण करा लिया। निर्माण करते समय बकायदा एक होर्डिंग्स लगाया गया जिसमें मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा के साथ कुमाऊं मंडल विकास निगम के अध्यक्ष एवं सितारगंज के पूर्व विधायक किरण मंडल के साथ ही प्रदेश के कैनिबेट मंत्री यशपाल आर्य का भी फोटो लगा हुआ था। इस होर्डिंग्स के बलबूते अतिक्रमणकारी ने न केवल कांग्रेस नेता बनकर अवैध निर्माण को अंजाम दिया बल्कि वह प्रशासन पर भी अपना रौब झाड़ता रहा। दूसरी तरफ मालविंदर सिंह के पड़ोसी नरेश शर्मा नामक व्यक्ति का मकान गिरा दिया गया। शर्मा का यह मकान भी उसी समय बनना शुरू हुआ था जब मालविंदर सिंह के व्यावसायिक भवन का निर्माण कार्य जारी था। 

 

गौरतलब है कि मालविंदर सिंह और नरेश शर्मा का मकान खतौनी संख्या ००६४१ के अंतर्गत आने वाली जमीन पर बने हुए थे। एक ही जमीन पर बने दो भवनों पर प्रशासन की अलग-अलग नीति से दुखी होकर नरेश शर्मा के पक्ष में भारतीय मानवाधिकार एसोसिएशन के जिला महासचिव अमरपाल शर्मा ने जुलाई २०१२ में मुख्यमंत्री और जिलाधिकारी ऊधमसिंहनगर को पत्र लिखा। इसके बाद प्रशासन ने अपनी जांच रिपोर्ट का दायरा नरेश शर्मा से बढ़ाकर मालविंदर सिंह तक किया जिसमें मालविंदर सिंह का फंसना तय था। सितारगंज के तत्कालीन उपजिलाधिकारी पीसी दुमका ने जांच की जिसमें मालविंदर सिंह को अवैध निर्माण कराने का आरोपी बनाया गया। यही नहीं पीसी दुमका ने तहसीलदार ऋचा सिंह के साथ मौके पर जाकर अवैध बने होटल पर नोटिस चस्पां कर दिया। मजे की बात यह है कि उपजिलाधिकारी दुमका ने जिस दिन व्यावसायिक भवन पर नोटिस चस्पां किया उसके दो दिन बाद ही उनका तबादला सितारगंज से काशीपुर कर दिया गया। इससे पूरे सितारगंज में यह चर्चाएं आम हो गई कि उक्त अतिक्रमणकारी को कांग्रेस के उन नेताओं का वरदहस्त प्राप्त है जो मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा के करीबी हैं। मुख्यमंत्री का करीबी होने के चलते ही मालविंदर सिंह के भवन की एक ईंट तक इधर-उधर नहीं हुई। जबकि इस भवन से सटे हुए नरेश शर्मा के घर को प्रशासन के अतिक्रमण हटाओ दस्ते ने ध्वस्त कर दिया। इससे इस बात को बल मिला कि सरकारी जमीन पर बने होटल में कांग्रेसी नेताओं का भी पैसा लगा हुआ है।

 

३० नवंबर २०१२ को सितारगंज की तहसीलदार ऋचा सिंह ने इस मामले की फाइल में नया पेंच फंसा दिया। तहसीलदार की ओर से मामले में बेदखली रिपोर्ट लगा दी गई। जिसमें उन्होंने मामले को उत्तर प्रदेश अधिनियम (२२ सन् १९७२ में परिभाषित करते हुए अनाधिकृत कब्जा माना और बेदखली की धारा (४ की उपधारा के अंतर्गत नोटिस जारी कर अनाधिकूत कब्जेदार को बेदखल किए जाने की पैरवी करते हुए उपजिलाधिकारी के समक्ष पेश कर दिया। जबकि होना यह चाहिए था कि सरकारी जमीन पर बने अवैध निर्माण को हटाकर कब्जा करने वाले व्यक्ति के खिलाफ मामला दर्ज किया जाता। यही नहीं बल्कि कब्जाधारक से सरकार जुर्माना भी वसूल करती है। लेकिन इस मामले में बेदखली की धारा (४ की उपधारा के तहत नोटिस जारी करने की बात कर दी गई। कांग्रेसी नेताओं का प्रशासन पर दबाव का नतीजा है कि ३० नवंबर २०१२ से लेकर अभी तक यह फाइल उपजिलाधिकारी के कार्यालय में धूल फांक रही है। यहां तक कि उपलजिलाधिकारी मनीष कुमार ने अभी तक बेदखली के नोटिस पर अपने हस्ताक्षर नहीं किए हैं।

साथ में रवि रस्तोगी

 

बात अपनी-अपनी

हमे इस मामले का पता नहीं है अब आपने संज्ञान में डाला है। हम इस पर कार्यवाही करायेंगे। साथ ही यह भी जांच करायेंगे कि मुख्यमंत्री की फोटो से सुसाज्जित होर्डिंग्स किसकी शह पर लगाया गया।

मंत्री प्रसाद नैथानी प्रभारी मंत्री ऊधमसिंह नगर

 

सितारगंज में मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा की नहीं भू-माफिया की सरकार चल रही है। सिडकुल रोड पर जिस सरकारी जमीन पर अवैध निर्माण की बात कर रहे हैं वह मामला मेरे संज्ञान में कुछ दिन पूर्व ही आया है। 

प्रकाश पंत पूर्व मंत्री उत्तराखण्ड

 

सितारगंज में सरकारी जमीन पर अवैध निर्माण का मामला मेरे संज्ञान में नहीं है। मैं इस मामले को देखूंगा तभी जाकर कुछ कह पाऊंगा। 

बृजेश कुमार संत जिलाधिकारी ऊधमसिंहनगर

 

मुझे इस प्रकरण की ज्यादा जानकारी नहीं है। अगर पड़ोसी नरेश शर्मा का घर गिराया गया और मालविंदर सिंह का नहीं तो इसकी जांच कराई जायेगी।

मनीष कुमार उपजिलाधिकारी सितारगंज


हमने अतिक्रमणकारी को अवगत करा दिया है। साथ ही उसके मकान पर नोटिस भी चस्पां कर दिया था। इसकी फाइल हमने एसडीएम को प्रेषित कर दी है।

ऋचा सिंह तहसीलदार सितारगंज

 

मुझसे सितारगंज के कई पत्रकार इस बाबत बात करने आए। सभी का मकसद ब्लैकमेलिंग करना था। मैंने कई पत्रकारों की ब्लैकमेलिंग करते हुए वीडियो बनाई है। तुम भी मुझे ब्लैकमेल कर रहे हो। मेरा घर ही नहीं पूरा सितारगंज सरकारी जमीन पर बसा हुआ है। मैं फोन पर बात नहीं करता मुझसे मिलने आओ तब बात करूंगा।

मालविंदर सिंह आरोपी

 

पटवारी की धमकी

सितारगंज के पटवारी राजकुमार ने नरेश शर्मा को अपनी शिकायत वापस लेने की धमकी दी है। बकौल नरेश शर्मा  'हमने जब अपना मकान गिराने और पड़ोसी का मकान न गिराए जाने को लेकर शिकायती पत्र लिखा तो इससे बौखलाकर पटवारी ने हमें धमकी दी। हम पर शिकायती पत्र वापस लेने का दबाव डाला गया। इस बाबत जब 'दि संडे पोस्ट' ने राजकुमार से बात की तो उन्होंने नरेश शर्मा को पड़ोसी बताते हुए माना कि उसने शर्मा को धमकी नहीं बल्कि आपसी सहमति से समझौता करने की बात कही थी। 

 

 

 
         
 
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