fnYyh uks,Mk nsgjknwu ls izdkf'kr
चौदह o"kksZa ls izdkf'kr jk"Vªh; lkIrkfgd lekpkj i=
vad 23 25-11-2017
 
rktk [kcj  
 
दुनिया 
 
ब्रिक्स के बहाने

  • सिराज माही

पि छले कुछ समय से पूरी दुनिया में आतंकवाद का मुद्दा सबसे अहम है। पूरी दुनिया इससे परेशान है। चीन के शियामे में संपन्न हुए ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में आतंकवाद का मुद्दा केंद्र में रहा। ब्रिक्स में लश्कर&ए&तैयबा और जैश&ए&मोहम्मद जैसे आतंकवादी संगठनों पर दबाव बनाने पर भारत को बड़ी कूटनीतिक कामयाबी मिली है। ब्रिक्स सम्मेलन में ब्राजील] रूस] भारत] चीन और दक्षिण अफ्रीका देश शामिल हुए। 

गौरतलब है कि ब्रिक्स सम्मेलन में भारत ने आतंकवाद का मुद्दा उठाया। ब्रिक्स देशों के इस सम्मेलन में एक संयुक्त ?kks"k.kk& पत्र जारी हुआ] उसमें वैश्विक आतंकवाद को लेकर गंभीर चिंता जताई गई। साफ शब्दों में पाकिस्तान के ठिकानों से काम करने वाले लश्कर&ए& तैयबा और जैश&ए&मोहम्मद जैसे आतंकी संगठनों को निशाना बनाया गया। ?kks"k.kkपत्र के ४८वें पैराग्राफ में आतंकवाद पर कड़ी चिंता व्यक्त की गई है। इसमें लिखा गया है कि हम लोग आस&पास के इलाके में फैल रहे आतंकवाद और सुरक्षा की द्घटनाओं पर चिंता व्यक्त करते हैं। इनमें तालिबान] आईएसआईएल] अलकायदा से खतरा है। वहीं ईस्टर्न तुर्कीस्तान इस्लामिक मूवमेंट] इस्लामिक मूवमेंट ऑफ उजबेक्सितान] टीटीपी] हक्कानी नेटवर्क] जैश&ए&मोहम्मद और हिज्बुल उत तहरीर का जिक्र किया गया है। उल्लेखनीय है कि चीन लगातार पाकिस्तान समर्थक आतंकी संगठनों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आतंकवादी द्घोषित करने में अड़ंगा लगाता रहा है। लेकिन ब्रिक्स के ?kks"k.kkपत्र में इनका जिक्र होना भारत के लिए बड़ी सफलता है। 

भारत ने कई मौकों पर संयुक्त राष्ट्र में जैश&ए&मोहम्मद के सरगना अजहर मसूद को अंतरराष्ट्रीय आतंकी द्घोषित करने की मांग उठाई तो चीन ने दखल देकर भारत को कोशिशों को बाधित किया है। ऐसे में ब्रिक्स के दूसरे सदस्य देशों के साथ&साथ चीन को भी अगर साझा बयान पर राजी होना पड़ा है तो यह इसलिए भी महत्वपूर्ण है कि हाल में भारत और चीन के बीच डोकलाम में फौज की तैनाती को लेकर काफी तनाव पैदा हो गया था] जिसे काफी मशक्कत के बाद ढीला किया जा सका।

उल्लेखनीय है कि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकात ब्रिक्स सम्मेलन में हुई। करीब ढाई महीने डोकलाम विवाद के बाद दोनों पहली बार मिले हैं। शी जिनपिंग ने मोदी से कहा कि चीन भारत के साथ मिलकर काम करना चाहता है। ताकि पंचशील के पांच सिद्धांतों से प्रेरणा ले सके। जिनपिंग ने आगे कहा कि भारत और चीन दोनों तेजी से उभरते देश हैं। हालांकि दोनों देशों ने डोकलाम पर कोई बात नहीं की। ब्रिक्स सम्मेलन में भारत की तरफ से प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि हमारा विकास का एजेंडा 'सबका साथ] सबका विकास' है। चरमपंथ के खात्मे] आपदा प्रबंधन] सोलर एनर्जी और विकास के क्षेत्रों में सभी देशों को साथ आना चाहिए। शिक्षा में सुधार और विकास के नए रास्ते तलाशने की जरूरत है। 

वैश्विक बदलाव] साइबर सुरक्षा और डिजिटल वर्ल्ड बनाने की दिशा में प्रयास किए जाने चाहिए। दुनिया को और हरा&भरा बनाने के लिए हमें प्रयास करने की जरूरत है। आठवां ब्रिक्स सम्मेलन अक्टूबर २०१६ में हुआ था। इस सम्मेलन में भी आतंकवाद का मुद्दा केंद्र में था। उस वक्त उरी हमले के बाद भारत ने पीओके में सर्जिकल स्ट्राइक कर पाकिस्तान को झटका दिया था। ब्रिक्स सम्मेलन के ?kks"k.kkपत्र में आतंकवाद की कड़े शब्दों में निंदा की गई थी। ?kks"k.kk पत्र में कहा गया था कि यह उन देश की सरकारों की जिम्मेदारी है कि अपनी जमीन से किसी तरह की आतंकवादी गतिविधियों को रोकें। आठवें ब्रिक्स सम्मेलन से पहले भारत और रूस के बीच १६ अहम समझौतों पर दस्तखत हुए थे।

 


बंदर के हाथ में बम

ऐसा तानाशाह जो इक्कीसवीं शताब्दी में भी इंसानों के साथ जानवरों जैसा बरताव करता हो] उससे यह उम्मीद करना कि वह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शांति स्थापित करने में सहयोग देगा] महज एक ख्वाब है। जिस तरह का उत्तर कोरिया के तानाशाह किम जोंग उन और उसके पिता का इतिहास रहा है। इससे जाहिर है वह पूरी दुनिया को भी अपने दबदबे में लेना चाहता है। यही वजह है कि कई देशों के बार&बार चेतावनी दिए जाने के बावजूद वह मिसाइल परीक्षण] परमाणु बम परीक्षण और हाइड्रोजन बम परीक्षण करने से बाज नहीं आ रहा है। उत्तर कोरिया की आम जनता की हालत ऐसी है कि उन्हें दो जून की रोटी ठीक से मिल पा रही है। आने वाले समय में यह स्थिति और भयानक हो सकती है जब दुनिया के कई देश उसपर प्रतिबन्ध लगा देंगे।

गौरतलब है कि उत्तर कोरिया ने तीन सितम्बर को जानकारी दी कि उसने छठी बार हाईड्रोजन बम का परीक्षण किया है। उत्तर कोरिया ने बयान दिया था कि उसने बैलिस्टिक मिसाइल पर लगाए जाने में सक्षम अति उन्नत परमाणु बम विकसित कर लिया है। हालांकि उत्तर कोरिया के इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं की जा सकी है। उत्तर कोरिया ने यह परीक्षण ऐसे समय में किया है जब उसे अमेरिका ने पहले ही चेतावनी दी है। उत्तर कोरिया के इस कारनामे पर अमेरिका भारत] जापान] रूस और दक्षिण कोरिया समेत दुनिया भर के कई देशों ने इसकी निंदा की है। परीक्षण से नाराज अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्टीवन मूचिन ने कहा कि उत्तर कोरिया के खिलाफ कड़े प्रतिबंधों का मसौदा तैयार किया जा रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप चेतावनी दे चुके हैं कि वो ऐसे किसी भी देश के साथ व्यापारिक रिश्तों को खत्म कर देंगे] जो उत्तर कोरिया से व्यापार करेगा। 

उत्तर कोरिया के परमाणु परीक्षण पर उसके करीबी संबंध रखने वाले चीन ने सलाह दी है कि वो कोई ऐसा कदम न उठाए] जिससे हालात और बिगड़ें। इस परमाणु परीक्षण की भारत ने भी निंदा की है। भारत के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि उत्तर कोरिया का ये कदम कोरियाई प्रायद्वीप को परमाणु हथियारों से मुक्त करने की अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं का उल्लंद्घन है। उत्तर कोरिया ने अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों को नजरअंदाज कर अपने परमाणु और मिसाइल कार्यक्रम को जारी रखा है। हाल के महीनों में किए गए मिसाइल परीक्षणों के बाद अंतरराष्ट्रीय चिंताएं बढ़ गई हैं। 

उत्तर कोरिया का यह छठवां हाईड्रोजन परीक्षण है। पांचवे हाइड्रोजन परीक्षण के वक्त भी उत्तर कोरिया ने ऐसा ही दावा किया था। हाइड्रोजन बम परमाणु बम से १०० गुना ज्यादा शक्तिशाली होता है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रतिबंधों को धता बताते हुए उत्तर कोरिया के ताजा हाईड्रोजन परीक्षण से कोरियाई प्रायद्वीप में तनाव काफी बढ़ गया है। इस परीक्षण से उत्तर कोरिया का परमाणु हथियारों के परीक्षण का कार्यक्रम पूरा हो गया है। हथियार परीक्षणों के खिलाफ पूरी दुनिया के एकजुट हो जाने के बावजूद उत्तर कोरिया कोई दबाव मानने को तैयार नहीं है। 

उत्तर कोरिया की मनमानियों पर इस वर्ष अमेरिका ने संयुक्त राष्ट्र में प्रतिबंध का प्रस्ताव पारित किया था। इस प्रस्ताव को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने सर्वसम्मति से पारित कर दिया था। इसमें निर्यात पर भी रोक शामिल थी। इसका लक्ष्य प्योंगयांग को एक अरब डॉलर के वार्षिक राजस्व से वंचित करना था। इस प्रतिबंध के बाद उत्तर कोरिया ने कहा था इस तरह के प्रतिबन्धों से केवल प्योंगयांग की परमाणु हथियारों के संकल्प को और मजबूत ही करेंगे। 

इन दिनों उत्तर कोरिया मिसाइल परीक्षण] परमाणु बम परीक्षण और हाईड्रोजन परीक्षण के चलते सुर्खियों में हैं। इससे पहले किम जोंग उन अपने खिलाफ आवाज उठाने वालों को अमीनवीय तरीके से सजा देने के लिए चर्चा में था। उन्होंने करीब दो साल पहले शिक्षा मंत्री को तोप से दाग दिया था। किम जोंग उन ने अपने फूफा को भूखे कुत्तों के सामने इसलिए नोचवा दिया कि कहीं वह उससे बड़े नेता न बन जाएं। एक रिपोर्ट के मुताबिक उत्तर कोरिया के हजारों लोग भूख की वजह से दम तोड़ चुके हैं। पिछले पांच सालों से जब से किम जोंग उन ने गद्दी संभाली है बस बम और बंदूक ही उसका शौक रहा है। उसने हाइड्रोन बम तो बना लिया पर अपने ही लोगों का पेट नहीं भर पा रहा है। आलम ये है कि लोग ?kkl खा&खा कर किसी तरह अपनी सांसें चला रहे हैं। उत्तर कोरिया की हालत अब कुछ इतनी भयानक है कि कुछ इलाकों से तो लोगों के अपने ही बच्चों को मार कर खाने तक की खबरें आई हैं। इस तरह के सनकी तानाशाह के हाथों में इतना विनाशकारी बम होना पूरी दुनिया के लिए खतरे का संकेत है। अमेरिका] जापान] दक्षिण कोरिया और चीन को चाहिए कि वह उसके खिलाफ कोई निर्णय लें।

 

 
         
 
ges tkus | vkids lq>ko | lEidZ djsa | foKkiu
 
fn laMs iksLV fo'ks"k
 
 
fiNyk vad pquss
o"kZ  
 
 
 
vkidk er

क्या मुख्यमंत्री हरीश रावत के सचिव के स्टिंग आॅपरेशन की खबर से कांग्रेस की छवि प्रभावित हुई है?

gkW uk
 
 
vc rd er ifj.kke
gkW & 70%
uk & 14%
 
 
fiNyk vad

  • गुंजन कुमार@अरुण कश्यप

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मिशन को उत्तराखण्ड में पलीता लगाया जा रहा है। स्वच्छता अभियान के तहत खुले में शौच मुक्त भारत के

foLrkkj ls
 
 
vkidh jkf'k
foLrkkj ls
 
 
U;wtysVj
Enter your Email Address
 
 
osclkbV ns[kh xbZ
1916529
ckj