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Vªafpax ग्राउंड भूमि ?kksVkyk

  • दिकदर्शन रावत@सुमित जोशी

रामनगर नगर पालिका ने ३७ साल पहले Vªafpaxग्राउंड के लिए जो भूमि खरीदी वह अतिक्रमण की भेंट चढ़ गई। इस भूमि को लेकर इन दिनों राजनीतिक गलियारों में खूब चर्चा है। चर्चा की खास वजह यह है कि इस भूमि से संबंधित एक मामले में हाईकोर्ट ने जिन पक्षों को जवाब देने को कहा उनमें नगर पालिका के पूर्व अध्यक्ष भगीरथ लाल चौधरी और उनकी पत्नी उर्मिला चौधरी भी शामिल हैं। उर्मिला भी पालिका की अध्यक्ष रह चुकी हैं

 

रामनगर के निवासी और यहां आने वाले पर्यटक गंदगी की समस्या से परेशान रहते हैं। ऊपर से दिक्कत यह है कि कूड़ा निस्तारण के मकसद से Vªafpax ग्राउंड के लिए करीब ३७ साल पहले जो १८ ch?kk और १६ विस्वा भूमि खरीदी गई थी उसमें से पालिका के पास अब सिर्फ तीन ch?kk भूमि ही शेष बची हुई है। १५ ch?kk १६ विस्वा भूमि कहां चली गई] उस पर कुछ लोगों द्वारा कैसे अतिक्रमण कर लिया गया] इस संबंध में स्थानीय निवासी एलएम पांडे ने १२ जून २०१७ को नैनीताल हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की। याचिका पर सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने रामनगर पालिका] नगर विकास सचिव देहरादून] पूर्व पालिका अध्यक्ष रामनगर भगीरथ लाल चौधरी और पूर्व में पालिका अध्यक्ष रह चुकीं उनकी पत्नी उर्मिला चौधरी को चार हफ्ते के भीतर जवाब दाखिल करने के आदेश दिए। इन चार हफ्तों के भीतर जवाब दाखिल नहीं हो पाए। लिहाजा अब इसिके लिए नई तिथि दे दी गई है। पूर्व पालिका अध्यक्ष भगीरथ लाल चौधरी प्रदेश भाजपा के कद्दावर नेता रहे हैं। २०१३ का पालिका अध्यक्ष चुनाव भी उन्होंने भाजपा के टिकट पर लड़ा था। भाजपा संगठन में वह कई पदों पर रह चुके हैं। भाजपा के साथ ही वह कांग्रेस में भी रहे हैं। राज्य की पूर्व हरीश रावत सरकार में वह राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के उपाध्यक्ष रहे। यही वजह है कि उनके चलते पालिका भूमि का मामला हाईकोर्ट में जाने के कारण राजनीतिक गलियारों में भी चर्चा का विषय बना हुआ है। 

नगर में इन दिनों इस बात को लेकर खूब चर्चा है कि वर्ष २०१० में कुमाऊं मंडल के तत्कालीन आयुक्त एस राजू ने अपने आदेश संख्या ६३७@ तेईस-४५२@२००९-२०१० दिनांक १-२-२०१० में नगर पालिका अधिनियम की धारा-८१(४) के तहत पूर्व पालिका अध्यक्ष भगीरथ लाल चौधरी के खिलाफ पालिका की १५ ch?kk १६ विस्वा भूमि को नुकसान पहुंचाने के लिए मुकदमा कायम करने की स्वीकृति दी थी। यही नहीं तत्कालीन पालिका अध्यक्ष मो ़ अकरम द्वारा भी दिनांक २१-०६@२०१० को पालिकाअधिवक्ता रामनगर को आदेश का अनुपालन करते हुए मामले में मुकदमा दायर करने के उद्देश्य से पत्र लिखा गया था।एक आरटीआई द्वारा हुए खुलासे से पता चला है कि राम नगर पालिका ने Vªafpax ग्राउंड के लिए १९७९ में पूछड़ी गांव के निवासी पीसी मुथन्ना से १८ ch?kk १६ विस्वा भूमि १५ हजार रुपये में खरीदी थी। जिसके लिए पालिका ने १९८० में १२ हजार रुपये का भुगतान भी कर दिया था। शेष ३ हजार रुपये का भुगतान रजिस्ट्री के समय करने की बात कही गई थी। ३१-०५-१९९७ को तत्कालीन पालिका अध्यक्ष ने भूमि विक्रेता पीसी मुथन्ना को पत्र लिखकर १८ ch?kk १६ विस्वा भूमि की रजिस्ट्री पालिका के नाम पर करने को कहा। इस पत्र के जवाब में ६-९-१९९७ को पीसी मुथन्ना ने कहा कि 'आपके द्वारा रजिस्ट्री की जो तारीख तय की गई थी उस पर रजिस्ट्री नहीं कारवाई जा सकी। अनुबंध के आधार पर रजिस्ट्री का खर्च भी पालिका द्वारा किया जाना था।' मुथन्ना ने कहा कि जो जमीन पालिका को उन्होंने दी थी उस पर १८ साल में कुछ लोगों ने अतिक्रमण कर लिया है। स्थिति यह है कि अब सिर्फ ३ ch?kk भूमि ही शेष बची है। पत्र में अतिक्रमण हटाने को लेकर भी पालिका से कहा गया। इस मामले में जारी विभागीय जांच रिपोर्ट से भी स्पष्ट है कि २०-७-१९९७ को पीसी मुथन्ना ने एसडीएम को भी पत्र लिखा था। ३-१-१९९८ को तत्कालीन अधिशासी अधिकारी ने अतिक्रमण हटाने के लिए नायब तहसीलदार को पत्र लिखा था। 

तत्कालीन अधिशासी अधिकारी ने मुथन्ना को भी पत्र लिखकर रजिस्ट्री करने के लिए १०-९-१९९८ को सब रजिस्ट्रार कार्यालय बुलाया था। लेकिन उस दिन मुथन्ना ने वहां आने में असमर्थता जताई थी। विभागीय रिपोर्ट के आधार पर ३-८-२००० को तत्कालीन अधिशासी अधिकारी द्वारा भूमि की रजिस्ट्री करने को कहा गया और पालिका बोर्ड द्वारा प्रस्ताव संख्या-१० दिनांक ६-७-२००० के द्वारा ेंेंसर्वसम्मति से भूमि रजिस्ट्री कराना स्वीकार किया गया। इसके साथ ही अधिशासी अधिकारी द्वारा पक्की तार बाड़ कराने के निर्देश दिए गए। बोर्ड में पास प्रस्ताव के अनुसार भूमि के लिए दिए गए १५ हजार रुपए में से १२ हजार ६ सौ रुपए पालिका कोष में जमा करने की बात कही गई। जिसकी सूचना अधिशासी अधिकारी द्वारा पत्र सं०-४६३२ दिनांक ३-१०-२००० को पीसी मुथन्ना को दी गयी। पत्र के जवाब के साथ मुथन्ना ने १२]६०० का चैक भेजा जिसे १२-१०-२००० को पालिका की कार्यवाही के बाद पालिका कोष में जमा करवाने के आदेश दिए गए। जांच रिपोर्ट में बताया गया है कि तमाम कार्यवाही के बाद पीसी मुथन्ना द्वारा २३-०३-२००२ को ३ ch?kk भूमि की रजिस्ट्री नगर पालिका परिषद रामनगर के तत्कालीन अध्यक्ष भगीरथ लाल चौधरी के नाम पर करा दी गई। अधिशासी अधिकारी द्वारा पत्र सं०-६६५९ के जरिए दिनांक ४-८-२००३ को तहसीलदार रामनगर को १५ ch?kk भूमि पर अतिक्रमण करने वालों के खिलाफ कार्यवाही करने की मांग की गयी। 

जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद एक स्थानीय निवासी हरिओम शर्मा ने १६-१०- २००७ को पालिका अध्यक्ष के नाम एक ज्ञापन देकर पूरे मामले का विस्तार से वर्णन कर कार्यवाही करने की मांग की। जिसमें बिंदु सं०१२ भाग ४ व ५ में साफ तौर पर १५ ch?kk १६ विस्वा भूमि के गबन मामले के तार पूर्व पालिका अध्यक्ष भगीरथ लाल चौधरी से जुड़े होने की बात कही गई। ज्ञापन पर संज्ञान लेते हुए तत्कालीन पालिका अध्यक्ष मो ़अकरम ने २८-११-२००८ को पत्रांक-१३७४@४-स०-स्वा०अनु०@ ०८-०९ के जरिये जिला शासकीय अधिवक्ता से शिकायतकर्ता द्वारा वर्णित विषय एवं विभागीय जांच रिपोर्ट के आधार पर पूर्व पालिका अध्यक्ष के विरुद्ध पालिका एक्ट-८१ के तहत कार्यवाही को लेकर उनकी विधिक राय मांगी। जिस पर उन्होंने उत्तर प्रदेश नगर पालिका अधिनियम १९१६ की सरचार्ज की वसूली की धारा ८१ की उपधारा २]३]४ से अवगत कराया। जिसके बाद तत्कालीन पालिका अध्यक्ष मो ़अकरम ८-१-२०१० को कुमाऊं आयुक्त को पत्र लिखकर मामले से अवगत कराया था। 

इस पूरे मामले में खास बात यह है कि एक ओर जहां कुमाऊं मंडल के आयुक्त ने पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष भगीरथ लाल चौधरी के खिलाफ बाद दायर करने की स्वीकृति दी] वहीं दूसरी ओर भगीरथ लाल  चौधरी साक्ष्य प्रस्तुत करते हैं कि उन्होंने और उनकी पत्नी उर्मिला चौधरी ने जो भी जमीन खरीदी वह सीधे पीसी मुथन्ना से खरीदी। उर्मिला देवी ने २६-१०-२००२ को एक लाख ५० हजार रुपए में मुथन्ना से जमीन खरीदी थी। खाता खतौनी संख्या २३] खसरा नं ़ ८ अ] रकबा ० ़९३६ हेक्टेयर इस जमीन में से ० ़ १९० हेक्टेयर आराजी विक्रय की है। इसी तरह ४-३-२००५ के विक्रय पत्र के अनुसार भगीरथ लाल चौधरी ने मुथन्ना से १ लाख २५ हजार रुपए में जमीन खरीदी। इस जमीन का खाता खतौनी नं २३ और  रकबा न ़ ८ अ है। ० ़९३६ हेक्टेयर में से ४ ़ ०६ हेक्टेयर आराजी विक्रय की है।

 

कूड़े का निस्तारण न होने के कारण जनता को तीन महीने काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। यदि रामनगर पालिका की १५ ch?kk भूमि का हेर फेर न हुआ होता तो ये समस्या सामने नहीं आती। मुझे आशा है कि जनहित में जो पीआईएल मैंने दायर की है उस पर न्यायालय का फैसला जनता के पक्ष में ही आएगा।

 एलएम पाण्डेय] याचिकाकर्ता

 

मैंने मुथन्ना से बोर्ड की मीटिंग के बाद वर्ष २००५ में जमीन खरीदी थी। २३-३-२००२ की मीटिंग में बोर्ड ने फैसला लिया था कि जो जमीन खाली है उसे खरीद सकते हैं। कुछ लोग नगर पालिका चुनाव से पहले बिना वजह इस मुद्दे को तूल देना चाहते हैं। चुनाव में मेरे खिलाफ संगठित हो जाते हैं। पिछली बार भी उन्होंने ऐसा ही किया था। 

भगीरथ लाल चौधरी] पूर्व अध्यक्ष नगर पालिका

 
         
 
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