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प्रदेश 
 
उड़नपरी की उड़ान

  • संजय चौहान

महज १३ बरस उम्र में उन्होंने अपने हैरतंगेज कारनामों से देश-दुनिया को अचंभित कर दिया। आज वह युवाओं के लिए एक आइकॉन हैं। जिद और जज्बा ऐसा कि पहाड़ के हर कोने की खाक छान दी। हौसले इतने बुलंद कि आपदा के बाद सुरक्षित यात्रा का संदेश देने के लिए विपरीत परस्थितियों में केदार धाम जा पहुंचीं। अपनी माटी से इतना प्यार कि पहाड़ों का भ्रमण करके लोगों को ?kj लौटने का न्योता दे रही हैं।

 एक ऐसी लड़की की परिकथा जो हकीकत है] से आपको रूबरू करा रहें हैं जिसके सपने न केवल पहाड़ जैसे हैं बल्कि उसके हौसलों की ऊँची उड़ान के लिए शायद नीला आसमान भी छोटा पड़ जाय। पहाड़ की इस उड़नपरी का नाम है शिवानी गुसांईं। ८ अप्रैल १९८८ को पौड़ी गढ़वाल के ग्राम कफोल्स्यूं] कल्जीखाल निवासी विजय लक्ष्मी गुसांईं और सुरेंद्र सिंह गुसांई के ?kj एक बिटिया का जन्म हुआ। माता-पिता ने अपनी इस बेटी का नाम शिवानी रखा। बचपन से ही शिवानी न केवल पढ़ने लिखने में होनहार थी] बल्कि अन्य कार्यों में भी निपुण थी। जो सबसे खास बात उसमें थी वह यहा कि उसे अपने माटी और पहाड़ से असीम प्यार था। खासतौर पर शिवानी को यहाँ की नदियां] गाड] गदेरे] गगनचुम्बी पहाड़] लोकभाषा] लोकसंस्कृति बहुत पसंद थी। शिक्षक माता पिता शिवानी पर कभी भी बंदिशों की पाबंदी नहीं रखी बल्कि उन्होंने अपने ५ बच्चों-तीन बेटियां और दो बेटों को अपना भविष्य खुद बनाने की खुली छूट दी। जिसका नतीजा ये हुआ कि शिवानी की दो बहनों में एक हॉकी खिलाड़ी और एक लोक नृत्यांगना हैं। एक भाई क्रिकेट तो एक रचनात्मक गतिविधियों में अपनी अपनी मंजिल की ओर अग्रसर है।

इन सबके बीच शिवानी ने अपनी अलग राह चुनी। १२वीं के बाद आईटी से पॉलिटेक्निक किया। फिर बीकॉम] एमकॉम के बाद एमबीए की उच्च शिक्षा ग्रहण की। वर्तमान में शिवानी महिला तकनीकी संस्थान प्रेमनगर देहरादून में कार्यरत हैं।

बहुमुखी प्रतिभा की धनी वह स्कूल और पॉलिटेक्निक में राज्य स्तर पर टेबिल टेनिस में सिल्वर और गोल्ड मेडेलिस्ट रहीं हैं। ८ जनवरी २००१ को जब वह महज १३ बरस की थीं विश्व की सबसे कम आयु की पैराग्लाइडर बनीं। पौडी से १० किमी दूर कंडारा हिल में उडान भरकर शिवानी ने इतिहास रचकर पूरे विश्व को आश्चर्यचकित कर दिया था। शिवानी की यह उपलब्धि ^लिम्का बुक^ में स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज है। जिसके बाद से शिवानी ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। शिवानी ने मन ही मन ठान लिया था कि अब वो एडवेंचर को ही अपने जीवन का उद्देश्य बनायेंगी। इसलिए वह महज पैराग्लाइडिंग तक ही सीमित नहीं रही] पर्वतारोहण] राफ्टिंग] स्कीइंग में भी महारत हासिल की। औली में प्रथम एशियाई खेलों के दौरान वह पूरे ३ महीने औली में ही रही थीं। उन्होंने एशियाई खेलों में भाग भी लिया। उत्तराखण्ड में पैराग्लाइडिंग की उपेक्षा पर वह बेहद आहत हैं। 

अपने सपनों को सकार करने के लिए शिवानी ने माउंटेन एडवेंचर क्लब यानी कि ^मैक^ की स्थापना की। जिसमें अब तक ३ हजार से भी अधिक युवा जुड़ चुके हैं। मैक के जरिये शिवानी एडवेंचर] पर्यटन] लोक संस्कूति] को बढ़ावा देने का कार्य कर रहीं हैं। साथ ही साथ लोगों को वापस अपने पहाड़ की ओर लौटने को प्रेरित भी कर रही हैं। मैक के बैनर तले शिवानी ने केदारनाथ आपदा के बाद लोगों के मन में बैठे डर को दूर करने के लिए नवंबर २०१४ में ^चलो केदारनाथ^ ट्रेकिंग कैंपिंग शिविर के जरिये ३८ युवाओं की टीम के साथ केदारपुरी का भ्रमण और अध्यन किया। तत्कालीन मुख्यमंत्री को एक रिपोर्ट सौंपी। जबकि २०१५ में एक बार फिर २५ सदस्यों के दल के साथ चलो केदारनाथ के जरिये सुरक्षित केदारनाथ यात्रा का संदेश देश और दुनिया को दिया। उनकी पूरी टीम ने दीपवाली भी केदारनाथ में ही मनाई। अक्टूबर २०१६ में उत्तराखण्ड सरकार के ^हिटो केदार कार्यक्रम^ के जरिये शिवानी ने अपने नेतृत्व में ३५ लड़कियों के ग्रुप के साथ चौमासी- खाम बुग्याल-रामबाड़ा-केदारनाथ-ट्रैक से ३६ किमी का सफर तयकर सुखद केदारनाथ यात्रा का सन्देश भी दिया। जिसके लिए शिवानी को सम्मानित  किया गया था। इसके अलवा शिवानी उत्तरकाशी से लेकर टिहरी] पौड़ी] चमोली और रुद्रप्रयाग में साहसिक खेलों को बढ़ावा देने के लिए अपनी टीम के साथ कई ट्रैक कर चुकी हैं।

शिवानी को उसके कार्यों के लिए समय- समय पर सम्मानित भी किया जाता रहा है। २००४ में नई दिल्ली स्थित विज्ञान भवन दिल्ली में उन्हें बाल उत्कूष्ट अवार्ड ¼एडवेंचर पैराग्लाइडिंग½ मिला। २००४ में उत्तराखण्ड के तत्कालीन मुख्यमंत्री उत्तराखण्ड नारायण दत्त तिवारी ने पैराग्लाइडिंग के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य के लिए १५ अगस्त के अवसर पर उन्हें सम्मानित किया। २००८ में तत्कालीन मुख्यमंत्री भुवनचंद्र खण्डूड़ी और २०१० में महामहिम राज्यपाल मार्गेट अल्वा द्वारा भी राजभवन देहरादून में उन्हें सम्मानित किया जा चुका है। २०१४ में शिवानी को राज्यस्तरीय ^तीलू रैतोली पुरुस्कार^ से नवाजा जा चुका है। २०१६ में तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत द्वारा ^उत्तराखण्ड की बेटियां^ सम्मान से नवाजा गया। इसके अलावा २०१५ में यूथ आइकॉन सम्मान और २०१६ में प्रथम ^उत्तराखण्ड उदय सम्मान^ समारोह में भी उन्हें सम्मानित किया गया उल्लेखनीय कार्य के लिए पीपुल्स चॉइस अवार्ड सहित दर्जनों अन्य सम्मान भी उन्हें मिल चुकें हैं। शिवानी को उत्तराखंड ईयर बुक में भी स्थान मिला है।  

शिवानी गुसांई से हुई बातचीत में उन्होंने बताया कि ^मैं अपने पहाड़ को एडवेंचर पर्यटन से जोड़ना चाहती हूं। ताकि युवा पहाड़ों की ओर आकर्षित हों। मैं चाहती हूं कि बच्चों में नशा और मानसिक विकृति की जगह प्रकृति के प्रति प्यार हो और वे पहाड़ों की सैर करें। जिससे  उत्तराखण्ड के पर्यटन और तीर्थाटन को नई ऊंचाइयां मिल सकें।

शिवानी दुखी हैं कि राज्य बने १७ साल बीत गए लेकिन यहां की सरकारों ने पहाड़ों के विकास के लिए ठोस धरातलीय कार्यों को अमलीजामा नहीं पहनाया। जो लोग अपने अपने स्तर से कार्य भी कर रहें हैं उन्हें कभी भी प्रोत्साहन नहीं दिया] बल्कि उनकी निरंतर उपेक्षा कर हतोत्साहित किया] सरकारें आये दिन भाषणों में खेलों और साहसिक खेलों में उल्लेखनीय कार्य करने वाले युवाओं को उचित सम्मान और सरकारी नौकरी देने की बात तो करती रही हैं लेकिन हकीकत कुछ और है। ऐसे में कोई युवा क्यों इस ओर अपना भविष्य तलाशेगा? लेकिन मैं इन सबसे हार मानने वाली नहीं हूं] क्योंकि मैं पहाड़ की माटी की बेटी हूं। पहाड़ की बेटी ने कभी भी हारना नहीं सीखा है। 


आजादि की प्रतिमा हटाने पर जनाक्रोश

  • अली खान

रुड़की ¼हरिद्वार½। नगर के सिविल लाइंस क्षेत्र में चंद्रशेखर चौक पर स्थित स्वतंत्रता सेनानी चंद्रशेखर आजाद की प्रतिमा को हटवाए जाने को लेकर उठा विवाद शांत नहीं हो पा रहा है। कई संगठनों के कार्यकर्ताओं ने प्रतिमा हटाए जाने के विरोध में स्थानीय भाजपा विधायक प्रदीप बत्रा की नगर में शव यात्रा निकाली और उनका पुतला दहन किया। प्रदर्शनकारियों ने रोष जाहिर किया कि शहीद आजाद की प्रतिमा हटाया जाना उनका अपमान है। उन्होंने प्रतिमा हटाए जाने के विरोध में हिंदू रक्षक दल] यंग इंडिया] ब्राह्मण जागृति मंच और भारतीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी संगठन के कार्यकर्ता रुड़की टॉकिज पर एकत्र हुए। यहां से संगठनों के कार्यकर्ताओं ने विधायक प्रदीप बत्रा के पुतले की शव यात्रा निकाली। यह यात्रा सिविल लाइंस होते हुए चंद्रशेखर चौक पर पहुंची। जहां कार्यकर्ताओं ने विधायक के विरुद्ध जमकर नारेबाजी की। कार्यकर्ताओं ने यहां पर आयोजित जनसभा में कहा कि प्रदीप बत्रा ने निजी स्वार्थ साधने के चक्कर में शहीद की प्रतिमा हटवाई। यंग इंडिया के अध्यक्ष आशीर्वाद सैनी ने कहा कि अगर चंद्रशेखर आजाद की प्रतिमा को ससम्मान पुराने स्थान पर नहीं लाया गया तो सड़कों पर उतर कर भाजपा और उसके विवादित विधायक के खिलाफ आंदोलन किया जाएगा। हम इस मामले को लेकर कोर्ट में भी जाएंगे।

हिंदू रक्षक दल के जिलाध्यक्ष आदित्य चौहान ने कहा कि शहर विधायक ने चंद्रशेखर आजाद की प्रतिमा को हटाकर शहीदों का भारी अपमान किया है जिसे बर्दाशत नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि कथित सौंदर्यीकरण के नाम पर विधायक शहर पर कब्जा करने का प्रयास कर रहे हैं] जबकि आम नागरिकों के हितों की पूरी तरह से अनदेखी की जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि विधायक अपने आर्थिक हित साधने के लिए शहर में गुंडागर्दी को बढ़ावा देकर जनता को आतंकित कर रहे हैं। 

 

 

 

 
         
 
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मिथुन नाम के शिक्षक ने दिखाया है कि अगर आप में कुछ सार्थक करने का जज्बा हो तो रास्ता खुद&ब&खुद बन जाता है। मिथुन अमृतसर के देहाती क्षेत्र नंगली में करीब डेढ़ सौ बच्चों को पढ़ाते हैं।

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