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vad 23 25-11-2017
 
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आवरण कथा
 
देहभूमि बना हरिद्वार

गुंजन कुमार@अरुण कश्यप

सदियों से सनातन धर्मावलंबियों के लिए आस्था की नगरी रही हरिद्वार में अब जिस्मफरोशी का धंधा भी होने लगा है। इस धंधे को चमकाने के लिए इंटरनेट और मोबाइल जैसे साधनों का जमकर इस्तेमाल हो रहा है। वॉट्सअप पर ग्राहकों को लड़कियों की फोटो भेजकर रेट तय कर लिए जाते हैं। ग्राहकों को उनकी जेब के अनुसार आलीशान होटल भी उपलब्ध करवा दिए जाते हैं। इन होटल व्यवसायियों की राजनीति और प्रशासन में ऊंची पहुंच होती है। लिहाजा पकड़ में आने के बावजूद वे फिर से अपना धंधा शुरू कर लेते हैं। हाइटेक सेक्स रैकेट के साथ ही रेलवे स्टेशन और औद्योगिक क्षेत्र के आस&पास भी देह व्यापार का धंधा चल रहा है

 

देर रात तक मेरे जीमेल एकाउंट में आते व्यर्थ के संदेश स्पैम में अपनी जगह बना लेते हैं। सेक्स को परोसते ये संदेश ग्राहक को लुभाने की कोशिश करते नजर आते हैं। मुझे भी अपना ग्राहक समझ कर भेजे गए एक संदेश में संपर्क करने के लिए बाकायदा मोबाइल नंबर दिया गया। उस मोबाइल नंबर पर यह सोच कर फोन किया कि शायद वह बंद हो। लेकिन आश्चर्य का तब ठिकाना नहीं रहा] जब फोन करने पर दूसरी तरफ \kaVh बजने लगी। दो&तीन बार \kaVh बजते ही एक पुरुष की आवाज आई। बिना हाय! हैलो के उसने सीधा दो&तीन सवाल दाग दिए। किस उम्र की] कैसी और कहां की लड़की चाहिए\ कई संदेहों से उठा&पटक करते दिमाग में इसका कोई उत्तर नहीं सूझ रहा था। उसे परखने के लिए मैंने बोला] १६ साल की। मिलेगी\ जवाब आया] हरिद्वार में आज नहीं अगले हफ्ते उपलब्ध करा दूंगा। इतना सुनते ही एक और झटका लगा। उसकी बात से इतना पता चल गया कि दलाल हरिद्वार का है और वहीं सैक्स रैकट चलाता है। उस धर्म नगरी हरिद्वार से जो कि सनातन धर्म के लोगों की गहरी आस्था का केंद्र रही। देवभूमि] देवनगरी] कुंभनगरी इस तरह के कई नामों से हरिद्वार की पहचान है। लेकिन गलत तरीके से पैसा कमाने की हवस यहां के वातावरण को दूषित कर रही है।

 हरिद्वार सनातन धर्मावलंबियों का बहुत बड़ा तीर्थ स्थल है। ऋषि&मुनियों] साधु&सन्यासियों और आश्रमों के इस शहर ने जैसे&जैसे औद्योगिकरण का रूप लिया] वैसे&वैसे यहां अपराध भी पैर पसारने लगा। सिर्फ औद्योगिकरण ही क्यों\ तीर्थाटन और पर्यटन के द्घालमेल ने भी हरिद्वार को धर्मनगरी से अधर्मनगरी की ओर धकेलने का काम किया। आज यहां वह सभी अपराध धड़ल्ले से अपने पैर पसार चुके हैं जो कभी मैट्रो सिटीज में हुआ करते थे। दिल्ली एनसीआर से लेकर आस&पास के लोग कहने को तो पापहारिणी गंगा में डुबकी लगाकर अपने सभी पाप धोने ¼मान्यता के अनुसार½ हरिद्वार आते हैं। लेकिन यहां आने वाले कई लोगों का ध्येय गंगा स्नान नहीं बल्कि मौज मस्ती करना रह गया है। हरिद्वार में चल रहा सेक्स रैकेट तो इसी ओर इशारा कर रहा है।

मेल में आये संदेश और फोन पर दलाल से हुई बात के बाद ^दि संडे पोस्ट^ टीम ने इसकी इन्वेस्टिगेशन शुरू की। हरिद्वार के संवाददाता अरुण कश्यप और मैंने मिलकर इसकी तह तक जाने का प्रयास किया। सबसे पहले हमने गूगल पर ^हरिद्वार कॉल गर्ल^ सर्च किया। सर्च करने पर आंखें खुली की खुली रह गईं। या कहें पहली बार यह भी अहसास हुआ कि हम बहुत पीछे हैं] क्योंकि गूगल पर एक&दो नहीं बल्कि दर्जनों ऐसी साइट हैं जो हरिद्वार में कॉल गर्ल उपलब्ध कराती हैं। ^एस्कोर्ट सर्विस इन हरिद्वार^] ^हॉट देहरादून कॉल गर्ल^] ^प्रीति त्यागी डॉट इन^ जैसी साइटों पर लड़कियों और उनके दलालों के नंबर उपलब्ध हैं। इन नंबरों पर फोन कर हरिद्वार में कॉल गर्ल की सेवा ले सकते हैं। कई बार दिल्ली से हरिद्वार आने वाले पर्यटक इन्हीं साइटों से कॉल गर्ल की एडवांस बुकिंग करते हैं।

इन  साइटों पर उपलब्ध नंबरों पर फोन करना शुरू किया। पहला नंबर स्विच ऑफ बताया। दूसरे नंबर ८९३७xxxx८३ पर फोन लग गया। इस बार पहले कि तरह सीधा सवाल नहीं दागा गया। बात शुरू होने पर दलाल ने अपना नाम तो नहीं बताया पर उसने इतना जरूर कहा कि पुरुषों का मन बहलाना अच्छा लगता है। सैक्स को उसने आत्मसंतुष्टि] उर्जावान बनाने के साथ एकाग्रता के लिए जरूरी बताया। दूसरी तरफ उसने अपने को सही बताते हुए यह भी बताया कि हम किसी लड़की को जबरदस्ती सेक्स करने को मजबूर नहीं करते। लड़की अपनी इच्छा से ही कॉल गर्ल बनती है। उसे कम समय में ज्यादा से ज्यादा पैसा कमाने की इच्छा होती है। कुछ लड़कियां प्यार और अपनी सेक्स भूख को मिटाने के लिए इसमें आती हैं। बात और आगे बढ़ने से पहले हमने लड़कियों को फोटो मांगी। इस पर दलाल ने हमें अपने वॉटसअप नंबर से ^हाय^ लिखकर भेजने को कहा। जिसके बाद वह हमें वॉटस अप पर फोटो भेजता। जिसके बाद हरिद्वार संवाददाता अरुण कश्यप के मोबाइल नंबर से उसे ^हाय^ लिखकर संदेश भेजा गया।

अरुण कश्यप& हाय!

इसके बाद दलाल ने करीब एक दर्जन लड़कियों के फोटो वॉट्सअप पर भेजे। फोटो भेजने के बाद वॉट्सअप चैट पर बातचीत का सिलसिला शुरू हुआ।

अरुण कश्यप& ऐनी सिंपल गर्ल

दलाल& और नहीं है

अरुण कश्यप& और फोटो है तो सेंड कर दीजिए।

दलाल& फुल नाइट ४ श   + + + १०००० रुपए। हरिद्वार के लिए।

अरुण कश्यप& आपको बोला था] थोड़ा कम कीमत वाली। ४ से ५ हजार के रेंज वाली।

कुछ \kaV ksa बाद फिर से वॉट्सअप पर चैट होता है

अरुण कश्यप& हैलो!

दलाल& कम रेट में नहीं है।

अरुण कश्यप& कोई बात नहीं दिन में चलेगा।

अरुण कश्यप& ८००० रुपए फाइनल कर दो।

अरुण कश्यप& नाइट के लिये] ८००० रुपए मैं दे दूंगा।

दलाल& हरिद्वार

अरुण कश्यप& हां] हरिद्वार में ही चाहिए।

दलाल& ओके

अरुण कश्यप& कब भेजोगे।

दलाल& कब चाहिए।

अरुण कश्यप& कल या अगले शनिवार

दलाल& ओके।

अरुण कश्यप& कल हो जाएगा क्या\

दलाल& जब चाहो] बता देना। जब चाहिए] उससे पहले बता देना।

अरुण कश्यप& कल किस टाइम

दलाल& ¼ऑडियो क्लिप में बोला½ आप लड़की के नंबर पर १५० का रिचार्ज करा दीजिए। वह बाद में आकर पेमेंट ले लेगी।

अरुण कश्यप& ओके] नंबर सेंड कर दो।

दलाल& ¼ऑडियो क्लिप में½ जिस समय रिचार्ज करने शॉप पर पहुंचोगे उस वक्त नंबर दे दूंगा।

अरुण कश्यप& ठीक कल १० बजे।

दलाल& ओके।

अगले दिन

अरुण कश्यप& ¼लाल कपड़ा पहनी एक लड़की का फोटो पसंद कर कहा½ इसे भेज दो

दलाल& भाई! ये तो नहीं मिलेगी। इसकी तबीयत खराब है।

अरुण कश्यप& ¼दूसरी लड़की का फोटो पसंद कर½ ये भेज दो फिर

दलाल& दिन में।

अरुण कश्यप& ¼तीसरी लड़की का फोटो पसंद कर½ या फिर ये वाली।

दलाल& अभी चाहिए ना। कहां लेकर जाओगे।

अरुण कश्यप& रूम की व्यवस्था तुम करोगे या मैं खुद करा लूं।

दलाल& मैं करा दूंगा। ८००० लगेगा।

अरुण कश्यप& करा दो यार प्लीज। ये कल ही डन हो गया था।

दलाल& रूम का अलग।

अरुण कश्यप& कितना\

दलाल& कहां मिलोगे\

अरुण कश्यप& रानीपुर मोड़ पर मिल जाऊंगा।

दलाल& ओके।

अरुण कश्यप& कब मिलोगे\

दलाल& कितनी देर में] आ जाओ] ३० मिनट में।

अरुण कश्यप& एक \kaVs बाद।

दलाल& ओके।

अरुण कश्यप& कॉल करूंगा] एक \kaVs बाद फोन उठा लेना।

दलाल& ओके।

आधा \kaVs बाद एक लड़की का फोटो भेजकर दलाल ने कहा] ये भी सुंदर है।

अरुण कश्यप& इसका क्या रेट है\

दलाल& सेम

अरुण कश्यप& किस होटल में अरेंजमेंट करोगे\

दलाल& अब कल बात करना। आज नहीं है।

अरुण कश्यप& कहां हो\ आज ही चाहिए। आधे \kaVs में कहां मिलोगे बताओ\

यहां हम लोग फिर अपने को पिछड़ा महसूस करने लगे] क्योंकि हम उसे दिए समय से आधा \kVk बाद तय स्थान पर पहुंचे। जिसके बाद शायद उसे संदेह हो गया। यहां एक तकनीकी गलती ने भी हमारा रास्ता रोक दिया। हरिद्वार संवाददाता अरूण कश्यप के फोन से चैट करने पर उसे आभास हो गया कि हम लोग ग्राहक नहीं बल्कि पत्रकार हैं। दरअसल वह अरुण के वॉट्सअप डीपी में उसके फोटो को पहचान गया। चूंकि हरिद्वार छोटा शहर है इसलिए दलाल वॉट्सअप डीपी में अरुण के लगे फोटो को पहचान गया।

दलाल को हमारे पत्रकार होने का अहसास हुआ और हम अब तक के अपने इन्वेस्टिगेशन में यह जान गए। धर्मनगरी सेक्स की मंडी बन गई है। इन दिनों धर्मनगरी में जिस्मफरोशी का धंधा कैसे फल&फूल रहा है। इंटरनेट के माध्यम से इसे बढ़ावा दिया जाता है। ताकि हरिद्वार में बैठे&बैठे देश भर के ग्राहकों तक अपनी पहुंच बना सकें। एक बार संपर्क होने के बाद इंटरनेट या फिर वॉट्सअप के माध्यम से लड़कियां पसंद कराई जाती हैं। इनके पास हर उम्र की] अलग&अलग राज्यों की लड़की होती है। इनका रेट उम्र] आकर्षण आदि पर अलग&अलग फिक्स होता है। फिर ग्राहक जिस लड़की को पसंद करते हैं उसे तय की गई कीमत की आधी रकम देकर लड़की भेजी जाती है। बाकी आधा अमाउंट भी लड़की ही ले लेती है। यही नहीं इस तरह सेक्स रैकेट के संचालक धर्मनगरी के कई होटलों में इतनी गहरी पैठ बनाए हुए हैं कि वे अपने ग्राहकों को आसानी से किसी भी वक्त साधारण से लेकर लग्जरी तक के कमरे उपलब्ध करा देते हैं। होटलों के रूम का किराया कस्टमर को अलग से देना होता है। एक अनुमान के अनुसार धर्मनगरी में इन दिनों लगभग ३ से ४ दर्जन ऐसे रैकेट सक्रिय हैं। ये एस्कॉर्ट सर्विस उपलब्ध कराते हैं। इनमें से कुछ रैकेट केवल वीकेंड या बड़े मौकों पर ही सक्रिय होते हैं। इसका खुलासा भी कांवड़ मेले के दौरान हुआ। हरिद्वार कोतवाली क्षेत्र में पकड़ी गई महिलाओं ने इसका खुलासा किया था। 

श्रवणनाथ नगर स्थित दर्जनों होटल और गेस्ट हाउस इस तरह के देह व्यापार के लिए सबसे सुरक्षित और मशहूर हैं। यहां के कई होटल पहले भी जिस्मफरोशी के धंधे को पनाह देने के लिए पुलिस और एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग सेल की कार्रवाई का शिकार हो चुके हैं। इसके बादजूद इन इलाकों के होटल इस प्रकार के काम में लगे हुए हैं। छापेमारी के बाद होटलों को कुछ समय के लिए सील किया जाता है मगर कुछ समय बाद फिर खेल दिया जाता है। जिसके बाद होटल फिर से अपने इस काम में लग जाते हैं। हरिद्वार के स्थानीय लोगों का मानना है कि इस क्षेत्र के होटल व्यवसायियों में से अधिकतर की राजनीति और प्रशासनिक क्षेत्र में पकड़ है। इसी वजह से होटलों पर स्थायी रूप से कोई कार्रवाई नहीं होती है।

हरिद्वार में तीन अलग&अलग रूप में सेक्स का धंधा चल रहा है। पहला] इंटरनेट के माध्यम से कॉल गर्ल के रूप में। यह हाई लेवल पर किया जाता है। इसमें १०००० से ऊपर प्रति नाइट का रेट होता है। इसे ग्राहक हरिद्वार और हरिद्वार के बाहर देहरादून] मसूरी] धनौल्टी जैसे टूरिस्ट प्लेस पर ले जाकर मौज मस्ती करते हैं। इनकी एडवांस बुकिंग नेट के माध्यम से की जाती है। दूसरा यह सेक्स रैकेट हरिद्वार के छोटे एवं मंझोले आकार के होटलों से चलाया जाता है। हरिद्वार के कई होटलों में लड़कियां उपलब्ध कराई जाती हैं। हरिद्वार में अब अधिकतर समय पर्यटक आते हैं। सीजन के समय जरूर भीड़ ज्यादा होती है। सीजन के समय होटलों के रूमों की तर्ज पर इन लड़कियों का रेट भी बढ़ जाता है। इस काम में लगे एक दलाल के अनुसार सीजन के समय कोई भी लड़की फुल नाइट के लिए नहीं जाती। उस वक्त लड़कियां \kaVksa में काम करती हैं। यदि कोई फुल नाइट के लिए ले जाना चाहता है तो उस वक्त मुंह मांगा रेट वसूल किया जाता है।

तीसरे किस्म का सेक्स रैकेटघ्धर्मनगरी की सड़कों से संचालित किया जा रहा है। धर्मनगरी हरिद्वार का रेलवे स्टेशन इसका मुख्य अड्डा बना हुआ है। देश भर से अधिकतर तीर्थ यात्री रेल से ही हरिद्वार आते हैं। सीजन के समय तीर्थ यात्रियों को होटल] धर्मशाला नहीं मिलने पर तीर्थ यात्री रेलवे स्टेशन पर ही रात बिताते हैं। उसी रेलवे स्टेशन में रात होते ही रोजाना सेक्स का धंधा परवान चढ़ने लगता है। जैसे&जैसे रात चढ़ती है] वैसे&वैसे यह धंधा भी जोर पकड़ने लगता है। रात जवां होते ही हर रोज हरिद्वार का रेलवे स्टेशन रेड लाइट एरिया बन जाता है। आमतौर पर रात १० बजे के बाद शुरू होने वाले इस धंधे में दर्जनों महिलाएं यहां मिल जाएंगी। जो बाहर से आने वाले यात्रियों को अपनी ओर आकर्षित करती हैं। सौदा तय हो जाने के बाद ये महिलाएं ग्राहकों के स्टेशन के आसपास स्थित होटलों में लेकर चली जाती हैं। यहां इस धंधे में लिप्त महिलाओं की टोली पूरी रात आराम से \kwerh देखी जा सकती है। इनमें से अधिकांश महिलाएं ४० पार कर चुकी होती हैं जो केवल २०० से लेकर ५०० रुपये तक में रात भर के लिए अपने जिस्म का सौदा करती हैं।

हरिद्वार के औद्योगिक क्षेत्र सिडकुल में भी सेक्स का धंधा खुलेआम चलता है। सिडकुल के किरबी चौक के करीब स्थित सिडकुल थाने चेकपोस्ट के पीछे वाली सड़क जिस्मफरोशी के लिए बदनाम है। इस सड़क मैं सुबह से लेकर शाम तक जिस्म बेचने वाली युवतियां और महिलाएं आसानी से मिल जाएंगी। बात तय हो जाने के बाद ये महिलाएं खुद आपको सिडकुल हरिद्वार के समानाथी स्थित होटलों में ले जाएंगी। होटल का रेट ग्राहक को अलग से देना पड़ता है। सिडकुल में काम करने वाले सैकड़ों लोगों को सेक्स की यह मंडी स्वतः ही अपनी ओर खींच लाती है।

पुलिस की कार्यवाही सेक्स रैकेट को लेकर होती रहती है। हरेक महीने एक&दो सेक्स रैकेट का खुलासा पुलिस करती है। मगर उसकी पकड़ में निचले स्तर की सेक्स वर्कर ही आती हैं। छोटे होटल या रेलवे स्टेशन से सेक्स का धंधा चलाने वाली महिलाएं ही पुलिस गिरफ्त में आती हैं। बड़े स्तर पर इंटरनेट के माध्यम से चल रहे कॉल गर्ल बाजार तक पुलिस नहीं पहुंच पाती है। हरिद्वार के बड़े होटलों में दिल्ली और बाहर से आने वाले बड़े द्घरानों के लोगों तक पुलिस नहीं पहुंच पाई है। पुलिस पर सवाल इसलिए भी उठता है कि इंटरनेट पर खुले रूप से साइटों के माध्यम से कॉल गर्ल की बुकिंग होती है। हम दलाल और कॉल गर्ल तक पहुंचने में कामयाब हुए। लेकिन पुलिस इनके आस&पास भी नहीं पहुंच पा रही है। 

 

 

^गरीबी मुख्य वजह^

हरिद्वार में ह्यूमन ट्रैफिकिंग सेल की इंचार्ज साधना त्यागी से बातचीत के मुख्य अंश

धर्मनगरी हरिद्वार में सेक्स रैकेट के इतने जोर-शोर से चलने का क्या कारण मानती हैं\

इसके कई कारण हैं। एक तो हरिद्वार में इंडस्ट्री बहुत ज्यादा हैं। देश के गरीब क्षेत्रों की महिलाएं यहां की फैक्ट्रियों में नौकरी दिलाने का लोभ देकर लाई जाती हैं। जिन्हें जिस्म बेचने के धंधे में लगा दिया जाता है। दूसरा] वीकएंड पर यहां बहुत से लोग मौज-मस्ती करने के मूड में आते हैं। जिस कारण यह धंधा यहां चलने लगा है।

तो फिर पुलिस प्रशासन क्या कर रहा है\

पुलिस अपनी सूचनाओं और शिकायत पर कार्यवाही करती है। हमारे ही सेल ने पिछले तीन माह में दस रेड डाले। जिसमें कई अभियुक्तों को पकड़ा गया है। सेक्स रैकेट का पर्दाफाश करने के लिए होटलों में छापेमारी की जाती है।

इन सेक्स रैकेटों में क्या ह्यूमन ट्रैफिकिंग का भी सहारा लिया जाता है\

हां] ऐसा होता है। गरीब ?kj की लड़कियों और महिलाओं को नौकरी देने के नाम पर यहां सेक्स बाजार में उतार दिया जाता है। 

 


इस तरह के सभी सेक्स रैकेट पर शीद्घ्र नकेल कसी जाएगी।

कृष्ण कुमार वीके] एसएसपी हरिद्वार

 

इंटरनेट के जरिए जितने भी सेक्स रैकेट संचालित हो रहे हैं] वह हमारे सर्विलांस पर हैं। आप जिनके बारे में छापेंगे] उनको भी हम सर्विलांस पर लेंगे। इसके बाद क्रमबद्ध तरीके से इस तरह के गिरोह का पर्दाफाश किया जाएगा।

दीपक रावत] जिलाधिकारी हरिद्वार

 


बढ़ता सेक्स बाजार

हरिद्वार ही नहीं देश के तमाम अन्य मेट्रो शहरों में भी इंटरनेट के माध्यम से कॉल गर्ल की बुकिंग होती है। ये कॉल गर्ल अधिकतर अच्छे द्घरों की लड़कियां होती हैं। कई कॉलेजों में पढ़ने वाली या फिर संभ्रांत परिवार की नई शादीशुदा महिलाएं होती हैं। इनमें से अधिकतर महिलाएं अपने सेक्स साथी से संतुष्ट नहीं होती हैं। जिस कारण वे कॉल गर्ल बन जाती है। कैजुअल सेक्स पर २०११ के सर्वेक्षण में एक पत्रिका में बताया गया कि ३२ फीसदी सेक्स संबंध बिल्कुल अजनबियों के साथ हुए। जिनमें से ३८ फीसदी संबंध एक द्घंटे से ज्यादा तक नहीं चले। जबकि कुछ संबंध कुछ दिनों तक भी चले। इनमें से एक तिहाई में महिलाओं के द्वारा पहल की गई। लेकिन इनमें सबसे मजेदार बात यह है कि एक तिहाई मामलों में पांच में से एक मामले में ये संबंध तीन वर्षों तक भी कायम रहते हैं।

सेक्स और बाजार का संबंध आज का नहीं यह लंबे अरसे से होता आ रहा है। यहां तक कि कॉमर्शियल सेक्स वर्कर को प्रोस्टिट्यूट कहा जाता है। जो कि अपने काम की मान्यता को लेकर la?k"kZ कर रहे हैं। आज इस धंधे से पैसा कमाने की तरफ ज्यादा संख्या में लोग जुड़ रहे हैं।

अब इसके लिए नए तरीके और तकनीकों का भी भरपूर इस्तेमाल किया जा रहा है। डेटिंग के लिए एप बाजार में मौजूद हैं। ये सभी मेट्रिमोनियल साइट से अलग हैं। वर्तमान में इस बाजार का आकार १३ करोड़ डॉलर से भी ऊपर चला गया है जो बढ़ोतरी की ओर अग्रसर है। डेटिंग साइटों का दावा है कि भारत में लगभग ६० लाख लोग इस तरह की डेटिंग साइटों पर अपने अकाउंट खोल चुके हैं। टिंडर इंडिया ने दावा किया है कि आज एक दिन में १४ मिलियन स्वाइप्स होते हैं जो कि सितंबर २०१५ में ७५ लाख तक ही थे। सेक्स संबंधी गतिविधियों को डाउनलोड करने में एक लाख एक्टिव यूजर हैं जो कि लगभग दो मिलियन डाउनलोड करते हैं। ऐसे यूजर की संख्या में ४० फीसदी १८ से २६ वर्ष की आयु के हैं जो कि मुख्यतः छोटे शहरों और कस्बों के हैं। वर्तमान में इस तरह का बिजनेस ३००० करोड़ रुपये के आसपास है और २०२० तक यह ९००० करोड़ रुपये को पार कर जाएगा।

 

१९९८ के बाद से आए डिजिटल बदलाव ने भारतीय जीवन शैली को काफी अधिक प्रभावित कर दिया है। एक रिपोर्ट के अनुसार भारत में ३५ करोड़ लोग इंटरनेट के एक्टिव यूजर हैं, जिनमें से २८ .९ करोड़ यूजर शहरी क्षेत्रों के हैं। वे अधिकांशतः मोबाइल के माध्यम से इंटरनेट का उपयोग करते हैं। इनमें से २५ फीसदी उपयोगकर्ता महिलाएं हैं। इंटरनेट से यह सुविधा मिली है कि यह आपकी निजता को बनाए रखता है और परिवार में कोई संकट आए बिना ही आपकी इच्छाओं का समाधान करता है। लेकिन गलत धंधों में लिप्त लोग आधुनिक सूचना तकनीकी का दुरुपयोग करने लगे हैं।

 

 gunjan@thesundaypost.in


 
         
 
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  • कृष्ण कुमार

रैबार कार्यक्रम को लेकर सरकार की मंशा पर सवाल उठ रहे हैं। लोग हैरान हैं कि जब मुख्यमंत्री गढ़वाली बोली में जनता से विकास के सुझाव मांग रहे

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