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vad 14 23-09-2017
 
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सरगोशियां
 
जीत उमा की

मोदी मंत्रिमंडल में हुए फेरबदल का एक रोचक हिस्सा केंद्रीय मंत्री उमा भारती की कुर्सी का बच जाना रहा। सूत्रों की मानें तो उमा को कैबिनेट से बाहर किए जाने का निर्णय  पीएम मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने ले लिया था। स्वयं शाह ने उमा भारती को फेरबदल से पहले इस्तीफा देने का निर्देश दे दिया था। उमा लेकिन ठहरी हठी। उन्होंने शाह के निर्देश को दरकिनार कर राष्ट्रीय स्वयं सेवक la?kके दरबार में गुहार लगाई। रामंदिर आंदोलन की अग्रणी नेता रही उमा को la?kका हमेशा से आशीर्वाद मिलता आया है। जानकारों के अनुसार जब वृंदावन में la?kप्रमुख से भाजपा अध्यक्ष मिले तो उन्हें उमा भारती को मंत्री बनाए रखने का सुझाव la?kप्रमुख ने दिया। अब चूंकि la?kभाजपा की रीढ़ है इसलिए चाहकर भी पीएम और भाजपा अध्यक्ष उमा को कैबिनेट से बाहर न कर सके। अपने विद्रोही तेवरों के लिए जानी जाती रहीं उमा भारती ने नए मंत्रियों के शपथ ग्रहण समारोह में जाना तक उचित नहीं समझा। जब शपथ ग्रहण हो रहा था तब उमा राजधानी से कोसों दूर झांसी में एक कार्यक्रम में शिरकत कर रही थीं। खबर है कि उमा की इस जीत से पार्टी का वह खेमा खासा प्रसन्न है जिन्हें भाजपा के नए अवतार में महत्व नहीं दिया जा रहा है। कानाफूसी इस बात पर भी जबरदस्त हो रही है कि भाजपा के दो दिग्गज नेता आडवाणी और जोशी भी वर्तमान नेतृत्व से अपनी नाराजगी के चलते शपथ ग्रहण में नहीं पहुंचे।

 

संकट में योगी

उत्तर प्रदेश के फायर ब्रांड सीएम योगी आदित्यनाथ इन दिनों चौतरफा संकटों से द्घिरे बताए जा रहे हैं। उनके गृहक्षेत्र गोरखपुर में स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली के चलते गंभीर आलोचना का शिकार बन रहे योगी को लखनऊ राजभवन से भी सहयोग न मिलने की खबरें आ रही हैं। जानकारों की मानें तो योगी सरकार ने राजभवन को कई निगमों में अध्यक्ष पदों की नियुक्ति संबंधी फाइलें भेजी हैं। राज्यपाल लेकिन इन फाइलों पर अपने हस्ताक्षर नहीं कर रहे हैं। खबर यह भी है कि भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के करीबी समझे जाने वाले उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के भी सीएम संग रिश्ते सहज नहीं हैं। इतना ही नहीं राज्य की नौकरशाही का एक हिस्सा योगी को अपेक्षित सहयोग नहीं दे रहा है। सीएम के लिए मोदी मंत्रिमंडल में हुआ फेरबदल भी सुखद समाचार लेकर नहीं आया है। गोरखपुर की राजनीति में उनके प्रतिद्वंद्वी कहे जाने वाले शिवप्रताप शुक्ला को केंद्रीय मंत्री बनाया जाना भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व द्वारा योगी को उनके ही गृहक्षेत्र में ?ksरus की रणनीति का हिस्सा बताया जा रहा है। अपने विद्रोही तेवरों के चलते सुर्खियों में रहने वाले योगी आदित्यनाथ को शायद अब समझ आ रहा होगा कि शासन चलाने के लिए केवल तेवर नहीं] व्यवहार कुशलता भी बेहद जरूरी है।

 

सकते में नीतीश

मोदी मंत्रिमंडल में हुए फेरबदल से पहले बड़ी चर्चा थी कि नीतीश कुमार के दो सांसदों को केंद्र में मंत्री बनाया जा रहा है। रेलमंत्री रहते नीतीश कुमार के निजी सचिव आरसीपी सिंह को महत्वपूर्ण मंत्रालय मिलने की भी खबर थी। लेकिन ऐसा कुछ हुआ नहीं। जानकारों का कहना है कि नीतीश कुमार को इससे भारी सदमा पहुंचा है। कहने वाले यह भी कहते सुने जा रहे हैं कि पीएम मोदी ने सुशासन बाबू को उनकी एनडीए में वापसी के बाद दो झटके दे दिए हैं। २६ अगस्त को जब मोदी बिहार में आई बाढ़ का सर्वेक्षण करने गए तो नीतीश कुमार ने उनके लिए लंच की व्यवस्था की थी। पीएम लेकिन बगैर नीतीश संग लंच किए ही दिल्ली लौट गए। तब यह माना गया था कि २०१० में विधानसभा चुनाव से ठीक पहले जिस प्रकार नीतीश कुमार ने मोदी का विरोध करते हुए भाजपा के राष्ट्रीय नेताओं को दिए जाने वाले रात्रि भोज को कैंसिल कर दिया था] पीएम ने उसका जवाब नीतीश के लंच में न जाकर दिया। अब की बार जद (यू) के सांसदों को मंत्री तो नहीं ही बनाया] बिहार की राजनीति में नीतीश के धुर विरोधी अश्विनी चौबे को मंत्री बना पीएम ने स्पष्ट संकेत देने का काम किया है कि वे अपने विरोधियों को माफ नहीं करते। गौरतलब है कि बिहार भाजपा नेताओं में जहां सुशील मोदी की नीतीश कुमार संग अच्छी ट्यूनिंग है] वहीं गिरिराज सिंह और चौबे नीतीश के विरोधी रहे हैं। गिरिराज पहले से ही मोदी मंत्रिमंडल के सदस्य हैं। अब चौबे को भी केंद्रीय मंत्री बना पीएम ने रही&सही कसर भी पूरी कर दी है। लालू यादव नीतीश की इस स्थिति पर जमकर चुटकी लेते फिर रहे हैं।

उत्तराखण्ड में त्रिवेंद्र सिंह रावत सरकार का गठन हुए जुम्मा&जुम्मा पांच माह ही हुए हैं लेकिन सोशल मीडिया में मंत्रिमंडल के ऋतु बनेंगी मंत्रीपुनर्गठन को लेकर जमकर कयासबाजी का दौर शुरू हो गया है। जानकारों की मानें तो भाजपा आलाकमान त्रिवेंद्र सरकार की परफॉरमेंस से खासा खुश नहीं है। शायद यही कारण है कि राज्य मंत्रिमंडल में फेरबदल की अफवाहों को बल मिलने लगा है। भाजपा सूत्रों की मानें तो पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज और शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक के बीच वर्चस्व की जंग का सीधा नुकसान पार्टी को हो रहा है। कांग्रेस से भाजपा में आए एक अन्य मंत्री हरक सिंह रावत खुलकर सीएम की कार्यशैली पर प्रश्न चिह्न लगा रहे हैं तो स्वयं सीएम अपने शिक्षा मंत्री अरविंद पाण्डे से नाराज चल रहे हैं। ऐसे में पार्टी के भीतर से ही मंत्रिमंडल में फेरबदल की मांग पांच माह के भीतर उठना सीएम की क्षमता पर प्रश्न चिह्न लगाता है। खबर जोरों पर है कि जब कभी भी मंत्रिमंडल में फेरबदल होगा तब पूर्व सीएम जनरल खण्डूड़ी की पुत्री ऋतु खण्डूड़ी को मंत्री बनाया जाना तय है तो दूसरी तरफ कांग्रेस से भाजपा] भाजपा से कांग्रेस और फिर भाजपा में शामिल होने का रिकॉर्ड बना चुकी राज्यमंत्री रेखा आर्य को बाहर का रास्ता दिखाया जाना भी लगभग तय है।

 

 

 

 
         
 
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  • कृष्ण कुमार

चुनाव के समय भाजपा ने अन्य राजनीतिक दलों के नेताओं के लिए दरवाजे खोलकर एक तरह से प्रदेश की राजनीति की दिशा और दशा बदल कर रख दी। प्रदेश में

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