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चुनावी चकल्लस
 
हवा में विपक्षी एकता

जब भी लोकसभा चुनाव होता है तब उसके बहुत पहले से ही विपक्षी एकता का शोर शुरू हो जाता है लेकिन अक्सर ही वह शोर एक सन्नाटे में तब्दील हो जाता है। इस बार क्या होगा सब कुछ धुंध में है। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के मोदी की गोदी में जाते ही विपक्षी एकता धड़ाम से गिर पड़ी। इसकी हवा निकल गई। भीतर ही भीतर यह सरगोशी जोर पकड़ने लगी थी कि आगामी २०१९ के लोकसभा चुनाव में मोदी के मुकाबिल नीतीश विपक्ष का चेहरा हो सकते हैं। लेकिन मोदी नीतीश गठबंधन ने इस हसीन सपने पर पानी फेर दिया। अब विपक्ष को नए सिरे से एक होना है। मगर जो सक्रियता होनी चाहिए वह दिखाई नहीं दे रही। वामपंथी नेता सीताराम येचुरी ने इस पर गहरी चिंता भी व्यक्त की है। उन्होंने कांग्रेस समेत तमाम विपक्षी दलों से भाजपा के खिलाफ सक्रिय रूप से लामबंद होने की अपील भी की है। कुछ लोगों को लग रहा है कि नोटबंदी और जीएसटी के बाद जनता में मोदी के प्रति मोहभंग की प्रक्रिया शुरू हो गई है। लेकिन यह भारत है जहां की जनता को अपनी भावनाओं की अभिव्यक्ति के लिए एक नायक चाहिए। मतलब विपक्ष की ओर से एक सशक्त चेहरे का होना जरूरी है।

 

निशंक&मदन में तानातनी

उत्तराखण्ड में प्रचंड बहुमत वाली भाजपा की सरकार है। इस लिहाज से वहां पार्टी के भीतर शांति होनी चाहिए। मगर है नहीं। वहां पार्टी के भीतर कई स्तरों पर आपसी टकराव जारी है। दो टीमों में एक पूर्व मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल ^निशंक^ और मंत्री मदन कौशिक की है। दोनों के दरम्यान एक लंबे अरसे से कोल्ड वार जारी है। अजीब सा संयोग देखिए कि उत्तराखण्ड के ताजा किट्टी ?kksVkys भी दोनों का एक साथ नाम आया है। बताया जा रहा है कि उन दोनों दिग्गज नेताओं की खास महिलाओं ने किट्टी पार्टी के बहाने द्घोटाला किया। यह भी कि अब दोनों अपनी खास महिलाओं को बचाने में जुटे हैं। कुछ का कहना है कि एक के बाद दोनों अपना पल्ला भी झाड़ सकते हैं। अटकलों के कोई हाथ&पांव नहीं होते। एक चर्चा यह भी है कि कौशिक ने अपनी खास महिला का नाम आने पर निशंक को भी फंसा दिया। असल में इन दोनों के बीच शीत युद्ध की शुरुआत तभी हो गई थी जब निशंक ने हरिद्वार से चुनाव लड़ा। हरिद्वार से मदन कौशिक लगातार विधायक रहे हैं। ऐसे में निशंक के आने से उनको खुद के लिए खतरा महसूस होने लगा है, ऐसी चर्चा है।

 

la?k की चिंता

नोटबंदी की रिपोर्ट रिजर्व बैंक ने जारी कर दी। इस रिपोर्ट ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को dV?kjs में खड़ा कर दिया है। रिपोर्ट के अनुसार सरकार के इस कदम से सरकार को पांच लाख करोड़ रुपए का भारी नुकसान हुआ है। कालेधन की वापसी का नारा भी विफल हुआ। इस दौरान देश में सैकड़ों लोग लाइन में लगने से जो मरे वह अलग। शायद पहली बार है कि नोटबंदी के बाबत रिवर्ज बैंक की रिपोर्ट आने के बाद आम जनता में मोदी को लेकर खिन्नता है, थोड़ी नाराजगी भी है। यह नाराजगी इसलिए अहम हो जाती है कि इसे राष्ट्रीय स्वयं सेवक la?kने गंभीरता से लिया है। खबर है कि la?k के भीतर इस रिपोर्ट और रिपोर्ट के बाद जनता में जन्म ले रही नाराजगी से विचार&मंथन चल रहा है। la?k को इस बात की चिंता है कि अगर इस नाराजगी का विस्तार हुआ तो अगले २०१९ के लोकसभा चुनाव में भाजपा के लिए नुकसानदेह साबित हो सकता है। la?kके भीतर के कुछ लोगों ने इस बात की भी चर्चा की कि जीएसटी के आने से भी एक बड़े वर्ग में मोदी सरकार से नाराजगी है। भले ही la?kको इन बातों पर चिंता है। मगर हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मौज में हैं। उन्होंने साफ किया है कि वे ऐसे सख्त कदम आगे उठाएंगे जो देशहित में हैं।  

 

 

 
         
 
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