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दुनिया 
 
पाक की नई पटकथा

  • सिराज माही

पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान में तमाम सियासी उठापटक के  बाद शाहिद खाकान अब्बासी को नया प्रधानमंत्री चुना गया है। हाल ही में पाकिस्तानी सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ को पनामा पेपर लीक मामले में दोषी पाए जाने पर अयोग्य करार दिया था। इसके बाद प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। यह दूसरी मरतबा है जब पनामा पेपर लीक मामले में किसी प्रधानमंत्री को अपनी कुर्सी गंवानी पड़ी है। इससे पहले पनामा लीक मामले में आइसलैंड के प्रधानमंत्री को भी अपना पद गंवाना पड़ा था।

पाकिस्तान में चुने गए नए प्रधानमंत्री शाहिद अब्बासी विश्वास मत में जीत हासिल कर पाकिस्तान के १८वें प्रधानमंत्री बने हैं। शाहिद खाकान अब्बासी पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज ¼पीएमएल-एन½ की तरफ से अंतरिम प्रधानमंत्री के रूप में नामित थे। अब्बासी नवाज शरीफ सरकार में पेट्रोलियम मंत्री रह चुके हैं। अंतरिम प्रधानमंत्री अब्बासी के बारे में ये कहा जा रहा है कि शहबाज शरीफ जब नेशनल असेम्बली का चुनाव जीत जाएंगे] तब वे उनके लिए कुर्सी खाली कर देंगे और इस तरह शहबाज शरीफ को प्रधानमंत्री बनने का मौका मिल जाएगा। शहबाज शरीफ] नवाज शरीफ के छोटे भाई हैं जो इस वक्त पंजाब प्रांत के मुख्यमंत्री हैं।

नवाज शरीफ के अपने पद से हटने पर वहां के किसी भी प्रधानमंत्री का कार्यकाल पूरा न होने का सिलसिला बदस्तूर जारी रहा। दरअसल] नवाज शरीफ को सत्ता से बेदखल करने में पूर्व क्रिकेटर और पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ प्रमुख इमरान खान का बड़ा हाथ है। सुप्रीम कोर्ट नवाज के खिलाफ कई याचिकाएं दाखिल थी जिनमें से एक इमरान खान की भी थी। इमरान इसी वर्ष अप्रैल में नवाज शरीफ पर आरोप लगाया था कि पनामा गेट स्कैंडल पर शांत रहने के लिए नवाज ने उन्हें दस अरब रुपये का ऑफर दिया था। हालांकि नवाज शरीफ की बेटी ने इसका खंडन किया था।

गौरतलब है कि २०१३ में अमेरिका स्थित एक एनजीओ ने पनामा के मोजैक फोंसेका नामक कानूनी फर्म के कई पेपर्स का खुलासा किया था। इनके मुताबिक अलग-अलग देशों की बड़ी हस्तियों ने अपनी अरबों की संपत्ति का ऐसी जगहों पर निवेश किया] जहां टैक्स का कोई चक्कर नहीं है। पनामा पेपर्स में भारत के भी ५०० लोग भी शामिल हैं] जिनमें से ३०० नामों का खुलासा हो चुका है। लेकिन भारत में इसे गंभीरता से नहीं लिया गया। बहुत से लोग यह मान कर चलते हैं कि पाकिस्तान में लोकतांत्रिक संस्थाएं बेहद कमजोर हैं। जबकि पाकिस्तान सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले ने इस तरह की धारणाओं को नकारा है। यह दुखद है कि जिस तरह से पाकिस्तान और आइसलैंड में पनामा मामले में दोषियों पर कार्यवाई हुई है उस तरह से भारत में नहीँ हुई है।

नवाज शरीफ को उन्नीस सौ अस्सी के दशक में भी अपना पद छोड़ना पड़ा था। इस बार सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें आजीवन अयोग्य ठहराया है। इसलिए उन्हें इस्तीफा देने के लिए बाध्य होना पड़ा। इस मायने में यह एक अपूर्व द्घटना है। नवाज शरीफ तीन बार प्रधानमंत्री रह चुके हैं। पहले भी दोनों दफा कार्यकाल पूरा करने से पहले ही उनकी सरकार चली गई थी। माना जा रहा है कि सुप्रीम कोर्ट के इस कदम से संभव है कि अगले साल होने वाले संसदीय चुनाव में भ्रष्टाचार खास मुद्दा बने।

माना जाता है कि पाकिस्तान में सत्ता पर काबिज इंसान सेना से मुखालफत करके नहीं रह सकता। नवाज शरीफ से वहां की फौज खफा थी इसका खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ा। यह बात इससे भी सिद्ध होती है कि सुप्रीम कोर्ट ने जो जांच समिति बनाई थी उसमें फौज की खुफिया एजेंसी के अफसर भी शामिल थे। अगर इमरान खान की मानें तो नवाज शरीफ और पाक सेना में नहीं बनती थी। इमरान खान के मुताबिक नवाज अपनी सेना के खिलाफ वैसी ही भाषा का इस्तेमाल करते है जैसा कि भारत में मोदी करते हैं। इमरान ने यह भी आरोप लगाया कि आतंकियों के खिलाफ सेना की कार्यवाई से नवाज सरकार नाखुश है। उल्लेखनीय है कि १९४७ से लेकर २०१७ को शरीफ के पद से बाहर होने तक] पाकिस्तान में १८ आम नागरिक प्रधानमंत्री बन चुके हैं। इन सभी को बीच में ही किसी न किसी मजबूरी के चलते अपना पद छोड़कर जाना पड़ा। पाकिस्तान में पहली बार चुनाव १९७० में हुए और जुल्फिकार अली भुट्टो पहले निर्वाचित प्रधानमंत्री बने।

सरकार के खिलाफ प्रदर्शन 

इन दिनों वेनेजुएला में आम नागरिक सरकार के खिलाफ सड़कों पर उतर कर प्रदर्शन कर रहे हैं। प्रदर्शन का कारण यहां राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को असीमित शक्तियां प्रदान करना है। लोगों ने राष्ट्रपति को असीमित शक्ति देने वाले मतदान से दूरी बनाई। प्रदर्शनकारियों एवं बलों के बीच हुए la?k"kZ में १० लोगों की मौत हो गई। मतदान के जरिए सरकार वेनेजुएला पर पूर्ण राजनीतिक प्रभुत्व हासिल करने की पूरी कोशिश कर रही है। सरकार के इस कदम से अमेरिकी प्रतिबंध और नए सिरे से सड़कों पर दंगे होने की आशंका बढ़ गई है। अप्रैल से शुरू हुए इन la?k"kks± में कम से कम १२२ लोगों की मौत हो चुकी है और करीब २]००० लोग ?kk;y हुए हैं। हिंसा के कारण मतदान बुरी तरह प्रभावित हुए थे। प्रदर्शनकारियों ने मतदान केंद्रों पर हमला किया जिसके जवाब में सुरक्षा बलों ने गोलीबारी की। अर्जेंटीना] कोलंबिया] पेरू] पनामा और अमेरिका का कहना है कि वे इस मतदान को मान्यता नहीं देंगे। कनाडा और मैक्सिको ने भी चुनाव को अस्वीकार करने के संबंध में बयान जारी किया है। इस बीच] संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका की राजदूत निकी हेली ने एक ट्वीट में कहा] ^मादुरो का यह दिखावटी चुनाव तानाशाही की ओर एक और कदम है। हम अवैध सरकार को स्वीकार नहीं करेंगे। वेनेजुएला की जनता एवं लोकतंत्र की जीत होगी।^ राजधानी में करीब २० लाख लोग हैं लेकिन दर्जनों मतदान केंद्र खाली रहे। इसके विपरीत] पश्चिमी कराकस में पॉलीद्रो स्पोर्ट्‌स और कल्चरल कॉम्पलेक्स में हजारों लोग दो
?kaVksa तक मतदान केंद्रों पर वोट डालने के लिए इंतजार में खड़े रहे।

भारत-चीन युद्ध संभव!

हाल ही में अमेरिका के एक विशेषज्ञ ने कहा कि भारत चीन के बीच युद्द हो सकता है। विशेषज्ञ ने युद्ध का कारण सिक्किम सेक्टर के डोकलाम में भारत तथा चीन के बीच का सीमा विवाद बताया। अमेरिकन फॉरेन पॉलिसी काउंसिल के जेफ एम स्मिथ ने न्यूयॉर्क टाइम्स से कहा] ^मुझे लगता है और मैं यह हल्के-फुल्के अंदाज में नहीं कह रहा हूं।^ सीमा से संबंधित मुद्दों के कारण सन्‌ १९६२ के युद्ध की ओर इशारा करते हुए स्मिथ ने कहा] ^दोनों पक्षों ने कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है] जिससे वापस लौटना मुश्किल है।^ डोकलाम में चीन] भारत तथा भूटान] तीनों देशों की सीमाएं आकर मिलती हैं और इसका तीनों देशों के लिए रणनीतिक महत्व है। भारतीय सेना ने जून में चीनी सैनिकों द्वारा इस इलाके में सड़क निर्माण पर रोक लगा दी थी] जिसके कारण दोनों देशों के सैनिकों के बीच ठन गई थी। डोकलाम में दोनों देशों के सैनिकों के बीच गतिरोध का यह दूसरा महीना है। चीन ने बार-बार भारत से डोकलाम से अपने सैनिकों को वापस बुलाने के लिए कहा है। डोकलाम को चीन अपना भूभाग मानता है। भारत ने कहा है कि दोनों देशों के सैनिकों को उस जगह से हटना चाहिए] क्योंकि यह उसके सहयोगी देश भूटान का हिस्सा है। भूटान का चीन के साथ कोई कूटनीतिक संबंध नहीं है।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 
         
 
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