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जनपदों से 
 
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  • अली खान

लंढौरा ¼रुड़की½। प्रदेश के स्कूलों में छात्र-छात्राओं से दुर्व्यवहार की द्घटनाएं थम नहीं पा रही हैं। हरिद्वार जनपद के स्कूलों में छात्र-छात्राओं के शारीरिक एवं मानसिक उत्पीड़न की खबरें आती रही हैं। लेकिन इस बार जो खबर आ रही है उससे हड़कंप मचा हुआ है। आरोप है कि मंगलौर कोतवाली के अंतर्गत लंढौरा कस्बा स्थित एक पब्लिक स्कूल की शिक्षिका ने टेस्ट में कम नंबर आने पर कक्षा छह की दो मासूम बच्चियों के कपड़े उतरवाकर अपमानित किया। स्कूल से छुट्टी होने पर डरी-सहमी बच्चियों ने ?kj पहुंचकर अपने परिजनों को द्घटना की जानकारी दी। बच्चियों के परिजनों ने पुलिस को तहरीर देकर शिक्षिका और प्रधानाचार्य के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।

कस्बा लंढौरा के मोहल्ला किला और हरिजन बस्ती निवासी दो बच्ची क्षेत्र के एक पब्लिक स्कूल में कक्षा छह में पढ़ती है। परिजनों की तरफ से पुलिस को दी गई तहरीर में आरोप लगाया गया है कि एक अगस्त को क्लास टीचर ने टेस्ट में कम नंबर आने पर आग बबूला होकर दोनों मासूम बच्चियों को सजा देने के लिए उनके पूरे कपड़े ही उतरवा दिए। शिक्षिका पर यह भी आरोप है कि शिक्षिका ने बच्चियों को क्लास में बिना कपड़ों के द्घूमने पर भी मजबूर किया। आरोप यह भी है कि बाद में प्रधानाध्यापिका और शिक्षिका ने बच्चियों को चेतावनी देते हुआ कहा कि अगर तुमने द्घटना की जानकारी अपने ?kj वालों को दी तो तुम्हें इससे भी f?kukSuh ltk देने के बाद स्कूल से निकाल दिया जाएगा। डरी सहमी हुई ?kj पहुंची बच्चियों ने इसकी जानकारी अपने परिजनों को दी। जिसके बाद से इस द्घटना को लेकर परिजनों में भारी आक्रोश है।

परिजनों ने पूरे मामले की जानकारी पुलिस को दी और लिखित शिकायत करते हुए प्रधानाध्यापिका और शिक्षिका के विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई करने की मांग की। मंगलौर कोतवाली के एसएसआई अजय कुमार ने बताया कि तहरीर के आधार पर आरोपी शिक्षिका शैफाली के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। हालांकि आरोपी शिक्षिका को स्कूल से बाद में बर्खास्त कर दिया गया है। स्कूल के प्रधानाध्यापिका अमिता 

राठौर का कहना है कि परिजनों का आरोप सरासर गलत है कि बच्चियों को धमकाया गया है। मामले की जांच कर रहे आईओ सुरेश बलोदी ने बताया कि जांच के सिलसिले में स्कूल गया तो आरोपी शिक्षिका स्कूल में नहीं मिली। अब उनसे पूछताछ के लिए उनके ?kj रुड़की जाऊंगा। उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व भी जनपद के कुछ स्कूलों में छात्र-छात्राओं का विभिन्न तरीकों से शारीरिक और मानसिक उत्पीड़न किया जा चुका है।



कच्चे पुल से नदी पार करने को विवश
  • जसपाल नेगी

 

पौड़ी। जिले में शासन-प्रशासन की उदासीनता का आलम यह है कि पिछले मानसून में नयार नदी पर एक पुल बह गया था जो आज तक नहीं बन सका। ऐसे में आज जब फिर मानसून सीजन में नयार नदी उफान पर है] तो लोग जान जोखिम में डालकर नदी पार कर रहे हैं] स्कूली बच्चों को सबसे ज्यादा खतरा है।

जिले कें थलीसैंण ब्लैक के अंतर्गत नयार नदी पर पिछले साल बरसात में पुल बह गया था। इस पुल का उपयोग ७० ग्राम समस्याओं के हजारों लोग और स्कूली बच्चे करते थे। पौड़ी गढ़वाल पहाड़ों में मानसून ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर डाला है। पौड़ी जनपद का एक पिछड़ा क्षेत्र ऐसा भी है जो पिछले मानसून के कहर की मार अब तक झेल रहा है। थैलीसैंण ब्लॉक में जब प्रशासन और राजनीतिक तंत्र लंगड़ा हो गया है तो स्थानीय निवासी गौरा भाई की प्ररेणा और सहायता से जनता ने लकड़ी और टीन से वैकल्पिक पुल का निर्माण किया। ग्रामसभाओं को जोड़ता एकमात्र पैदल पक्का पुल क्षतिग्रस्त हो जाने के बाद लोगों का अपने ब्लॉक मुख्यालय से थैलीसैंण का संपर्क पूरी तरह से कट गया। साल भर बाद भी जब शासन प्रशासन को पुल बनाने का ख्याल नहीं तो मजबूरी में यहां के ग्रामीणों ने स्वयं एक वैलपिक पुल का निर्माण कराया। इस काम में स्थानीय निवासी गौरा भाई की अहम भूमिका रही। उनकी प्रेरणा से लोग नदी पर कच्चा पुल बांधने में सफल रहे।

ग्रामीणों की आर्थिकी मजबूत न होने के चलते नदी पर लकड़ी और टीन का पुल बनाया गया। अब स्कूली बच्चे ग्रामीण इसी जान जोखिम पुल से आवाजाही कर रहे है। लेकिन पुल के कभी भी ढह जाने का खौफ हमेशा बना रहता है। ग्रामीणों का कहना है कि शासन प्रशासन से पुल बनाने के गुहार कई बार लगाई गई लेकिन निराशा ही हाथ लगी। ऐसे में कच्चे पुल पर आवाजाही करने के सिवाय उनके पास अन्य कोई रासता नहीं सामस्या को जिलाधिकारी के समक्ष रखा गया तो उन्होंने पुल निर्माण में विलंब होने की जांच की बात कही है।

 

शहीद हुए पहाड़ के लाल

 

  • संजय स्वार

 

हल्द्वानी ¼नैनीताल½। कश्मीर के शोपिया में सेना के दस्ते पर द्घात लगाकर किए गए हमले में एक मंजर और जवान शहीद हो गए हैं। शहीद होने वालों में मेजर कमलेश पांडे ६२ राष्ट्रीय रायफल्स में तैनात थे। दक्षिण कश्मीर के नाथपुरा गांव में गश्त कर रही सैन्य टीम पर द्घात लगाए आतंकवादियों ने अंधाधुंध फायरिंग कर दी। अचानक हुए हमले में मेजर कमलेश पांडे और सिपाही संजीव] कृपाल सिंह ?kk;y हो गए। गंभीर रूप से ?kk;y मेजर कमलेश पांडे और सिपाही तजीन का ९२ बेस अस्पताल में इलाज के दौरान निधन हो गया। मध्यवर्गीय परिवार में जन्में मेजर कमलेश की इंटर तक की शिक्षा केंद्रीय विद्यालय रानीखेत में हुई। इंटर के बाद वो इंडियन एयर फोर्स में भर्ती हो गए थे। उसी दौरान उन्होंने आर्मी कमीशन में सफल होकर सेना में अधिकारी के रूप में शामिल हुए थे। मूलरूप से अल्मोड़ा जिले के रिगोल बाड़े छीना निवासी कमलेश के पिता मोहनचंद्र पाण्डे सेवानिवृत सैन्यकर्मी हैं। इनका एक भाई भी सेना में ही कार्यरत हैं।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 
         
 
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