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vad 18 21-10-2017
 
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राजनीति
 
धीमी चाल के ठोस कदम

  • कृष्ण कुमार

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने चार माह के अपने कार्यकाल में अहसास कराया है कि बेशक उनकी चाल धीमी हो। लेकिन कदम सही दिशा में बढ़ रहे हैं। सचिवालय में ई&फाइलिंग] कृषि क्षेत्र में बेल्जियम का सहयोग] परिसंपत्तियों का बंटवारा] चिकित्सा क्षेत्र में सेवानिवृत्त डॉक्टरों की तैनाती] स्कूलों में एनसीईआरटी की पुस्तकें] पलायन रोकने की नई योजनाएं आदि सरकार के कुछ ऐसे निर्णय हैं जो सकारात्मक पहल के तौर पर देखे जा सकते हैं

 

प्रदेश की त्रिवेंद्र सिंह रावत सरकार  के चार माह के कार्यकाल को लेकर कुछ लोगों को शिकायत है कि उत्तर प्रदेश की योगी सरकार के मुकाबले उसकी रफ्तार धीमी है। लेकिन इस बीच त्रिवेंद्र रावत सरकार ने जनता से जुड़े कुछ ऐसे फैसले लिए हैं जो यह अहसास कराते हैं कि सरकारी योजनाओं संबंधी कामकाज न सिर्फ तेज गति से होंगे] बल्कि इनमें पारदर्शिता का भी ख्याल रखा जाएगा। विपक्ष की ओर से अपनी कार्यक्षमता और नीयत पर उठते सवालों का जवाब देने के लिए सरकार जनता को गुड गवर्नेंस का अहसास कराना चाहती है। सरकारी योजनाओं और निर्णयों पर त्वरित कार्यवाही करने के लिए सचिवालय में ई&फाइलिंग की व्यवस्था की गई है। पारदर्शी व्यवस्था के तहत कोई भी आम आदमी इनको देख सकेगा और अपनी टिप्पणी भी कर सकेगा। फाइलों को ट्रैक किया जा सकेगा। किस अधिकारी के पास फाइल है] इसका आसानी से पता चल सकेगा।

कुछ ऐसे बड़े निर्णय भी सरकार ने लिए हैं जो राज्य के लिए दीर्द्घकालीन फायदे के हो सकते हैं। पंचेश्वर बांध के निर्माण में तेजी लाने के लिए राज्य सरकार ने मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक प्राधिकरण का गठन करवाया। उत्तर प्रदेश से परिसंपतियों के बांटवारे के लिए समय&समय पर निश्चित बैठक का निर्णय और राज्य को ३७ नहरों का स्वामित्व उत्तराखण्ड को दिलाना राज्य सरकार की एक बड़ी उपलब्धि मानी जा सकती है। कुमाऊं और गढ़वाल के बीच दूरी कम करने तथा उत्तर प्रदेश की सीमा में वाहनों की आवाजाही को कम करने के लिए कंडी मार्ग को आम जनता के लिए खोला जाना भी सरकार के खाते में अच्छी उपलब्धि है।

दुर्भाग्य से राज्य में तकरीबन ७ किसानों ने विभिन्न कारणों से आत्महत्याएं कीं। इस पर विपक्ष ने सरकार पर किसानों की अनदेखी के आरोप लगाए हैं। लेकिन एक हकीकत यह भी है कि सरकार किसानों] फल उत्पादकों और कूषि व्यापार को बढ़ाने के लिए कई बड़ी&बड़ी योजनाओं पर काम कर रही है। इन योजनाओं में निजी क्षेत्र में मंडी की स्थापना करना] राज्य में हर्टीकल्चर को विशेष तौर पर योजनागत ढांचे के तहत प्रोत्साहन देना तथा राज्य में पहली बार नर्सरी एक्ट को लागू करना जैसी योजनाएं चलाई जा रही हैं। राज्य में कूषि को बढ़ावा देने के लिए बेल्जियम के सहयोग से कई क्षेत्रों में पूंजी निवेश के लिए बड़ा निर्णय लिया गया है। इसके तहत राज्य में जड़ी&बूटी] हर्बल के क्षेत्र में पूंजी निवेश को बढ़ावा दिया जाएगा। किसानों के हितों के लिए कोल्ड स्टोरेज के क्षेत्र में भी काम हो सकेगा। इन सभी क्षेत्रों में जिस तरह से बेल्जियम ने अपनी तकनीक से बहुत बड़ी उपलब्धि हासिल की है उसका लाभ प्रदेश को भी मिलने की पूरी संभावना है। बेल्जियम तकनीक का फायदा राज्य में क्लीन गंगा और सोलर ऊर्जा में भी होगा। 

युवाओं के लिए स्किल डेलपमेंट प्रोगाम को तेजी से आगे बढ़ाने के लिए सरकार ने पहल की है। छात्रों को तकनीकी ज्ञान और शिक्षा के लिए कई निर्णय लिए हैं। जिनमें रोजगारपरक और कारोबार के लिए योजनाओं का क्रियान्वयन किया जाएगा। इसके तहत सहसपुर में साइंस सिटी बनाए जाने का निर्णय लिया गया है। सुपर तीस योजना भी राज्य सरकार के द्वारा इसी के तहत लाई गई है। इसमें प्रतिवर्ष तीस मेधावी छात्रों का चयन किया जाएगा। इन सभी को आईआईटी और जेईई मेंस की परीक्षा की तेैयारी सरकारी खर्च पर करवाई जाएगी। राज्य में सिविल सेवा के लिए हर जिले में एक सेंटर की स्थापना करके उसमें मेधावी छात्रों को निशुल्क प्रतियोगिता परीक्षाओं की तैयारी करवाई जाएगी। राज्य के सभी स्कूलों में एनसीईआरटी की पुस्तकों को अनिवार्य रूप से लागू किए जाने और पांच वर्ष तक पाठ्यक्रम में बदलाव नहीं करने का निर्णय सरकार की एक बड़ी उपलब्धि मानी जा सकती है। इसके चलते निजी क्षेत्र के शिक्षण संस्थानों में पढ़ने वाले स्कूली बच्चों पर नई किताबें खरीदने का बोझ नहीं पड़ेगा। निजी क्षेत्र के शिक्षण संस्थान हर वर्ष अपने पाठ्यक्रम में बदलाव करके छात्रों पर नई किताबों की खरीद के लिए दबाब बनाते रहे हैं। इससे अब छुटकारा मिल सकेगा।

राज्य सरकार स्वास्थ्य के क्षेत्र में कई योजनाओं पर काम कर रही है। एम्स के अलावा निजी क्षेत्र के चिकित्सालयों को इससे जोड़ने की योजनाए हैं। पर्वतीय क्षेत्रों के अस्पतालों में बेहतर चिकित्सा सुविधाएं देने के लिए और चिकित्सकों के पदों को भरने के लिए भारतीय सेना के सेवानिवृत्त चिकित्सकों को तैनात करने  की योजना है। इसका सकारात्मक परिणाम यह है कि योजना के आरंभ होने के साथ ही तकरीबन सौ से भी अधिक सेवानिवृत्त चिकित्सकों ने अपना आवेदन राज्य सरकार को दिया है। इससे पहाड़ों के अस्पतालों में चिकित्सकों की कमी को दूर किया जा सकेगा।

श्रीनगर मेडिकल कॉलेज को सरकार पहले ही सेना के सुपुर्द कर चुकी है। अब वीर चंद्र सिंह गढ़वाली मेडिकल कॉलेज की पूरी देखरेख और संचालन भारतीय सेना ही करेगी। इससे सरकार को कई तरह की समास्याओं से छुटकारा मिल सकेगा। इसी के तहत डोईवाला का संयुक्त चिकित्सालय भी हिमालयन मेडिकल कॉलेज को पांच वर्ष के लिए दिया गया है। अब इस चिकित्सालय का पूरा जिम्मा हिमालयन मेडिकल कॉलेज का होगा। इसी तरह से देहरादून का रायपुर स्वास्थ्य केंद्र एम्स को दिया गया है। आने वाले समय में राज्य के कई प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को पीपीपी मोड पर चलाए जाने का निर्णय राज्य सरकार ले चुकी है। आने वाले समय में खास तौर पर पर्वतीय क्षेत्रों के अस्पतालों को इससे जोड़ने की योजना पर काम चल रहा है। इसके साथ ही आयुर्वेद चिकित्सकों की सेवानिवृत्ति की आयु सीमा ६० से बढ़ाकर ६५ वर्ष की गई है। विश्व बैंक द्वारा प्रायोजित ९०० करोड़ के प्रोजेक्ट से राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर करने की योजना पर सरकार काम आरंभ कर चुकी है। 

देहरादून में २८७ रुपए] हल्द्वानी में रुपए १९७ में सस्ती दरों पर डायलसिस की सुविधा देने का सरकार आदेश जारी कर चुकी है। सरकार राज्य में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाओं पर काम कर रही है। कई पर्यटन सर्किटों का निर्माण] गेस्ट हाउस योजना और पहाड़ों की रानी मसूरी में मोनो रेल योजना आरंभ करने का निर्णय सरकार के खाते में दर्ज हो चुका है। पलायन रोकने के लिए पर्यटन क्षेत्र में कई योजनाओं की द्घोषणाएं की जा चुकी हैं। राज्य के पहाड़ी क्षेत्रों में औद्योगिक विकास के लिए तथा पलायन को रोकने के लिए आठ समितियों का गठन किया गया है। इसके तहत क्षेत्र के हिसाब से योजनाओं को बनाने और उनका पालन करने के लिए खास तोैर पर पहल की जाएगी। इसी तरह से आपदा से निपटने के लिए सरकार तेजी से काम कर रही है। आपदा के समय हेलीकॉप्टर सेवाओं द्वारा तत्काल राहत] nq?kZVukxzLr ?kk;yksa को बेहतर और तत्काल चिकित्सा देने के लिए सरकार हैलीकॉप्टर सेवाओं का उपयोग कर चुकी है।

त्रिवेंद्र सरकार के चार माह के शासनकाल की योजनाओं] निर्णयों और द्घोषणाओं को देखा जाए तो कहा जा सकता है कि मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत की वास्तव में अपनी एक अलग कार्यशैली है। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार की तरह मीडिया में सुर्खियां भले ही त्रिवेंद्र रावत सरकार ने नहीं बटोरी हों] लेकिन सरकार के चार माह के कार्यकाल के दौरान हर उस मुद्दे और समस्या को सरकार ने छूने का प्रयास किया है जो कि राज्य में वर्षों से चली आ रही थी। एनएच ७४ के ?kksVkys पर सीबीआई जांच आरंभ न होने पर सरकार पर कई सवाल उठते रहे। लेकिन आखिरकार सीबीआई का इस मामले में जांच के लिए तैयार होना भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की नीति को दर्शाता है। शासन और प्रशासन में जिम्मेदारी तय करना और पारदर्शी शासन के तहत प्रशासनिक व्यवस्था में बदलाव सरकार की नीयत और नीति को स्पष्ट करता है। लेकिन इसमें यह भी गौर करने वाली बात है कि आखिर सरकार के चार माह के शासन के दौरान बड़ी&बड़ी द्घोषणाओं] निर्णयों तथा योजनाओं का सफल क्रियान्वयन कब और किस तरह से सामने आता है। अभी फिलहाल कम से कम इतना तो कहा ही जा सकता है कि मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत की सरकार अपने पहले पायदान पर कुछ हद तक सफल होती दिख रही है।

krishan.kumar@thesundaypost.in

 
         
 
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  • दिनेश पंत

प्रदेश में निगमों] परिषदों के विलय को लेकर कर्मचारी संगठन एकमत नहीं हैं। जल संस्थान और पेयजल निगम के कर्मचारी शुरू से ही सरकार के इस फैसले का

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