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vad 18 21-10-2017
 
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सुर्खियां जो नहीं बनीं
 
इंटरनेट से सीखकर बनाया रोबोट

बॉर्डर पर तैनात पूरे देश की हिफाजत करने वाले जवानों के लिए १७ साल के एक लड़के ने ऐसा रोबोट तैयार किया है] जिसकी वजह से जवानों की जान सुरक्षित रहेगी। इस रोबोट की खासयित है कि बॉर्डर पर जंग लड़ते समय देश के जवानों की बजाए इस रोबोटिक जवान का इस्तेमाल किया जा सकता है। इसे ओडिशा के बालासोर जिले के नीलमादाब ने तैयार किया है। उनका दावा है कि ये रोबोट आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के आधार पर काम करेगा और सीमा की सुरक्षा करेगा। नीलमादाब ने पहली बार इस रोबोट को बनाने की कोशिश की थी] जब वह क्लास ६ में था। लेकिन वह रोबोट बनाने में कामयाब नहीं हो सका। उसके बाद उसने ठान लिया कि वह रोबोट बनाकर ही रहेगा। नीलमादाब ने इसे कड़ी मेहनत करके बनाया है। उसकी आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी फिर भी उसने धीरे-धीरे विज्ञान और प्रौद्योगिकी की अच्छी समझ हासिल कर ली। हालांकि आर्थिक स्थिति के चलते वह अपनी पढ़ाई के लिए चिंतित था। लेकिन इंटरनेट के जरिए अपने ज्ञान को बढ़ाया। फिर धीरे-धीरे उसने विज्ञान में अपनी पकड़ बनाई। दिन-रात मेहनत करके इस रोबोट को बनाने में सफलता प्राप्त की। नीलमादाब ने अपने इस रोबोट का नाम एटम ^थ्री प्वाइंट सेवेन^ रखा है। उसका कहना है कि इस रोबोट का रक्षा] ऑटोमैटिक स्टार्ट] मनोरंजन के क्षेत्र में] शिक्षा के क्षेत्र में] विनिर्माण उद्योग और द्घरेलू सेवाओं जैसे क्षेत्रों में मानव कर्मचारियों की जगह के लिए भी इसे इस्तेमाल किया जा सकता है।

हौसले की मिसाल

अपनी मेहनत और लगन के भरोसे पर इंसान कभी-कभी ऐसे भी काम करने की ठान लेता है] जो एक आम आदमी की नजर में बिलकुल असंभव होता है। ऐसे ही एक मुश्किल दिखने वाले काम को चुनौती समझ कर] उसे पूरा करने के लिए समीर सिंह निकले थे और वो आज अपनी मंजिल के बेहद करीब हैं। मध्य प्रदेश के मंदसौर जिले के रहने वाले ४४ साल के समीर सिंह ने १०० दिन में १० हजार किमी दौड़ने का लक्ष्य रखा है। समीर अब तक ८७ दिन में ६३७१ किमी की दूरी तय कर चुके हैं। उम्मीद है कि उनकी ये दौड़ छह अगस्त तक पूरी हो जाएगी। समीर हर दिन सुबह चार बजे उठते हैं और रुटीन काम के बाद दौड़ना शुरू कर देते हैं। समीर सिंह जब गांव में पढ़ाई कर रहे थे] उस दौरान उनके कॉलेज की बिल्डिंग गिर गई] जिसमें उनके पढ़ाई के सभी दस्तावेज नष्ट हो गए। इसके बाद समीर सिंह नौकरी की तलाश में मुंबई चले आए] लेकिन डिग्री के अभाव में उन्हें कहीं अच्छी नौकरी नहीं मिली। इसके बाद समीर रन्निग कोच बन गए और ये कोचिंग ही उनकी रोजी-रोटी का जरिया बन गई। जब समीर की जिंदगी की गाड़ी पटरी पर आ गई तो उन्होंने कुछ अलग करने की ठानी। इसके बाद समीर ने सौ दिन में दस हजार किमी दौड़ने का लक्ष्य रखा। समीर ने २९ अप्रैल से दौड़ना शुरू किया था।

 
         
 
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  • दिकदर्शन रावत

गिरधारी लाल साहू के खिलाफ अब लोग अपनी आवाज बुलंद करने लगे हैं। ^दि संडे पोस्ट^ के पिछले अंकों में सिलसिलेवार प्रकाशित गिरधारी के जमीन फर्जीवाड़े

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