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vad 32 27-01-2018
 
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पहल 
 
डीएम की पत्नी बनीं मिसाल
  • संजय स्वार

उत्तराखण्ड में जहां एक ओर शिक्षा विभाग सत्तारूढ़ पार्टी से जुड़े बड़े नेताओं की अध्यापिका पत्नियों को एक शिकायत निवारण प्रकोष्ठ बनाकर पहाड़ से देहरादून समायोजित कर देता है] वहीं एक अधिकारी विद्यालय में विज्ञान के शिक्षक न होने पर अपनी पत्नी से उस विद्यालय में निःशुल्क पढ़ाने का आग्रह करता है। पत्नी भी सहर्ष उस विद्यालय में पढ़ाने लगती है। ये दो प्रसंग उत्तराखण्ड की वास्तविक स्थिति को बयां करते हैं और दर्शाते हैं। ये उन दो मानसिकताओं को भी दर्शाते हैं जिनमें एक राजनीतिक नेतृत्व के लिए खीझ पैदा करती हैं] वहीं दूसरी कुछ सुकून का एहसास भी कराती है। 

प्रदेश में नौकरशाही अपनी बेलगाम प्रवृत्ति के लिए कुख्यात है। कुछ अधिकारी ऐसे हैं जिनमें जनसरोकारी भावना भरपूर है। यहां पर बात हो रही है रुद्रप्रयाग के जिलाधिकारी मंगेश f?fYM;ky की। जिनके कार्यों से उत्तराखण्ड की नौकरशाही की छवि कुछ उजली हुई है। रुद्रप्रयाग के नए जिलाधिकारी मंगेश f?fYM;ky का तबादला खड़िया कारोबारियों के दबाव में बागेश्वर के जिलाधिकारी पद से करवा दिया गया था। शिक्षा के प्रति विशेष रुचि रखने वाले f?fYM;ky पिछले दिनों से विद्यालयों के निरीक्षण में थे। राजकीय बालिका इंटर कॉलेज रुद्रप्रयाग के निरीक्षण में उन्हें बताया गया कि यहां हाईस्कूल की कक्षाओं के लिए विज्ञान के शिक्षक नहीं है और छात्राओं की पढ़ाई नहीं हो पा रही है। उन्होंने सरकार को लिखने की बात नहीं की। शायद उन्हें पता था कि ये कवायद सिर्फ टालने की होगी। उन्होंने इस संबंध में अपनी पत्नी ऊषा f?fYM;ky से बात की। ऊषा पंतनगर विश्वविद्यालय में उच्च शिक्षा प्राप्त हैं। ऊषा ने बच्चों को निःशुल्क पढ़ाने का आग्रह स्वीकार कर बच्चों को पढ़ाना शुरू भी कर दिया। एक लंबी प्रक्रिया वाली समस्या का तुरंत समाधाना मंगेश f?fYM;ky ऐसे ही करते हैं। चमोली के मुख्य विकास अधिकारी के रूप में उनके कार्यकाल  को लोग आज भी याद करते हैं। बागेश्वर में तो उनके स्थानांतरण के खिलाफ लोग सड़कों पर उतर आए थे। सिविल सेवा परीक्षा में चौथा स्थान प्राप्त करने वाले मंगेश f?fYM;ky ने प्रशाएसनिक सेवा को ही अपना विकल्प चुना। वरना योग्यता सूची में उच्च स्थान के कारण उनके पास विदेश सेवा ¼आईएफएस½ चुनने का भी विकल्प था। बागेश्वर के जिलाधिकारी के रूप में उन्होंने जहां खड़िया माफियाओं की लगाम कसी थी वहीं शिक्षा विशेषकर विद्यार्थियों के लिए कई कार्य किए जिनमें प्रशासनिक सेवा में जाने के इच्छुक युवाओं के लिए निःशुल्क कोचिंग अपना जन्म दिन भी स्कूल के बच्चों के साथ ही मनाते थे। पिछले दिनों केदारनाथ की हवाई सेवाओं में ज्यादा किराया लेकर बुकिंग की शिकायत पर उन्होंने आम यात्री बनकर हवाई सेवा प्रदाता कंपनी को पकड़ा था। आज ऐसे अधिकारियों की वजह से ही उत्तराखण्ड की नौकरशाही के कुछ साख बची है जिनके लिए सरकारी पद महज नौकरी नहीं बल्कि जनसरोकार है।


 
         
 
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  • अरुण कश्यप

गंगा में खनन के मसले पर मातृ सदन के संत और सरकार आमने- सामने हैं। संतों का आरोप है कि सरकार स्थानीय प्रशासन का इस्तेमाल कर उनकी आवाज दबाना चाहती

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