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प्रदेश 
 
चहेतों के लिए खुला खजाना

  • कृष्ण कुमार

राज्य की पिछली हरीश रावत सरकार पर सरकारी खजाना खाली करने का आरोप लगाती रही भाजपा को आज अपनी सरकार के काम नजर नहीं आ रहे हैं। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के लिए विशेष कार्याधिकारियों] मीडिया सलाहकारों और जनसंपर्क अधिकारियों की जो भारी-भरकम खर्चीली फौज खड़ी कर दी गई है वह पार्टी को दिखाई नहीं देती

 

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के लिए आधा दर्जन से भी अधिक मुख्य कार्याधिकारी यानी ओएसडी और सलाहकारों की फौज गठित की जा चुकी है। इन सब पर जमकर सरकारी खजाने से धन लुटाया जा रहा है। इसके बावजूद अपने और चहेतों को एडजेस्ट करने के लिए भाजपा सरकार ने नया रास्ता निकाला है। इसके तहत चहेतों को बाकायदा किसी सरकारी कर्मचारी और अधिकारी की तरह एक निश्चित ग्रेड पे और वेतनमान तक दिए जाने के आदेश जारी कर दिये गये हैं। हाल ही में सरकार ने १५ नये विभिन्न पदों पर नियुक्तियां की हैं। जिन पर प्रतिमाह कई लाख रुपया सरकारी खजाने से लुटाया जाएगा।

तीन जुलाई को मुख्यमंत्री के अपर मुख्य सचिव ओमप्रकाश ने १५ विभिन्न पदों पर नियुक्तियां की हैं। इनमें एक मीडिया कोर्डिनेटर] एक विशेष कार्याधिकारी] चार जनसंम्पर्क अधिकारी] तीन उप समन्वयक सोशल मीडिया] एक प्रेटोकाल अधिकारी] तीन निजी सहायक और दो अनुसेवक के पदों पर नियुक्तियां की गई हैं। इन सभी पदों को एक निश्चित ग्रेड पे एवं वेतनमान दिए जाने के भी अदोश जारी किए गए हैं। इनमें मीडिया कोर्डिनेटर को ७६०० का ग्रेड पे] विशेष कार्याधिकारी को ६०००] जनसंपर्क अधिकारी को ५४०० और प्रोटोकाल अधिकारी को ५४०० का गे्रड पे दिया गया है। इसी तरह से निजी सहायक के पद के लिए ४२००] और अनुसेवकों १८०० का ग्रेड पे दिया गया है। उप समन्वयक सोशल मीडिया के पदों के लिए ५० हजार का निश्चित नियत वेतन दिया गया है।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र रावत कुछ समय पहले भी दिल्ली के एक चैनल के एंकर रमेश भट्ट को अपना मीडिया सलाहकार नियुक्त कर चुके हैं। अब एक दैनिक अखबार में काम करने वाले पत्रकार दर्शन सिंह रावत को मुख्यमंत्री का मीडिया कॉर्डिनेटर नियुक्ति किया गया है। इसके अलावा भाजपा के प्रदेश कार्यालय में प्रभारी के पद पर काम करने वाले उर्वादत्त भट्ट को मुख्यमंत्री के ओएसडी पद पर नियुक्त किया गया है।

खजाना खाली होने का रोती रही भाजपा सरकार का यह निर्णय किसी को समझ नहीं आ रहा है। सरकार जनहित के कामों के लिए खजाना खाली होने का रोना रोने लगती है लेकिन जब अपने चहेतों ओैर पार्टी के कार्यकर्ताओं को एडजेस्ट करना होता है तो सरकार इस तरह से काम करती है जैसे आपातकाल लगा हो। तत्काल अपने चहेतों को नियुक्तियां थोक के भाव में बांट दी जाती हैं।

हालांकि चहेतों को सरकारी सेवाओं में एडजेस्ट करने वाली यह राज्य की पहली सरकार नहीं है। बल्कि कमोबेश उत्तराखण्ड की हर सरकार के मुख्यमंत्रियों ने अपने-अपने चहेतों को और अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं को एडजेस्ट करके सरकारी खजाने से वेतन और सुविधायें जम के दी हैं। राज्य की पहली निर्वाचित सरकार के मुखिया नारायण दत्त तिवारी के कार्यकाल में इस तरह अपने चहेतों को एडजेस्ट करने के बीज बो दिये गये थे। तत्कालीन समय में तिवारी जी ने कांग्रेस पार्टी के अलावा अपने पुराने चहेतों को जमकर अपने कार्यालय में भारी भरकम वेतन और सुविधाओं के साथ एडजेस्ट किया था।

तिवारी सरकार के समय जम कर सरकारी खजाने की लूट से सरकार को चुनाव में हार का सामना करना पड़ा। इसी का प्रभाव था कि भाजपा की खण्डूड़ी सरकार में इस तरह की नियुक्तियां कम रहीं। इसके बावजूद खण्डूड़ी सरकार में भी दिल्ली से आयातित पत्रकार उमाकांत लखेड़ा को मुख्यमंत्री का मीडिया सलाहकार बनाया गया था। और जनसंपर्क अधिकारियों की फौज तैनात की गई थी।

निशंक सरकार में कई नियुक्तियां मुख्यमंत्री कार्यालय में की गई थीं। जिनमें कई लोग स्वंय मुख्यमंत्री निशंक के पुराने साथी रहे या उनके साथ काम करते रहे। निशंक सरकार में भी कुल मिलाकर सभी पदों पर तकरीबन एक दर्जन से भी अधिक नियुक्तियां की गई थीं। कहने की जरूरत नहीं कि इन सभी नियुक्तियों पर सरकारी खजाने से ही वेतन आदि दिया जाता रहा।

कांग्रेस की बहुगुणा सरकार के समय मे ंभी जम कर अपने चहेतों को मुख्यमंत्री कार्यालय में नियुक्तियां दी गई। ओएसडी के अलावा निजी सचिव] जनसंपर्क अधिकारी और मीडिया सलाहकार के पदों पर कई लोगों को एडजेस्ट किया गया। मुख्यमंत्री विजय बहुुगुणा के साथ वर्षों से काम करने वाले डिमरी को उनका ओएसडी बनाया गया था। यही नहीं बताया जाता है कि बहुगुणा के आवास पर खाना बनाने का काम करने वाले व्यक्ति तक को सरकार में एडजेस्ट किया गया। उसका वेतन वाहन आदि की सुविधा सरकारी खजाने से ही दी गई।

हरीश रावत के मुख्यमंत्री बनने के बाद इस तरह की नियुक्तियों की बाढ़ सी आ गई। तकरीबन आधा दजर्न से भी अधिक ओएसडी और इतने ही निजी सचिवों की भारी भरकम फौज हरीश रावत के कार्यकाल में खड़ी की गई थी। इसके अलावा मुख्यमंत्री के सलाहकारों की भी एक बड़ी फौज हरीश रावत के कार्यकाल में रही। इन सभी पर जम कर सरकारी खजाने को लुटाया गया।

अब भाजपा की त्रिवेंद्र सरकार में भी वही सब किया जा रहा है। आधा दर्जन ओएसडी तो सरकार में ंपहले ही तैनात किए जा चुके हैं और अब एक साथ १५ 'चहेतों को एडजेस्ट किया गया है। इन सभी पर प्रतिमाह कई लाख रुपये वेतन और सुविधाओं के नाम पर उसी सरकारी खजाने से लुटाए जाएंगे जिसके खाली होने की चिंता में भाजपाई मातम मनाते नजर आते थे। 

krishan.kumar@thesundaypost.in

 

 
         
 
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