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vad 15 30-09-2017
 
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आवरण&कथा&2
 
पर्ची पर इलाज

  • संजय चौहान

सीमांत चमोली जिले के अस्पतालों में जिन डॉक्टरों की तैनाती की जाती है वे यहां आने के बजाए बीमारी का बहाना बना लेते हैं। नतीजतन आज जिले के अस्पताल सिर्फ रेफर सेंटर बनकर रह गए हैं

 

सामरिक] धार्मिक और पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण चमोली जिले में स्वास्थ्य सेवाओं का बुरा हाल है। हर साल इस जनपद में लाखों तीर्थयात्री और पर्यटक आते हैं। अगर इसी साल २०१७ की बात करें तो अब तक ६ लाख १० हजार से अधिक तीर्थयात्री बदरीनाथ आ चुके हैं। ७० हजार से अधिक श्रद्धालु हेमकुंड साहिब की यात्रा कर चुके हैं। १ हजार से अधिक पर्यटक फूलों की ?kkVh पहुंच चुके हैं। लेकिन अति महत्वपूर्ण इस जिले की स्वास्थ्य सेवाएं बैकुंठ धाम भगवान बदरीनाथ के भरोसे ही चल रही हैं। 

विगत १६ साल से सूबे के अधिकतर अस्पताल फार्मासिस्ट और डॉक्टरों के अभाव में सफेद हाथी साबित हो रहे हैं। जनपद में १७० के सापेक्ष महज ४१ डॉक्टर वर्तमान में कार्यरत हैं। हालत इस कदर गंभीर हैं कि कई अस्पतालों ने आज तक डॉक्टर देखा ही नहीं। अधिकतर अस्पताल महज पर्ची काटने के रेफर सेंटर बने हुए हैं। जहां मरीज को इलाज के नाम पर रेफर की पर्ची पकड़ा दी जाती है। जनपद के जोशीमठ] द्घाट] पोखरी] देवाल] गैरसैंण] नारायणबगड़] थराली] दशोली] कर्णप्रयाग ब्लॉक में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति दयनीय है। अगर जनपद में स्वास्थ्य सेवाओं की बात की जाए तो यहां पर सबसे बड़े अस्पताल के रूप में जिला अस्पताल गोपेश्वर है। जहां डॉक्टरों एवं स्टाफ के स्वीकूत ३६ पदों के सापेक्ष २० पद खाली हैं। पहले से ही डॉक्टरों की कमी झेल रहे अस्पताल से हाल ही में ४ डॉक्टरों का स्थानांतरण अन्यत्र हो गया है। डॉक्टरों के आभाव में जिले का सबसे बड़ा अस्पताल खुद ही बीमार हो गया। जब जिले के मुख्य अस्पताल की ऐसी स्थिति है तो सुदूरवर्ती इलाकों का क्या होगा] खुद ही अंदाजा लगाया जा सकता है। 

जोशीमठ] पोखरी] कर्णप्रयाग] थराली के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में भी डॉक्टरों का अभाव बना हुआ है। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों से लेकर राजकीय एलोपेथिक अस्पताल और स्वास्थ्य उपकेंद्रों की कहानी तो अत्यंत ही दुखद है। सूबे की जनाकांक्षाओं की राजधानी गैरसैंण के अस्पताल को पीपीपी मोड में दिए जाने के बाद से उक्त अस्पताल लाइलाज बना हुआ है। ऐसे में इस अस्पताल से लोगों की उम्मीदें बेमानी हैं। कई मर्तबा इस अस्पताल को पीपीपी मोड़ से हटाकर सरकार द्वारा संचालित करने की मांग को लेकर लोगों ने आंदोलन भी किया] पर नतीजा कुछ नहीं निकला। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पीपलकोटी को लम्बे समय से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बनाये जाने की मांग स्थानीय लोगों द्वारा की जा रही है। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने इसके उच्चीकरण की द्घोषणा बंड मेले के दौरान की थी। लेकिन आज तक अस्पताल के उच्चीकरण की पत्रावाली कहां है] किसी को नहीं मालूम। 

इसे चमोली के लोगों का दुर्भाग्य ही कहेंगे कि यहां से मैदानी जनपदों में स्थानांतरित होने वाले डॉक्टर तबादला सूची जारी होने के अगले ही दिन नए तैनाती स्थल में कार्यभार ग्रहण कर लेते हैं। लेकिन दूसरी तरफ मैदानी इलाकों से चमोली जिले में स्थानांतरित होने वाले अधिकतर डॉक्टर यहां आने से पहले खुद ही बीमार होकर लंबी छुट्टी पर चले जाते हैं। वे यहां आने की जहमत तक नहीं उठाते। कुछ महीनों बाद पता चलता है कि यहां ज्वाइन करे बिना उनका तबादला हो गया। विगत कई साल से यही परिपाटी चली आ रही है। विगत दिनों डॉक्टरों के तबादलों में भी यही देखने को मिला। मैदानी इलाकों के लिए स्थानांतरित हुए डॉक्टर तो यहां से चले गए लेकिन मैदानी क्षेत्रों से चमोली जिले के लिए जिन १२ डॉक्टरों का तबादला किया गया] इनमें से आज तक केवाल ५ डॉक्टरों ने यहां ज्वाइन किया है। यह तब है जब शासन ने स्पष्ट निर्देश दिए थे कि डॉक्टरों को जून महीने का वेतन नए तैनाती स्थल से ही मिलेगा। फिर भी इसका कोई असर देखने को नहीं मिला है।

जनपद चमोली में जिन १२ डॉक्टरों को भेजा गया उनमें से ये डॉक्टर जिले में पहुंचे ही नहीं।

१ + डॉ शशि बाला वासन नेत्र सर्जन

२ + डॉ नरेंद्र चौहान सर्जन

३ + महावीर सिंह फिजिशियन।

४ + डॉ + बिराज शाह।

५ + डॉ + मयंक बडोला] कार्यवाहक अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी।

६ + डॉ + निशा गुप्ता] अधीन मुख्य चिकित्सा अधिकारी।

७ + डॉ + विवेक तिवारी] अधीन मुख्य चिकित्सा अधिकारी।

 

 
         
 
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  • संजय चौहान

उच्च शिक्षा हासिल कर जब वे शहरों के बनाए निर्जन बुग्यालों में भविष्य तलाशने निकले तो हर किसी ने उन्हें पागल ठहराया। लेकिन वे पहाड़ की तरह अपने

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