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vad 15 30-09-2017
 
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आईना  
 
मुख्यमंत्री की ^मन की बात^

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ^मन की बात^ कार्यक्रम की तर्ज पर अब राज्य के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने भी अब सोशल साइट फेसबुक के माध्यम से जनता से मुखातिब रहेंगे। इस क्रम में मुख्यमंत्री ने फेसबुक के जरिए किसानों को संबोधित कर उनकी समस्याओं के निराकरण का भरोसा दिया। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ट्विटर पर भी काफी समय से सक्रिय हैं। उनके आधिकारिक ट्विटर हैंडल पर किसी भी \kVuk की प्रतिक्रिया तुरंत सामने आती है। अब सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर कदम बढ़ाते हुए मुख्यमंत्री ने फेसबुक पर किसानों की समस्याओं और सरकार की योजनाओं की जानकारी को साझा किया है। उन्होंने लिखा] ^आज मैं आपसे कुछ कहना चहता हूं। खासकर] आपकी आमदनी को लेकर। मैं जानता हूं जितनी मेहनत और लागत आपकी लगती है] उसके मुकाबले जो मिलता है] वह बेहद कम है। इसलिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने २०२२ तक किसानों की आय दोगुना करने का जो लक्ष्य रखा है] उसे हम पूरा करेंगे।^

मंत्रियों की सुरक्षा हटाई

केंद्र सरकार ने राज्य के दो मंत्रियों डॉ हरक सिंह रावत एवं सुबोध उनियाल के साथ ही उन तीन मौजूदा भाजपा विधायकों की सुरक्षा व्यवस्था हटा ली है जो पिछले साल कांग्रेस से बगावत कर भाजपा में आए थे। गौरतलब है कि पिछले वर्ष प्रदेश में १८ मार्च को बजट सत्र के दौरान तत्कालीन कांग्रेस सरकार में कैबिनेट मंत्री डॉ हरक सिंह रावत एवं पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा समेत नौ विधायक सरकार के खिलाफ बगावत कर भाजपा में चले गए थे। इस दौरान प्रदेश की राजनीतिक परिस्थितियों को देखते हुए केंद्र ने पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा] तत्कालीन कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत] विधायक सुबोध उनियाल] प्रदीप बत्रा] अमृता रावत] शैलारानी रावत] डॉ शैलेंद्र मोहन fla\ky] उमेश शर्मा काऊ एवं कुंवर प्रणव सिंह चैंपियन को विशेष सुरक्षा प्रदान की। इनकी सुरक्षा में अर्धसैनिक बलों के जवान लगाए गए थे। अब प्रदेश में स्थितियां सामान्य हो चुकी हैं] लिहाजा केंद्र सरकार ने इन सभी को दी जा रही सुरक्षा वापस लेने का निर्णय लिया है।

नदारद अधिकारी

उत्तराखण्ड सरकार जनता की समस्या जानने के लिए ^सरकार जनता के द्वार^ कार्यक्रम चला रही है। यह कार्यक्रम गांवों] प्रखंडों आदि स्थानों पर आयोजित किया जाता है। जिसमें जिला स्तर के अधिकारी शामिल होकर जनता की समस्या सुनते हैं और उनका समाधान करते हैं। १३ जुलाई को पौड़ी जिले के द्वारीखाल ब्लॉक में ^सरकार जनता के द्वार^ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसकी अध्यक्षता जिलाधिकारी पौड़ी को करनी थी। मगर सरकार और जिलाधिकारी के बीच वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग होने के कारण जिलाधिकारी नहीं आ पाए। जिलाधिकारी के नहीं आने की खबर लगते ही अधिकतर अधिकारी भी इस कार्यक्रम में नहीं पहुंचे। जिस कारण स्थानीय लोगों में निराशा और नाराजगी छा गई। सोनपुर की यशोदा देवी बताती हैं] ^पिछले साल भी जनता दरबार लगा] तब से अभी तक मेरे बेटे का विकलांग प्रमाण&पत्र नहीं बन पाया] फिर इस बार आए हैं। मगर अधिकारी आए ही नहीं हैं। हरी प्रसाद कहते हैं कि बेटी का गौरा धन पिछले साल से नहीं मिल पाया है। कोई सूचना भी नहीं है। कलोडी निवासी चांदपाल सिंह कहते हैं कि २०१५ से विधायक निधि का पैसा नहीं आया] शिकायत की तो जवाब मिला कि ट्रेजरी से पैसा नहीं आया है। मुख्य विकास अधिकारी विजय कुमार जोगदंड ने अनुपस्थित रहने वाले अधिकारियों का एक दिन का वेतन काटने के निर्देश दिए हैं। कार्यक्रम में आए अधिकतर लोगों का कहना था कि जब यहां पर समस्याओं का समाधान ही नहीं होना है तो फिर किस बात का जनता दरबार। यह सिर्फ जनता को बेवकूफ बनाने के लिए किया जाता है। 


फेस बुक

त्रिवेंद्र सिंह रावत % प्रधानमंत्री ने किसानों की आय दोगुना करने का जो लक्ष्य रखा है] हम उस दिशा में काम कर रहे हैं। सुगंधित खेती से भी इस दिशा में मदद मिलेगी।

संतोष सिंह टोलिया % सर पहाड़ों की जमीनें बाहरी लोगों/ बिल्डर्स/भू माफियाओं से बचाने के लिए भी कुछ कर रहे हैं क्या\ बाहरी लोगों के जमीन खरीदने] बसने पर रोक कब से लगेगी\

वैभव पोखरियाल % हिमाचल पैटर्न लगाओ तभी पहाड़ और पहाड़ी का अस्तित्व रह जाएगा वरना यूपी जैसा हाल।

दर्शन डोभाल %पिछली सरकार के भांग की खेती के फैसले को बदलकर सुगंधित खेती के फैसले से निश्चित ही लाभ होगा और लोगों मे सद्बुद्धि आएगी। भांग की खेती करना तो दूर किसी के?kj के आस&पास भांग का पेड़ उगना भी हमारे पहाड़ में अपशगुन माना जाता है। भांग की जगह फूलों की खेती हर लिहाज से लाभप्रद ही होगी।

सुबोध जेशवाल % डोभाल जी] तभी मैं मा. मुख्यमंत्री जी से अनुरोध कर रहा हूं] छोटे&छोटे पॉली हाउस जो बंद पडे़ हैं] उन्हें दोबारा चालू करने के लिए अनुदान देकर फूलों की खेती करके बेरोजगारी दूर की जा सकती है। १००० स्क्वायर मी. को दोबारा चालू करने के लिए चार लाख की लागत आ रही है। बेचारा किसान कहां से इतने पैसे लाएगा। सरकार को इसके लिए उचित कदम उठाना चाहिए।

कमल चंद्रा % फूल और भांग में बहुत अंतर है। फूल की देखभाल भांग की कोई देखभाल नहीं होती। आज यह भाग लगाना बहुत सरल है। नसा ही नहीं भांग को नमक की तरह एवं तेल भी निकलते हैं। और यह कॅश क्रॉप भी है। सोच ठीक किंतु जमीनी सच मुश्किल।

हेमराज सिंह चौहान % उत्तराखण्ड में बस सरकारें बदलती हैं सिस्टम नहीं बदलता। माफिया किसी का राज हो पनपते रहते हैं। सूबे के सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने खुद आबकारी नीति की द्घोषणा करते कहा था कि राज्य में अब शराब की कालाबाजारी और ओवररेट समाप्त होंगे। लेकिन अल्मोड़ा में ये बदस्तूर जारी है। शराब की दुकानों में ओवररेट में शराब बेची जा रही है

प्रेम सिंह बिष्ट % दर्द है दिल में सभी के कि शराब महंगी मिल रही है दवाओं की] किताबों की] डॉक्टरों की कोई बात नहीं करता।

मनीष पंत % बात अजीब है] शायद गले के नीचे न उतरे]लेकिन अगर मेरा बस चले तो सारी कालाबाजारी शराब के सर डाल दूं] इतनी की ये हर किसी की जद से बाहर हो जाए।

शंकर सिंह कुमाऊंनी कवि % एक तो हम शराबियों में एकता नहीं है। हमारी कोई ऑर्गेनाइजेशन नहीं है। हम पैसा खर्च कर अपनी पहचान छुपाते हैं। हम शराब विक्रेताओं के विरुद्ध आंदोलन नहीं करते। हमारी खून&पसीने की कमाई चूसकर शराब व्यापारी पनप रहे हैं और हम शराबी...। मैं सभी शराबियों का आवाह्‌न करता हूं] भाइयों एक छत के नीचे आओ। हम कोर्ट जाएंगे] हम मुख्यमंत्री को ज्ञापन देंगे। साथियों कौन नहीं पीता है\ हम गरीबों को ही दुकान में लाइन लगानी पड़ती है। नेता लोगों के लिए उनके चमचे ले जाते हैं। अधिकारियों के लिए उनके क्लर्क/चपरासी ले जाते हैं। पुलिस वालों के वहां भट्टी वाले खुद पहुंचाते हैं। हम दुकान में जाकर मोल&भाव नहीं कर सकते। दो कौड़ी की भट्टी में काम करने वाला छोकरा नोट बदलने के लिए कहने पर झिड़की देकर भगा देता है। क्या हमारे पैंसों की कोई कीमत नहीं\ सरकार नौ रुपए बढ़ाती है] व्यापारी सौ रुपए बढ़ा देता है। हमारी प्रॉबलम है] हम हड़ताल नहीं कर सकते। आपने पोस्ट डाली बहुत अच्छा लगा। क्रांतिकारी अभिवादन। हर शराब की दुकान में रेट लिस्ट अवश्य लगी हो। मिलावट का गोरखधंधा बंद हो। पता ही नहीं लगता पानी में शराब मिला रखी है या शराब में पानी। मैं भट्टी वालों/सरकार को आगाह करना चाहता हूं यदि शराबी बोला तो तुम्हारा सिंहासन डोला।


ट्वीटर वॉर

Akhilesh Yadav@yadavakhilesh

साइकिल चलाना स्वास्थ्य] पर्यावरण और अर्थव्यवस्था सबके लिए लाभप्रद है।


शिवम्‌ यादव @Sshheebbuu 

ऐसी क्या मजबूरी है जो किरण रिजिजू को गाय का मांस खाने के वावजूद भाजपा पार्टी में बनाए हुए है।


anoop marg @anoopazamg 

बहुत परेशान हो अब दुबारा नहीं अखिलेश आते तुमरे भईया।


Rafiq Ansari (MLA) @hajirafiqansari 

जी प्रतीक भाई को भी बता देना। बड़ी महंगी कार में ?kwers हैं।

Ravish Kumar NDTV™ @NDTVRavish 

देश आजादी से लेकर अब तक कपड़े पर किसी प्रकार का टैक्स नही लगा है केंद्र की भाजपा सरकार द्वारा  बुनकर एंव गरीबों के पेट पर लात मारी जा रही है।

त्ंअपेी ज्ञनउंत छक्ज्ट /छक्ज्टत्ंअपेी ये देश उस दिन प्रगति कर जाएगा जब जश्न सरकारें नहीं जनता मनाएगी।


Prakash Pant @PrakashPantBjp 

श्री @harishrawatcmuk

जी खनन और शराब पर आपने क्या किया है यह जनता भलीभांति जानती है।


Pradeep Mamgain @PcMNavy  

अरे सर हरदा को केवल कैमरे के सामने दलाली करनी आती.।


Piyush Tyagi @tyagipiyush19 

@tsrawatbjp सत्य वचन अभी तक कुछ मंत्रालयों को छोड़कर ऐसा ही लग रहा है जैसे कांग्रेस सरकार।


prakashpaliwal @prakashtehri

मोबाइल से शराब बेचने और शराब का विरोध करने वाली महिलाओं पर केस दर्ज करने वालों के बारे में भी जनता जान चुकी है।

जनाब ने फरमाया + + + 

नदियां लगातार सिकुड़ती जा रही हैं। अगर अभी से ठोस पहल नहीं की गई तो आने वाली पीढ़ियां हमें कभी माफ नहीं करेंगी। प्रकाश पंत] पेयजल मंत्री 

जर्जर स्कूलों में बच्चे अपना ख्याल खुद रखें। मैं कोई शक्तिमान नहीं। 

अरविंद पाण्डेय] शिक्षा मंत्री

राज्य के सभी द्घरों में शौचालय होने की बात कतई भ्रामक है। मैदानी ही नहीं] बल्कि पर्वतीय क्षेत्र में बड़ी संख्या में ऐसे परिवार हैं] जिनके पास शौचालय ही नहीं है।  

गोविंद सिंह कुंजवाल] पूर्व विधानसभाध्यक्ष

गुटबाजी के चलते उक्रांद ने जनता का विश्वास खोया। अब दल में एकता है। सभी प्रमुख नेताओं को गढ़वाल&कुमाऊं में पार्टी को मजबूत करने की जिम्मेदारी दी गई है। 

दिवाकर भट्ट] अध्यक्ष उक्रांद

मंडी समिति हर किसान की समस्या सुनेगी] उसका निराकरण करेगी। इसलिए आत्महत्या जैसा कोई कदम उठाने की नहीं सोचें।

सुमित हृदयेश] अध्यक्ष मंडी समिति

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 
         
 
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जेएनयू और दिल्ली विश्वविद्यालय के चुनावों से कोई सीधा वास्ता नहीं है। मगर इसका क्या किया जाए कि जेएनयू के बाद दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्र la?k चुनावों

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