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vad 7 05-08-2017
 
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स्मृति शेष
 
खत्म जिंदगी का रोल
  • दि संडे पोस्ट

 

बॉलीवुड और टेलीविजन की जानी&मानी ५९ वर्षीय अभिनेत्री रीमा लागू का निधन हो गया। सीने में दर्द की शिकायत के बाद उन्हें कोकिलाबेन अस्पताल में भर्ती कराया गया। जहां दिल का दौरा पड़ने से उनकी मौत हो गई। इससे बॉलीवुड इंडस्ट्री में शोक की लहर दौड़ गई है। वह वर्तमान में ^नामकरण^ धारवाहिक की शूटिंग कर रही थीं।

रीमा लागू ने कई फिल्मों और टीवी सीरियल में काम किया और अपने दमदार अभिनय की छाप लोगों के दिलों पर छोड़ी। मैंने प्यार किया] ^हम आपके हैं कौन^]  ^कुछ कुछ होता है^] ^हम साथ&साथ हैं^] और वास्तव जैसी फिल्मों में उनको यादगार अभिनय के लिए जाना जाता है। वहीं छोटे पर्दे पर उनको ^श्रीमान श्रीमती^ टीवी सीरियल के लिए याद किया जाता है ^तू&तू^ ^मैं&मैं^ में इस अभिनेत्री को बहुत पंसद किया गया था। इन दिनों वे स्टार प्लस पर आ रहे सीरियल ^नामकरण^ में लीड रोल निभा रही थीं। जिसमें उनका नेगेटिव रोल था। रीमा लागू का जन्म १९५८ में मुंबई में हुआ था। पढ़ाई पूरी करने के बाद ही उन्होंने मराठी थियेटर से एक्टिंग की शुरूआत की थी। उन्होंने हिंदी और मराठी फिल्मों में ज्यादातर सपोर्टिंग रोल किया। उन्हें कई फिल्मों में अभिनय के लिए सम्मान भी मिल चुका है। अस्सी और नब्बे के दशक की फिल्मों में मां के रोल में वो काफी लोकप्रिय हुई थी।

^कयामत से कायामत तक^ १९८८ में रीमा ने अभिनेत्री जूही चावला की मां का किरदार निभाया था। १९८९ में ^मैंने प्यार किया^ फिल्म ^साजन^ में वर्ष १९९१ में सलमान खान की मां का रोल निभाया। ये फिल्में बॉक्स ऑफिस पर सुपरहिट रही थीं। ^गुमराह^ १९९३ और ^जय किशन^ जैसी ड्रामा और थ्रिलर फिल्में भी की। ^गुमराह^ अपने समय की सुपरहिट फिल्म रही थी। इसके अलावा ^हम आपके हैं कौन^] ^ये दिल्लगी^] ^दिलवाले^] ^कुछ कुछ होता है^ और ^कल हो ना हो^ में इन्होंने यादगार भूमिकाएं निभाई। फिल्म ^आक्रोश^ १९८० में इन्होंने ^डांसर^ की भूमिका की तो वहीं ^ये दिल्लगी^ फिल्म में एक बिजनेस वुमन की भूमिका निभाई थी।

 


राजेंद्र धस्मानानहीं रहे

  • दि संडे पोस्ट

 

पत्रकारिता जगत के एक महत्वपूर्ण हस्ताक्षर राजेंद्र धस्माना का १६ मई को दिल्ली में निधन हो गया। उनके निधन की खबर से पत्रकारिता एवं साहित्य जगत के साथ ही समाज को भी झकझोर दिया। धस्माना आकाशवाणी और ^दूरदर्शन^ के समाचार संपादक के साथ ही संपूर्ण गांधी ^वांगमय^ के मुख्य संपादक भी रहे। इसके अलावा उन्होंने कई अन्य पत्र&पत्रिकाओं का संपादन और स्वतंत्र लेखन भी किया। ^दि संडे पोस्ट^ को भी उनका लेखन सहयोग मिला। 

९ अप्रैल १९३६ को पौड़ी गढ़वाल के एकेश्वर ब्लॉक के बग्याली गांव में जन्में राजेंद्र धस्माना न सिर्फ पत्रकार बल्कि साहित्यकार भी थे। उनका हिंदी कविता संग्रह ^परिवलय^ साहित्य जगत में काफी लोकप्रिय हुआ। उन्होंने ^अर्द्धग्रामेश्वर^ सहित कई अन्य नाटकों की रचना भी की। उत्तराखण्ड राज्य आंदोलन के दौरान उनका लिखा ^जै भारत जै उत्तराखण्ड^ नाटक काफी लोकप्रिय रहा। राज्य आंदोलन के साथ ही उनका उत्तराखण्ड के राजनीतिक एवं सामाजिक क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण भूमिका रही।

धस्माना अपने पीछे पत्नी] दो बेटों] पुत्री] नाती&पोतों] भाई बहनों] भतीजों का भरा&पूरा परिवार छोड़ गए हैं। वर्षीय धस्माना के निधन से उत्तराखण्उ समाज में शोक की लहर है। निगम बोध द्घाट पर उनके अंतिम संस्कार में राजनीति] पत्रकारिता] साहित्य] समाज] रंगमंच और जनआंदोलनों से जुड़ी कई शख्सियतों के अलावा आम लोग भी बड़ी संख्या में शामिल हुए।

 
         
 
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