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vad 23 25-11-2017
 
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दुनिया 
 
सड़क से सियासत

  • सिराज माही

पड़ोसी देश होने के बावजूद चीन अक्सर भारत को आंख दिखाता रहता है। दोनों के बीच किसी न किसी मुद्दे पर विवाद बना रहता है। नया विवाद ^वन बेल्ट वन रोड^ ¼ओबीओआर½ परियोजना को लेकर है। दरअसल चीन ने ओबीओआर परियोजना पर व्यापक सहमति बनाने के मकसद से बीजिंग में एक सम्मेलन किया। इस सम्मेलन में दुनिया के १३० देशों के अधिकारी] कारोबारी और फाइनेंसर शामिल हुए जबकि भारत ने अपने कहे मुताबिक इस सम्मेलन में हिस्सा नहीं लिया।

गौरलतब है कि चीन ओबीओआर के अंतर्गत चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा बना रहा है। यह रास्ता पाकिस्तान को चीन से जोड़ेगा। यह रास्ता करीब २४४२ किलोमीटर लंबा है। इस परियोजना का मकसद दक्षिण-पश्चिमी पाकिस्तान से चीन के उत्तर-पश्चिमी स्वायत्त क्षेत्र शिंजियांग तक ग्वादर बंदरगाह] रेलवे और हाइवे के माध्यम से तेल और गैस की कम समय में वितरण करना है। भारत इस रास्ते का विरोध इसलिए कर रहा है क्योंकि यह रास्ता पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के गिलगित-बाल्टिस्तान और पाकिस्तान के विवादित क्षेत्र बलूचिस्तान होते हुए जायेगा। जिसे भारत अपना हिस्सा मानता है। यह रास्ता इसलिए भी विवादित है क्योंकि बलूचिस्तान प्रांत में दशकों से अलगाववादी आंदोलन चल रहे हैं। इसलिए भारत ने ओबीओआर सम्मेलन में हिस्सा नहीं लिया है।

चीन की महत्वकांक्षी ओबीओआर परियोजना कितनी विशाल है इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि दुनिया की आधी से अधिक आबादी इसके दायरे में आएगी। इस परियोजना के तहत सड़कों] रेलवे और बंदरगाहों का ऐसा जाल बिछाया जाएगा जो एशिया] अफ्रीका और यूरोप के बीच संपर्क और 

आवाजाही को आसान बना देंगे। तीनों महाद्वीपों के पैंसठ देशों को जोड़ने की इस महापरियोजना पर चीन २०१३ से साठ अरब डॉलर खर्च कर चुका है और अगले पांच साल में इस पर छह सौ से आठ सौ अरब डॉलर निवेश करने की उसकी योजना है। चीन का मानना है कि यह दुनिया का सबसे बड़ा ^सिल्क रूट^ होगा और वैश्विक अर्थव्यवस्था की सुस्ती को तोड़ने का कारगर उपाय साबित होगा।

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग शी के मुताबिक ^बेल्ट एंड रोड^ पहल एशियाई] यूरोपीय एवं अफ्रीकी देशों पर केंद्रित है लेकिन यह अन्य देशों के लिए भी है। चीन ^बेल्ट एंड रोड^ पहल में हिस्सा लेने वाले विकासशील देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों को ८.७ अरब डालर की सहायता मुहैया कराएगा ताकि ये देश और संगठन लोगों के कल्याण के लिए और परियोजनाओं की शुरूआत कर सकें। चीन ^बेल्ट एंड रोड^ पहल में हिस्सा ले रहे देशों के साथ नवाचार पर सहयोग बढ़ाने के लिए पचास संयुक्त प्रयोगशालाओं की स्थापना करेगा। इसके अलावा चीन वित्तीय संस्थानों को करीब ४३.५ अरब डालर की अनुमानित राशि से दूसरे देशों में आरएमबी कोष कारोबार करने के लिए प्रोत्साहित करेगा। शी के मुताबिक ^बेल्ट एंड रोड^ पहल में कई मार्ग और बंदरगाह परियोजनाएं हैं। सीपीईसी को जहां मुख्य परियोजना कहा जा रहा है वहीं ^बेल्ट एंड रोड^ में बांग्लादेश] चीन] भारत और म्यामांर आर्थिक गलियारा] न्यू यूरेशियन लैंड ब्रिज] चीन मंगोलिया रूस आर्थिक गलियारा] चीन भारत-चीन प्रायद्वीप आर्थिक गलियारा और २१वीं सदी का नौवहन रेशम मार्ग शामिल है।

चीन ने भारत के ^बेल्ट एंड रोड^ पहल में शामिल होने से इनकार करने को ^खेदजनक^ बताया है। दरअसल भारत को मुख्य रूप से चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे ¼सीपीईसी½ को लेकर चिंताएं हैं कि इससे विवादित कश्मीर क्षेत्र पर असर पड़ सकता है। चीन की सरकारी मीडिया के मुताबिक यदि बी एंड आर को लेकर किसी देश को इतने संदेह हैं और वह इसमें शामिल होने को लेकर ?kcjk;k हुआ है तो चीन इसमें भाग लेने के लिए उस पर दबाव नहीं बनाएगा। दरअसल भारत का कहना है कि कोई भी देश ऐसी परियोजना को स्वीकार नहीं कर सकता जिसमें उसकी संप्रभुता एवं भूभागीय एकता संबंधी प्रमुख चिंताओं की उपेक्षा की गई हो। 

जानकारों के मुताबिक ओआरओबी चीन के राष्ट्रपति शी जिनफिंग का सपना है और उनके सत्ता की कमान संभालने के कुछ समय बाद ही इसकी चर्चा शुरू हो गई थी। पर चीन की महा तैयारी के बावजूद ओबीओआर का सपना पूरा होगा इसकी कोई गारंटी नहीं है। क्योंकि ओबीओआर की राह में बहुत रोड़े हैं। पहले तो चीन की इस पिरियोजना के रास्ते में दुर्गम इलाके रोड़ा बनेंगे और दूसरे दो देशों के बीच स्थायी रूप से बनी रहने वाली तकरार।

भारत और चीन के बीच ताजे विवाद के इतर भी हाल ही में कई विवाद हुए हैं। पिछले दिनों चीन ने अरुणाचल प्रदेश की कुछ जगहों के नाम बदल दिए थे। दलाई लामा की अरुणाचल यात्रा पर चीन ने भारत को चेताया था कि इससे दोनों देशों के रिश्तों में दरार आऐगी। भारत ने सुरक्षा की दृष्टि से चीन सीमा पर ब्रम्होस मिसाइल तैनात की थी तब भी चीन ने एतराज जताया था। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जैशे मोहम्मद सरगना हाफिज सईद को प्रतिबन्धित करने के भारत के प्रयास को चीन ने रोकने की कोशिश की थी। इस तरह हम देखें तो दोनों देशों के किसी न किसी मुद्दे को लेकर तनाव की स्थिति बनी रहती है।


धीमा है अंसाज का मामला

विकीलीक्स के संस्थापक जूलियन असांज पर चल रहे मामले की जांच बहुत धीमी रफ्तार में हो रही है। यह मामला स्वीडन में चल रहा है। इक्वाडोर के मुताबिक स्वीडन की सरकार जूलियन असांज पर लगे यौन उत्पीड़न के आरोपों की जांच नहीं करवा पाई है। यह मामला २०१० का है। जूलियन असांज बीते पांच साल से इक्वाडोर की शरण में हैं और उन्हें ब्रिटेन स्थित इक्वाडोर के दूतावास तक ही सीमित करके रखा गया है। असांज को डर है कि अगर उन्होंने दूतावास की इमारत से निकलने की कोशिश की] तो उन्हें एक विदेशी अपराधी के तौर पर अमरीका को सौंप दिया जाएगा। ऑस्ट्रेलियाई कंप्यूटर प्रोग्रामर जूलियन असांज इस बात से चिंतित हैं कि उन्होंने अफगानिस्तान और इराक युद्ध से संबंधित करीब ५००]००० गुप्त सैन्य फाइलों की विकीलीक्स के जरिए रिलीज कर दिया था] जिसके चलते अमेरिका उनकी गिरफ्तारी की मांग कर सकता है। यौन उत्पीड़न के सभी आरोपों को असांज शुरुआत से ही बेबुनियाद बताते आए हैं। साल २०१० में जब असांज स्टॉकहोम में एक लेक्चर देने के लिए गए थे] तो उन पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगा था। उनपर एक महिला के रेप करने का आरोप है। असांज इन आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताते हैं। बीते महीने] अमेरिकी अटॉर्नी जनरल जेफ सेशंस ने कहा था कि असांज को गिरफ्तार करना उनकी ^प्राथमिकता^ थी। हालांकि असांज पर लगे आरोपों के बारे में अमेरिकी न्याय विभाग से उन्हें कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हो पाई 

 
         
 
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  • आकाश नागर

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