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vad 7 05-08-2017
 
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तलाक! तलाक ! तलाक ! + + +

  • सिराज माही

तीन तलाक पिछले कुछ दिनों से सुर्खियों में है। जहां एक तरफ कुछ मुस्लिम महिलाएं तीन तलाक के विरोध में हैं तो ज्यादातर मुस्लिम इसके समर्थन में हैं। दरअसल तीन तलाक के खिलाफ केंद्र का तर्क है कि आम मुस्लिम अपनी पत्नी को तीन बार तलाक बोलकर उसकी जिंदगी बर्बाद कर देता है। इसलिए इस पर रोक लगनी चाहिए। जबकि तीन तलाक पर मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड का कहना है कि पत्नी के साथ रह कर और उससे खीझ कर उसे मौत के ?kkV उतार देने से बेहतर है कि उसे तलाक दे दिया जाए। 

उच्चतम न्यायालय में इन दिनों तीन तलाक को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई हो रही है। इसमें केंद्र सरकार ने तीन तलाक के खिलाफ अपनी दलीलें दी हैं तो तीन तलाक के समर्थन में ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की ओर से कपिल सिब्बल ने कई दलीलें दी हैं। कपिल सिब्बल के मुताबिक तीन तलाक चौदह सौ साल पुरानी प्रथा है और यह स्वीकार की गई है। यह मामला आस्था से जुड़ा है] जो चौदह सौ साल से चल रहा है तो ये गैर- इस्लामिक कैसे है। उनके मुताबिक अगर राम को लेकर आस्था पर सवाल नहीं उठाए जा सकते तो तीन तलाक पर क्यों? यह सारा मामला आस्था से जुड़ा है। पर्सनल लॉ कुरान और हदीस से आया है। कपिल के मुताबिक हर मुस्लिम बहुसंख्यक देश में हिंदुओं को संरक्षण मिलना चाहिए और उसी तरह हिंदू बहुसंख्यक देश में मुस्लिमों को सरंक्षण मिले। 

उच्चतम न्यायालय में केंद्र की ओर से दलील दी गई कि कि केंद्र सरकार तीन तलाक पर कानून बनाने को तैयार है। केंद्र के मुताबिक तलाक के मामले में मुस्लिम समाज में महिलाओं के अधिकार पुरुषों की तुलना में कम हैं। देश में अन्य समुदायों की महिलाओं की तुलना में मुस्लिम महिलाओं को समान अधिकार नहीं है। तीन तलाक संविधान के विपरीत है। ये महिलाओं के समानता] लैंगिक समानता और मानवाधिकार के खिलाफ है। कोई भी पर्सनल ला हो या प्रथा] उसे संविधान की कसौटी से गुजरना होगा। किसी भी महिला को दूसरे समुदाय की महिलाओं के समान हक होना चाहिए। ये माइनरटी से जुड़ा संवेदनशील मुद्दा है इसलिए पुरानी सरकार इस पर कानून नहीं लाई। 

तीन तलाक पर सबसे पहले उत्तराखण्ड के तात्कालिक मुख्यमंत्री ने पिछले साल बाकायदा एक सभा में यह ऐलान किया था कि उत्तराखंड में तीन तलाक को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। दरअसल किच्छा में एक मुस्लिम महिला ने खुलेआम मुस्लिम समाज के खिलाफ विद्रोह कर दिया था। तीन तलाक से परेशान इस महिला ने हिंदू धर्म अपनाने की बात कही थी। पूरे देश में अलग-अलग जगहों से तीन तलाक पर दायर याचिका के बाद सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड से सवाल पूछा था। तब मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने हलफनामा दायर करते हुए कहा था कि ये याचिकाएं खारिज की जानी चाहिए क्योंकि तीन तलाक एक ^पर्सनल लॉ^ है और नियमों के मुताबिक सरकार या सुप्रीम कोर्ट इसमें बदलाव नहीं कर सकती। दो सितंबर २०१६ को दिए जवाब में मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने दलील दी थी कि] ^पत्नी से छुटकारा पाने के लिए पति उसका कत्ल कर दे]  इससे बेहतर है कि उसे तीन बार तलाक बोलने दिया जाए।^ 

मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के जवाब के बाद सुप्रीम कोर्ट ने इस पर केंद्र सरकार से जवाब मांगा था। सात अक्टूबर को केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दायर कर कहा था] ^तीन तलाक] निकाह हलाला और एक से ज्यादा शादी जैसी प्रथाएं इस्लाम की अनिवार्य धार्मिक प्रथा नहीं हैं।^ यह पहला मौका था जब केंद्र सरकार ने तीन तलाक का विरोध किया था। उल्लेखनीय है कि ^तीन तलाक^ पर सबसे पहले सुप्रीम कोर्ट ने खुद संज्ञान लेते हुए सुनवाई शुरू की थी। बाद में छह मुस्लिम महिलाओं ने भी कोर्ट में याचिका दायर की। तीन तलाक का मुद्दा साल पिछले साल यानि २०१६ से सुर्खियों में आया। जानकारों का मानना है कि भारतीय जनता पार्टी तीन तलाक का फायदा लेना चाहती है इसलिए गाहे बगाहे वह तीन तलाक का विरोध कर रही है। चूंकि कुछ मुस्लिम महिलाएं तीन तलाक के खिलाफ हैं इसलिए उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी ने उन्हें बरगलाने के कोशिश की। इन दिनों तीन तलाक इसलिए चर्चा में है क्योंकि सुप्रीम कोर्ट में इसकी सुनवाई चल रही है। हालांकि सुप्रीम कोर्ट अभी किसी भी नतीजे पर नहीं पहुंचा है।



बेटियों की पीड़ा

हरियाणा के एक गांव में इतिहास रचा गया। भारत के इतिहास में यह पहली ?kVuk होगी जब एक साथ किसी स्कूल की ८० से ज्यादा लड़कियां धरने पर बैठीं। यहां १३ लड़कियां आमरण-अनशन भी कर रही थी। जिस हरियाणा से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ^बेटी बचाओ] बेटी पढ़ाओ^ का नारा दिया] आज उसी हरियाणा की बेटियां १०वीं तक का स्कूल १२वीं तक कराने के लिए हड़ताल करना पड़ रहा है। लड़कियां छेड़खानी की ?kVukvksa से इस कदर परेशान हैं कि वे १०वीं के बाद पढ़ाई के लिए दूसरे गांव के स्कूल नहीं जाना चाहती हैं और उनकी मांग है कि उनके गांव के स्कूल को ही १२वीं तक कर दिया जाए। रेवाड़ी जिले के गोठड़ा गांव की इन लड़कियों के लिए एक गांव से दूसरे गांव की तीन किलोमीटर की दूरी किसी जहन्नुम से कम नहीं है। यह दूरी इनकी पूरी जिंदगी बदल रही है। इस गांव की लड़कियां पढ़ने के लिए सरकार से गुहार लगा रही हैं कि उन्हें और कुछ नहीं बस स्कूल चाहिए। गोठड़ा गांव में सरकारी स्कूल सिर्फ कक्षा १० तक हैं और आगे की पढ़ाई के लिए गांव की लड़कियों को तीन किलोमीटर दूर कवाली गांव तक का सफर तय करना पड़ता है। स्कूल के रास्ते में शराब का] सीनियर सेकेंडरी स्कूल और श्री कूष्णा कॉलेज पड़ता है जहां गांव की लड़कियों के साथ अक्सर छेड़खानी की ?kVuk,a होती हैं। गांव के सरपंच सुरेश चौहान के मुताबिक उन्होंने कई बार इन ?kVukvksa की शिकायत प्रशासन से की लेकिन सुनवाई नहीं हुई। गांव की लड़कियों की मांग है कि स्कूल में दो कक्षाएं जोड़ दी जाएं ताकि लड़कियां बिना डरे] बिना किसी छेड़छाड़ के और बिना किसी पीड़ा के अपनी पढ़ाई कर सकें।

 

तृणमूल का जलवा बरकरार

पश्चिम बंगाल में हुए सात नगर निकाय चुनावों में तृणमूल कांग्रेस ने चार पर जीत हासिल की है। पिछले तीन दशकों में यहां पहाड़ी इलाके मिरिक में जीत दर्ज करने वाली वह पहली गैरपहाड़ी ¼मुख्यधारा की½ पार्टी है। तृणमूल कांग्रेस ने राज्य के साउथ २४ परगना के पुजाली] नॉर्थ दिनाजपुर के रायगंज] मुर्शिदाबाद के डोमकल और दार्जिलिंग की मिरिक सीट पर विरोधियों का सफाया कर दिया। पुजाली के १६ वार्डों में से १२ पर तृणमूल कांग्रेस ने जीत दर्ज की] जबकि बीजेपी सिर्फ दो वार्डों पर जीती। डोमकल के २१ वार्डों में तृणमूल कांग्रेस को २० पर सफलता मिली। डोमकल नगर निगम में पहली बार कोई चुनाव हुआ था। चुनाव से पहले रैगनी नगर निगम पर कांग्रेस का नियंत्रण था] लेकिन अब वहां के २७ वार्डों में से २४ पर तृणमूल का कब्जा हो गया है। मिरिक के नौ वार्डों में से पार्टी ने छह जीते। यहां उसने बीजेपी गठबंधन की सहयोगी गोरखा जनमुक्ति मोर्चा को मात दी। तीन पहाड़ी क्षेत्र] दार्जिलिंग] कलीमपोंग और कुर्सेयोंग पर जीजेएम ने जीत दर्ज की। दार्जिलिंग की ३२ सीट में से ३१ जीजेएस को गईं] वहीं कुर्सेयोंग के २० वार्डों में से १७ उसके नाम हुए। कलीमपोंग का परिणाम सबसे आखिर में ?kksf"kr हुआ। यहां जीजेएम-बीजेपी गठबंधन को जीत मिली। २३ वार्डों  में ११ सीटें इस गठबंधन ने जीतीं] जबकि हरका बहादुर छेत्री के नेतृत्व वाली जन आंदोनलन पार्टी ने दो और तृणमूल कांग्रेस ने भी दो सीटों पर जीत दर्ज की।

 
         
 
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  • गुंजन कुमार

उत्तराखण्ड से बढ़ते पलायन पर मानवाधिकार आयोग ने यूं ही चिंता नहीं जताई। वास्तव में पलायन और परिसीमन के चलते पर्वतीय राज्य की पहचान खतरे में

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