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श्वेत पत्र / दाताराम चमोली
 
जन यातायात में जनता

पब्लिक ट्रांसपोर्ट को बेहतर बनाने के लिए सरकार इसमें जनता की भागीदारी सुनिश्चित करे। प्रदेश और जिला स्तर पर ऐसी मजबूत कमेटियां बनाई जा सकती हैं] जिनमें संबंधित सरकारी अधिकारी] विशेषज्ञ और स्थानीय लोग शामिल हों

 

उत्तराखण्ड का दुर्भाग्य ही कहा जाएगा कि यहां जो भी जनहित में कुछ बेहतर करना चाहता है उसे चक्रव्यूह रचकर खत्म कर दिया जाता है। अविभाजित उत्तर प्रदेश में विधायक और उत्तराखण्ड की अंतरिम सरकार में परिवहन मंत्री रहे सुरेश चंद्र आर्य राज्य के ट्रांसपोर्ट को सुगम बनाना चाहते थे। इसमें जनता की भागीदारी चाहते थे। पहाड़ों में रोपवे से लेकर किसानों के लिए वातानुकूलित ट्रांसपोर्ट की कल्पना उन्होंने की थी। लेकिन लगता है कि उन जैसी सोच के नेताओं की जरूरत नए उत्तराखण्ड राज्य को नहीं थी। लिहाजा उन्हें हाशिए पर धकेल दिया गया। मल्टी मॉडल ट्रांसपोर्ट में एमबीए विश्वदीप भट्टाचार्य केंद्र की वाजपेयी सरकार में टेलिकॉम मेंबर रहे और वर्तमान में असम में इंस्टीट्यूट ऑफ रूरल डेवलपमेंट के सीनियर फैकल्टी मेंबर हैं। भट्टाचार्य महसूस करते हैं कि उत्तराखण्ड में पीपीपी मॉडल पर रोप वे और छोटी&छोटी वायु सेवाएं शुरू की जा सकती थीं। जल परिवहन के बारे में भी यहां किसी ने नहीं सोचा। फंड की दिक्कत थी तो सरकार किलोमीटर आधार पर प्राइवेट बसों को हायर कर जनता को उपलब्ध करा सकती थी। बंगलौर की तरह ट्रांसपोर्ट और इंदौर की तरह ड्राइवर कंडक्टर उत्तराखण्ड को चाहिए। उत्तराखण्ड निवासी जगदीश भट्ट १९९४ से इंस्ट्ीट्यूट ऑफ रेल ट्रांसपोर्ट ¼रेल मंत्रालय½ के आजीवन सदस्य और वर्तमान में इंडियन लाइटनिंग इंजीनियर सोसायटी के फैलो मेंबर हैं। उनका मानना है कि यदि वाहनों के ड्राइवर स्वस्थ हों तो ९९ प्रतिशत nq?kVuka, रुक सकती हैं। मशीन और मैेन का समन्वय जरूरी है। भारी वाहनों के ड्राइवरों को इंसेंटिव मिलता है तो वे nq?kVuka, नहीं करते हैं। जन यातायात को लेकर विशेषज्ञों की और भी तमाम राय हो सकती हैं। विशेषज्ञों की राय सरकार को समय&समय पर लेनी ही चाहिए। जहां तक मैं समझता हूं सरकार जन यातायात में जनता की भागीदारी कराकर इसे बेहतर बना सकती है। इसके लिए वह कुछ इन सुझावों को भी आजमा सकती है।

  • सरकार जन यातायात को नियंत्रित करने के लिए प्रदेश स्तर पर कोई मजबूत कमेटी बनाए जिसमें जनता से जुडे़ पब्लिक ट्रासपोर्ट के विशेषज्ञों] संबंधित सरकारी विभागों के अधिकारियों] जीएमओ] टीजीएमओ] केएमओ के प्रतिनिधियों और जन यातायात वाहन चालक la?kksa के प्रतिनिधियों को भी शामिल किया जाए। कमेटी में जो भी सदस्य हों उनके नाम] पते और फोन नंबर समाचार माध्यमों के जरिए पब्लिक को उपलब्ध कराए जाएं ताकि लोग उन तक समस्याएं भेज सकें। 
  • प्रदेश स्तरीय नियंत्रण कमेटी समय&समय पर पीडब्ल्यूडी और राजमार्ग प्राधिकरण के अभियंताओं के साथ बैठक कर उन्हें nq?kZVukxzLr क्षेत्रों ¼डेंजर जोन्स½ में सड़क सुधार के लिए सुझाव भी दे। 
  • जिला स्तर पर भी नियंत्रण कमेटियां बननी चाहिए। इन कमेटियों में संबंधित सरकारी अधिकारियों और स्थानीय जनता के बीच के जानकार लोगों को शामिल किया जाए। इनकी बैठकों में पीडब्ल्यूडी] राजमार्ग एवं स्थानीय निकायों के अभियंता और सार्वजनिक वाहन चालक la?kksa के प्रतिनिधि भी मौजूद रहें। बैठकों में जो भी सुझाव आएं उन्हें प्रदेश स्तरीय नियंत्रण कमेटी को भेजा जाए।  

  • जिलाधिकारी अपने स्तर से यातायात नियमों के पालन की जानकारी लेते रहें। वे इस संबंध में हर दो&तीन माह के अंतराल में अपर जिलाधिकारी] अपर पुलिस अधीक्षक] समस्त एसडीएम] क्षेत्राधिकारियों और जिला स्तर की नियंत्रण कमेटियों के साथ बैठकर कर समस्या समाधान के निर्देश भी दे सकते हैं। 
  • सड़क सुरक्षा अभियानों के तहत ब्लॉक स्तर पर भी पुलिस] प्रशासन]परिवहन अधिकारियों और स्थानीय लोगों की बैठकें हों। इनमें सड़क nq?kZVuk क्षेत्रों को चिन्हित किया जाए और उनसे जिला व प्रदेश कमेटी को अवगत कराया जाए। 
  • किसी भी वाहन nq?kZVuk की जांच के लिए कम से कम एसडीएम के नेतृत्व में जांच कमेटी बनाई जाए। इसमें nq?kZVukxzLr क्षेत्र के ब्लॉक प्रमुख या स्थानीय निकाय के अध्यक्ष] स्थानीय थानेदार या पटवारी को भी शामिल किया जाए। 
  • सड़क nq?kZVukमें ?kk;y व्यक्ति को तत्काल चिकित्सा सहायता मिले। इसके लिए ब्लॉक स्तर पर सरकारी एवं निजी अस्पतालों] पुलिस&प्रशासन और समाज सेवियों की कोआर्डिनेशन कमेटियां बनाई जाएं।
  • आपात स्थिति के लिए कोई टोल फ्री नंबर हो जिस पर राह चलता कोई आम आदमी nq?kZVukकी जानकारी दे सके। 
  • आपात स्थिति के लिए कोई ऐसी ठोस व्यवस्था हो जिससे आपदा प्रबंधन और तमाम अन्य संबंधित सरकारी विभागों मसलन पुलिस] प्रशासन] स्वास्थ्य आदि के साथ ही सामाजिक संगठनों को भी तत्काल राहत और बचाव कार्य के लिए सक्रिय किया जा सके। यह व्यवस्था डिपो स्तर पर और जहां डिपो नहीं वहां जिला स्तर पर हो। 
  • यातायात सुरक्षा को लेकर जन जागरूकता पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए।

  • chamoli@thesundaypost.in
 
         
 
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