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vad 50 02-06-2018
 
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प्रदेश 
 
^अवैध खनन के खिलाफ हूं^

मंगेश f?kfYM;ky ऐसे आईएएस हैं जो चाहते तो विदेश सेवा में जा सकते थे। लेकिन उन्होंने राज्य की सेवा करना उचित समझा। बागेश्वर के जिलाधिकारी रहते उनसे हुई बातचीत के अंश 

 

प्रशासनिक अधिकारी के रूप में आपके शुरुआती कार्य क्या थे\

मैं सबसे पहले चमोली में कार्यरत रहा। वहां हमने विकास कार्यों में पारदर्शिता लाने के उद्देश्य से एक मोबाइल एप बनाया। मुख्यमंत्री ने इसका उद्द्घाटन किया था। ^बेदनी^ नाम से एक प्रोजेक्ट बनाया गया था।

बेदनी में क्या कार्य हुए\

^बेदनी^ शब्द बुग्याल से लिया गया है। इस प्रोजेक्ट के तहत गर्भवती महिलाओं को सुविधाएं दी गईं। आप देख सकते हैं कि आज भी पहाड़ों के दूरस्थ गांवों में ब्लड प्रेशर] एनीमिया जांच की सुविधाएं नहीं हैं। वेदनी प्रोजेक्ट के तहत सुनिश्चित किय गया कि एएनएम ?kj&?kj जाकर उन्हें यह सुविधाएं दें। डिलीवारी के सात दिन पहले द्घर के लोगों को एलर्ट किया किया जाए। हमने यह भी ध्यान रखा कि बागेश्वर में ब्लड बैंक नहीं है। जरूरत पड़ने पर इस समस्या से कैसे निपटा जाए। दूरस्थ गांवों को चिह्नित कर हमने महिलाओं को स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराई हैं।

बागेश्वर जनपद में अवैध खनन एवं खड़िया खनन कारोबारी हैं। उनके खिलाफ क्या कार्रवाई हुई\

मैं शुरू से ही अवैध खनन के खिलाफ कार्रवाई करता आ रहा हूं। सभी एसडीएम को इस बारे में सख्त आदेश दिए गए। अभी हाल में हमने दो अवैध माइंस को सीज किया है। 

कहा जा रहा है कि जिले में हरियाणा की शराब बेची जा रही है\

इस मामले में शिकायतें मेरे पास भी आई थीं। हमने आबकारी एवं पुलिस विभाग को आदेश किया था कि हरियाणा से जो शराब आ रही है] उस पर कार्रवाई की जाए। १५-२० लोगों पर नामजद मुकदमे भी दर्ज किए गए हैं।

कांडा में शराब विरोध कर रही महिलाओं एवं स्थानीय लोगों पर मुकदमे दर्ज िकए गए हैं\

व्यवसायी द्वारा सामान तोड़ने की शिकायत किए जाने पर पुलिस एफआईआर दर्ज करने के लिए बाध्य हुए। शासन की तरफ से महिलाओं पर किए गए मुकदमे वापस लेने की कोशिश हो रही है।

सुना है कि युवाओं के लिए भी आप कुछ अच्छे कार्य कर रहे थे\

युवा राज्य और देश का भविष्य है। जिले के जितने भी पीसीएस अधिकारी हैं] उनके सहयोग से हमने युवाओं को कुछ गाइड करने की सोची। उन्हें सुबह ८ बजे से २ द्घंटे तक अलग-अलग विषयों में मार्गदर्शन देने का काम किया है। अधिकारी युवाओं को लोकप्रशासन] इतिहास आदि विषय पढ़ाते हैं। युवाओं को प्रतियोगिताओं के लिए तैयार किया जाता है। लाइब्रेरी में भी अधिकारी किताबें दान देते हैं। महिलाओं के लिए भी ^स्पर्श^ और ^उत्कर्ष^ जैसी योजनाएं चलाई गई। 


तबादले से आक्रोश

  • दिकदर्शन रावत

जिलाधिकारी मंगेश f?kfYM;ky ने खनन माफिया के खिलाफ कड़े तेवर दिखाए तो महज आठ माह में ही उनका तबादला कर दिया गया

 

उत्तराखण्ड के बारे में कहा जाता है कि यहां जो अधिकारी जनहित में ईमानदारी से काम करता है] भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने की कोशिश करते हैं] वह राजनेताओं और उनके गुर्गों की आंखों की किरकिरी बन जाता है। इसका प्रत्यक्ष प्रमाण बागेश्वर जिले के डीएम मंगेश f?kfYM;ky हैं। इस युवा आईएएस अधिकारी ने जब खनन माफिया के खिलाफ सख्त कार्रवाई की। राजनेताओं के भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने की कोशिश की तो महज आठ महीने में ही उनका तबादला कर दिया गया] जबकि न्यायपालिका के स्पष्ट आदेश हैं कि कम से कम दो साल तक किसी अधिकारी का स्थानांतरण नहीं होना चाहिए। जिलाधिकारी के स्थानांतरण की खबर से जनता में भारी आक्रोश है। यहां तक कि लोग सड़कों पर प्रदर्शन करते भी नजर आए। राज्य आंदोलन से जुड़े कार्यकर्ताओं] बुद्धिजीवियों और छात्रों ने जिलाधिकारी के तबादले के विरोध में सड़कों पर प्रदर्शन किया। तहसील परिसर पर भी जमकर विरोध दर्ज किया। जन आक्रोश को देखते हुए खनन माफिया और राजनेताओं में हड़कंप है कि विरोध की यह चिंगारी कहीं उग्र रूप न धारण कर ले।

गौरतलब है कि बागेश्वर जिले की धरती खनन माफिया के लिए स्वर्ग के समान रही है। दूसरे राज्यों के लोग भी यहां पहाड़ों को चीरकर खड़िया खनन से मालामाल होते रहे हैं। नदियों से भी बड़े पैमाने पर अवैध खनन होता रहा है। बताया जाता है कि कुछ दिन पहले राज्य के एक विधायक हैं] उनके बेटे की अवैध खनन की ओवरलोड गाड़ियां सीज कर ली गई थी। इन्हीं विधायक की गाड़ी से चुनाव के दौरान दो लाख रुपए और शराब भी पकड़ी गई थी। जानकारों का मानना है कि तभी से विधायक डीएम से नाराज चल रहे थे। जिसकी परिणति डीएम के तबादले के रूप में सामने आई।

जिलाधिकारी के सख्त तेवरों से लोग खुश थे। जिले में खनन माफिया ने निर्माण कार्यों की आड़ में खनन के लिए नदियों में जेसीबी मशीनें डाल दी थी। ^दि संडे पोस्ट^ के पास इसके साक्ष्य भी उपलब्ध हैं। जिलाधिकारी ने इन मशीनों और अवैध खनन पर अंकुश लगाया। यहां तक कि अपने तबादले से महज दो दिन पहले ही उन्होंने दो खड़िया माइन्स सीज कर दी थीं। जिनमें मानकों का खुलेआम उल्लंद्घन हो रहा था। बताया जाता है कि जिलाधिकारी के सख्त तेवर माफिया और नेताओं को नागवार लगे। जिलाधिकारी न सिर्फ भ्रष्टाचार की राह का रोड़ा बने] बल्कि उन्होंने विकास कार्यों में दिलचस्पी दिखाई। दूरस्थ क्षेत्रों की गर्भवती महिलाओं की समय से स्वास्थ्य जाचं की व्यवस्थाएं की। कम समय में ही वे काफी योजनाओं को धरातल पर ले आए। इसके अलावा उन्होंने अधिकारियां से मिलकर युवाओं को प्रतियोगिता परीक्षाओं की तैयारी के लिए भी माहौल भी उपलब्ध कराया।


 

 
         
 
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,क्या उत्तराखंड में ऐसी कोई सरकार आयेगी जो जंगलों को जलने से रोक सके

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  • जीवन सिंह टनवाल

आईपीएल के मौजूदा सीजन में ही महिला आईपीएल की भी भूमिका तैयार हो गई है। प्लेऑफ मुकाबलों से पहले ही महिला क्रिकटरों का जो प्रदर्शनी मुकाबला

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