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देश&प्रदेश
 
राशन पर भारी अनुशासन

  • गुंजन कुमार

राष्ट्र रक्षा में अपनी जान की बाजी लगा देने वाले जवान अब सरकार के आगे फरियादी बन लाचार होने लगे हैं। तेज प्रताप यादव के धरने ने सेना के भीतर जारी भ्रष्टाचार की ओर इशारा किया है। यह भी कि सवाल खड़ा करने वालों को सजा दी जा रही है। यानी अनुशासन राशन पर भारी है

 

दिल्ली का जंतर मंतर ऐसे तो आंदोलन और सरकार विरोधी नारों से रोजाना गूंजता रहता है। यहां सरकार विरोधी नारे लगाने वालों में सैनिकों] अर्द्धसैनिक बलों के जवानों को बहुत कम देखा गया है। मगर पिछले दो सालों से जंतर मंतर पूर्व सैनिकों के आंदोलन का भी अड्डा बनता जा रहा है। पहले ^वन रैंक वन पेंशन^ पर पूर्व सैनिक महीनों जंतर मंतर पर सैकड़ों आंदोलनरत रहे। इनका आंदोलन अभी भी चल रहा है। कुछ दिनों पहले एक पूर्व जवान ने ^वन रैंक वन पेंशन^ के कारण आत्महत्या करने का प्रयास भी किया। फिलहाल अपनी दस सूत्री मांगों के साथ हरियाणा निवासी एवं बीएसएफ के पूर्व जवान तेज बहादुर यादव ने धरना प्रदर्शन शुरू किया है। तेज बहादुर यादव बीएसएफ का वही जवान है जिसने कुछ माह पूर्व बीएसएफ में खराब खाना मिलने का एक वीडियो  सोशल मीडिया पर डाल था जो वायरल हुआ था। जिसके बाद अनुशासन तोड़ने का आरोप लगाकर तेजबहादुर को बीएसएफ से निकाल दिया गया।

बीएसएफ जवान तेज बहादुर सिंह ने खराब खाने का वीडियो फेसबुक पर पोस्ट किया था। जिसके बाद वह सुर्खियों में आ गए थे। तब पूरी फोर्स को लेकर सवाल उठे थे कि क्या सीमा की सुरक्षा करने वाले जवानों को ऐसा ही खाना मिलता है। ये बात जब तूल पकड़ने लगी तो दूसरी पैरामिलिट्री फोर्सेज से खाने और जवानों से जुड़ी अन्य समस्याओं का मुद्दा सामने आने लगा। बाद में तेज बहादुर को बीएसएफ ने कोर्ट ऑफ इंक्वायरी में गलत पाया और उन पर कार्रवाई करते हुए १९ अप्रैल को नौकरी से बर्खास्त कर दिया। बर्खास्त होने के बाद तेज बहादुर ने कहा था कि वह न्याय के लिए लड़ाई जारी रखेंगे। उनकी लड़ाई सारे सैनिकों के लिए है। अब वे दस सूत्री मांग को लेकर १४ मई से जंतर-मंतर पर धरने पर बैठे हैं। 

यादव ने केंद्र सरकार को जवानों को मिलने वाले राशन में बदलाव करने के लिए दो महीने का समय दिया है ताकि जवानों को बेहतर खाना मिल सके। उनके इस धरने में सेना के कई पूर्व अधिकारी भी शामिल हुए। तेज बहादुर ने बताया कि वह जवानों के लिए बेहतर राशन दिलाने और पाकिस्तान द्वारा भारतीय जवानों पर होने वाले हमलों को लेकर केंद्र सरकार से कड़ी नीति अपनाने की मांगों को लेकर यह भ्रष्टाचार विरोधी प्रदर्शन कर रहे हैं। उन्होंने अपने इस धरना-प्रदर्शन का ऐलान मुंबई कांग्रेस के एक कार्यक्रम में किया था। वह कार्यक्रम छत्तीसगढ़ में हुए नक्सली हमले में शहीद हुई २५ सीआरपीएफ जवानों को श्रद्धांजलि देने के लिए आयोजित कराया गया था। उन्होंने कहा कि अन्ना हजारे से प्रेरित होकर इस भ्रष्टाचार विरोधी अभियान की शुरुआत की है।

उनकी मांग है कि सेना और अर्द्धसैनिक बलों में जवानों और अधिकारियों का एक ही मेस होना चाहिए। भ्रष्टाचार करने वाले अफसरों पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। तेज अगर सरकार हमारी १० सूत्री मांगों को दो महीने में पूरा नहीं करती है तो बड़ा आंदोलन किया जाएगा। यह व्यक्ति विशेष की लड़ाई नहीं है] बल्कि देश की लड़ाई है। सरकार ^जय जवान-जय किसान^ का नारा भूल चुकी है। धरने में तेज बहादुर के परिवार वाले भी शामिल हुए। उनकी पत्नी भी उनके साथ पूरे दिन बैठी रही। सेना से सेवानिवृत्त अधिकारी और जवान भी उनके धरने को समर्थन देने जंतर मंतर पहुंचे। मणिपुर की मानवाधिकार कार्यकर्ता इरोम शर्मिला भी १४ अप्रैल को तेज बहादुर को समर्थन देने पहुंची। उन्होंने कहा कि जवानों की सभी मांगें उचित हैं। इनकी मांगें पूरी होनी चाहिए। तेज बहादुर मूलतः हरियाणा के रहने वाले हैं। हरियाण के रेवाड़ी से वे तालुक्क रखते हैं। तेज बहादुर की पत्नी से जब बात की गई तो उन्होंने स्पष्ट  कहा] ^मोदी सरकार से हमें बहुत उम्मीद थी। खासकर भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने को लेकर। मगर जिस व्यक्ति ने भ्रष्टाचार के खिलाफ अवाज उठाई] उसे ही नौकरी से निकाल दिया गया। यदि ऐसे होगा तो कौन अपने बेटे को सेना में भेजेगा।^ हालांकि वह इस धरने के पहले भी धरना दे चुके हैं। तब राष्ट्रपति को ज्ञापन भी सौंपा गया था। तेज बहादुर ने बताया कि उनके मामले में हरियाणा महासभा पंचायत की ओर से राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपा गया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भ्रष्टाचार के खिलाफ बोलने की बात करते हैं तो फिर उन्हें सच बोलने की सजा क्यों दी जा रही है। 

तेज बहादुर यादव के धरने पर बैठने से पहले गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने दो एप लॉन्च किए हैं। पहले एप के जरिए सभी पैरामिलिट्री फोर्स के जवान और दूसरे एप से बीएसएफ के जवान अपनी समस्याओं की जानकारी डाल सकते हैं और जानकारी ले भी सकते हैं। इस एप के लॉन्च के दौरान गृह मंत्री ने कहा था कि सैनिकों को अनुशासन में रहना पड़ता है। इसी अनुशासन के कारण कई जवान अपनी समस्या अधिकारियों और सरकार के समक्ष नहीं रख पाते हैं। इस एप के जरिए कोई भी जवान अपनी समस्या मंत्री और अधिकारी को भेज सकता हैं। देखना होगा कि इस एप पर शिकायत करने वाले सैनिकों को भी अनुशासनात्म कार्यवाही होती है या उनकी समस्या को दूर किया जाता है।

gunjan@thesundaypost.in


अनहोनी के इंतजार में प्रशासन

  • सुमित जोशी

कोसी में डूबने के कारण अब तक कई लोगों की मौतें हो चुकी हैं। लेकिन प्रशासन लापरवाह बना हुआ है। नदी के किनारे सुरक्षा के इंतजाम तक नहीं हैं

 

आमतौर पर देखा जाता है कि प्रशासन किसी ?kVuk के बाद ही सक्रिय हो पाता है। लेकिन कुछ दिन की सक्रियता के बाद ही ?kVukओं को भूल जाता है। सुरक्षा के उपाय कभी नहीं किए जाते। ऐसे में जनता को हादसों का खामियाजा भुगतना पड़ता है। ऐसा ही हाल पर्यटन नगरी रामनगर का है। यहां पिछले कुछ वर्षों के दौरान कोसी नदी में डूबने से कई लोगों की अकाल मौतें हो चुकी हैं। लेकिन स्थानीय प्रशासन अभी तक नहीं जागा है। प्रशासन की लचर कार्य प्रणाली कभी भी किसी बड़ी ?kVuk को न्यौता दे सकती है।

गौरतलब है कि इन दिनों सूरज ने हर जगह लोगों का जीना दुभर कर रखा है। लोग गर्मी से बचने के लिए अपने द्घरों में कैद होने के लिए मजबूर हैं। मजदूर लोग दिन भर काम करने के बाद गर्मी से राहत पाने के लिए कोसी नदी का रूख कर रहे हैं। साथ ही पर्यटन सीजन की शुरूआत होने से हजारों की तादाद में सैलानी रामनगर आ रहे हैं। यहां पहुंचने वाले सैलानी अपनी यात्रा को तब तक सफल नहीं मानते हैं जब तक कि वे कोसी नदी के बीचों बीच चट्टान के टीले पर स्थित माता गार्जिया के धाम का दर्शन नहीं कर लेते हैं। इसी के चलते माता के धाम पर भक्तों] देशी-विदेशी पर्यटकों का तांता लगा हुआ है। इन तपिश भरे दिनों में माता के दर पर पहुंचने वाले कोसी में स्नान किए बिना नहीं लौटते हैं। लेकिन वे इस बात से शायद बेखबर हैं कि गर्मी से राहत पाने के चक्कर में थोड़ी सी चूक उनकी जान पर भारी पड़ सकती है।

दरअसल]  कोसी नदी के कुछ क्षेत्रों में गहरे कुंड बने हुए जिनमें डूबकर पहले भी कुछ लोगों की जानें गई हैं इससे मंदिर समिति बार-बार वहां आए श्रद्धालुओं को चेतावनी भी देती रहती है। रामनगर कोसी रैज के पास क्षेत्र के कामगार और मजबूदरों के साथ ही छोटे बच्चे अपने परिजनों को बिना बताए नहाने आ जाते हैं। जबकि कोसी क्षेत्र में लोगों का प्रवेश वर्जित है। लेकिन अपनी जान की परवाह किए बिना वो लोग कोसी नदी की ओर रूख करने से बाज नहीं आ रहे हैं। सिंचाई विभाग द्वारा चेतावनी के रूप में साफ-साफ लिख रखा है कि नदी में कभी भी जल का स्तर बढ़ सकता है। जिस कारण नदी क्षेत्र में प्रवेश वर्जित है। लेकिन प्रशासनिक स्तर से लोगों के प्रवेश को रोकने के लिए अभी तक किसी प्रकार के कोई खास प्रयास नहीं किए हैं। किसी सुरक्षाकर्मी की तैनाती नहीं की गई है। अमूमन देखा गया है कि गर्मियों के समय में ही कोसी में डूबने के कारण कई सारी मौतें भी हो चूकी हैं। छात्र कमलेश हर्बोला का इस विषय में कहना है कि ?kVuk  के बाद प्रशासन कार्यवाही करने की बात करता है। लेकिन समय गुजरने के साथ कार्यवाही की बात मात्र हवाई होकर रह जाती हैं। प्रशासन को किसी बड़ी ?kVuk के द्घटित होने से पहले ही यहां अपनी व्यवस्था चाक चौबंद कर देनी चाहिए। पूर्व छात्र संद्घ सचिव राजेंद्र रावत का तक है कि नदी क्षेत्र के पास मात्र चेतावनी लिखने से काम नहीं चलेगा। प्रशासन को ऐसे संवेदनशील क्षेत्र में तारबाड़ करनी चाहिए जिससे नदी में लोगों की आवाजाही को रोका जा सके। व्यापार मंडल कोषाध्यक्ष सौरभ गोयल ने कहा है कि प्रशासन को बैराज के पास एक कंट्रोल रूम बनाकर निगरानी रखनी चाहिए तथा वहां निपुण तैराकों को भी तैनात करना चाहिए। जिससे विपरीपरिस्थितियों में किसी अनहोनी को रोका जा सके।

 

पुलिस एवं वन विभाग को इस संदर्भ में आदेश दिए गए हैं। जल्द ही कोसी में नहाने वालों के खिलाफ अभियान चलाया जाएगा।

पारितोष वर्मा] एसडीएम] रामनगर

 

 
         
 
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  • अरुण कश्यप

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