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vad 50 02-06-2018
 
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सुर्खियां जो नहीं बनीं
 
हर मौसम मं आम

महात्मा गांधी अकसर कृषि प्रधान देश का सपना देखा करते थे] इसी सपने को भारत का भविष्य भी कहा करते थे। गांधी जी इसी सपने को साकार करता हुआ एक किसान राजस्थान के कोटा में दिखाई दे रहा है] जिसने आम की एक ऐसी फसल विकसित की है] जो साल भर फल देने में सक्षम है। कोटा के रहने वाले किशन सुमन चार बीद्घा खेत में आम की खेती करते हैं। उनके द्वारा उगाए गए पेड़ साल भर आम देते हैं] जिसकी वजह से इस पेड़ के चार पौधे राष्ट्रपति भवन में लगाए गए हैं। इस किस्म का नाम किशन ने सदाबहार रखा है। इन पेड़ों में रोग से लड़ने की क्षमता है] जिसकी वजह से फसल बर्बाद होने का डर नहीं रहता। इस पेड़ को गमलों में भी उगा कर फल पाया जा सकता है। किशन खुद इस किस्म के २२ मदर प्लांट्स लगा कर ३०० दूसरे पौधे पैदा कर चुके हैं। किशन के मुताबिक] सत्रह साल पहले उनके आम के बगीचे में एक&दो पेड़ ऐसे थे] जो साल भर फल दे रहे थे। उन्होंने इन पेड़ों पर ध्यान देना शुरू किया और संरक्षित करके नई किस्म विकसित की। फिलहाल किशन इन पौधों के पेटेंट की प्रक्रिया पर काम कर रहे हैं] जिससे इन्हें सुरक्षित किया जा सके।

दूध दान करती हैं महिलाएं

नवजात शिशु के लिए मां का दूध बहुत जरूरी होता है। मां का दूध उस बच्चे के लिए और जरूरी हो जाता है] जो प्रीमैच्योर पैदा हुआ हो। लेकिन कई बार कुछ बच्चों को मां का दूध नहीं मिल पाता। ऐसे ही एक बच्चे की जिंदगी बचाने के लिए चेन्नई की शरण्या गोविंदराजालु पिछले कई महीनों से उसको अपना दूध पिला रही हैं। ३२ साल की शरण्या गोविंदराजालु एक ऐसे बच्चे को अपना दूध पिलाती हैं] जो प्रीमैच्योर पैदा हुआ है। शरण्या खुद एक सात महीने के बच्चे की मां हैं और वो हफ्ते के पांच दिन १०० से १५० मिलीलीटर ब्रेस्ट मिल्क उस अस्पताल में भिजवाती हैं] जहां वक्त से पहले पैदा हुए कई बच्चे हैं और उनको मां के दूध की जरूरत है। शरण्या बताती हैं] मेरे पति ब्लड डोनर हैं और मैं ब्रेस्ट मिल्क डोनर हूं। कभी&कभी वो खुद इन बच्चों की माओं से मिलने के लिए हॉस्पिटल भी जाती हैं। गौरतलब है शरण्या अकेली ऐसी मां नहीं हैं] जो बच्चों के लिए बरस मिल्क देती हैं] बल्कि वो एक ऐसी कम्युनिटी का हिस्सा हैं] जो ब्रेस्ट मिल्क डोनेशन की प्रक्रिया संभालती है। ^नेचुरल पैरेन्टिंग कम्युनिटी^ नाम की ये संस्था जरूरतमंद नवजात बच्चों तक ब्रेस्ट मिल्क पहुंचाने का काम करती है। इसी कम्युनिटी से जुड़ी एक रेग्युलर डोनर वहीदा सतीश कुमार बताती हैं] ^कभी हॉस्पिटल के अधिकारी उनसे कॉन्टेक्ट करते हैं] तो कभी वो रेग्युलर बेसिस पर मिल्क डोनेट करती हैं] जो अस्पताल में स्टोर किया जाता है।^ उल्लेखनीय है तमिलनाडु में वर्तमान में नौ सरकारी ब्रेस्ट मिल्क बैंक हैं] जिनमें से पहला बैंक एग्मोर के इंस्टिट्यूट ऑफ चाइल्ड हेल्थ में है।


 

 
         
 
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,क्या उत्तराखंड में ऐसी कोई सरकार आयेगी जो जंगलों को जलने से रोक सके

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  • जीवन सिंह टनवाल

आईपीएल के मौजूदा सीजन में ही महिला आईपीएल की भी भूमिका तैयार हो गई है। प्लेऑफ मुकाबलों से पहले ही महिला क्रिकटरों का जो प्रदर्शनी मुकाबला

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