fnYyh uks,Mk nsgjknwu ls izdkf'kr
चौदह o"kksZa ls izdkf'kr jk"Vªh; lkIrkfgd lekpkj i=
vad 14 23-09-2017
 
rktk [kcj  
 
सियासी चकल्लस 
 
बिल माफी के निहितार्थ

उत्तराखण्ड के कैबिनेट मंत्री और सरकार के प्रवक्ता मदन कौशिक ने कहा कि यदि जल संस्थान पानी उपलब्ध नहीं करा रहा है तो चार माह के बिल माफ कर दिए जाने चाहिए। उनकी इस बात के निहितार्थ निकाले जा रहे हैं। आखिर सरकार का जोर पानी उपलब्ध कराने पर होना चाहिए या फिर बिल माफ करने पर? कयास लगाए जा रहे हैं कि बयान का मतलब कहीं यह तो नहीं कि राज्य में नेताओं के पिछले चार माह के दौरान पानी के बड़े&बड़े बिल आए हों। जिन्हें वे भुगतान करने में तकलीफ महसूस कर रहे हों। कहीं आम जनता के बहाने नेताओं के बड़े बिल माफ करने की तैयारी तो नहीं है। आखिर राजनीति में सब कुछ आम जनता के बहाने ही तो होता है।

असंतोष का विस्तार

अरविंद केजरीवाल मौजूदा शासन व्यवस्था और भ्रष्ट राजनीतिक माहौल से मायूस लोगों के लिए एक उम्मीद का प्रतीक बनकर आए थे। इसी उम्मीद में जनता ने उनको दिल्ली के सत्ता की बागडोर सौंपी और वे मुख्यमंत्री बने। लेकिन बहुत जल्द ही जनता तो क्या उनके अपने सहयोगियों का मोहभंग होना शुरू हो गया है। पहले योगेंद्र यादव] प्रशांत भूषण] आनंद कुमार अलग हुए। लेकिन केरीवाल सरकार में मंत्री रहे कपिल मिश्रा ने अरविंद केजरीवाल के खिलाफ जिस तरह मोर्चा खोला है] वह थमने का नाम नहीं ले रहा। केजरीवाल के खिलाफ तमाम भ्रष्टाचार के आरोपों के मद्देनजर अरविंद अभी तक खामोश हैं जो उनके स्वभाव के विपरीत है। अब आम आदमी पार्टी के एक और विधायक पंकज पुष्कर ने अपना असंतोष जाहिर किया है। पार्टी में दो दर्जन से ज्यादा विधायक मुख्यमंत्री के क्रिया&कलापों से खफा बताए जा रहे हैं। अगर बारी&बारी और भी विधायकों ने आगे आकर मोर्चा खोल दिया तो आप का साफ होना तय है।

लालू के बहाने

सीबीआई ने जिस तरह राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद पर शिकंजा कसा है] उसके सियासी इलाकों में कई मायने निकाले जा रहे हैं। इसे केंद्र की मोदी सरकार की एक खास चाल के रूप में देखा जा रहा है। अगले लोकसभा चुनाव में अभी दो साल की देरी है। मगर उसकी कवायद शुरू हो गई है। विपक्ष मोदी के विरुद्ध एक महागठबंधन बनाने की दिशा में सक्रिय है। इसमें सबसे ज्यादा सक्रियता बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार दिखा रहे हैं] जिनकी सरकार लालू प्रसाद की पार्टी राजद की समर्थन की बदौलत चल रही है। लिहाजा नीतीश को कमजोर करने के लिए उनके सहयोगी लालू प्रसाद पर निशाना साधा जा रहा है। लालू प्रसाद के तमाम ठिकानों पर जिस तरह से सीबीआई ने छापे मारे उससे सियासी निहितार्थ से इंकार भी नहीं किया जा सकता। अब आगे सवाल यह है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस अप्रत्यक्ष ^द्घोड़ा चाल^ का लालू नीतीश क्या जवाब देते हैं। जानकार बताते हैं कि लालू&नीतीश की जोड़ी को कमतर समझना भाजपा की भूल साबित हो सकती है जो उसने बिहार के विधानसभा चुनाव के दौरान की थी।

 

 
         
 
ges tkus | vkids lq>ko | lEidZ djsa | foKkiu
 
fn laMs iksLV fo'ks"k
 
 
fiNyk vad pquss
o"kZ  
 
 
 
vkidk er

क्या मुख्यमंत्री हरीश रावत के सचिव के स्टिंग आॅपरेशन की खबर से कांग्रेस की छवि प्रभावित हुई है?

gkW uk
 
 
vc rd er ifj.kke
gkW & 68%
uk & 14%
 
 
fiNyk vad

  • गुंजन कुमार

पतंजलि योग पीठ में स्वामी रामदेव के बाद महत्वपूर्ण स्थान रखने वाले आचार्य बालकृष्ण पर सीबीआई की नजर है। ^दि संडे पोस्ट^ ने ११ साल पहले खुलासा

foLrkkj ls
 
 
vkidh jkf'k
foLrkkj ls
 
 
U;wtysVj
Enter your Email Address
 
 
osclkbV ns[kh xbZ
1827834
ckj