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vad 45 30-04-2017
 
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विविध
 
मेरे बाद किधर जाएगी तन्हाई---

  • सिराज माही

जफर गोरखपुरी बहुमुखी प्रतिभा वाले शायर हैं। वह ऐसे कामयाब शायर हैं कि पिछले पचास सालों से उनकी रचनाएं महाराष्ट्र सरकार के स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल हैं। इन रचनाओं को लाखों बच्चे रोजाना पढ़ते हैं। उन्होंने फिल्मों के लिए भी गीत लिखें हैं। उन्होंने फिल्म नूरे&इलाही में ^बड़ा लुत्फ था जब कुंआरे थे हम तुम^ कव्वाली लिखी है। फिल्म ^बाजीगर^ में ^किताबें बहुत सी पढ़ीं होंगी तुमने^ गीत लिखा है] जो काफी मशहूर है। जफर ऐसे खुशनसीब शायर हैं जिसने फिराक गोरखपुरी] जोश मलीहाबादी] मजाज लखनवी और जिगर मुरादाबादी जैसे शायरों से अपने कलाम के लिए दाद वसूल की है। सिर्फ २२ साल की उम्र में उन्होंने मुशायरे में फिराक साहब के सामने गजल पढ़ी थी। उनकी गजल सुनकर फिराक साहब ने सरेआम ऐलान किया था कि ये नौजवान बड़ा शायर बनेगा। उस दौर में जफर गोरखपुरी प्रगतिशील लेखक la?k से जुड़े हुए थे और उनकी शायरी से शोले बरस रहे थे। फिराक ने उन्हें नसीहत दी कि शायर किसी भी la?k में फिट नहीं बैठता। फिराक साहब की नसीहत का जफर गोरखपुरी पर गहरा असर हुआ। इसके बाद वे संजीदगी से शायरी में जुट गए। जफर गोरखपुरी का जन्म गोरखपुर जिले की बासगांव तहसील के बेदौली बाबू गांव में ५ मई १९३५ को हुआ। प्रारंभिक शिक्षा गांव में प्राप्त करने के बाद उन्होंने मुंबई को अपना कर्मक्षेत्र बनाया। सन १९५२ में उनकी शायरी की शुरुआत हुई। उन्होंने १९९७ में संयुक्त राज्य अमेरिका की यात्रा की और वहां कई अंतरराष्ट्रीय मुशायरों में हिंदुस्तान का प्रतिनिधित्व किया।

 

सम्मान % महाराष्ट्र उर्दू आकादमी का राज्य पुरस्कार ¼१९९३½] इम्तियाजे मीर अवार्ड ¼लखनऊ½ और युवा&चेतना गोरखपुर द्वारा फिराक सम्मान ¼१९९६½।

 

रचनाएं % तेशा ¼१९६२½] वादिए&संग ¼१९७५½] गोखरु के फूल ¼१९८६½] चिरागे&चश्मे&तर ¼१९८७½] हलकी ठंडी ताजा हवा ¼२००९½] ^नाच री गुड़िया^ ¼कविताएं १९७८½] ^सच्चाइयां^ ¼कहानियां १९७९½। ^आर&पार का मंजर^ हिंदी में ¼१९९७½। 

 

मेरे बाद किधर जाएगी तन्हाई

मैं जो मरा तो मर जाएगी तन्हाई

 

मैं जब रो&रो के दरिया बन जाऊंगा

उस दिन पार उतर जाएगी तन्हाई

 

तन्हाई को ?kj से रुख्सत कर तो दो

सोचो किस के ?kj जाएगी तन्हाई

 

वीराना हूं आबादी से आया हूं

देखेगी तो डर जाएगी तन्हाई

 

यूं आओ कि पावों की भी आवाज न हो

शोर हुआ तो मर जाएगी तन्हाई

 

अब के साल पूनम में] जब तू आएगी मिलने

हम ने सोच रखा है रात यूं गुजारेंगे

धड़कनें बिछा देंगे शोख तेरे कदमों पे

हम निगाहों से तेरी आरती उतारेंगे

 

तू कि आज कातिल है] फिर भी राहत&ए&दिल है

जहर की नदी है तू] फिर भी कीमती है तू

पस्त हौसले वाले तेरा साथ क्या देंगे

जिंदगी इधर आ जा] हम तुझे गुजारेंगे

 

आहनी कलेजे को] जख्म की जरूरत है

उंगलियों से जो टपके] उस लहू की हाजत है

आप जुल्फ&ए&जानां के] खम संवारिए साहब

जिंदगी की जुल्फों को आप क्या संवारेंगे

 

हम तो वक्त हैं पल हैं] तेज गाम द्घड़ियां हैं

बेकरार लमहे हैं] बेथकान सदियां हैं

कोई साथ में अपने] आए या नहीं आए

जो मिलेगा रस्ते में हम उसे पुकारेंगे

 

धूप क्या है और साया क्या है अब मालूम हुआ

ये सब खेल तमाशा क्या है अब मालूम हुआ

 

हंसते फूल का चेहरा देखूं और भर आई आंख

अपने साथ ये किस्सा क्या है अब मालूम हुआ

 

हम बरसों के बाद भी उनको अब तक भूल न पाए

दिल से उनका रिश्ता क्या है अब मालूम हुआ

 

सहरा&सहरा प्यासे भटके सारी उम्र जले

बादल का इक टुकड़ा क्या है अब मालूम हुआ

 

मिले किसी से नजर तो समझो गजल हुई।

रहे अपनी खबर तो समझो गजल हुई॥

 

मिला के नजरों को वो हया से फिर]

झुका ले कोई नजर तो समझो गजल हुई॥

 

इधर मचल कर उन्हें पुकारे जुनूं मेरा]

भड़क उठे दिल उधर तो समझो गजल हुई॥

 

उदास बिस्तर की सिलवटें जब तुम्हें चुभें]

न सो सको रात भर तो समझो गजल हुई॥

 

वो बदगुमां हो तो शेर सूझे न शायरी]

वो महरबां हो जफर तो समझो गजल हुई॥

 

मेरा कलम मेरे जज्‌बात मांगने वाले

मुझे न मांग मेरा हाथ मांगने वाले

 

ये लोग कैसे अचानक अमीर बन बैठे

ये सब थे भीक मेरे साथ मांगने वाले

 

तमाम गांव तेरे भोलपन पे हंसता है

धुएं के अब्र से बरसात मांगने वाले

 

नहीं है सहल उसे काट लेना आंखों में

कुछ और मांग मेरी रात मांगने वाले

 

कभी बसंत में प्यासी जड़ों की चीख भी सुन

लुटे शजर से हरे पात मांगने वाले

 

तू अपने दश्त में प्यासा मरे तो बेहतर है

समंदरों से इनायात मांगने वाले

 

जब मेरी याद सताए तो मुझे खत लिखना।

तुम को जब नींद न आए तो मुझे खत लिखना॥

 

नीले पेड़ों की ?kuh छांव में हंसता सावन]

प्यासी धरती में समाने को तरसता सावन]

रात भर छत पे लगातार बरसता सावन]

दिल में जब आग लगाए तो मुझे खत लिखना।

 

जब फड़क उठे किसी शाख पे पत्ता कोई]

गुदगुदाए तुम्हें बीता हुआ लम्हा कोई]

जब मेरी याद का बेचौन सफीना कोई]

जी को रह&रह के जलाए तो मुझे खत लिखना।

 

जब निगाहों के लिए कोई नजारा न रहे]

चांद छिप जाए गगन पर कोई सहारा न रहे]

लोग हो जाएं पराए तो मुझे खत लिखना ।

 

मैं ऐसा खूबसूरत रंग हूं दीवार का अपनी 

अगर निकला तो ?kjवालों की नादानी से निकलूंगा

 

नेजे पे रखके और मेरा सर बुलंद कर 

दुनिया को इक चिराग तो जलता दिखाई दे

 

किसी मासूम बच्चे के तबस्सुम में उतर जाओ

तो शायद ये समझ पाओ] खुदा ऐसा भी होता है

 

मेरी इक छोटी सी कोशिश तुझको पाने के लिए

बन गई है मसअला सारे जमाने के लिए

 

रेत मेरी उम्र] मैं बच्चा] निराले मेरे खेल

मैंने दीवारें उठाई हैं गिराने के लिए

 

वक्त होठों से मेरे वो भी खुरचकर ले गया

एक तबस्सुम जो था दुनिया को दिखाने के लिए

 

देर तक हंसता रहा उन पर हमारा बचपना

तजरुबे आए थे संजीदा बनाने के लिए

 

यूं बजाहिर हम से हम तक फासला कुछ भी न था

लग गई एक उम्र अपने पास आने के लिए

 

मैं जफर ता&जिंदगी बिकता रहा परदेस में

अपनी ?kjokyh को एक कंगन दिलाने के लिए

 

कौन याद आया ये महकारें कहां से आ गईं

दश्त में खुशबू की बौछारें कहां से आ गईं 

 

कैसी शब है एक इक करवट पे कट जाता है जिस्म

मेरे बिस्तर में ये तलवारें कहां से आ गईं 

 

साथ है] मिलना अगर चाहूं तो मिलता भी नहीं

एक ?kj में इतनी दीवारें कहां से आ गईं 

 

शायद अब तक मुझमें कोई द्घोंसला आबाद है

?kj में ये चिड़ियों की चहकारें कहां से आ गईं 

 

ख्वाब शायद फिर हुआ आंखों में कोई संगसार] 

जेरे&मिजगां] खून की धारें कहां से आ गईं 

 

रख दिया किसने मेरे शाने पे अपना गर्म हाथ 

मुझ शिकस्ता&पा] में रफ्तारें कहां से आ गईं

&&&&&&

मुझे इक बोझ की सूरत 

उठाकर शाम कांधे पर

जब अपने ?kj पटक देती है लाकर

तेरे होठों की जिंदा मुस्कराहट

उठाती है मुझे

कहती है आओ

तुम्हारा बोझ पलकों पर उठा लूं

 

सब अच्छा है

सभी ने ?kj में खाना खा लिया है

बद्घारी दाल] सोंधी रोटियां] आलू की सब्जी] गर्म चाय

और उससे भी बहुत मीठा तेरा अंदाजे दिलदारी

तेरी मानूस] गमखारी

हथेली तेल बनकर जज्ब हो जाती है मेरे गर्म सर में

 

समा जाती हैं बालों में मसीहा उंगलियां तेरी

मुझे महसूस होता है 

मेरे बिखरे हुए आजा] दुबारा जुड़ गए हैं  

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