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दुनिया 
 
बातचीत पर विराम

  • सिराज माही

भारत&पाकिस्तान के बीच पहले से ही कई मामलों के चलते रिश्तों में दरारें थीं। अब भारतीय नागरिक कुलभूषण जाधव को फांसी की सजा सुनाए जाने के मामले को लेकर दोनों देशों के बीच एक बार फिर विवाद बढ़ा है। इस मामले में अब अमेरिका ने भी अपनी राय दी है। अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार लेफ्टिनेंट जनरल एचआर मैकमास्टर ने पाकिस्तान को चेतावनी दी है कि कोई भी छद्म रवैया नहीं अपनाएं जिससे उपमहाद्वीप की शांति खतरे में पड़े। मामले में पाकिस्तान के अड़ियल रवैये के चलते भारत ने पाकिस्तान के साथ होने वाली सभी वार्ताएं अस्थायी तौर पर रद्द कर दी हैं।

 

गौरतलब है कि पिछले दिनों अमेरिका की मध्यस्थता में दोनों देशों के प्रतिनिधियों के बीच सिंधु जल आयोग की बैठक होनी थी] जिसे रोक दिया गया। हाल ही में नई दिल्ली में समुद्री सुरक्षा के विभिन्न पहलुओं पर दोनों देशों के तटरक्षक बलों की होने वाली बैठक को भारत सरकार ने आखिरी समय में रद्द कर दिया। स्पष्ट रहे कि पिछले साल पठानकोट और उड़ी हमलों के बाद दोनों देशों के बीच हर तरह की बातचीत बंद हो गई थी। लेकिन कुछ स्थितियों को देखते हुए दोनों देशों के बीच बातचीत की स्थिति बनी थी] लेकिन जाधव के मामले के तूल पकड़ने के बाद सारी वार्ताएं एक बार फिर रद्द हो गईं।

 

भारत&पाक के बीच सभी वार्ताएं रद्द होने की वजह कुलभूषण जाधव के खिलाफ पाकिस्तान की कार्रवाई है। जाधव को पाकिस्तान की सैन्य अदालत ने फांसी की सजा सुनाई है। इस पर पाक सेना प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा मुहर लगा चुके हैं। भारत सरकार इस फैसले के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की तैयारी में है। भारत] पाक में ही भारतीय उच्चायोग ऊपरी अदालत में अपील करना चाहता है। कानूनी प्रक्रिया के तहत इस मामले को भारत सरकार अंतरराष्ट्रीय न्यायालय ले जाने की तैयारी कर रही है। इसी की तैयारी के तहत इस्लामाबाद में पदस्थापित भारतीय उच्चायुक्त गौतम बंबावले ने पाकिस्तानी विदेश सचिव तहमीना जंजुआ से मुलाकात की थी और जाधव तक राजनायिक पहुंच के साथ ही आरोप पत्र और फैसले की प्रमाणित प्रति की मांग की थी। जंजुआ ने राजनायिक पहुंच उपलब्ध कराने की मांग तुरंत ही ठुकरा दिया था और प्रतियां उपलब्ध कराने को लेकर कोई जवाब नहीं दिया था। चौंकाने वाली बात यह है कि जाधव के खिलाफ दायर आरोप पत्रों और फैसले की प्रति की मांग भारत पाकिस्तान से चौदह बार मांग चुका है।

 

दरअसल] भारत का कहना है कि जाधव भारतीय नौसेना से सेवामुक्त होने के बाद ईरान के चाबहार में अपना कारोबार कर रहे थे। वहां से उन्हें अगवा करके पाकिस्तान लाया गया और उनके खिलाफ आतंकवाद फैलाने] जासूसी और तोड़&फोड़ करने का आरोप लगाकर पाकिस्तानी सेना ने फांसी की सजा सुना दी। जबकि पाकिस्तान की सैन्य अदालत फील्ड जनरल कोर्ट मार्शल ने उन्हें पाकिस्तान में ^जासूसी और गड़बड़ी वाली गतिविधियों^ का दोषी करार दिया है। पाकिस्तान का दावा है कि सुरक्षा बलों ने जाधव को तीन मार्च २०१६ को अशांत बलूचिस्तान प्रांत से गिरफ्तार किया था] जहां वह कथित तौर पर ईरान से ?kqls थे। पाकिस्तान का यह भी दावा है कि जाधव ^भारतीय नौसेना में तैनात अधिकारी^ था।

 

भारत सरकार द्वारा मामले को अंतरराष्ट्रीय अदालत ले जाने की तैयारियों के बीच पाकिस्तान ने नया डोजियर तैयार किया है और इसे संयुक्त राष्ट्र और विदेशी राजदूतों को सौंपेगा। नया डोजियर जाधव के उस कबूलनामे और बयानों के आधार पर तैयार किया गया है] जो उन्होंने जासूसी एवं विध्वंसक गतिविधियों में अपनी कथित संलिप्तता के बारे में फील्ड जनरल कोर्ट मार्शल के सामने दिए थे। डोजियर में कोर्ट मार्शल जनरल की प्रमाणित रिपोर्ट शामिल है और अदालती कार्यवाही का ब्योरा भी शामिल किया जा रहा है। जाधव की ओर से मुहैया कराई गई सूचना के आधार पर पाकिस्तानी सुरक्षा एजंसियों की कार्रवाई का ब्योरा है।

 

जानकारों के मुताबिक एक साल से पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग&थलग पड़ा है। भारत कई बार अपने यहां हुई तमाम आतंकवादी गतिविधियों का प्रमाण पाकिस्तान को दे चुका है। कई जिंदा आतंकवादियों को पकड़ कर उनके बयान पेश कर चुका है। फिर भारत अंतरराष्ट्रीय मंचों पर लगातार पाकिस्तान के आतंकवादी संगठनों से दूरी न बना पाने को लेकर दबाव बनाता रहा है। दुनिया के कई देश पाकिस्तान को चेतावनी दे चुके हैं। ऐसे में उसकी छवि दहशतगर्दों के पनाहगाह देश के रूप में बनती गई है। इसी के चलते वह जाधव के जरिए यह साबित करने की कोशिश कर रहा है कि भारत खुद आतंकवाद को बढ़ावा देता है।

 

जाधव पर पाक के आरोप

१- ग्वादर और तुरबत में आईईडी और ग्रेनेड हमले कराने का आरोप।

२- जिवानी बंदरगाह की विपरीत दिशा में समुद्र में रडार स्टेशन और मछुआरों की नावों पर हमले के निर्देश दिए।

३- पाकिस्तान खासकर ब्लूचिस्तान में अलगाववादी और आतंकवादी गतिविधियों के लिए हवाला और हुंडी के जरिये धन मुहैया कराने का आरोप।
पाकिस्तान के खिलाफ युवाओं को उकसाने का भी आरोप।

४- ब्लूचिस्तान के सिबी और सुई इलाके में गैस पाइपलाइन और इलेक्ट्रिक पॉयलन में धमाके को स्पॉन्सर करने के आरोपी।

५- २०१५ में क्वेटा में आईडी ब्लास्ट को स्पॉन्सर करने के आरोपी।

६- ईरान से आने और जाने वाले हजारा और शिया समुदाय के लोगों पर हमले को स्पॉन्सर करने का आरोप।

७- पाकिस्तान विरोधी तत्वों को सरकारी एजेंसियों पर हमले के लिए भड़काने का आरोप। 

८- २०१४&१५ में फ्रन्टियर कॉर्प्स और फ्रंटियर वर्क्‌स ऑर्गनाइजेशन पर २०१४&१५ में तुरबत] ग्वादर] पसनी और जिवानी में हमले करवाने का आरोप।


तानाशाही की मिसाल

  • दि संडे पोस्ट संवाददाता

 

ट्रंप के हाथों में जब से अमेरिका की कमान आई है] तब से वह तानाशाही वाले फैसले लेने से नहीं चूक रहे हैं। पिछले एक हफ्ते में दो देशों पर किए गए उनके हमले इसका ताजा उदाहरण हैं। गौरतलब है कि अमेरिका ने अफगानिस्तान के नांगरहार प्रांत के अचिन जिले पर गैर परमाणु बम गिराया। अमेरिका के मुताबिक यह कार्यवाई उसने अफगानिस्तान में आईएसआईएस के खिलाफ की है। उसने यहां आईएसआईएस के ठिकानों को निशाना बनाया जिसमें आईएस के करीब छत्तीस आतंकी मारे गए। इससे पहले उसने सीरिया के हवाई ठिकानों पर पचास से ज्यादा मिसाइलें दागी थीं। यह कार्यवाई सीरियाई सरकार के खिलाफ थी। अमेरिका का आरोप था कि सीरिया के राष्ट्रपति बशर&अल&असद ने अपने नागरिकों पर रासायनिक हथियार से हमला किया है।

 

दरअसल] अमेरिका ने अफगानिस्तान पर यह कार्यवाई इसलिए की कि इसी इलाके में कुछ दिन पहले अमेरिका के विशेष सुरक्षा बल ^ग्रीन बेरेट^ के कमांडर की जान चली गई थी। अमेरिका ने अपने कमांडर की मौत के बाद आईएस को नेस्तनाबूत करने के लिए यह कड़ा कदम उठाया। माना जाता है कि अमेरिका की अफगानिस्तान में यह अब तक की सबसे बड़ी कार्यवाई है।

 

जानकारों के मुताबिक सीरिया पर मिसाइलों से किए गए हमले ने जहां रूस को नाराज कर दिया है] वहीं अफगानिस्तान में की गई इस कार्रवाई की मुखालफत खुद वहां के राष्ट्रपति और अमेरिका के चहेते रह चुके हामिद करजई ने की है। करजई ने यहां तक कहा है कि यह आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई नहीं है] बल्कि अमेरिका अफगानिस्तान का इस्तेमाल अपने भयानक हथियारों के परीक्षण स्थल के तौर पर कर रहा है।

 

माना जाता है कि सीरिया पर मिसाइल दागने और अफगानिस्तान में गैर परमाणु बम गिराने के बाद डोनाल्ड ट्रंप उत्तर कोरिया को सबक सिखाने के मूड में हैं। अफगानिस्तान पर बम गिराने के बाद उन्होंने साफ कहा कि उत्तर कोरिया एक समस्या है] जिसको खत्म किया जाएगा। उत्तर कोरिया की ओर से फिर से परमाणु बम और मिसाइल परीक्षण करने की अटकलों के बीच ट्रंप का यह बयान सामने आया है। इससे पहले अमेरिकी जंगी बेड़ा भी कोरियाई प्रायद्वीप भेजा गया] लेकिन उत्तर कोरिया के कड़े तेवर के चलते अमेरिका ने अभी तक उसके खिलाफ कोई कदम नहीं उठाया है। उत्तर कोरिया ने भी परमाणु हमले की चेतावनी दी है। ऐसे में अमेरिका अफगानिस्तान में अपना सबसे बड़ा गैर परमाणु बम गिराकर यह साफ संदेश देना चाहता है कि वह उत्तर कोरिया के खिलाफ भी कार्यवाई करने से नहीं चूकेगा।

 

ग्यारह टन विस्फोटकों वाला बम जहां गिरा] वह अफगानिस्तान का पाकिस्तान से लगा हुआ इलाका है। इसलिए इस कार्रवाई को पाकिस्तान के लिए भी चेतावनी के तौर पर देखा जा रहा है। बहरहाल आईएस के खिलाफ सख्त रुख के तौर पर अमेरिकी सेना की इस कार्रवाई की सराहना पूरी दुनिया में हो रही है। लेकिन कई देशों को डर है कि राष्ट्रपति ट्रंप के इस तरह के फैसले पूरी दुनिया के लिए खतरा न पैदा कर दें।

 
         
 
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