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vad 2 02-07-2017
 
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देश
 
परवान चढ़ती हिंसा

  • सिराज माही

इन दिनों कश्मीर में जिस तरह से हिंसक ?kVuk,a हो रही हैं] उस तरह पहले कभी नहीं हुईं। जिस तरह से नौजवान यहां सुरक्षा बलों पर पत्थर फेंक रहे हैं] उससे उनके आक्रोश को समझा जा सकता है। यह हिंसक ?kVuk,a यहां की गठबंधन सरकार भाजप और पीडीपी के भीतरी टकराहट की कहानी बताती हैं। भाजपा&पीडीपी के गठबंधन को जानकारों ने पहले विपरीत बताया था। अब यहां की स्थितियां देख वाकई लग रहा है इन दोनों पार्टियों का यह बेमेल गंठबंधन है।

 

गौरतलब है कि पिछले दिनों कश्मीर में हालात इतने खराब हो गए कि स्कूल और कॉलेज के छात्र&छात्राओं ने बाकायदा स्कूली ड्रेस पहन कर सुरक्षा बलों पर पत्थर फेंके। दरअसल] छात्रों के उग्र होने के पीछे उनका आक्रोश है सुरक्षा। बलों पर पथराव करने से दो दिन पहले श्रीनगर के पुलवामा में छात्रों और सुरक्षाबलों के बीच हुई हिंसक झड़प थी। सेना ने पुलवामा के एक डिग्री कॉलेज में प्रवेश किया था] जहां छात्रों ने उनका विरोध किया और उनके वाहनों पर पथराव किया। इस दौरान सेना के जवानों की ओर से की गई कार्रवाई में बीस से अधिक छात्र ?kk;y हो गए।

 

इससे पहले श्रीनगर विधानसभा सीट पर उपचुनाव का भी लोगों ने बहिष्कार किया था। इस बीच सुरक्षा बलों ने लोगों के पथराव से बचने के लिए एक कश्मीरी जवान को अपनी जीप पर आगे बांधा था। इस वीडियो के वायरल होने के बाद लोग आक्रोशित हुए थे। हालात को बेकाबू होते देख पुलिस को दूरसंचार कंपनियों से ?kkVh में थ्री जी और फोर जी इंटरनेट सेवा फिलहाल स्थगित रखने को कहना पड़ा।

 

जम्मू&कश्मीर में थोड़ा गौर करने पर पता चलता है कि इस तरह की हिंसक ?kVuk,a वहां पिछले साल से शुरू हुईं। जब वहां आतंकी बुरहान वानी को भारतीय सेना ने मार गिराया था। बुरहान वानी के मारे जाने के बाद यहां सुरक्षा बलों और लोगों के बीच हिंसक ?kVukvksa में करीब ६५ लोगों की जानें चली गईं थीं। दरअसल] बुरहान वानी आतंकी संगठन हिजबुल का कमांडर था। वह सोशल मीडिया का सहारा लेकर अपनी राजनीतिक विचारधारा प्रसारित कर रहा था। इसी के सहारे वह युवाओं के बीच खासा प्रभावशाली बन गया। जब उसे सेना ने मार गिराया तभी से कश्मीर में हिंसा शुरू हो गई] जो अब तक जारी है। 

 

सुरक्षाबलों और कश्मीरी नौजवानों में la?k"kZ का मामला राजनीतिक भी है। दरअसल] दक्षिण कश्मीर में २०१० में हिंसक ?kVuk,a हुईं थीं। इन ?kVukvksa के चलते यहां के युवा तत्कालीन सत्तासीन नेशनल कॉन्फ्रेंस से काफी नाराज हुए। उन्होंने उमर अब्दुल्ला की सरकार को सत्ता से बेदखल करने के लिए २०१४ के विधानसभा चुनाव में पीडीपी को वोट दिया। लेकिन पीडीपी और भाजपा ने गठबंधन किया। इसके बाद से यहां के युवा अपने आप को ठगा हुआ महसूस किया। इसलिए ये युवा सरकार से भी भिड़ने को आमादा हो गए।

 

हालात अब भी इतने खराब नहीं हुए थे। लोगों को इस गठबंधन वाली सरकार से उम्मीदें थीं। जम्मू के लोगों ने भाजपा पर भरोसा जताया था तो ?kkVh के लोगों ने पीडीपी पर। गठबंधन से यह भी उम्मीद थी कि जम्मू और ?kkVh के बीच की मनोवैज्ञानिक खाई को पाटेगा। साथ ही सांप्रदायिक सौहार्द का संदेशवाहक साबित होगा। प्रदेश में रोजगार के अवसर पैदा करेगा। लेकिन पीडीपी&भाजपा गठबंधन सरकार ने इस दिशा में कुछ नहीं किया। दोनों पार्टियों ने इन दिशाओं में कोई ठोस काम करना तो दूर कानून&व्यवस्था बहाल रखने में भी नाकाम रही है। इसलिए यहां इस तरह की ?kVuk,a बढ़ती गईं हैं।

 

कुछ दिन पहले प्रधानमंत्री ?kkVh के दौरे पर गए थे और उन्होंने वहां वाजपेयी के ^इंसानियत] कश्मीरियत और जम्हूरियत^ के सूत्र को दोहराया। पर इस दिशा में केंद्र सरकार की तरफ से कोई सकारात्मक पहल अब तक नहीं की गई। यहां दिक्कत यह है कि दिल्ली से दूर इस राज्य में शांति व्यवस्था बनाए रखने और संकट से जूझने के लिए सेना की तैनाती और बढ़ा दी जाती है। जानकारों का मानना है कि सुरक्षा बल उपद्रव और विघ्न से निपटने की ही भूमिका निभा सकते हैं। वे लोकतांत्रिक प्रक्रिया में जनभागीदारी का जरिया नहीं बन सकते। इसलिए राजनीतिक नेतृत्व को ?kkVh के हालात की बाबत सुरक्षा बलों की भूमिका से आगे जाकर भी सोचना होगा।


अब हिंदी में होगा भाषण

 

राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी की ओर से स्वीकार की गई एक संसदीय समिति की सिफारिशों को यदि लागू कर दिया जाता है तो राष्ट्रपति और मंत्रियों सहित गणमान्य लोगों को जल्द ही हिंदी में भाषण देना पड़ सकता है। प्रणब ने राजभाषा पर संसद की समिति की ९वीं रिपोर्ट में की गई ज्यादातर सिफारिशें मान ली हैं। यह रिपोर्ट २०११ में सौंपी गई थी। समिति की सिफारिश है कि राष्ट्रपति और मंत्रियों सहित सभी गणमान्य व्यक्तियों] खासकर हिंदी पढ़ने और बोलने में सक्षम लोगों] से अनुरोध किया जा सकता है कि वे अपने भाषण या बयान हिंदी में ही दें। राष्ट्रपति ने कई अन्य सिफारिशें भी स्वीकार की है] जिनमें भारतीय विमानों में पहले हिंदी और फिर अंग्रेजी में ?kks"k.kk,a करनी होंगी। समिति की सिफारिश के मुताबिक] विमानों में आधी अध्ययन सामग्री के तौर पर हिंदी अखबार और पत्रिकाएं होनी चाहिए। नागरिक उड्डयन मंत्रालय से कहा गया है कि वह इन सिफारिशों पर अमल सुनिश्चित करे। राष्ट्रपति ने समिति की यह सिफारिश भी स्वीकार की है कि एयर इंडिया और पवन हंस हेलीकॉप्टरों के सभी टिकटों पर हिंदी का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित किया जाना चाहिए। मसूरी स्थित लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासनिक अकादमी ¼एलबीएसएनएए½ में १०० फीसदी प्रशिक्षण सामग्री अंग्रेजी के साथ&साथ हिंदी में भी उपलब्ध कराने की सिफारिश भी राष्ट्रपति ने स्वीकार कर ली है। समिति ने मानव संसाधन विकास मंत्रालय से कहा था कि वह पाठ्यक्रमों में हिंदी भाषा को अनिवार्य बनाने के लिए ठोस कदम उठाए।


आनंद बसपा के उपाध्यक्ष

 

बहुजन समाज पार्टी सुप्रीमो मायावती ने अपने छोटे भाई आनंद कुमार को पार्टी उपाध्यक्ष का पद सौंप दिया है। इसी के साथ यह अटकलें भी खत्म हो गई कि मायावती का सियासी उत्तराधिकारी तथा पार्टी में दूसरे स्थान पर कौन है। उन्होंने भाजपा के खिलाफ आक्रामक तेवर अपनाते हुए भाजपा विरोधी दलों से हाथ मिलाने के भी संकेत दिए हैं। मायावती ने इस शर्त के साथ आनंद कुमार को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी देने का फैसला ले लिया है कि वह पार्टी में हमेशा निःस्वार्थ भावना से कार्य करता रहेगा और कभी भी सांसद] विधायक] मंत्री] मुख्यमंत्री आदि नहीं बनेगा। पार्टी का पद अपने भाई को सौंपने के साथ यह भी साफ हो गया कि मायावती को परिवारवाद से कोई भी परहेज नहीं है। आनंद को यह पद सौंपने से पहले पार्टी के राज्यसभा सांसद राजाराम और सतीश चंद्र मिश्र जैसे कई नेता नंबर दो की स्थिति में माने जाते थे। यह गौरतलब है कि मायावती ने अपनी सियासी पारी एक कार्यकर्ता के तौर पर शुरू की थी और बरसों उनका la?k"kZ का दौर भी रहा। लेकिन आनंद का राजनीतिक अनुभव और पार्टी के काम में भागीदारी उस तरह नहीं है जिस तरह पहले मायावती का रहा है। अपने भाई को उपाध्यक्ष पद सौंपने के पीछे उनकी दलील है कि इससे उन्हें लिखा&पढ़ी और दिल्ली से होने वाले कामों में काफी सहूलियत होगी।

 
         
 
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  • आकाश नागर

आम जनता में पुलिस की छवि बेशक संवेदनहीन खाकी वर्दी वाले की हो। लेकिन लोकप्रिय आईपीएस अधिकारी डॉ + सदानंद दाते ने अपने काम और व्यवहार से जताया

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