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जनपद
 
निजी स्कूलों की मनमानी

  • अरुण कश्यप

हरिद्वार। निजी स्कूलों की मनमानी किसी के रुके नहीं रुक रही। उत्तर प्रदेश सरकार ने निजी सकूलों पर सख्ती शुरू कर दी है। जिसके बाद से उत्तराखण्ड के अभिभावकों को भी उम्मीद है कि उत्तर प्रदेश की तर्ज पर उत्तराखण्ड में भी भाजपा सरकार नकेल कसेगी। मगर अभी तक ऐसा कुछ नहीं हुआ है। जिससे प्रदेश के आम लोगों में नाराजगी व्याप्त होने लगी है।

 

एडमिशन सीजन शुरू होते ही जैसे प्राइवेट स्कूलों की चांदी हो जाती है। हालांकि चांदी तो उनकी साल भर रहती है। मगर एडमिशन के समय ये स्कूल तरह&तरह की फीस वसूलते हैं। एडशिन फीस] बिल्डिंग फीस] वार्षिक फीस जैसी दर्जनों तरह की फीस सहित एक बड़ा परचा अभिभावकों के हाथ में थमा दिया जाता है। इसके अलावा प्रत्येक साल दस से पंद्रह प्रतिशत फीस वृद्धि कर दी जाती है। फीस वृद्धि एवं अन्य फीस पर सरकार का कोई अंकुश नहीं है। इसको लेकर कोई कानून भी नहीं है। अपने बच्चों का भविष्य और शिक्षा को देखते हुए अभिभावक कुछ भी नहीं कर पाते हैं। बच्चों को परेशान एवं स्कूल से बाहर करने के डर से वे स्कूल प्रबंधक के खिलाफ शिकायत नहीं करते हैं। हर बच्चे के मां&बाप चुपचाप इन निजी स्कूल वालों का आर्थिक अत्याचार सह रहे हैं।

 

यह अत्याचार केवल फीस तक ही सीमित नहीं है] बल्कि इन स्कूलों के प्रबंधन ने कमीशन खोरी में जैसे लाइसेंस प्राप्त कर लिया हो। किताबों] नोटबुक] ड्रेस यहां तक की स्कूल बैग तक में इन स्कूल वालों का कमीशन तय होता है। हर स्कूल वाले ने अपने&अपने कमीशन के हिसाब से अलग&अलग दुकानें तय कर रखी हैं। इन दुकानों के अलावा और कहीं किताबें या ड्रेस मिलने का सवाल ही पैदा नहीं होता। मजबूरन अभिभावकों को यह सब सामान उन्हीं दुकानों से लेना पड़ता है] जहां स्कूल वाले चाहते हैं। बदले में दुकानदार पहले से तय मोटा कमीशन स्कूल प्रबंधन के पास पहुंचा देते हैं। अभी प्रदेश भर में एडमिशन का सीजन शुरू हो गया है। हरिद्वार के सभी छोटे&बड़े स्कूलों में अभिभावकों की भीड़ है। सभी अभिभावकों के हाथ में फीस और अन्य शुल्क के पर्चे हैं। उनके चेहरे पर परेशानी और लाचारी साफ झलकती है] मगर कोई कुछ बोलने को तैयार नहीं। इनमें से कई अभिभावकों से स्कूलों की मनमानी पर बात करने की कोशिश की। मगर कोई भी अभिभावक ऑन रिकॉर्ड बोलने को तैयार नहीं हुए। नाम नहीं छापने की शर्त पर  कनखल के एक निवासी कहते हैं कि सरकार ने शिक्षा का अधिकार लागू तो कर दिया है मगर निजी स्कूल इस कानून का माखौल उड़ा रहे हैं। गरीब के बच्चे निजी स्कूल में पढ़ नहीं सकते और सरकारी स्कूल पढ़ने लायक रहा नहीं।

 

बताया जाता है कि हरिद्वार में अभिभावक&शिक्षक la?k भी हैं। मगर आज की तारीख में यह la?k सिर्फ कागजी शोभा ही बढ़ा रहे हैं। la?k से जुड़े एक भी अभिभावक स्कूल प्रबंधक के खिलाफ बोलने को तैयार नहीं है। अभिभावकों के इस मौन और लाचारी का नाजायज लाभ निजी स्कूल प्रबंधन उठा रहे हैं। यह लाचारी अभिभावकों तक सीमित नहीं है] बल्कि अधिकारी भी लाचार दिखते हैं। शिक्षा अधिकारी की बातों से ऐसा लगता है कि उनके पास निजी स्कूलों पर कार्यवाही करने का कोई अधिकार नहीं है। वह सिर्फ एनओसी बांटने वाला विभाग बनकर रह गया है।

 

किताबों पर भी मूल्य छापकर मनमाने तरीके से बेची जाती हैं। जो बजारी कीमत से कई गुना ज्यादा होते हैं। अभिभावकों को मजबूरन यह सब सामान उसी कीमत पर खरीदना पड़ता है। उनके पास और कोई विकल्प नहीं बचता। कई जगह तो स्कूल में ही ड्रेस और किताबें बेचने का काम शुरू कर दिया गया है। हर साल ज्यादा बिक्री हो इसलिए ड्रेस और किताबें बदल दी जाती हैं ताकि अगले साल कोई बच्चा यह ड्रेस या किताबें इस्तेमाल ना कर पाए। जबकि यदि ड्रेस और किताबें न बदली जाएं तो कोई और बच्चा भी इन किताबों से पढ़ सकता है या अगले साल बच्चा अपनी पुरानी ड्रेस पहनकर स्कूल जा सकता है।

 

बात अपनी&अपनी

हमारे विभाग से केवल इन प्राइवेट स्कूलों को एनओसी जारी की जाती है। हर स्कूल का पॉलिसी मैटर भी अलग होता है। जिसमें हम दखलंदाजी नहीं कर सकते। हालांकि नई सरकार ने इस समस्या पर पहल की है और जल्द ही शासन स्तर से कुछ सटीक मानक बनाए जा सकते हैं। जिससे इन प्राइवेट स्कूलों की मनमर्जी पर लगाम लगाई जा सके। 

पुष्पा रानी वर्मा] मुख्य शिक्षा अधिकारी हरिद्वार

 

इस संदर्भ में जल्द ही शासन की बैठक होगी। जिसमें कुछ सटीक निर्णय लिए जा सकते हैं। जिसके बाद इन प्राइवेट स्कूलों की शोषण नीति में कुछ बदलाव होगा। किसी भी स्कूल को ड्रेस या किताबें बेचने का अधिकार नहीं है।

जगमोहन सोनी] जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी हरिद्वार


मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में अव्यवस्था

 

  • अली खान

 

रुड़की ¼हरिद्वार½। मुख्यमंत्री बनने के बाद पहली बार त्रिवेंद्र सिंह रावत अंबेडकर जयंती पर रुड़की पहुंचे। उनके आगमन पर शहरवासियों में खासा उत्साह देखा गया। रुड़की शहर और आस&पास के हजारों लोग उनके स्वागत में पहुंचे। इस भीड़ की उम्मीद संभवत : आयोजकों को भी नहीं थी। जिस कारण मंच और आयोजन स्थल पर अफरा&तफरी का माहौल रहा।

 

मुख्यमंत्री के स्वागत के लिए भाजपा कार्यकर्ता धक्का&मुक्की करने लगे। जिस कारण आयोजन स्थल पर अव्यवस्था फैल गई। इस आपाधापी में अल्पसंख्यक मोर्चा के जिलाध्यक्ष अनीस अहमद को भाजपा कार्यकर्ताओं ने धक्का&देकर सीढ़ी से धकेल दिया। अव्यवस्था का आलम यह था कि ग्राम मुंडेट की दलित महिलाएं जब अपना ज्ञापन लेकर मुख्यमंत्री की ओर बढ़ीं तो उनसे ज्ञापन छीन लिया गया। बीएसएमपीजी कॉलेज में फीस बढ़ोतरी को लेकर हुए बवाल के बाद कई छात्र&छात्राएं भी सीएम से मिलने पहुंचे। लेकिन उन्हें भी आगे बढ़ने नहीं दिया गया। मुंडेट की महिलाओं ने ज्ञानन छीनने पर नाराजगी जताई। ज्ञापन देने आई बलबीरी देवी] शिखा आदि ने  कहा कि बात तो सुनी ही नहीं और ज्ञापन भी छीन लिया। इस द्घटना से भाजपा की दलित विरोधी मानसिकता उजागर हो गई है। इस अवसर पर उमा] हरिया] पूनम आदि महिलाएं मौजूद थीं।

 

अव्यवस्था को देखते हुए सुरक्षा अधिकारियों ने सीमित लोगों को ही मंच पर चढ़ने दिया। इसके चलते अनेक भाजपाइयों में रोष फैल गया। अव्यवस्था के बीच ही मुख्यमंत्री ने कहा कि बाबा साहेब को जो सम्मान मिलना चाहिए था कांग्रेस ने नहीं दिया जबकि भाजपा की अटल सरकार ने आते ही बाबा साहेब को भारत रत्न से सम्मानित किया। अब बाबा साहेब को असली सम्मान प्रधानमंत्री मोदी ने दिया है।

 

उन्होंने आगे कहा कि कैलिफोर्निया के जिस विश्वविद्यालय में बाबा साहेब पढ़े और जहां रहे उसे मोदी ने खरीद कर सम्मान दिया है। महिलाओं की दुखती रग पर हाथ रखते हुए उन्होंने तीन तलाक को एक कलंक कहा। मुख्यमंत्री द्वारा अपने भाषण में रुड़की के विकास के संबंध में कोई ?kks"k.kk न करने पर स्थानीय विधायक प्रदीप बत्रा ने उनके समक्ष १८ प्रस्ताव रखे। इनमें रुड़की में जाम से निपटने को वर्कशाप के सामने से स्रोत मुहल्ले को जोड़ने के लिए स्टील गार्डर पुल निर्माण] पठानपुरा] आदर्श नगर] सोलानीपुरम से होते हुए नदी तक नाले का निर्माण] कांवड पटरी का सौंदर्यीकरण] कलियर से आसुनगर तक सड़क चौड़ीकरण तथा विद्युत व्यवस्था] टाइल्स से वाकिंग जोन निर्माण] रुड़की को मैट्रो से जोड़ना] सिविल लाइन की नजूल भूमि को फ्रीहोल्ड करना] वेस्ट टू एनर्जी प्रोजेक्ट को जल्द शुरू करना] गणेशपुर पुल से रामपुर चुंगी तक एवं महाराणा प्रताप चौक से मिलिट्री चौक तक] गंगनहर पुल से रेलवे स्टेशन तक डिवाइडर पर फेंसी डबल आर्म पोल लगाना] मलकपुर चुंगी से सोलानीपुरम तक] मिलिट्री चौक से डबल फाटक] रामनगर से रामपुर चुंगी तक] जादूगर रोड] कचहरी रोड और ग्राम शेरपुर माजरा के सामने मेन रोड पर नाला और फुटपाथ के निर्माण का प्रस्ताव मुख्यमंत्री को दिया गया। इसके अलावा रुड़की के स्टार क्रिकेटर ऋषभ पंत को खेल रत्न देने] रुड़की में इंटरनेशनल स्टेडियम बनाने सहित अनेक प्रस्ताव भी प्रेषित किए गए। शहरवासी विधायक के १८ प्रस्ताव से सहमत दिखे। अधिकतर शहरवासियों ने कहा कि जो प्रस्ताव दिए गए उन पर मुख्यमंत्री को संज्ञान लेकर उन्हें पूरा करना चाहिए।


आहत सीमांत वासी

  • संतोष सिंह

 

चमोली। सीमांत चमोली एवं रुद्रप्रयाग जिले को प्रदेश कैबिनेट में प्रतिनिधित्व न मिलने से जनता और कार्यकर्ताओं में मायूसी है। लोग महसूस कर रहे हैं कि यह पहली बार हुआ है कि जब सीमांत को प्रतिनिधित्व नहीं दिया गया है। पूर्व की सरकारों में मातवर सिंह कंडारी] राजेंद्र भंडारी और केदारसिंह फोनिया कैबिनेट मंत्री रहे। लेकिन अब चमोली और रुद्रप्रयाग से कोई मंत्री नहीं है।

 

चमोली और रुद्रप्रयाग की ५ सीटों में से एक केदारनाथ को छोड़ बाकी चारों सीटों पर भाजपा ने जीत दर्ज की। सबसे हॉट सीट बदरीनाथ थी। इस पर कांग्रेस के कबीना मंत्री और लगातार दो बार के विधायक रहे राजेंद्र भंडारी बहुत ही मजबूत स्थिति में थे। भाजपा विधायक महेंद्र भट्ट ने उन्हें साढे़ पांच हजार वोट से हराकर जीत दर्ज की। इसके साथ ही अनुभव के आधार पर भी महेंद्र भट्ट चारों विधायकों में सबसे वरिष्ठ हैं। भट्ट २००२ में नंदप्रयाग सीट से भी विधायक रह चुके हैं। la?k पृष्ठ भूमि से उनका ताल्लुक रहा है। इसीलिए भी कैबिनेट में उनकी दावेदारी मजबूत मानी जा रही थी। लेकिन उन्हें कैबिनेट में जगह न मिलने से भाजपा कार्यकर्ता और सीमांत की जनता मायूस है।

 

अब देखना यह है कि कैबिनेट के दो रिक्त पदों को भरने में सीमांत की नाराजगी दूर की जाती है या नहीं? इस पर ही सीमांत के लोगों की नजरें टिकी हुई हैं। इस बारे में जल्द भाजपा हाईकमान का फैसला होना है। दूसरी ओर बदरीनाथ के विधायक महेंद्र भट्ट इन दिनों अपनी विधानसभा क्षेत्र में गांव भ्रमण पर हैं। विधायक का फोकस चारधाम यात्रा के साथ क्षेत्रीय समस्याओं पर केंद्रित है। वे अब तक दशोली के नौरख पीपलकोटी] जैंसाल] गुनियाला] मंडलद्घाटी के दर्जन भर गांवों के साथ सीमांत जोशीमठ के विभिन्न गांवों का भ्रमण कर जनसमस्याएं सुन चुके हैं। चारधाम यात्रा के लिए विधायक ने जिलाधिकारी के साथ सभी विभागों को निर्देश किया है कि यात्रा से जुुड़ी सभी मूलभूत सुविधाओं को समय पर पूरा किया जाए। साथ ही विधायक ने बीआरओ को भी बदरीनाथ हाईवे पर सभी कार्य समय पर पूरा करने को कहा है जिससे तीर्थयात्रियों को किसी तरह की समस्याएं न हों।

 
         
 
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अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद में सक्रिय रहे धन सिंह रावत वर्ष २००४ में प्रदेश भाजपा के सह संगठन महामंत्री बने। २०१७ में श्रीनगर विधानसभा सीट से विधायक निर्वाचित हुए। आज वे

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