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दुनिया 
 
ट्रंप के टै्रप में यूथ

  • सिराज माही

अमेरिका में नए राष्ट्रपति ट्रंप के कारण युवा संकट में है। खासकर भारतीय मूल के युवाओं की नागरिकता दहशत में है। अमेरिका जिस रास्ते जा रहो है वह भयभीत करने वाला है।

ट्रंप ने चुनाव प्रचार के दौरान ही लोगों से वादे किए थे कि वह अगर सत्ता पर काबिज हुए तो अमेरिका का प्रारूप बदल देंगे। उनके चुनावी वादों में एक वादा यह भी था कि वे सत्ता पर काबिज होने के बाद बाहरी मुल्कों से आकर अमेरिका में रोजगार करने वालों पर नकेल कसेंगे] ताकि अमेरिकी युवाओं को रोजगार मिल सके। ट्रंप के इस तरह के बायानों के बाद से बाहरी लोगों के प्रति अमेरिकी युवाओं में नफरत उभरनी शुरू हुई। हाल ही में अमेरिका में हुईं दो भारतीयों की मौत इसका ताजा उदाहरण है।

गौरतलब है कि पिछले दिनों अमेरिका में तीन भारतीयों पर हमले हुए जिनमें से दो लोगों की मौत हो चुकी है और तीसरा द्घायल हो गया है। पहले इस तरह की द्घटनाएं एक समुदाय विशेष के साथ होती थीं। लेकिन अब इसने बढ़कर आक्रामक रूप ले लिया है। हाल ही में हैदराबाद के रहने वाले ३२ साल के श्रीनिवास कुचिभोटला की अमेरिका में गोली मारकर हत्या कर दी गई। अमेरिका के कनसास शहर के बार में श्रीनिवास अपने दोस्त आलोक मदसानी के साथ बैठे थे। तब अचानक अमेरिका के एक रिटायर्ड नौसैनिक ने यह कहते हुए उन दोनों पर गोली चलाई कि ^निकल जाओ मेरे देश से^ इस हमले में श्रीनिवास की मौके पर ही मौत हो गई। 

दूसरी द्घटना में भारतीय मूल के व्यवसायी हार्निश पटेल की उनके साउथ कैरोलीना के ?kj के बाहर गोली मारकर हत्या कर दी गई है। पटेल की यह हत्या] ट्रंप के उस बयान के दो दिन बाद हुई है जिसमें उन्होंने कनसास बार में भारतीय इंजीनियर श्रीनिवास की हत्या को ^?k`.kk और बुराई से भरा कूत्य^ बताया था। एक नए मामले में ३९ साल के सिख को एक शख्स ने गोली मार दिया] जिसकी वजह से वह गंभीर रूप से जख्मी हो गया। गोली मारने वाला सिख शख्स को कह रहा था कि तुम अपने देश वापस चले जाओ।

माना जा रहा है कि ट्रंप के सत्ता में आने के बाद से अमेरिका में ?k`.kk से उपजी हिंसा लगातार बढ़ रही है। वहां रह रहे लोगों को आए दिन नस्ली टिप्पणियों और अपने देश वापस लौट जाने की धमकियों का सामना करना पड़ रहा है। जानकारों का मानना है कि बराक ओबामा के शासन में नस्लीय हिंसा में कुछ कमी आई थी। दरअसल अमेरिका में ओबामा की जीत ही नस्लीय हिंसा के खिलाफ जीत थी। 

बहरहाल इन ?kVukvksa से अमेरिका में रह रहे भारतीय मूल के लोगों और भारत सरकार की चिंता बढ़ी है। इन ?kVukvksa के बाद भारत सरकार ने विदेश सचिव और वाणिज्य सचिव को अमेरिकी प्रशासन से बातचीत के लिए भेजा और उन्हें आश्वासन मिला है कि भारतीयों की सुरक्षा का ध्यान रखा जाएगा। 

दरअसल ट्रंप के चुनावी बयानों के बाद उन्होंने विदेशियों के प्रति जो नीतियां अपनाईं उससे अमेरिकी नौजवानों में यह बात ?kj कर गई कि विदेशी वाकई अमेरिका में आकर अमेरिकी नौजवानों के लिए बेरोजगारी पैदा कर रहे हैं। जितनी जल्दी विदेशी यहां से चले जाएंगे उतनी जल्दी वहां बेरोजगारी खत्म हो जाएगी। उन्होंने पहले वीजा नियमों को सख्त किया। कुछ मुसलिम देशों के नागरिकों के अमेरिका आने पर प्रतिबंध लगाया। हालांकि ट्रंप प्रशासन के फैसलों के खिलाफ अमेरिका में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन भी हुए। जानकारों का मानना है इस तरह बाहरी लोगों को डरा-धमका या फिर उन पर हिंसक हमले और नस्ली टिप्पणियां कर उन्हें वापस लौटने को बाध्य किया जाना किसी भी रूप में स्वस्थ लोकतंत्र के लिए सही नहीं है। 

अब यह भी खबर है कि डोनाल्ड ट्रंप जिस पार्टी से राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार रहे हैं] वह पार्टी यानी रिपब्लिकन पार्टी उनके खिलाफ है। इसकी वजह यह बताई जा रही है कि ट्रंप और उनके सहयोगी अमेरिकी राष्ट्रपति पद के चुनाव के दौरान रूसी खुफिया एजेंसी से जुड़े हुए थे। इस बात के भी सबूत मिले है कि अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव को रूस ने प्रभावित करने की कोशिश की। ट्रंप पर लगे इस तरह के आरोपों और हाल ही में लिए गए उनके निर्णयों से रिपब्लिकन पार्टी की छवि खराब हुई है। इसलिए रिपब्लिकन पार्टी को कुछ सांसद ट्रंप के खिलाफ हैं। यह आशंका जताई जा रही है कि ट्रंप को आगे चलकर इन सबका खामियाजा भुगतना पड़ सकता है।

चीन की चेतावनी

चीनी मीडिया ने भारत पर दक्षिण एशिया में चीन के बढ़ते आर्थिक और राजनीतिक प्रभाव से निपटने के लिए दलाई लामा कार्ड का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया है और अरुणाचल प्रदेश में ^विवादित^ क्षेत्र में तिब्बती आध्यात्मिक नेता की मेजबानी करने पर नई दिल्ली को ^गंभीर परिणाम^ की चेतावनी दी है। 

सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स ने एक लेख में कहा] ^चीन की आपत्तियों के बावजूद भारत आने वाले हफ्तों में चीन-भारत सीमा पर एक विवादित क्षेत्र में दलाई लामा की मेजबानी करेगा।^ इस टिप्पणी से पहले चीनी विदेश मंत्री ने दलाई लामा को अरुणाचल प्रदेश की यात्रा की अनुमति देने के लिए भारत की आलोचना की थी जिसे बीजिंग दक्षिणी तिब्बत होने का दावा करता है। यात्रा की अनुमति पिछले वर्ष अक्तूबर में दी गई थी और संभावना है कि दलाई लामा आने वाले हफ्तों में क्षेत्र का दौरा करेंगे। भारतीय अधिकारियों की उन कथित टिप्पणियों का जिक्र करते हुए कि यह एक धार्मिक यात्रा है और इससे पहले दलाई लामा ऐसी कई यात्राएं कर चुके हैं] लेख में कहा गया है कि अधिकारयिों को इसके परिणाम का एहसास नहीं है। लेख में कहा गया] ^या तो इन भारतीय अधिकारियों को दलाई लामा की यात्रा के गंभीर परिणाम का एहसास नहीं है या फिर उन्होंने जानबूझकर इसे नजरअंदाज किया है।^ इसमें कहा गया] ^चौदहवें दलाई लामा किसी भी तरह से एक आध्यात्मिक नेता नहीं बल्कि एक तिब्बती अलगाववादी हैं।^ 

महिलाओं का प्रदर्शन

कुछ समय पहले नाइजीरिया में हजारों महिलाएं चरमपंथी संगठन बोको हरम की वजह से अपना ?kj छोड़ने पर मजबूर हुई थीं। फिलहाल वे एक शिविर में रह रही हैं। हाल ही में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के दूतों ने इन शिविरों का दौरा किया। सुरक्षा परिषद के दूतों के समक्ष इन महिलाओं ने प्रदर्शन कर जीने की बेहतर परिस्थितियों की मांग की है। प्रदर्शनकारी महिलाओं ने दुनिया के सबसे खराब मानवाधिकार संकटों को और अधिक खराब करने के लिए स्थानीय प्राधिकरणों और सहायता एजेंसियों को दोषी ठहराया। संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि इस संकट ने उत्तर पूर्वी नाइजीरिया को अकाल की कगार पर ला छोड़ा है। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि माइदुगुरि के निकट स्थित टीचर्स विलेज शिविर में रह रहे करीब १५]००० विस्थापित लोगों को जो सहायता मिलनी चाहिए थी] उसे स्थानीय सहायता एजेंसियां कहीं और भेज रही हैं। महिलाओं ने उस समय विरोध प्रदर्शन किया] जब संयुक्त राष्ट्र की इस निर्णायक संस्था के पंद्रह दूत उत्तर पूर्व नाइजीरिया स्थित उनके शिविरों का निरीक्षण करने आए थे। ये महिलाएं विरोध प्रदर्शन के जरिए नाइजीरिया के लेक चाड़ क्षेत्र में करीब दो करोड़ विस्थापित लोगों की ओर दुनिया का ध्यान खींचना चाहती थीं। नाइजीरिया बोको हराम के आतंक की वजह से अक्सर अशांत रहता है।

 
         
 
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