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vad 18 21-10-2017
 
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न्यूज़-एक्सरे 
 
तस्करों की ऐशगाह बनी खुली सीमा

  • दिनंश पंत

भारत&नेपाल सीमा पिछले कई वर्षों से तस्करों की ऐशगाह बनी हुई है। मानव तस्करी का आलम यह है कि वर्ष २०१० से लेकर २०१६ तक सुरक्षा एजेंसियों ने ३३१ लड़कियों और १६५ नाबालिगों को तस्करों के चंगुल से छुड़ाया। सीमा के आर&पार रह रहे दोनों देशों के बीच रोटी&बेटी के रिश्तों को देखते हुए यहां सीमा खुली हुई है। तस्कर इसका नाजायज फायदा उठाते रहे हैं। जंगली जीवों की खालों और अंगों की तस्करी के मामले तो आए दिन सामने आते रहते हैं। सीमा पर एनएसबी की कड़ी निगरानी को देखते हुए तस्कर अब पुलों के बजाए ट्यूब के जरिए नदी पार कर अपना धंधा चला रहे हैं

 

भारत&नेपाल की २५० किमी. की खुली सीमा मानव एवं  वन्य जीव तस्करी के साथ ही अवैध आवाजाही का अड्डा बनी हुई है। तस्करों पर शिकंजा कसने के लिए पुलिस] सशत्र सीमा बल (एसएसबी) एवं वन विभाग द्वारा चलाए जा रहे सद्घन चेकिंग अभियान एवं काबिंग के बाद भी आए दिन सीमा पर मादक पदार्थों व मानव तस्करी के मामले बढ़ते जा रहे हैं। यह खुली सीमा तस्करों की ऐशगाह बनी हुई है। इस खुली सीमा का लाभ भले ही दोनों देशों के आम नागरिकों को न मिल पा रही हो लेकिन तस्कर इसका जमकर फायदा उठा रहे हैं। नेपाल के सुदूरवर्ती क्षेत्रों से लड़कियों] महिलाओं] बच्चों की बड़े पैमाने पर खरीद फरोख्त करने में यह खुली सीमा तस्करों की मददगार बनी हुई है। 

आंकड़ों पर नजर डालें तो सीमा पर मानव तस्करी की ?kVuk,a लगातार बढ़ रही हैं। वर्ष २०१० से लेकर २०१६ तक सुरक्षा एजेंसियो ने ३३१ लड़कियों व १६५ नाबालिग बच्चों को तस्करों के चंगुल से छुड़ाया। करीब ३२८० बच्चों की सरकार द्वारा संचालित उज्जवला परियोजना के तहत अब तक काउंसलिंग हो चुकी है। अनुमान है कि सुरक्षा एजेंसियां जिन बच्चों व महिलाओं को छुड़ा पाने में सफल होती हैं वे कुल मानव तस्करी का ३० प्रतिशत ही होते हैं। ज्यातादार मजबूर व लाचार मानव संसाधन को देह मंडियों में पहुंचाने में तस्कर कामयाब हो जाते हैं। नेपाल के पश्चिमांचल] महाकाली] सेती आदि अंचल के साथ ही पिथौरागढ़ के नेपाल सीमा से लगे दूरस्थ क्षेत्रा तस्करों की पंसदीदा जगह बनते जा रहे हैं। इसके अलावा अवैध आवाजाही के लिए भी यह सीमा कुख्यात बनती जा रही है। खुली सीमा का फायदा उठाकर बड़ी संख्या में नेपाल से लोग अवैध रूप से भारत पहुंचते हैं और कोई निगरानी तंत्र न होने से स्थाई रूप से यहीं बस जाते हैं। प्रदेश के पलायनग्रस्त गांव इनके ठिकाने बन रहे हैं। आज भी बिना पहचान वाले लाखों नेपाली स्थायी रूप से भारत में रह रहे हैं। वर्ष १९५० की भारत नेपाल की शांति व मैत्री संधि अब भारत के लिए मुसीबत बनती जा रही है। नेपाल के तत्कालीन प्रधनमंत्री शमशेर जंग बहादुर राणा व नेपाल में भारतीय राजदूत चंद्रेश्वर प्रसाद नारायण सिंह ने तब जिस संधि पत्र पर हस्ताक्षर किए थे] उसके अनुसार भारत व नेपाल के नागरिक सीमा से बिना बीजा] पासपोर्ट के आवागमन कर सकते हैं। नेपाल के नागरिक भारत में नौकरियां कर सकते हैं। संधि के अनुसार उन्हें यहां निवास करने की भी छूट है। इसी का कुछ चालाक नेपाली नागरिकों द्वारा नाजायज फायदा उठाया जा रहा है। सूत्रों के अनुसार आज भारत में करीब दो लाख ऐसे लोग हैं जो नेपाल से भारत तो आए लेकिन वापस नेपाल नहीं गए। अकेले नेपाल से भारत आने वाले लोगों पर नजर डालें तो वर्ष २०१३ में ९४ हजार व २०१४ में १ लाख ३० हजार] २०१५ में १ लाख ४० हजार व २०१६ में ८ लाख से अधिक नेपाली नागरिक भारत पहुंचे। आंकडे़ कहते हैं कि नेपाल से भारत आने वालों की तादाद लगातार बढ़ती जा रही है लेकिन नेपाल वापस जाने वालों में कमी आई है। 

मजबूत निगरानी तंत्र के अभाव में अवैध आवाजाही व मानव तस्करी के साथ ही वन्य जीव तस्करी के लिए भी खुली सीमा का जमकर उपयोग हो रहा है। वन्य जीव अंगों की तस्करी की स्थिति यह है कि पिछले दिनों एसओजी व वन विभाग की टीम ने चंपावत के तामली में तेंदुए की तीन खालों के साथ अंतराष्ट्रीय तस्कर गिरोह के एक सदस्य को गिरफ्तार किया गया। इससे ९ फुट ६ इंच की तीन खालें बरामद की गईं। आरोपी नेपाल सीमा से लगे सतकुली निवासी होशियार सिंह था। उसके द्वारा पुलिस को दी जानकारी के अनुसार वह पिछले दो सालों से वन्यजीव अंगों की तस्करी कर रहा था। अभी तक वह कई अंगों व खालों को दिल्ली में बेच चुका था। वन्य जीव तस्करी में लगा यह व्यक्ति पहले जंगल में तेंदुओं को जहर देकर मारता था फिर खालों व हड्डियों को बेचने का काम करता था। चंपावत जनपद के मूलाकोट निवासी कल्याण सिंह भी तेंदुए की तीन खालों के साथ पकड़ा गया था। पूर्व में स्पेशल टास्क फोर्स ने तेंदुए की ४ खालों के साथ एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया था। अकेले चंपावत जिले में एक दर्जन से अधिक गुलदारों की मौत के पीछे इन्हीं वन्य जीव तस्करों का हाथ बताया जा रहा है। 

जंगली जानवरों का अवैध व्यापार बढ़ने में खुली सीमा मददगार बनी हुई है। गंगोलीहाट से १० किलो गुलदार की हड्डयों के साथ एक व्यक्ति पकड़ा गया था। टनकपुर के डांडा मिडार क्षेत्र से भी दो युवक तेंदुए की खाल के साथ पकड़े गए थे। उत्तराखण्ड से सटे नेपाली जिलों में लगातार इस तरह के मामले प्रकाश में आ रहे हैं। वन्य जीव तस्करी के कई मामलों में पुलिस इस बात की पुष्टि कर चुकी है कि वन्य जीव अंग भारत से नेपाल और फिर चीन तक पहुंच रहे हैं। पूर्व में नेपाल के डडेलधूरा में भारी मात्रा में गुलदार के अंगों के साथ तस्कर पकड़े गए थे। नेपाल से भारत लाई जा रही गुलदार की खाल व हड्डियां पिथौरागढ़ पुलिस ने पूर्व में झूला?kkVट के पास पकड़ी। गैंडे की सींग के साथ कई लोगों को नेपाल पुलिस ने पकड़ा। पूर्व में हिम तेंदुएं की खाल व हड्डयों के साथ कई तस्कर पकड़े जा चुके हैं।

 बताया जाता है कि चीन में हिम तेंदुए की खाल व हड्डियों की भारी मांग रहती है। हिम तेंदुए भारत] पिथौरागढ़] चमोली] उत्तरकाशी] हिमाचल व कश्मीर में पाए जाते हैं। प्रदेश में बावरिया गिरोह की सक्रियता काफी चर्चा में रही थी। स्पेशल टास्क फोर्स ने १२५ किलोग्राम हड्डियों की खाल के साथ इस गिरोह के एक सदस्य को गिरफ्तार किया था। जो नेपाल व तिब्बत में इसे बेचने की योजना बना रहा था। अल्मोड़ा जनपद के दन्या क्षेत्र में गुलदार की खाल के साथ एक व्यक्ति खाल सहित पकड़ा गया जो खाल को नेपाल के रास्ते चीन भेजने की फिराक में था। पकड़ी गई यह खाल आठ फीट के आस&पास थी। अंतराष्ट्रीय बाजार में इसकी कीमत ५ लाख के करीब बताई गई थी। प्रदेश में चंपावत के साथ ही चमोली व देहरादून भी तस्करी का सॉफ्ट टारगेट बन रहे हैं। तेंदुए की खाल को बेचने का रहे एक व्यक्ति को रुद्रप्रयाग पुलिस ने गिरफ्तार किया। देहरादून में भी जीव जंतुओं की तस्करी करने वाले गिरोह सक्रिय हैं। अभी हाल में डालनवाला क्षेत्र में लेपर्ड की दो खालों के साथ दो तस्करों को पकड़ा गया था। कई बार चरस की तस्करी करते लोग पकड़े गए हैं। पूर्व में नकली नोटों का एक गिरोह भी पकड़ में आया था। गैरसैंण क्षेत्र के रोहिड़ा में दो तस्करों को तेंदुए की खाल के साथ गिरफ्तार किया गया था। पकड़े गए तस्करों द्वारा पुलिस को दिए गए बयान के मुताबिक वह फंदा लगाकर तेंदुए का शिकार करते हैं और मैदानी क्षेत्र से आने वाले जानवरों के व्यापारियों के माध्यम से खालों की तस्करी करते हैं। इन खालों की कीमत १० लाख से ऊपर बताई गई। भारत&नेपाल सीमा की सुरक्षा के लिए भारत व नेपाल पुलिस के साथ ही एसएसबी व वन विभाग आपस में मिलकर असामाजिक गतिविधियों पर अंकुश लगाने की जितनी कोशिश करते हैं तस्करों का गिरोह उतना ही अधिक सक्रिय होते जाता है। 

खुली सीमा दोनों देशों के लिए अब एक चुनौती बन गई है। तेजी से पलायान के कारण सीमा से सटे गांव खाली हो रहे हैं जिसका फायदा तस्कर उठा रहे हैं। पहाड़ में शराब] चरस के साथ ही स्मैक] हेराइन] अफीम] नशीली दवा व इंजेक्शन जिस तरह से उपयोग बढ़ रहा है उसका लाभ बड़ी आसानी से तस्कर उठा लेते हैं। विदेशी सामानों की स्मगलिंग] नशीली दवाओं] चरस के साथ ही नकली नोटों की आवाजाही बड़ी आसानी से सीमा से हो रही है। दोनों देशों के बीच ट्यूबों के सहारे अवैध आवाजाही की ?kVuk,a भी बढ़ रही हैं। भारत व नेपाल के बीच की सीमा रेखा काली नदी है। इस नदी में पांच स्थानों पर झूला पुल बने हैं जहां से दोनों देशों के बीच आवागमन होता है। गर्ब्याग] धारचूला] बलुवाकोट] जौलजीवी व झूला?kkVट में बने इन पुलों से भारत व नेपाल के बीच रोटी व बेटी का संबंध होने के कारण आवाजाही के साथ ही सामान की आपूर्ति भी होती रही है। इन झूलापुलों पर एसएसबी के सैनिकों की तैनाती रहती है। इसलिए अवैध रूप से सीमा पार प्रवेश करने वाले ट्यूब के सहारे नदी पार करते हैं। पंचेश्वर से लेकर झूला?kkVट तक दोनों तरफ के लोग टायर के टयूबों के सहारे अवैध आवाजाही करते हं। तस्करी के लिए भी ट्यूबों का इस्तेमाल किया जा रहा है। चंपावत जनपद के टनकपुर में शारदा नदी पर भी इसी तरह ट्यूबों के माध्यम से भारत&नेपाल के बीच तस्करी की जा रही है। ठंड के दिनों में 

ग्लेशियरों के जम जाने से शारदा नदी का जल कम हो जाता है। जिसका फायदा तस्कर उठाते हैं। वे टयूबों से तस्करी का माल इधर&उधर करते हैं। नेपाल की खुकरी] सिगरेट] गरम कपड़े] गुटखा] कास्मेटिक विदेशी कपड़े आदि वस्तुओं का अवैध व्यापार धड़ल्ले से हो रहा है। एसएसबी समय&समय पर इसका खुलासा करती रहती है। दोनों देशों के बीच वर्तमान में गर्ब्यांग] धरचूला] जौलजीवी] बलुवाकोट] झूला?kkVट में आवाजाही के लिए झूला पुल बने हुए हैं] वहीं बनबसा में मोटर पुल तो टनकपुर बैराज] शारदा बैराज भी लोगों की आवाजाही का एक माध्यम है। भारत व नेपाल के बीच इस समय बनबसा में एक मात्र इमीग्रेशन चेक पोस्ट है। इसके अलावा जनपद पिथौरागढ़ में धरचूला] बलुवाकोट] जौलजीवी व झूला?kkVट में आवाजाही के लिए झूलापुल बने हुए हैं। 

 

एसएसबी पूरी ईमानदारी व निष्ठा से अपना दायित्व निभा रही है। सीमा पर नियमित संयुक्त पेट्रोलिंग की जाती है। भारत में प्रवेश करने वाले अनजान] बाहरी व संदिग्धों पर खास नजर रखी जाती है। मादक पदार्थ] मानव व अन्य तस्करी के कई मामलों को पकड़ने में हम सफल रहे हैं      

अनिल कुमार नेगी] आईजी] एसएसबी

 
         
 
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