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vad 18 21-10-2017
 
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आवरण कथा ३
 
मार लिया मैदान

  • सिराज माही

देश के चुनावों में भारतीय जनता पार्टी ने मोदी के चेहरे पर चुनाव लड़ा था और सत्ता पर काबिज हुई थी। इसके बाद दिल्ली और बिहार के विधानसभा चुनावों में मोदी का चेहरा काम न आया। दोनों जगह उसे मुंह की खानी पड़ी। लेकिन अब भाजपा ने पांच राज्यों ¼उत्तर प्रदेश] पंजाब] उत्तराखण्ड] मणिपुर] गोवा½ में फिर मोदी के चेहरे पर चुनाव लड़ा और उसे फायदा मिला है। पांच राज्यों में से उत्तर प्रदेश और उत्तराखण्ड में उसे जबरदस्त जीत मिली है। देश में हुए नोटबंदी के बाद माना जा रहा था कि देश में भाजपा की स्थिति कमजोर होगी। लेकिन सही मायने में भाजपा को नोटबंदी का फायदा मिला। इस कड़ी में कांग्रेस को पंजाब] गोवा और मणिपुर ने राहत भरी खबर दी है।

उत्तर प्रदेश के पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस मात्र अट्ठाईस सीटों पर सिमट कर रह गई थी। इस बार सत्तारूढ समाजवादी पार्टी को भी बहुमत हासिल न कर पाने की शंका थी। इसलिए दोनों दलों ने बिहार की तर्ज पर गठबंधन किया। दोनों ने आपसी सहमति कर सीटों का बंटवारा किया लेकिन यूपी की जनता ने इस गठबंधन को नकार दिया। जनता ने यहां भाजपा को सर आंखों पर बिठाया। उत्तर प्रदेश में भाजपा को एकतरफा मत मिलने पर मायावती ने कहा कि यह जीत किसी के गले नहीं उतर रही है। उनके मुताबिक ईवीएम मशीन में गड़बड़ी कर दी गई है। वरना यह कैसे होता कि मुस्लिम बाहुल इलाकों में बीजेपी जीत जाए।

उत्तराखण्ड की बात करें तो इस बार पहाड़ों पर भाजपा ने भगवा झंडा लहरा दिया। उत्तराखण्ड में चौंकाने वाली बात यह रही कि निवर्तमान मुख्यमंत्री हरीश रावत इस बार दो सीटों किच्छा और हरिद्वार ग्रामीण से चुनाव लड़ रहे थे। लेकिन उन्हें दोनों ही जगहों से निराशा हाथ लगी। इन चुनावों में गोवा में कांग्रेस को थोड़ी राहत महसूस हुई। यहां भाजपा सत्ता में थी। लेकिन इस बार यहां कांग्रेस सरकार बना सकती है। दिल्ली विधानसभा चुनाव में जीत से उत्साहित आम आदमी पार्टी ने गोवा में भी अपना पांव पसारना चाहा] लेकिन यहां वह अपना खाता भी नहीं खोल सकी। गौरतलब है कि गोवा में निवर्तमान मुख्यमंत्री पारसेकर हार गए हैं। मनोहर पर्रिकर के इस्तीफे के बाद भाजपा ने पारसेकर को मुख्यमंत्री बनाया था। गोवा की ४० सदस्यीय विधानसभा में पिछली बार भाजपा को २१] कांग्रेस को नौ और अन्य को १० सीटें मिली थीं। 

पंजाब की जनता ने शिरोमणि अकाली दल से दस साल बाद सत्ता छीन कर कांग्रेस को दे दी है। यहां कांग्रेस पूर्ण बहुमत से अपनी सरकार बनाई। पिछली बार कांग्रेस यहां ४६ सीटों पर सिमट गई थी लेकिन इस बार उसने शानदार वापसी की है। कांग्रेस पंजाब में आठवीं बार सरकार बनाई और कैप्टन अमरिंदर सिंह दूसरी बार राज्य के मुख्यमंत्री का पद संभालेंगे। यहां लोगों की निगाहें पूर्व क्रिकेटर नवजोत सिंह सिद्धू पर भी टिकी थी। उन्होंने शानदार जीत दर्ज की है। आम आदमी पार्टी अपनी उम्मीदों पर तो खरा नहीं उतर पाई लेकिन उसने करीब बीस सीटों पर जीत दर्ज कर दूसरे दलों से अपना लोहा मनवाया। 

मणिपुर में कांग्रेस पिछले पंद्रह सालों से सत्ता पर काबिज थी। एक बार फिर मणिपुर की सत्ता पर कांग्रेस काबिज होगी। मणिपुर में भाजपा के लिए अच्छी खबर यह रही कि उसने यहां २१ सीटें निकाल लीं। मणिपुर में गौर करने वाली बात यह रही कि मानवाधिकार कार्यकर्ता इरोम शर्मिला हार गईं हैं। उन्हें महज ९० वोट मिले। वह राज्य के मुख्यमंत्री इबोबी सिंह के खिलाफ थौबल से चुनाव लड़ रही थीं। वह पहली बार चुनाव लड़ रही थीं। इरोम अफस्पा के खिलाफ सोलह वर्ष तक भूख हड़ताल पर रहीं थी। लेकिन हाल ही में उनको अनशन खत्म करने के लिए राज्य के लोगों की आलोचनाओं का भी सामना करना पड़ा था। इरोम ने मणिपुर के लोगों की मांग को अपने जीवन का उद्देश्य बना दिया था। ऐसे में उनका इतने कम वोटों पर सिमट आना चौंकाने वाला है। सपा की कमजोर हुई स्थिति पर यूपी के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को शिवपाल सिंह ने तीखा हमला करते हुए कहा कि यह समाजवादियों की हार नहीं है] बल्कि द्घमंडी लोगों की हार है। जनता ने उन्हें सबक सिखा दिया जिन्होंने मेरा अपमान किया था।

दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के पुत्र संदीप दीक्षित आमतौर पर कांग्रेस पार्टी के भीतर विरोधी स्वर उठाने के लिए मशहूर रहे हैं। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में भाजपा को बढ़त मिलने पर उन्होंने कांग्रेस की कमजोरियों को गिनाया है। उनके मुताबिक कांग्रेस नेताओं को तैयार करने और उनका साथ देने पर ध्यान नहीं देती है। कांग्रेस के पास सिस्टम नहीं है] जिसमें किसी नेता को बनाया जा सके। जम्मू एवं कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने विधानसभा चुनावों में भाजपा को मिली बढ़त पर कहा कि यूपी में भारतीय जनता पार्टी के नाम की 'सुनामी' दिख रही है। उन्होंने विपक्षी पार्टियों को वर्ष २०१९ के लोकसभा चुनाव के बारे में भूलकर वर्ष २०२४ के आम चुनाव की तैयारियां शुरू करने की सलाह दी। उनके मुताबिक मोदी में मुकाबले देश में कोई नेता नहीं है। कोई ऐसी पार्टी नहीं है] जो २०१९ में बीजेपी को चुनौती दे सके।

 

कांग्रेस का विरोध करेगी यूएनसी

उत्तर प्रदेश ¼४०३½

भाजपा+ ३२५

सपा&कांग्रेस ५५

बसपा १९ 

अन्य  ५

मणिपुर ¼६०½

कांग्रेस २८ 

भाजपा २१ 

अन्य १० 

टीएमसी १

पंजाब ¼११७½

कांग्रेस ७७ 

आप २०

शिअद&भाजपा १८ 

अन्य २

उत्तराखण्ड ¼७०½

भाजपा ५७

कांग्रेस ११

अन्य २

बसपा ०

गोवा ¼४०½

कांग्रेस १७

भाजपा १३ 

अन्य १०

आप ०

 
         
 
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  • कृष्ण कुमार

वरिष्ठ और वयोवृद्ध नेता भुवन चंद्र खण्डूड़ी कभी भाजपा के पोस्टर ब्वॉय रह चुके हैं। अपनी सरकार के दौरान जनहित के कई बड़े निर्णयों के लिए वे आज भी प्रदेश की

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