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सुर्खियां जो नहीं बनीं
 
नहीं होगा हार्ट अटैक

देश में हार्ट अटैक से होने वाली मौतों की संख्या दिन पर दिन बढ़ती जा रही है। इसकी वजह व्यक्ति में हार्ट अटैक के लक्षण दिखाई न देना भी है। तमिलनाडु के दसवीं कक्षा के एक होनहार स्टूडेंट ने एक ऐसी तकनीक खोज निकाली है] जिसकी मदद से हार्ट अटैक के खतरों की पहचान करना संभव हो पाएगा। तकनीकी को ईजाद करने वाले स्टूडेंट का नाम आकाश मनोज है और ये तमिलनाडु के एक स्कूल में दसवीं में पढ़ते हैं। ^इनोवेशन स्कॉलर्स इन&रेजीडेंस प्रोग्राम^ के लिए आकाश इन दिनों राष्ट्रपति भवन में मेहमान के तौर पर रह चुके हैं। आकाश के मुताबिक उनके दादा की मौत अचानक ही हार्ट&अटैक आने से हुई थी। दादा की मौत ने ही आकाश मनोज को इस बीमारी के खतरों का पता लगाने वाली इस नई तकनीक को ईजाद करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने बताया यह तकनीक खून में पाए जाने वाले एफएबीपी&३ नामक प्रोटीन के विश्लेषण पर आधारित है। एफएबीपी&३ प्रोटीन की मात्रा दिल तक रक्‌त की आपूर्ति में उत्पन्न होने वाली बाधाओं के संकेत देती है। इस तकनीक में खून में मौजूद एफएबीपी&३ प्रोटीन की मात्रा का समय&समय पर विश्लेषण किया जाता है। अपनी नई खोज के बारे में बताते हुए आकाश ने कहा] ^एफएबीपी&३ प्रोटीन शरीर में पाए जाने वाले सबसे छोटे प्रोटीनों में से एक है] जो ऋणावेशित होने के कारण धनावेश की ओर आकर्षित होता है।^ उनकी नई खोज इसी तकनीक पर आधारित है। आकाश एक कार्डियोलॉजिस्ट बनकर गांवों के लोगों की जान बचाना चाहते हैं।

जंगल बचाने की नई पहल

दुनिया में हरियाली बचाने के लिए अक्सर लोग अपने स्तर से प्रयास करते हैं। लेकिन जमुना टुडू एक ऐसी महिला हैं] जिन्होंने जंगल बचाने के लिए अपनी जान तक दांव पर लगा दी। लोग इन्हें ^लेडी टार्जन^ भी बुलाते हैं। इन्होंने जंगल की अवैध कटाई पर अपने बल&बूते पर रोक लगाई। जब किसी भी पुरुष ने उनका साथ नहीं दिया तो इन्होंने चार महिलाओं के साथ जंगलों में पेट्रोलिंग शुरू की। जब भी कोई जंगल माफिया पेड़ काटने आता है तो वह उससे भिड़ जाती हैं। कई बार तो वह मुटभेड़ में लहूलुहान होकर ?kj लौटीं। आज जमुना के गांव में बेटी पैदा होने पर १८ ^साल^ वृक्षों का रोपण किया जाता है। बेटी के ब्याह के वक्त १० ^साल^ वृक्ष परिवार को दिए जाते हैं। रक्षाबंधन पर सारा गांव वृक्षों को राखी बांधता है। जमुना ने इस मुहिम की शुरुआत सन्‌ २००० के आस&पास की। पहले उन्होंने पुरुषों को इस मुहिम में जोड़ना चाहा। लेकिन पुरुषों के मना करने के बाद औरतें इस मुहिम को चलाने के लिए आगे आईं। सन्‌ २००४ में केवल चार महिलाओं के साथ मिलकर जमुना ने जंगलों में पेट्रोलिंग का काम शुरू किया। धीरे&धीरे ये संख्या बढ़कर ६० तक जा पहुंची। उन्होंने ^महिला वन रक्षक समिति^ का गठन किया। धीरे&धीरे पुरुषों ने भी जमुना का साथ देना शुरू कर दिया। दिल्ली की एक टीम उन पर डॉक्युमेंट्री बना चुकी है। २०१४ में उनको स्त्री शक्ति अवॉर्ड दिया गया। २०१६ में उनको राष्ट्रपति द्वारा भारत की प्रथम १०० महिलाओं में चुना गया और राष्ट्रपति भवन में सम्मानित किया गया। २०१३ में जमुना को ^फिलिप्स ब्रेवरी अवॉर्ड^ से सम्मानित किया गया था।

 
         
 
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