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आवरण कथा
 
मुरली होंगे नए राष्ट्रपति!

प्रणब मुखर्जी का कार्यकाल समाप्ति की ओर है। केंद्र में भाजपा पूरे बहुमत के साथ काबिज है। जाहिर है इस बार राष्ट्राध्यक्ष भाजपा की ही पसंद का होगा। राष्ट्रीय स्वयं सेवक la?k इस मुद्दे पर कोई समझौता नहीं चाहता। खबर है कि खुद la?k प्रमुख मोहन भागवत ने भाजपा नेतृत्व को इस बाबत la?k की इच्छा से अवगत करा दिया है। सार्वजनिक जीवन में अपनी बेदाग छवि] बौद्धिकता और la?kनिष्ठ वैचारिक प्रतिबद्धता के लिए पहचाने जाने वाले भाजपा नेता डॉ + मुरली मनोहर जोशी को राष्ट्रीय स्वयं सेवक la?k भारतीय गणराज्य का नया राष्ट्रपति देखना चाहता है

जुलाई में देश को नया राष्ट्रपति मिलना तय है। वर्तमान राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी का कार्यकाल २४ जुलाई को समाप्त होने जा रहा है। हालांकि लंबे अर्से से चर्चा चल रही थी कि मुखर्जी एक कार्यकाल और चाहते हैं। एनडीए की मोदी के नेतृत्व वाली सरकार के प्रति उनकी नरमी इस चर्चा को बल देती नजर  आ रही थी। अब किंतु स्पष्ट हो चला है कि प्रणब मुखर्जी दोबारा राष्ट्रपति नहीं बनने जा रहे। केंद्र सरकार ने उन्हें उनकी मनपसंद का आवास नंबर १०] राजाजी मार्ग भी आवंटित कर दिया है। पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम का यह आवास हुआ करता था। वर्तमान में केंद्रीय संस्कूति राज्यमंत्री डॉ महेश शर्मा को यह आवास आवंटित है। लुटियंस दिल्ली के गलियारों से लेकर नागपुर में la?k मुख्यालय तक इन दिनों नए राष्ट्रपति को लेकर जबरदस्त कयासबाजियों का दौर चालू है। आजादी के बाद पहली बार ऐसी संभावना है कि राष्ट्रीय स्वयं सेवक la?k की नीति और सिद्धांत को मानने वाला भारतीय गणराज्य का राष्ट्रपति बन सकता है क्योंकि la?k का शिशु संगठन इस समय केंद्र की सत्ता पर बहुमत के साथ कायम है। जाहिर है अपनी वैचारिक प्रतिबद्धता के लिए जाने जाना वाला la?k इस मुद्दे पर कोई समझौता नहीं चाहता। भाजपा के वरिष्ठ नेता डॉ मुरली मनोहर जोशी la?k की राष्ट्रपति पद के लिए पसंद बनकर उभरे हैं। la?k क्यों डॉ जोशी को राष्ट्रपति देखना चाहता है] यह समझने के लिए डॉ जोशी की पृष्ठभूमि में जाना होगा।

उत्तराखण्ड के ऐतिहासिक शहर अल्मोड़ा के मूल निवासी डॉ एमएम जोशी की गिनती राष्ट्रीय स्वयं सेवक la?k के उन प्रचारकों में होती है जिन्होंने सक्रिय राजनीति का हिस्सा बनने के बाद भी la?k की नीतियों और निर्देशों का हमेशा सम्मान किया। मात्र दस बरस की उम्र में la?k की शाखाओं में भाग लेने वाले जोशी पर अपने शिक्षक प्रोफेसर राजेंद्र सिंह का प्रमुख गहरा प्रभाव पड़ा। प्रो राजेंद्र सिंह आगे चलकर आरएसएस के सरla?kचालक बने थे। स्पेक्ट्रोस्कोपी में डॉक्ट्रेट की डिग्री के बाद डॉ जोशी ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय में ही फिजिक्स के प्राध्यापक पद पर काम करना शुरू कर दिया। स्वदेशी के प्रति अपने प्रेम के लिए प्रख्यात डॉ जोशी पहले ऐसे स्कॉलर रहे हैं जिन्होंने  फिजिक्स में अपना रिसर्च पेपर हिंदी में प्रस्तुत किया था। la?k की नीतियों पर उनकी अटूट आस्था की झलक उनके शुरुआती राजनीतिक जीवन में स्पष्ट नजर आती है। १९५३ का गौ रक्षा आंदोलन हो या फिर १९५५ का उप्र में कुंभ किसान आंदोलन] डॉ जोशी आंदोलन में सक्रिय रहे। आपातकाल के दौरान वे la?k से संबंध रखने वाले उन नेताओं में शामिल थे जिन्होंने पूरे अठारह महीने जेल में गुजारे। सत्ततर के चुनाव में वे पहली बार अल्मोड़ा संसदीय सीट से संसद पहुंचे। अस्सी में जनता सरकार के गिरने और इंदिरा गांधी की सत्ता वापसी के बाद बनी भारतीय जनता पार्टी के तीन दिग्गज नेताओं में एक डॉ जोशी थे। जब एक ही नारा भाजपा कार्यकर्ता की जुबान पर हुआ करता था-'भाजपा की तीन धरोहर] अटल- आडवाणी-मुरली मनोहर।' डॉ जोशी का पूरा जीवन भारतीय जनता पार्टी को स्थापित करने और la?k की नीतियों को मूर्त रूप देने में बीता। १९९१-९३ में भाजपा का राष्ट्रीय अध्यक्ष रहते मुरली मनोहर जोशी ने कन्याकुमारी से श्रीनगर तक की एकता यात्रा निकाली। पार्टी के एक धड़े ने उनकी इस यात्रा को सफल न होने देने की पूरी कोशिश की थी। अयोध्या में राममंदिर निर्माण आंदोलन में डॉ जोशी पूरी तरह सक्रिय रहे। बाबरी मस्जिद विध्वंस के बाद उनकी छवि एक कट्टरपंथी नेता के तौर पर बनी। अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री रहते एक तरफ तो डॉ जोशी ने उर्दू भाषा के लिए अधिक बजट] अल्पसंख्यक शिक्षक संस्थाओं का आधुनिकीकरण आदि कर अपनी प्रोगे्रसिव छवि को सामने रखा तो दूसरी तरह la?k की विचारधारा के अनुरूप डॉ जोशी ने शिक्षा व्यवस्था में आमूलचूल परिवर्तन के भी प्रयास किए। इन प्रयासों का भारी विरोध भी उस दौरान देखने को मिला था। 

प्राइमरी से लेकर बारहवीं तक की शिक्षा के पाठ्यक्रम में बदलाव को मानव संसाधन विकास मंत्री रहते डॉ जोशी ने अपने मुख्य एजेंडे में रखा। उनका जोर शिक्षा के भारतीयकरण] राष्ट्रीयकरण और आध्यात्मिककरण पर रहा।जाहिर है अपनी नीतियों के प्रति पूरी तरह समर्पित कार्यकर्ता को ही la?k भारत के सर्वोच्च पद पर प्रतिष्ठित करना चाहेगा। डॉ मुरली मनोहर जोशी का नाम इसी निष्ठा के चलते la?k ने आगे बढ़ाया है। la?k के सूत्र बताते हैं कि संगठन के सभी शीर्ष पदाधिकारी इस विषय पर एकमत हैं। सरla?kचालक मोहन भागवत] सह सरla?kचालक भैयाजी जोशी] दत्तात्रेय होसबोले और कूष्ण गोपाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह से इस विषय पर मंत्रणा शुरू कर दी है। la?k यह भी चाहता है कि उपराष्ट्रपति किसी दलित को बनाया जाए ताकि जातिगत समीकरण भाजपा के पक्ष में रहें। जिन तीन नामों पर la?k और भाजपा के बीच बातचीत चल रही है उनमें केंद्रीय मंत्री थावरचंद गहलोत] राज्यसभा सांसद नरेंद्र जाद्घव और लोकसभा सांसद उदितराज शामिल हैं। देश का अगला राष्ट्रपति कौन होगा यह तो भविष्य की कोख में छिपा है। इतना तय है कि यदि पांच राज्यों में हो रहे आमचुनाव के नतीजे भाजपा के पक्ष में आते हैं तो एनडीए के लिए अपने प्रत्याशी को राष्ट्रपति बनाने की राह आसान हो जाएगी। वर्तमान में भी एनडीए के पास सर्वाधिक मत मूल्य है। यदि पार्टी को इन चुनावों में विजय मिलती है तो ठीक अन्यथा उसे राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति पद के लिए विपक्ष के साथ बैठकर सहमति की राह बनानी पड़ सकती है। पचास वर्ष से अधिक समय से सार्वजनिक जीवन में सक्रिय डॉ जोशी बेशक हर दृष्टि से भारतीय गणराज्य के राष्ट्रपति बनने की योग्यता रखते हैं। डॉ जोशी किसी भी प्रकार के भ्रष्टाचार से सदैव कोसों दूर रहे हैं। उनकी ईमानदारी की प्रशंसा उनके द्घोर विरोधी भी खुलकर करते हैं। हालांकि यहां यह भी गौरतलब है कि उनके प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी संग निजी संबंधों में प्रगाढ़ता की कमी उनकी राह का रोड़ा बन सकती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को २०१४ के आम चुनाव में भाजपा का बनारस सीट से प्रत्याशी बनाया जाना डॉ जोशी की इच्छा के विरुद्ध लिया गया ऐसा कदम था जिसका उन्होंने पार्टी फोरम पर खुलकर विरोध भी किया। डॉ जोशी के समर्थकों ने लोकसभा चुनाव से ठीक पहले पूरे बनारस को 'बाबा विश्वनाथ का हाथ रहेगा डॉ जोशी के साथ-साथ' के नारे से पाट दिया था। माना जाता है la?k प्रमुख मोहन भागवत भी डॉ जोशी को बनारस से ही लड़ाए जाने के पक्ष में थे। इसके बावजूद अंततः मोदी की ही चली और डॉ जोशी को कानपुर जाना पड़ा। २०१४ के चुनाव में मिली अप्रत्याशित विजय के बाद जिस तरीके से मोदी-शाह ने भाजपा के दिग्गजों को किनारे लगाया उससे भी शंका उत्पन्न होती है कि मार्गदर्शक मंडल में डाल दिए गए पार्टी के संस्थापकों में से एक डॉ मुरली मनोहर जोशी के नाम पर क्या मोदी सहमत होंगे। दूसरी तरफ la?k भी इस मुद्दे पर समझौता करने के मूड में कतई नहीं है।


संक्षिप्त परिचय

जन्म  ५ जनवरी १९३४] उत्तराखण्ड

शिक्षा % चांदपुर] बिजनौर] अल्मोड़ा] मेरठ एवं इलाहाबाद विश्वविद्यालय

सामाजिक जीवन % दस वर्ष की आयु में राष्ट्रीय स्वयं सेवक la?k से जुड़े] १९५३ में गौ रक्षा और १९५५ में कुंभ किसान आंदोलन में सक्रिय

राजनीतिक जीवन % १९७७ में अल्मोड़ा से सांसद बने १९८० में भाजपा के पहले कोषाध्यक्ष एवं महासचिव १९९१-९३ तक भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष

मंत्री % भाजपा की पहली सरकार में १३ दिन के लिए केंद्रीय गृहमंत्री। दूसरी सरकार में मानव संसाधन के साथ-साथ विज्ञान एवं तकनीकि मंत्रालय का कार्यभार 

वर्तमान % कानपुर से भाजपा सांसद एवं भाजपा मार्गदर्शक मंडल के सदस्य 

निजी जीवन % पत्नी तरला जोशी एवं दो पुत्रियां प्रियवंदा एवं निवेदिता

 

 
         
 
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