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चुनावी चकल्लस
 
दोगला चरित्र

राजनेताओं का दोहरा चरित्र इस विधानसभा चुनाव में बखूबी देखने को मिला है। आश्चर्यजनक है कि जो नेता चुनावों से पूर्व क्षेत्र में शराब बंदी जैसे महत्वपूर्व आंदोलन चला रहे थे वह चुनावों में अपनी लाज बचाने के लिए मतदाताओं के बीच शराब बांटते नजर आए। उनका यह रवैया लोगों को बहुत अखरा। एक निर्दलीय प्रत्याशी इस बात को लेकर खासे चर्चा में रहे। उन्होंने चुनाव आचार संहिता की धज्जियां उड़ाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। शराब ही नहीं साड़ियां भी बांटी।

लेने के देने

अपने को तुर्रम खां समझने के चक्कर में कई बार लेने के देने पड़ जाते हैं। कुमाऊं मंडल में एक क्षेत्रीय पार्टी के पदाधिकारी के साथ भी यही हुआ। पदाधिकारी ने जब देखा कि चुनाव में उसके उम्मीदवार पिछड़ रहे हैं तो उसने राष्ट्रीय पार्टी के प्रत्याशी के खिलाफ भ्रामक पर्चे बांट डाले। लेकिन ऐसा करते उन्हें पुलिस ने रंगे हाथ पकड़ लिया। नतीजा यह हुआ कि खुद भी फंसे और मतदाताओं के बीच अपने प्रत्याशी की फजीहत भी करा बैठे।

लैपटॉप में प्रत्याशी

उत्तराखण्ड में भाजपा ने अपनी रणनीति के तहत मुख्यमंत्री का चेहरा आगे नहीं किया। लेकिन सोशल मीडिया पर उसकी इस रणनीति का काम तमाम करने की कोशिश हुई। पूर्व मुख्यमंत्री निशंक के नाम से किसी महाशय ने फर्जी आईडी बनाकर पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा को भावी मुख्यमंत्री बनाए जाने का संकेत दिया। चर्चा यह है कि सितारगंज से भाजपा सौरभ बहुगुणा के साथ भी विजय बहुगुणा की तस्वीरें वायरल हुई हैं। ये तस्वीरें संकेत करती हैं कि विजय बहुगुणा भावी मुख्यमंत्री होंगे। अब यह जांच का विषय है कि बहुगुणा को चेहरा बनाने की हवा कहां से फैली? लेकिन फिलहाल चुनाव के दौरान इसने भाजपा के कई दिग्गजों की बेचैनी तो बढ़ा ही दी।

 

 
         
 
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क्या मुख्यमंत्री हरीश रावत के सचिव के स्टिंग आॅपरेशन की खबर से कांग्रेस की छवि प्रभावित हुई है?

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मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत से उन्हीं की पार्टी के विधायक खफा होने लगे हैं। विधायकों को लग रहा है कि प्रदेश के मुखिया का रवैया उन्हें उपेक्षित करने और नौकरशाहों को तरजीह देने

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