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vad 37 05-03-2017
 
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मेरी बात अपूर्व जोशी
 
+ + +और करीब आएंगे भारत&अमेरिका

  • अपूर्व जोशी

आतंकवाद को इस्लाम से जोड़कर देखने वाले अमेरिका के नए jk"Vªifr डोनाल्ड Vªai भारत के संग संबंधों को अब और प्रगाढ़ करने की बात करते आए हैं। चीन की बढ़ती ताकत से चिंतित अमेरिका के पास भारत को आगे बढ़ाने के सिवाय कोई विकल्प भी नहीं। लेकिन ^अमेरिका फर्स्ट^ की Vªai नीति भारत के लिए सुखद नहीं है। एच&वनबी वीजा] दवा आयात पर अमेरिका में भारी टैक्स जैसे मुद्दों पर भारत की परेशानी बढ़ सकती है

"I am a big fan of Hindu and a big fan of India; big, big fan, big, big fan. Let me start by saying right upfront that if I'm elected President, the Indian and Hindu community will have a true friend in the white house and I can guarantee you that"

¼मैं हिंदुओं का जबरदस्त प्रशंसक हूं] मैं भारत का भी जबरदस्त प्रशंसक हूं। बड़ा&बड़ा प्रशंसक] बड़ा&बड़ा प्रशंसक। मैं कहना चाहता हूं कि यदि मैं अमेरिका का jk"Vªifr चुना जाता हूं तो भारतीय एवं हिंदू समुदाय को एक सच्चा मित्र ह्वाइट हाउस में मिलेगा½। अमेरिकी jk"Vªifr डोनाल्ड Vªai ने अपनी चुनावी सभाओं में कई बार हिंदू समुदाय के वोटरों को ऐसा कहकर संबोधित किया था। अब jk"Vªifr बनने के बाद दोनों ही देशों के पारस्परिक संबंध प्रगाढ़ होने के आसार हैं। इसमें कोई शक नहीं कि डोनाल्ड Vªai परंपरागत राजनेता नहीं हैं। ना ही उनसे कोई ऐसा होने की अपेक्षा रखता है। Vªai के सभी शुरुआती निर्णय अपने पूर्ववर्ती jk"Vªifr बराक ओबामा की नीतियों में भारी उलट&फेर करने वाले रहे हैं। विदेशी मामलों के जानकार केवल भारत के प्रति ओबामा की नीति को एकमात्र अपवाद बता रहे हैं जिसे Vªai ने भी आगे बढ़ाने के संकेत दिए हैं। हालांकि मैं विदेशी मामलों का अच्छा जानकार न होने की अपनी कमजोरी को बेहिचक स्वीकारता आया हूं। प्रयास फिर भी करता हूं कि विशेष महत्व वाले मुद्दों पर कम से कम वह सब जानकारी एकत्रित कर आपसे साझा कर सकूं जिसका सीधा प्रभाव किसी न किसी रूप में हम पर पड़ सकता है। तो चलिए थोड़ा अमेरिका के नए jk"Vªifr और भारत पर उनकी ताजपोशी के बाद संभावित रिश्तों पर कुछ चर्चा की जाए।

डोनाल्ड Vªai मूल रूप से एक शुद्ध व्यवसायी हैं जिनकी गिनती अमेरिका के सर्वाधिक धनी लोगों में की जाती है। वे बेहद विवादित छवि के भी हैं। अपने अराजक व्यवहार और विचारों के चलते उनकी छवि निश्चित तौर पर एक खलनायक की बन चुकी है। अमेरिकी jk"Vªifr का चुनाव प्रारंभिक दौर यथास्थितिवादियों के लिए बेहद आश्वस्तकारी रहा था। डेमोक्रेट प्रत्याशी हिलेरी क्लिंटन अपने रिपब्लिकन प्रतिद्वंद्वी Vªai से काफी आगे चल रही थी। Vªai के व्यवसायिक जीवन से लेकर निजी जीवन तक के प्रसंग अमेरिकी समाज में उनकी छवि को एक क्रूर पति] क्रूर व्यवसायी और काफी हद तक एक चरित्रहीन पुरुष की बना चुके थे। Vªai ने इस सबके बावजूद न तो अपनी विवादित छवि को सुधारने का प्रयास किया] न ही अमेरिका की स्थापित नीतियों के खिलाफ अपनी राय को जनता के सामने रखने से वे हिचकिचाए। उन्होंने आतंकवाद को सीधे तौर पर इस्लाम से जोड़कर भारी विवाद खड़ा किया। jk"Vªifr पद की शपथ लेने के साथ ही उन्होंने सबसे पहले सात मुस्लिम देशों के अमेरिका आने वाले नागरिकों की रोक का एलान कर दिया। हालांकि कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद उनके आदेश को स्थगित कर दिया गया है। लेकिन यह स्पष्ट है कि वे अपने पूर्ववर्ती jk"Vªifr की नीतियों को पलटने जा रहे हैं। भारत के साथ लेकिन उन्होंने स्पष्ट रूप से मैत्रीपूर्ण संबंधों को मजबूती देने के संकेत दिए हैं। ऐसा करने के पीछे उनकी मजबूरी भी है। अमेरिका चीन की बढ़ती हैसियत से चिंतित है। पश्चिम का पहले से ही स्पष्ट मानना रहा है कि चीन की बढ़ती ताकत को रोकने में केवल भारत ही ऐसा मुल्क है जो उनकी मदद कर सकता है। पाकिस्तान हालांकि अमेरिका का हमेशा करीबी रहा है लेकिन इस्लामिक आतंकवाद को मुद्दा बना चुके Vªai के शासन में पाकिस्तान को अब भारत की कीमत पर तवज्जो मिलने से रही। Vªai ?kksf"kr तौर पर पाकिस्तान को विश्व का सबसे खतरनाक देश कह चुके हैं। अमेरिका के रक्षामंत्री जनरल मैटिस ने भी अपनी शपथ के बाद पाकिस्तान को लेकर नए अमेरिकी प्रशासन की चिंता को दोहराया है। अमेरिका के नए राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जनरल फ्लाइन ने कठोरतम शब्दों का प्रयोग करते हुए पाकिस्तानी सरकार को चेतावनी दी है कि यदि वे जेहादी ताकतों को मदद जारी रखती है तो अमेरिका किसी भी प्रकार की कार्यवाही के लिए स्वतंत्र है। भारत के लिए अमेरिकी प्रशासन का पाकिस्तान विरोधी रुख सुखद कहा जा सकता है। यहां यह भी बेहद महत्वपूर्ण है कि अमेरिका के नए jk"Vªifr की कोर टीम में छह भारतीय मूल के अमेरिकियों को जगह मिली है। अपने स्वभाव के विपरीत Vªai ने एक समय में अपनी द्घोर विरोधी रही साउथ केरोलिना की पूर्व गर्वनर निक्की हेली को संयुक्त राष्ट्र में अपना राजदूत नियुक्त किया है। एक अन्य भारतीय मूल के उत्तम ढिल्लन को jk"Vªifr ने अपना विशेष सहायक नियुक्त किया है। स्वास्थ्य मामलों की प्रमुख सीमा वर्मा] अजीत पाई को सूचना आयोग तो प्रीत बहरारा और राज शाह को भी अपनी टीम में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी है। jk"Vªifr ने भारतीय प्रधानमंत्री संग अपनी दूरभाष पर हुई बातचीत में भी दोनों देशों के बीच संबंध मजबूत करने की बात को दोहराया। हमारे प्रधानमंत्री पांचवे ऐसे नेता हैं जिन्हें Vªai ने jk"Vªifr बनने के तुरंत बाद फोन किया। यह अच्छा संकेत माना जा सकता है। लेकिन इस सबके बावजूद कई ऐसे मुद्दे भी हैं जिनमें jk"Vªifr की नीतियों का भारत पर प्रतिकूल असर पड़ने का खतरा है। हालांकि jk"Vªifr Vªai ने पाकिस्तान पर आतंकी संगठनों को मदद करने के चलते कठोर कदम उठाने की बात कही है। पाकिस्तान की सीनेट के उपसभापति हाफिज हमदुल्ला को वीजा न देकर Vªai प्रशासन ने इस दिशा में पहला कदम उठा भी लिया है। लेकिन आने वाले समय में अमेरिका कश्मीर मुद्दे पर मध्यस्थता की बात कर सकता है। Vªai अपने चुनाव प्रचार के दौरान इस बाबत कह चुके हैं। भारत को यह निश्चित ही मंजूर नहीं होगा। ऐसे में पाकिस्तान को कश्मीर मुद्दे पर भारत को ?ksjus की छूट मिल जाएगी। Vªai लंबे अर्से से ^अमेरिका फर्स्ट^ की नीति पर काम करने की बात करते रहे हैं। उनके प्रशासन ने एच&वनबी वीजा को कम करने की बात कही है। इस वीजा के चलते ही अमेरिका में अन्य देश के नागरिक रोजगार के लिए प्रवेश कर सकते हैं। jk"Vªifr Vªai का मानना है कि पहले अमेरिकी मूल के नागरिकों को रोजगार के अवसर उपलब्ध होने चाहिए। भारत इस समय पूरे विश्व में सूचना तकनीक सेवाओं का सबसे बड़ा सोर्स है। हमारा आईटी के क्षेत्र में एक सौ तीस बिलियन अमेरिकी डॉलर यानी छह लाख पचास हजार करोड़ का कारोबार है। इसमें से अकेले अमेरिका संग हम ६७ प्रतिशत यानी चार करोड़ पैंतीस लाख रुपए का कारोबार करते हैं। हमारे साढ़े तीन लाख नागरिक एच&वनबी वीजा के तहत अमेरिका में नौकरी कर रहे हैं। इनमें से जिनके वीजा का नवीनीकरण होने वाला है] वे सभी चिंतित हैं कि कहीं उन्हें अमेरिका छोड़ना न पड़े। न केवल इसके चलते बेरोजगारी बढ़ने का खतरा भारतीयों पर मंडरा रहा है] बल्कि हमारा तकनीकी निर्यात भी बड़े स्तर पर प्रभावित हो सकता है। हमारी दवाई कंपनियों को भी Vªai प्रशासन की नीतियों से खतरा है। नए अमेरिकी प्रशासन का प्रस्ताव है कि दवाइयों के आयात पर ३५ प्रतिशत तक टैक्स लगाया जाए। यदि ऐसा होता है तो हमारे निर्यात पर इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ना तय है। 

कुल मिलाकर अमेरिका के नए jk"Vªifr ने अभी तक यही संकेत दिए हैं कि भारत के साथ अमेरिका के संबंध उनके कार्यकाल में और मजबूत होंगे। उनके पूर्ववर्ती बराक ओबामा ने अपने आठ बरस के शासन में भारत संग अमेरिकी मैत्री को हमेशा प्रमुखता दी। अमेरिकी विदेश नीति के जानकार इसे उस रणनीति का हिस्सा मानते हैं जो अमेरिका की चीन को लेकर आशंकाओं से जुड़ी है। ओबामा पाकिस्तान के प्रति नरम रवैया रखते थे। हालांकि उनके शासनकाल में आतंकी ओसामा बिन लादेन को मार गिराने के लिए अमेरिकी फौज ने पाकिस्तान संप्रभुता का लिहाज नहीं किया था लेकिन आर्थिक मदद जारी रख अमेरिका ने पाकिस्तान के भारत विरोधी आतंकी गतिविधियों को एक तरह से बढ़ावा ही दिया। अब Vªai के राज में इसके आसार कम नजर आते हैं। यहां यह भी गौरतलब है कि भारत की केंद्र सरकार हिंदुत्व की अवधारणा पर यकीन करती है। अमेरिकी jk"Vªifr का इस्लाम को आतंकवाद से सीधे जोड़कर देखना भाजपा सरकार को सुहाता है। आने वाले समय में प्रधानमंत्री मोदी की अमेरिका यात्रा के दौरान दक्षिण पूर्व एशिया की सुरक्षा का मुद्दा दोनों देशों को करीब लाने का काम अवश्य करेगा। उम्मीद की जानी चाहिए कि दोनों मुल्कों के बीच नजदीकियां एक दूसरे के आर्थिक&सामरिक हितों की रक्षा करने का काम करेगी। अमेरिका और रूस के संबंधों में हो रहा सुधार भी अंततः भारत के पक्ष में अंतरराष्ट्रीय समुदाय को एक करने का काम करेगा। हो सकता है निकट भविष्य में हमारा संयुक्त राष्ट्र का स्थाई सदस्य होने का सपना भी पूरा हो जाए।

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