fnYyh uks,Mk nsgjknwu ls izdkf'kr
चौदह o"kksZa ls izdkf'kr jk"Vªh; lkIrkfgd lekpkj i=
vad 46 07-05-2017
 
rktk [kcj  
 
खास खबर 
 
छोटे बहुगुणा सुभान अल्लाह

 

जिस विधानसभा सीट का प्रतिनिधित्व खुद मुख्यमंत्री करता है वह वीवीआईपी सीट मानी जाती है। जनता को लगता है कि मुख्यमंत्री के क्षेत्र में अधिकारी समस्याओं को गंभीरता से लेते हैं और विकास के नये रास्ते खुलते हैं। इसी उम्मीद के साथ सितारगंज क्षेत्र की जनता ने मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा को भारी मतों से विजयी बनाया था। चुनाव के दौरान बहुगुणा ने कांग्रेस प्रत्याशी के तौर पर जनता से बड़े-बड़े वादे भी किये थे। उनके समर्थकों ने तो यहां तक संदेश दिया कि राज्य के विकास की गंगा सितारगंज से बहेगी। लेकिन बहुत जल्द ही जनता की उम्मीदें टूट गईं। इसका कारण यह है कि मुख्यमंत्री के पास जनता की सुध लेने का समय नहीं है। जनता की नाराजगी को भांपकर मुख्यमंत्री बहुगुणा ने अपने बेटे सौरभ को सितारगंज में जनता से संपर्क बनाने की जिम्मेदारी सौंपी। जनता का चुना हुआ प्रतिनिधि न होने के बावजूद उन्हें सरकारी कार्यक्रमों के शिलान्यास की भी जिम्मेदारी दे डाली। लेकिन सरकारी अधिकारियों से द्घिरे सौरभ तड़क-भड़क और दिखावे के चक्कर में इस कदर उलझे कि लोगों के दिलों को नहीं छू पाए। नतीजा यह है कि लोग उनसे न सिर्फ कट रहे हैं बल्कि बेहद खफा भी हैं। इस तरह राजनीतिक क्षतिपूर्ति के तौर पर सौरभ को जिम्मेदारी सौंपना मुख्यमंत्री के लिए फायदे के बजाए घाटे का ही सौदा साबित हो रहा है। भाजपा आरोप लगा रही है कि सौरभ एवं उनकी पत्नी सुमेधा के आगे-पीछे सरकारी अधिकारियों का जमावड़ा लगा हुआ है।

मुख्यमंत्री से लोगों की नाराजगी इस बात को लेकर है कि वे खुद तो क्षेत्र में आ नहीं रहे हैं और अपने जिस बेटे को उन्होंने जनता का दुख-दर्द बांटने का जिम्मा सौंपा है वह सिर्फ खनापूर्ति के लिए उनके बीच आ रहे हैं। उनका पूरा ध्यान तड़क-भड़क दिखाने पर केंद्रित है। लोगों की यह नाराजगी बेवजह भी नहीं हैं। हाल में १२ मार्च को सितारगंज विधानसभा क्षेत्र के सहदौरा गांव में जब महिला सशक्तीकरण बहुद्देश्य शिविर का आयोजन किया गया तो मुख्य अतिथि सौरभ मात्र आधे द्घंटे ही कार्यक्रम में रह सके। हैरानी की बात तो यह है कि आधे द्घंटे के इस वक्त में उन्हें आराम करने की भी जरूरत पड़ी। कार्यक्रम को छोड़कर वह ऊधमसिंहनगर की जिला पंचायत अध्यक्ष सुशीला गंगवार के बरा गांव स्थित द्घर पर आराम फरमाने चले गए। इसके बाद फिर से सहदौरा पहुंचे जहां थोड़ी देर रुकने के बाद चले गए। मजे की बात यह रही कि महिला सशक्तीकरण के नाम पर किए गए इस बहुउद्देशीय कार्यक्रम में महिलाओं के लिए कोई शिविर नहीं लगाया गया। इसमें जिले के अधिकारी और कर्मचारी मौजूद थे। १७७ लोगों ने उनके सम्मुख अपनी समस्याएं भी रखीं। लेकिन मौके पर निस्तारण एक का भी नहीं हुआ। इस तरह सौरभ के आतिथ्य में हुआ यह कार्यक्रम महज औपचारिक बनकर रह गया। कार्यक्रम में विशेष बात यह देखने को मिली कि जैसे ही सौरभ बहुगुणा कार्यक्रम से निकले उनके आगे -पीछे अधिकारियों का काफिला भी चल पड़ा। सितारगंज के उपजिलाधिकारी मनीष कुमार और तहसीलदार ऋचा सिंह उनकी जी हुजूरी करने के लिए बीच कार्यक्रम से ही चले गये। जबकि फरियादी इन दोनों का मुंह ताकते रह गए। 

अलीनगर निवासी हारून खान के अनुसार 'अधिकारियों को मुख्यमंत्री के बेटे की आवभगत करने से ही फुर्सत नहीं है। ऐसे में उन्हें जनता के दुख कहां दिखाई पड़ते हैं। यह प्रदेश का पहला मामला है जहां एक मुख्यमंत्री के बेटे की उपजिलाधिकारी और तहसीलदार 'एस्कार्ट' करते नजर आए। भाजपा के अनुसूचित जाति मोर्चा के प्रदेश उपाध्यक्ष सूब सिंह 'विकल' कहते हैं एक मुख्यमंत्री के पुत्र के आगे-पीछे उनकी पार्टी के नेताओं का  रहना इतना नहीं खलता जितना कि प्रशासनिक अधिकारियों का। इन अधिकारियों को चाहिए था कि वे बहुउद्देशीय शिविर में जनता की समस्याएं सुनते न कि बहुगुणा के बेटे की गाड़ियों के बेडे़ में शामिल होते। यह सरकारी मशीनरी का खुलेआम दुरुपयोग है।

लोग मुख्यमंत्री की कार्यशैली से कितने खफा हैं इसका नजारा ११ मार्च को शहर के अंतर्गत रामलीला मैदान में युवा व्यापार प्रकोष्ठ के नवनियुक्त पदाधिकारियों का शपथ ग्रहण समारोह में भी दिखा था। उसमें सौरभ बहुगुणा को मुख्य अतिथि बनाया गया। इस कार्यक्रम में उनके इर्द-गिर्द कांग्रेसियों का ही जमावड़ा लगा रहा। रामलीला ग्राउंड जहां होर्डिंग्स से अटा पड़ा था वहीं कार्यक्रम में अधिकतर कुर्सियां खाली थी। ५ जुलाई २०१२ को सितारगंज  उपचुनाव के दौरान इसी रामलीला मैदान में जब मुख्यमंत्री की रैली  में सिने अभिनेता एवं सांसद राज बब्बर मुख्य अतिथि थे तो तब पूरा मैदान लोगों से इस कदर भरा पड़ा था कि पैर रखने की जगह नहीं थी। लेकिन इसके महज आठ माह बाद जब प्रदेश के मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा के पुत्र सौरभ यहां मुख्य अतिथि के तौर पर आए तो दर्जन भर लोग ही मौजूद थे। कार्यक्रम स्थल पर मौजूद राम निवास गुप्ता के अनुसार 'सितारगंज में अब बहुगुणा का सच सामने आ चुका है। उनके यहां से विधायक बनते समय लोगों ने विकास के जो सपने देखे थे वे अब धूमिल होने लगे हैं।' ऐसे में जनता ने उनके पुत्र सौरभ बहुगुणा को पंसद नहीं किया। 

१० मार्च को ग्राम उकरौली में भी सौरभ बहुगुणा ने विद्युत आपूर्ति का शुभारंभ किया। यहां ६३ केवी के बिजली ट्रांसफॉर्मर से उकरौली गांव के ६५ परिवारों को विद्युत आपूर्ति सुचारू की गई।  सौरभ ने बटन दबाकर बिजली सप्लाई की। यह कार्यक्रम पूरी तरह सरकारी था। यहां विद्युत विभाग के अधिकारियों से लेकर कई अन्य विभागों के अधिकारी भी मौजूद थे। सितारगंज के उपजिलाधिकारी और तहसीलदार उनके साथ साये की तरह रहे। भाजपा इस मुद्दे को लेकर मुखर हो गई है। भाजपा के नगर मंडल अध्यक्ष राकेश त्यागी ने विद्युत विभाग के अधिकारियों से सवाल किया है कि आखिर उन्होंने किस आधार पर सौरभ बहुगुणा को एक सरकारी कार्यक्रम का चीफ गेस्ट बनाया है। इस पर विद्युत विभाग के अधिकारी अपना बचाव करते नजर आए। राज्य के पूर्व मंत्री एवं सितारगंज उप चुनाव में मुख्यमंत्री बहुगुणा के विरुद्ध भाजपा प्रत्याशी रहे प्रकाश पंत ने कहा कि मुख्यमंत्री बहुगुणा ने अपने परिवार को बिना ताज के राज करने की छूट देकर उत्तराखण्ड में एक नई परंपरा शुरू की है। उन्होंने कांग्रेस सरकार को कटद्घरे में खड़ा किया है कि सौरभ को किस आधार पर सरकारी कार्यक्रमों में मुख्य अतिथि बनाया जा रहा है। ऐसे कार्यक्रमों में वही व्यक्ति शिरकत कर सकता है जो विधायक हो या फिर जनप्रतिनिधि। नेता प्रतिपक्ष अजय भट्ट के अनुसार 'प्रशासनिक अधिकारियों का ऐसे कार्यक्रमों में मशगूल रहना असंवैधानिक है। उनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।'

गौरतबल है कि ११ जुलाई २०१२ को सितारगंज का विधायक बनने के बाद मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा का क्षेत्र में अब तक तीन बार ही आगमन हुआ है। उनके इन तीन दौरों को विकास के लिहाज से शून्य ही कहा जायेगा। दौरा शक्तिफार्म के बंगालियों को भूमिधरी अधिकार देने के लिए हुआ। इसके तहत दो व्यक्तियों को पट्टे आवंटित किए गए। यह कार्यक्रम सिर्फ बंगाली समुदाय तक सिमटकर रह गया। इसी तरह मुख्यमंत्री का दूसरा कार्यक्रम भी शक्तिफार्म तक ही सिमटकर रह गया। यह उनका व्यक्तिगत दौरा था। क्योंकि इस बार वह सितारगंज के पूर्व भाजपा विधायक और वर्तमान में कुमाऊं मंडल विकास निगम के अध्यक्ष किरण मंडल की पौत्री के विवाह समारोह में शामिल होने आए थे। तीसरी बार वे सिडकुल फेज-२ का उद्द्घाघाटन करने आए थे। लेकिन उनका यह दौरा विवादों में सिमटकर रह गया। विशेष बात यह रही कि आठ माह में हुए तीन दौरों में वह सितारगंज शहर में प्रवेश तक नहीं कर सके।

 

मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा को भारी मतों से जीत दिलाकर सितारगंज की जनता ने विकास के जो सपने देखे वे बहुत जल्द ही चकनाचूर हो गए। क्षेत्र से मुख्यमंत्री की बढ़ती दूरी लोगों को खल रही है। डैमेज कंट्रोल के लिए उन्होंने अपने पुत्र सौरभ बहुगुणा को जनता से संपर्क रखने का जो जिम्मा सौंपा वह भी घाटे का ही सौदा साबित हो रहा है। लोग बेहद खफा हैं कि तड़क-भड़क दिखाने के चक्कर में सरकारी अआिँाकारियों से द्घिरे सौरभ आखिर उनकी तरफ क्या ध्यान दे पाएंगे

 

सरकारी कार्यक्रम में आ सकता हूं 

मुख्यमंत्री के पुत्र सौरभ बहुगुणा से दि संडे पोस्ट की बातचीत के अंशः

भाजपा नेताओं का कहना है कि आपको सरकारी कार्यक्रमों में मुख्य अतिथि बनाया जाना जायज नहीं है। यह जन प्रतिनिधित्व कानून के दायरे में नहीं आता?

नहीं ऐसा नहीं है। जनप्रतिनिधि के परिवार का कोई भी व्यक्ति कार्यक्रम में आ सकता है। मैं भी इसी नाते सितारगंज में आया हूं। पिताजी की व्यस्तता के चलते मुझे ऐसा करना पड़ा है। भाजपा इसे बेवजह मुद्दा बना रही है।

सितारगंज में विकास न के बराबर हुए हैं। मुख्यमंत्री यहां की जनता से दूरी बना रहे हैं। कहीं आपके आने का उद्देश्य इस दूरी को कम करना तो नहीं?

नहीं ऐसा नहीं है। पिताजी सितारगंज की जनता के साथ दिल से जुड़े हुए हैं। जिस तरह से यहां की जनता ने उन्हें भारी मतों से विजयी बनाया वह हमारे लिए फख्र की बात है। सितारगंज की जनता का यह एहसान हम नहीं भूल सकते हैं। रही बात विकास की तो वह हो रहा है। भाजपा शासन से कहीं बेहतर विकास हो रहा है।

मुख्यमंत्री ने सितारगंज के विकास की जो द्घोषणाएं की थी वह अभी भी अधूरी हैं?

उनके ड्रीम प्रोजेक्टों पर कार्य चल रहा है। बस अड्डे का निर्माण कार्य प्रगति पर है। आईटीआई के लिए चिन्हित जमीन से अतिक्रमण हटाया जा रहा है और पॉलीटेक्निक कॉलेज का निर्माण भी कराया जा रहा है।

लेकिन पॉलीटेक्निक कॉलेज का निर्माण तो अभी तक कागजों में ही शुरू हुआ है। धरातल पर कुछ भी नहीं है। यहां तक कि जमीन भी चिन्हित नहीं हुई है?

इसके लिए युद्ध स्तर पर कार्य किया जा रहा है। जल्द ही जमीन चिन्हित कर ली जायेगी।

मुख्यमंत्री के विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत खत्तों में जीवन यापन कर रहे लोगों के कल्याण के लिए चुनाव के वक्त बहुत से वादे किए गए थे। उनके लिए भी अभी तक कुछ नहीं हुआ?

हमने गुर्जरों के लिए सौर ऊर्जा से चालित लालटेन आवंटित की है। इसी तरह खत्तों में रह रहे लोगों के लिए भी कई योजनाएं बनाई जा रही हैं।

 

 

 
         
 
ges tkus | vkids lq>ko | lEidZ djsa | foKkiu
 
fn laMs iksLV fo'ks"k
 
 
fiNyk vad pquss
o"kZ  
 
 
 
vkidk er

क्या मुख्यमंत्री हरीश रावत के सचिव के स्टिंग आॅपरेशन की खबर से कांग्रेस की छवि प्रभावित हुई है?

gkW uk
 
 
vc rd er ifj.kke
gkW & 63%
uk & 13%
 
 
fiNyk vad

  • सिराज माही

इन दिनों कश्मीर में जिस तरह से हिंसक ?kVuk,a हो रही हैं] उस तरह पहले कभी नहीं हुईं। जिस तरह से नौजवान यहां सुरक्षा बलों पर पत्थर फेंक रहे हैं] उससे

foLrkkj ls
 
 
vkidh jkf'k
foLrkkj ls
 
 
U;wtysVj
Enter your Email Address
 
 
osclkbV ns[kh xbZ
1610307
ckj