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vad 36 26-02-2017
 
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सर्वेक्षण रिपोर्ट
 
भ्रष्टाचार ही मूलमंत्र

 

  • गुंजन कुमार

मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने अपनी ताजपोशी के तुरंत बाद जनता को भ्रष्टाचारमुक्त शासन देने के जो वादे किए वे हाथी के दांत की तरह दिखाने के कुछ और खाने के कुछ और ही साबित हुए हैं। आज राज्य पूरी तरह भ्रष्टाचार की गिरफ्त में है। खुद सरकार सिडकुल की अरबों रुपए मूल्य की सरकारी जमीन बिल्डरों को कौड़ियों के भाव बेचने के चलते कटघरे में है। चीनी मिलों सहित कई सरकारी संस्थाओं को पीपीपी मोड पर दिए जाने आनन-फानन में निजी विश्वविद्यालयों को मंजूरी जैसे फैसलों पर भी सरकार की खूब किरकिरी हुई

 

अलग पहाड़ी राज्य का सपना देखने वाले लोगों ने कभी सोचा भी नहीं होगा कि सत्ता में बैठी अपनी ही सरकार भ्रष्टाचार में गहरे धंस जाएगी। करीब चार दशक के अथक संघर्ष और जनआंदोलन के बाद वर्ष २००० में उत्तराखण्ड अलग राज्य बना। लेकिन राज्य बनने के बाद से ही सरकारें जनहित के कार्य करने के बदले घपले घोटालों में लिप्त हो गईं। नित्यानंद स्वामी की पहली सरकार को छोड़कर लगभग सभी सरकारों में भ्रष्टाचार प्राथमिकता में रहा। पहली निर्वाचित एनडी तिवारी की सरकार में उनके कई मंत्रियों पर ठेकेदारों से कमीशनखोरी और कर्मचारियों के स्थानांतरण में भ्रष्टाचार के आरोप लगते रहे। हलांकि एनडी तिवारी ने खुद को इन सबसे अलग रखा। लेकिन उनके बाद के सभी मुख्यमंत्री (खण्डूड़ी को छोड़करसीधे-सीधे घोटाले में लिप्त रहे हैं। निशंक सरकार ने सबसे बड़ा भूमि घोटाला सिटुरजिया लैंड घोटाला सहित कुंभ और जलविद्युत परियोजना जैसे बड़े घोटालों को अंजाम दिया। इसके अलावा कई अन्य छोटे-बड़े घोटाले उनके शासनकाल में हुए। अब बहुगुणा सरकार उसके नक्शे कदम पर चल रही है। मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा की नजर प्रदेश की बेशकीमती जमीनों पर है। एक साल के छोटे से कार्यकाल में उन्होंने हरिद्वार सितारगंज की सरकारी जमीन को कौड़ियों के भाव बिल्डरों को सौंप दिया। दि संडे पोस्ट सर्वेक्षण में भी आम जनता से भ्रष्टाचार पर पूछे गए सवाल का जवाब आशानुरूप ही आया है। भ्रष्ट मुख्यमंत्रियों में विजय बहुगुणा दूसरे नम्बर पर हैं। जबकि पहले नंबर पर निशंक सरकार।

 

दि संडे पोस्ट और आईएमआईएस ने वर्तमान सरकार  का एक साल पूरा होने पर प्रदेश भर में सर्वेक्षण कराया है। सर्वेक्षण में आम जनता से बहुगुणा सरकार का एक साल पूरा होने पर कई सवाल पूछे गए। जिसमें एक सवाल था कि वर्त्तमान सरकार में भ्रष्टाचार बढ़ा है या पूर्ववर्ती सरकार में भ्रष्टाचार ज्यादा था? इस सवाल के जवाब में लोगों ने निशंक सरकार को सबसे भ्रष्ट कहा है। दूसरे नंबर पर वर्तमान बहुगुणा सरकार है। करीब ४३ फीसदी लोग मानते हैं कि बहुगुणा सरकार में भ्रष्टाचार बढ़ा है।

 

ताजपोशी के तुरंत बाद अपने संबोधन में मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने भ्रष्टाचार उन्मूलन और स्वराज के प्रति जनता को आश्वस्त किया था। स्वराज भ्रष्टाचार उन्मूलन और जनसेवा जैसे विभाग मुख्यमंत्री के पास ही हैं। इसके बावजूद सरकार भ्रष्टाचार में पूरी तरह लिप्त है। हाल ही में बहुगुणा सरकार ने राज्य में औद्योगिक विकास के लिए बनाए गए सिडकुल की अरबों रुपए की जमीन बिल्डरों को कौड़ियों के भाव बेच दी। 

 

प्रदेश में सीमित भूमि होने के चलते हरिद्वार उधमसिंहनगर और देहरादून में जमीन की कीमत आसमान छूने लगी है। इसके अलावा इन्हीं तीन जनपदों में औद्योगिक क्षेत्र विकसित किए गए हैं इसलिए भी यहां की जमीनों की कीमत बढ़ गयी हैं। प्रदेश में सक्रिय बिल्डरों और भू-माफिया की नजर सरकारी भूमि पर है। ये सभी अधिकारियों और नेताओं के साथ मिलकर सरकारी जमीन सस्ती दर पर अपने नाम करवा रहे हैं। हरिद्वार में भी यही हुआ है। हरिद्वार सिडकुल की जिस जमीन का बाजार मूल्य करीब तीन अरब रुपए था उसे बहुगुणा सरकार ने अंतरिक्ष नामक एक कंस्ट्रक्शन कंपनी को महज ६१ करोड़ रुपए में बेच दिया। इस घोटाले में सीधे-सीधे मुख्यमंत्री और उनके एक प्रमुख सचिव का नाम सामने आया है।

 

इस भूमि घोटाले में मुख्यमंत्री का नाम इसलिए सामने आया क्योंकि जिस औद्योगिक विकास विभाग की यह भूमि थी वह विभाग मुख्यमंत्री के पास है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर ही इस घोटाले को अंतिम रूप दिया गया। इस घोटाले में कुल २३ ़१८ एकड़ सरकारी जमीन को सस्ती दर पर बेचा गया। हरिद्वार के अलावा सितारगंज सिडकुल की जमीन को भी सरकार औने-पौने दामों पर बेच रही है। एक हजार एकड़ जमीन से ज्यादा पर सिडकुल-दो बनाने के पीछे भी मुख्यमंत्री की मंशा बतायी जा रही है। सिडकुल के उदघाटन के समय भी लोगों ने मुख्यमंत्री पर सवाल उठाए थे। लोगों का कहना है कि जब सिडकुल एक में सैकड़ों एकड़ जमीन खाली है तो फिर फेज दो बनाने का कोई मतलब नहीं है। यह सरकारी जमीन का घोटाला करने का तरीका है। इसे सरकार भू-माफिया और बिल्डरों को बेचने की फिराक में है। 

 

हरिद्वार और सितारगंज के बाद बहुगुणा सरकार की नजरें देहरादून में सहस्त्रधारा रोड पर स्थित सिडकुल क्षेत्र के अंतर्गत करीब ४ ़७५ एकड़ बेशकीमती भूमि पर भी जा पड़ी हैं। इस बेशकीमती भूमि को बिल्डरों को सौंपने की योजना भी बना ली गई है। १२ मार्च २०१३ का दिन १९२२३ मीटर (४ ़७५ एकड़भूमि को बिल्डर के हाथों सौंपने के लिए टेंडर भरने की तिथि निर्धारित की गयी है। सिडकुल प्रबंधन ने इस बेशकीमती भूमि का रिजर्व मूल्य भी मात्र ८००० रुपए वर्ग मीटर ही रखा है। जबकि राजधानी देहरादून में इस जमीन का बाजार मूल्य इससे कहीं ज्यादा है। यही नहीं बहुगुणा सरकार भूमि घोटाले करने में इतनी मशगूल है कि वह भू-अध्यादेश का पालन करना भी जरूरी नहीं समझ रही। भू-अध्यादेश के मुताबिक बाहरी व्यक्ति राज्य में २५० मीटर से अधिक भूमि नहीं खरीद सकता जबकि औद्योगिक क्षेत्रों में उद्योगों के लिए अधिग्रहित की गई भूमि को स्वयं राज्य सरकार ही बाहरी बिल्डरों को सौंपने पर आमादा है।

 

राज्य में आवासीय सुविधाएं मुहैया कराने के लिए राजधानी देहरादून में मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए बनाया गया है। हरिद्वार में हरिद्वार विकास प्राधिकरण है। इन प्राधिकरणों के पास आवासीय योजनाएं बनाने के लिए भूमि उपलब्ध नहीं है और सरकार निजी बिल्डरों को जमीन दे रही है। आमजन के पास सिर छुपाने के लिए छत नहीं है और सरकार सस्ते दर पर सभी को घर उपलब्ध कराने की योजना को पलीता लगा रही है। बहुगुणा सरकार सिर्फ अपनी कमाई और उगाही करने में मस्त है।

 

पंतनगर सिडकुल में जमीन घोटाले का पहला मामला पंतनगर विश्वविद्यालय की उस भूमि का है जिस पर कृषि विश्वविद्यालय खेती में प्रयोग करता था। बाद में इस भूमि को तिवारी सरकार के शासनकाल में सिडकुल को दे दिया गया। इस भूमि पर एक बड़ा मॉल और आवासीय भवन का विज्ञापन दिल्ली के बड़े बिल्डर ने अपनी वेबसाइट पर डाला है। जबकि दूसरा महत्वपूर्ण मामला पंतनगर कृषि विश्वविद्यालय से जुड़ी उस जमीन का है जिसे पूर्व भाजपा सरकार ने विश्वविद्यालय से लेकर मण्डी समिति को २९  जुलाई २०११ को खाद्यान्न व्यापार स्थल एवं अत्याधुनिक कृषि बाजार बनाने के लिए दे दिया गया। सरकार की मंशा पर तब सवालिया निशान लगे जब एक ओर तो कृषि विपणन अनुभाग ने इस ५० एकड़ भूमि पर अत्याधुनिक बहुमंजिला व्यावसायिक भवन सहित सम्मेलन केंद्र बनाने और फूलों की खेती करने के लिए बैठक बुलायी वहीं दूसरी ओर इसी भूमि पर बहुमंजिला व्यावसायिक भवन सहित अत्याधुनिक आवासीय भवन और भूखण्ड का विज्ञापन एक निजी संस्थान ने अपनी वेबसाइट पर डाला दिया।

 

बहुगुणा की गलत नीतियों का विरोध खांटी कांग्रेसी भी कर चुके हैं। फिर भी उन पर कोई असर नहीं पड़ा। वयोवृद्ध कांग्रेसी नेता और वर्ष १९६९ से ७० तक इंदिरा गांधी के राजनीतिक सचिव रहे विश्वप्रकाश थपलियाल उत्तराखण्ड की राजनीतिक दुर्दशा को देखते हुए पिछले साल मई माह में आमरण अनशन पर बैठे थे। वीपी थपलियाल का कहना था कि पूर्ववर्ती भाजपा सरकार के साथ सांठ-गांठ कर भ्रष्टाचार फैलाने वाले अधिकारियों को वर्तमान मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने ही शह दी है। इससे भ्रष्टाचार पर अंकुश नहीं लगेगा। उनका शक सही साबित हो रहा है। वर्तमान में प्रमुख सचिव राकेश शर्मा बहुगुणा के सबसे करीबी अधिकारियों में से एक हैं। इतने करीबी तो मुख्य सचिव भी नहीं हैं। शर्मा पूर्व मुख्यमंत्री डॉ रमेश पोखरियाल निशंक के जमाने में भी सरकार पर हावी थे। वे सैफ गेम्स और कुंभ में पर्यटन एवं संस्कृति विभाग के कामों को लेकर चर्चा में आए थे। कुंभ और सैफ गेम्स में हुआ करोड़ों का घोटाला सबके सामने है।

 

 सिर्फ सरकारी जमीन का घोटाला ही नहीं बल्कि अन्य क्षेत्रों में भी जमकर घपला चल रहा है। विजय बहुगुणा अपने पहले विधानसभा सत्र (मई माह मेंके दौरान कैबिनेट की खास बैठक बुलाकर उत्तराखंड में चार निजी शिक्षण संस्थानों को विश्वविद्यालय बनाने का प्रस्ताव रखा था। कैबिनेट बैठक में जिन विषयों पर चर्चा होनी थी उसमें यह शामिल ही नहीं थे। मुख्यमंत्री ने अपने मंत्रियों को बिना पूर्व सूचना दिए इसे कैबिनेट बैठक में रख दिया। इसके चलते कैबिनेट बैठक में इस मुद्दे पर कई वरिष्ठ मंत्री भड़क गए थे। इन मंत्रियों ने इस प्रस्ताव का कड़ा विरोध किया था। जिससे इस कैबिनेट बैठक में यह प्रस्ताव पारित नहीं हो पाया। हालांकि इसे बाद में मुख्यमंत्री ने पास करवा लिया। उस समय भी कई मंत्रियों ने तकनीकी एवं उच्च शिक्षा के प्रमुख सचिव राकेश शर्मा के कामकाज पर कड़ी आपत्ति जाहिर की और शर्मा को हटाने की मांग की थी। उस वक्त कई शिक्षाविदों ने बहुगुणा सरकार पर पैसे लेकर शिक्षण संस्थानों को विश्वविद्यालय का दर्जा देने का आरोप लगाया था।

 

वर्तमान सरकार ने भ्रष्टाचार की एक नयी तरकीब भी निकाली है। सरकार ने अपनी योजनाएं और संस्थाओं को पीपीपी मोड पर चलाने का फैसला किया है। यहां तक की प्राइमरी स्कूल तक को पीपीपी मोड पर देने का फैसला लिया गया है। औली स्थित गढ़वाल मंडल विकास निगम के अन्तर्गत लाभ में चलने वाले रोपवे को भी प्राइवेट पार्टनरशिप में चलाने का फैसला लिया गया है। साफ है कि प्राइवेट पार्टनरशिप में ठेका लेने वाली निजी संस्थाओं से उगाही की जाएगी प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के बाद बहुगुणा ने कांग्रेस के चुनाव घोषणा पत्र में किए गए वायदे के अनुरूप भाजपा शासन में हुए घोटालों की जांच के लिए सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी केआर भाटी की अध्यक्षता में आयोग तो गठित कर दिया है। और जिसके कार्यकाल को नवंबर माह में छह माह के लिए बढ़ा भी दिया गया। लेकिन भाजपा शासन में जिन अधिकारियों पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे उन्हें नहीं हटाया गया। आज सरकार उन्हीं अधिकारियों की सलाह पर भ्रष्टाचार को अंजाम दे रही है। यही कारण है कि सर्वेक्षण फार्म में कई लोगों ने अपनी प्रतिक्रिया में लिखा- सब चोर हैं। उनकी यह प्रतिक्रिया बेशक बहुत आक्रमक लगे। लेकिन जिस प्रकार से राज्य में भ्रष्टाचार बढ़ रहा है और सरकार इस पर अंकुश लगाने के बजाए संलिप्त है उससे यह क्रोध स्वाभाविक लगता है।

 

 
         
 
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प्रदेश भाजपा अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष अजय भट्ट खुद रानीखेत से चुनाव मैदान में हैं। चुनाव के बीच उनसे ^दि संडे पोस्ट^ संवाददाता संजय स्वार ने बागियों] बगावत] जनता के मुद्दों]

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