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खास खबर 
 
संकट में संग्रहालय

 

प्रदेश के प्रमुख सचिव राकेश शर्मा का पिथौरागढ़ में जबर्दस्त विरोध हो रहा है। पिछले दिनों जब वह नैनी-सैनी हवाई अड्डे पर उतरे तो जनता ने उनके खिलाफ जमकर नारे लगाए। लोगों को आशंका है कि शर्मा नैनी-सैनी हवाई पट्टी के विस्तार में जुटी राइट्स कंपनी के हित में पिथौरागढ़-कुमाऊं के जाने-माने सांस्कृतिक संग्रहालय की बलि देने पर उतारू हैं

 

राज्य के ताकतवर आईएएस प्रमुख सचिव राकेश शर्मा के खिलाफ लोगों का आक्रोश बढ़ता ही जा रहा है। गढ़वाल में गंगा नदी पर दो द्घाटों को नियम विरुद्ध खनन के लिए खोल कर लोगों के निशाने पर वह पहले ही आ चुके हैं। अब उन्हें कुमाऊं में भी मुंह की खानी पड़ी है। कुमाऊं में राकेश शर्मा का खुलकर विरोध हुआ है। जिस योजना को लेकर वह यहां के बाशिंदों के बीच पहुंचे वह विवादों में पड़ गई। यह योजना इंजीनियरिंग कॉलेज के निर्माण से संबंधित है। जिसे पीपीपी मोड पर दिया जा रहा है। इसके लिए पिथौरागढ़ के संग्रहालय को चिह्नित किया गया है। कॉलेज के लिए संग्रहालय के अस्तित्व को ही खत्म किए जाने की आशंका के चलते लोग एकजुट हुए और शर्मा का पुरजोर विरोध किया। 


१७ जनवरी का दिन था जब पिथौरागढ़ के सैकड़ों लोग नैनी-सैनी हवाई पट्टी पर एकत्र हो गए। जैसे ही यहां हेलीकॉप्टर ने लैण्ड किया तो उसमें से प्रदेश के प्रमुख सचिव राकेश शर्मा नीचे उतरे। पहले तो उन्होंने सोचा कि लोग उनके स्वागत के लिए खड़े हैं, लेकिन जैसे ही वे उनकी तरफ बढ़े तो लोगों ने उनके विरोध में नारेबाजी शुरू कर दी। देखते ही देखते लोगों ने उनका द्घेराव कर दिया। वहां मौजूद भीड़ के बीच से लगातार राकेश  शर्मा वापस जाओ के नारे लगने लगे। प्रमुख सचिव राकेश शर्मा को समझते देर न लगी कि माजरा क्या है। उन्होंने लोगों को समझाने का बहुत प्रयास किया कि वे संग्रहालय को कुछ नहीं करेंगे। लेकिन लोगों का आक्रोश थमने की बजाय बढ़ता ही चला गया। कुछ देर बाद ही शर्मा बैरंग लौट गए। इससे लोगों ने राहत की सांस ली। लेकिन कहा जा रहा है कि कभी भी शहर की सांस्कूतिक धरोहरों को सहेजने का काम करने वाले इस संस्थान पर सरकार की गाज गिर सकती है।

 

राजकीय संग्रहालय पिथौरागढ़ के प्रभारी अधिकारी गिरजा दत्त भट्ट के अनुसार यह पहली बार नहीं है जब यहां के राजकीय संग्रहालय पर संकट के बादल उमड़े हैं, बल्कि इससे पूर्व भी तीन बार ऐसा हो चुका है। सबसे पहले यहां राइट्स कंपनी के कर्ताधर्ता आए थे। उन्होंने संग्रहालय के साथ ही जमीन की भी पैमाइस की थी। इसके बाद कुमाऊं इंजीनियरिंग कॉलेज के प्रधानाचार्य डीएस पुण्डीर आए। पुण्डीर के अवलोकन करने के बाद सीमांत इंजीनियरिंग कॉलेज का स्टॉफ भी यहां आया था। संग्रहालय के प्रभारी अधिकारी की यह बात उस चर्चा को पुष्ट करती है जिसमें संग्रहालय के अस्तित्व को खत्म करने की तैयारी की जा रही है। 


सूत्रों के अनुसार संग्रहालय को समाप्त करके यहां पर राइट्स कंपनी के कार्यालय और क्वार्टर बनाने की तैयारी है। ध्यान रहे कि राइट्स कंपनी वह कंपनी है जिसे नैनी-सैनी हवाई पट्टी का विस्तारीकरण करने के साथ ही यहां से हवाई उड़ानें शुरू कराने की योजना को अमलीजामा पहनाना है। यह योजना आगामी चार साल में पूरी होगी। इसके विस्तारीकरण पर ४८ करोड़ की योजना भी तैयार की जा चुकी है। इसके चलते राइट्स कंपनी को यहां अपने कार्यालय और क्वार्टर बनाने के लिए एक उपयुक्त स्थान की तलाश थी क्योंकि संग्रहालय नैनी-सैनी हवाई पट्टी के बिल्कुल नजदीक है, इसलिए भी राइट्स कंपनी के लिए इसका महत्व बढ़ जाता है।


इसके अलावा संग्रहालय की भव्य बिल्डिंग को सीमांत इंजीनियरिंग कॉलेज को देने की भी तैयारी चल रही है। कुमाऊं इंजीनियरिंग कॉलेज के प्रधानाचार्य डीएस पुण्डीर का यहां आना और जमीन का सर्वे करना इस ओर संकेत करता है। पिथौरागढ़ में सीमांत इंजीनियरिंग कॉलेज का निर्माण होना है। इसके निर्माण की पूरी योजना बनाई जा चुकी है। जिसके तहत ३३ करोड़ रुपये भी स्वीकृत किए जा चुके हैं। राकेश शर्मा फिलहाल तकनीकी उच्च शिक्षा सचिव भी हैं। पिथौरागढ़ में सीमांत इंजीनियरिंग कॉलेज के निर्माण का पूरा जिम्मा इन्हीं पर है।

 

पिथौरागढ़ के निवासी भयभीत हैं कि कहीं उनके सांस्कृतिक एवं रंगमंच का स्थान संग्रहालय और प्रेक्षागृह का वजूद खत्म न हो जाए। यहां यह भी उल्लेखनीय है कि पिथौरागढ़ का संग्रहालय और ऑडिटोरियम एक ही स्थान पर स्थित है। इसकी भव्य इमारत में भूतल पर एक लेक्चरर कक्ष, एक लाइब्रेरी के साथ ही प्रथम तल पर ४१० सीट का ऑडिटोरियम बना हुआ है। यह संग्रहालय के नाम से ही चर्चित है। इसकी स्थापना १९९८ में उत्तर प्रदेश के सांस्कृतिक मंत्रालय ने की थी। लेकिन इसका लोकार्पण वर्ष २००९ में हुआ। उत्तराखण्ड के तत्कालीन मुख्यमंत्री बीएस खण्डूड़ी ने इसे जनता काे समर्पित किया तभी से यह संग्रहालय पिथौरागढ़ वासियों के लिए सांस्कृतिक धरोहरों में शामिल हो गया। यहां लोक संस्कृति को सहेजने के साथ ही मेले और कार्यक्रमों का आयोजन होता रहता है। संग्रहालय का वजूद खत्म होने के साथ ही यहां पर सेवारत आठ लोग बेरोजगार हो जाएंगे। इनमें एक प्रभारी अधिकारी को छोड़कर बाकी अन्य सात लोग संविदा पर तैनात हैं। कुमाऊं के प्रसिद्ध इतिहासकार डॉ ़ राम सिंह और डॉ ़ मदन चंद भट्ट ने इस संग्रहालय के लिए ऐतिहासिक संग्रहित वस्तुएं दान की थी।

 

फिलहाल स्थानीय लोगों का विरोध देखते हुए शासन और प्रशासन ने इस मामले में अपने हाथ खींच लिए हैं। लेकिन लोगों को आशंका है कि चंडाक की तरह ही यहां भी जमीन को खुर्द-बुर्द किया जा सकता है। इसके लिए पिथौरागढ़ के पत्रकारों ने लोगों में अलख जगाने का काम किया है। वरिष्ठ पत्रकार बीडी कसनियाल के साथ ही जगत मर्तोलिया और विजय वर्धन उप्रेती सहित कई प्रबुद्धजनों ने जिलाधिकारी से एक पत्र के जरिए दो टूक कह दिया है कि वे किसी भी सूरत में संग्रहालय के अस्तित्व से छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं करेंगे। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष एवं डीडीहाट के विधायक बिशन सिंह चुफाल ने कहा है कि वे इस मामले का पुरजोर विरोध करेंगे। इसके लिए धरना-प्रदर्शन करने की जरूरत पड़ी तो उसमें भी पीछे नहीं हटेंगे।  

साथ में दिनेश पंत

 

बात अपनी अपनी

इस मामले में मैं कुछ कहने की। स्थिति में नहीं हूं क्योंकि मेरे पास संग्रहालय से संबंधित कोई मुख्य बिन्दु नहीं आया है।

सुश्री बीना भट्ट निदेशक संस्कृति निदेशालय

इस संग्रहालय से शहर के लोगों का भावनात्मक लगाव हैं शहर के सभी सांस्कृतिक कार्यक्रम यहीं होते हैं। यहां पर समय-समय पर प्रदर्शनी आयोजित की जाती है। कांग्रेस इसे खुर्द-बुर्द करने पर तुली है।  

प्रकाश पंत पूर्व मंत्री

मुझे तो उस दिन प्रशासन ने यह तक सूचित नहीं किया कि प्रमुख सचिव राकेश शर्मा यहां आ रहे हैं, उनके यहां आने का उद्देश्य क्या है यह तब पता चला जब लोगों ने उनका विरोध किया। आजकल राकेश शर्मा मिनी सीएम से कम नहीं है जो किसी स्थान का सर्वे करने के लिए हेलीकॉप्टर का प्रयोग कर रहे हैं। संग्रहालय वही बना रहेगा।

मयूख महर विधायक पिथौरागढ़

जो सरकार अपने सांस्कृतिक संग्रहालय और ऑडिटोरियम को खत्म करने के लिए नौकरशाहों को छूट देती है उसकी नीयत में खोट है। सरकार इसे खत्म कर निजी हाथों में देना चाहती है। इसकी जांच होनी चाहिए।

पीसी तिवारी अध्यक्ष उपपा

यह संग्रहालय पिथौरागढ़ के पर्यटक केंद्रों में से एक है। सरकार इसे गिराकर शहर को पर्यटकों से दूर करना चाहती है।

राजेन्द्र रावत, चेयरमैन पिथौरागढ़ नगरपालिका


 

राइट्स च्वाइस के मायने

प्रमुख सचिव राकेश शर्मा एक ऐसे आईएएस अधिकारी हैं जिनका जलवा भाजपा और कांग्रेस दोनों ही सरकारों में बरकरार रहता है। भाजपा के पूर्व मुख्यमंत्री वीएस खण्डूड़ी को छोड़ दिया जाए तो अब तक जितने भी मुख्यमंत्री हुए हैं उन सबने शर्मा के सहारे अपने हित साधे हैं। उत्तराखण्ड के इतिहास में खण्डूड़ी के शासनकाल में शर्मा को महत्वहीन समझे जाने वाले विभाग में पोस्टर किया गया था। लेकिन निशंक और अब बहुगुणा के दौर में शर्मा सबसे ताकतवर नौकरशाह बन उभरे हैं। पूर्व में पिथौरागढ़ के जिलाधिकारी रह चुके राकेश शर्मा ने जिस तरह से सांस्कृतिक विभाग को विश्वास में लिए बगैर ही यहां के संग्रहालय और ऑडिटोरियम को उजाड़ने की चाल चली वह सवालों के द्घेरे में है। शर्मा का नैनी-सैनी हवाई पट्टी विस्तारीकरण कर रही कंपनी राइट्स के प्रति उमड़ा मोह भी सवालों के द्घेरे में है। राइट्स को हवाई पट्टी के विस्तारीकरण का काम दिलवाने और अब उसके लिए कार्यालय और आवासीय परिसर बनाने के लिए संग्रहालय की बलि देने की तैयारी में शर्मा की व्यक्तिगत दिलचस्पी इन दिनों खासी चर्चा का विषय है।

 

 
         
 
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